मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते / Mere Aaqa Mujhe Tanha Nahin Rehne Dete

मेरे आक़ा, मेरे आक़ा
मेरे आक़ा, मेरे आक़ा

मेरे आक़ा बड़े लजपाल
मेरे मौला बड़े लजपाल

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते
मेरी दुनिया में अँधेरा नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

प्यास इंसान की कैसे वो भला देखेंगे
वो परिंदो को भी प्यासा नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

जो भी लिपटा है तेरे दामन-ए-रहमत से कभी
जख़्म उस का कभी गहरा नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

आल-ओ-असहाब से रखते हैं मुहब्बत जो भी
दूर खुद से उन्हें आक़ा नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

आल-ओ-असहाब से रखते हैं जो बुग़्ज़-ओ-कीना
उस से अपना कोई रिश्ता नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

मांगो, हसनैन के सदक़े से मदीना मांगो
ख़ाली कासा कभी आक़ा नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

मांग हर साल उजागर तू इजाज़त दर की
आक़ा महरूम तमन्ना नहीं रहने देते

मेरे आक़ा मुझे तनहा नहीं रहने देते

शायर:
अल्लामा निसार अली उजागर

नातख्वां:
सय्यिद अर्सलान शाह क़ादरी

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