नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा / Nazr e Karam De Bajhon Hona Nahin Guzara
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
ऐ काली कमली वाले दुखियाँ दा तू सहारा
महेशर ते गोर तों क्यों लोकि डरांदे मैनु
ओथे वी बादशाही तेरी ए ताजदारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
सूरज सि डुब के मुड़या, चन वी ते टुट के जुड़्या
उम्मत नू जोड़ देओ, हो गई ए पारा-पारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
होके हुज़ूर दा ते जन्नत में कीवे मंगां
जन्नत ते मुस्तफ़ा दा ख़ुद वेखदी दवारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
होवे सिरात दा पुल, मीज़ान भावे होवे
हर थां ते मुस्तफ़ा दा होवेगा एक नज़ारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
शायर:
मोहम्मद रफ़ीक़ नक़ीबी
नातख्वां:
माहनूर अल्ताफ
ऐ काली कमली वाले दुखियाँ दा तू सहारा
महेशर ते गोर तों क्यों लोकि डरांदे मैनु
ओथे वी बादशाही तेरी ए ताजदारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
सूरज सि डुब के मुड़या, चन वी ते टुट के जुड़्या
उम्मत नू जोड़ देओ, हो गई ए पारा-पारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
होके हुज़ूर दा ते जन्नत में कीवे मंगां
जन्नत ते मुस्तफ़ा दा ख़ुद वेखदी दवारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
होवे सिरात दा पुल, मीज़ान भावे होवे
हर थां ते मुस्तफ़ा दा होवेगा एक नज़ारा
नज़रे-करम दे बाझों होणा नहीं गुज़ारा ... या सैयदि
शायर:
मोहम्मद रफ़ीक़ नक़ीबी
नातख्वां:
माहनूर अल्ताफ
Comments
Post a Comment