पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर ! / Peeraan-e-Peer ! Raushan-Zameer ! Ya Ghaus-e-Aazam Dast-Geer !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! दस्त-गीर !
सुल्तान-ए-विलायत, ग़ौस-ए-पाक
वलियों पे हुकूमत, ग़ौस-ए-पाक
शहबाज़-ए-ख़िताबत, ग़ौस-ए-पाक
सरताज-ए-शरीअ'त, ग़ौस-ए-पाक
जिन्नों पे हुकूमत, ग़ौस-ए-पाक
मिस्कीन की दौलत, ग़ौस-ए-पाक
मोहताज की सर्वत, ग़ौस-ए-पाक
हैं बाइ'स-ए-बरकत, ग़ौस-ए-पाक
कमज़ोर की ताक़त, ग़ौस-ए-पाक
हैं रब की नेअ'मत, ग़ौस-ए-पाक
अल्लाह की रहमत, ग़ौस-ए-पाक
ग़ौस-ए-पाक, ग़ौस-ए-पाक
मैं क़ादरी हूँ, शुक्र है रब्ब-ए-क़दीर का
हाथों में मेरे हाथ है पीरान-ए-पीर का
दस्तगीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
वलियों में तुम ला-सानी, ग़ौस-ए-आज़म जीलानी !
तुम महबूब-ए-सुबहानी, या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी !
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
अग़वास-ओ-अब्दाल से बढ़ कर रुत्बा ग़ौस-ए-आज़म का
सारे वलियों की गर्दन पर तलवा ग़ौस-ए-आज़म का
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
डूबी कश्ती बारह बरस की पल भर में बाहर आई
मुख़ालिफ़ थी हवा दरिया में इक ऐसी लहर आई
गई दरिया में कश्ती डूब साहिल पे ख़बर आई
ज़ईफ़ा एक रोती पीटती आक़ा के दर आई
दुआ माँगी जनाब-ए-ग़ौस ने कश्ती उभर आई
ज़माने ! तूने मेरे ग़ौस की दरिया-दिली देखी
डूबी कश्ती बारह बरस की पल भर में बाहर आई
करता है फ़रमां-बरदारी दरिया ग़ौस-ए-आज़म का
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
पल भर में अब्दाल बनाया ऐसे चोर और डाकू को
रात को जो आया था चुराने जुब्बा ग़ौस-ए-आज़म का
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
चोर को अब्दाल, आक़ा ! कह दिया तो हो गया
गो उसने मुर्दे को ज़िंदा कह दिया तो हो गया
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
ग़ौस-ए-आज़म ! आप की नज़र-ए-विलायत ने अगर
जिस को भी अल्लाह वाला कह दिया तो हो गया
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! मीरां !
नातख्वां:
शब्बीर बरकाती, महमूद रज़ा क़ादरी और हस्सान रज़ा क़ादरी
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! दस्त-गीर !
सुल्तान-ए-विलायत, ग़ौस-ए-पाक
वलियों पे हुकूमत, ग़ौस-ए-पाक
शहबाज़-ए-ख़िताबत, ग़ौस-ए-पाक
सरताज-ए-शरीअ'त, ग़ौस-ए-पाक
जिन्नों पे हुकूमत, ग़ौस-ए-पाक
मिस्कीन की दौलत, ग़ौस-ए-पाक
मोहताज की सर्वत, ग़ौस-ए-पाक
हैं बाइ'स-ए-बरकत, ग़ौस-ए-पाक
कमज़ोर की ताक़त, ग़ौस-ए-पाक
हैं रब की नेअ'मत, ग़ौस-ए-पाक
अल्लाह की रहमत, ग़ौस-ए-पाक
ग़ौस-ए-पाक, ग़ौस-ए-पाक
मैं क़ादरी हूँ, शुक्र है रब्ब-ए-क़दीर का
हाथों में मेरे हाथ है पीरान-ए-पीर का
दस्तगीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
वलियों में तुम ला-सानी, ग़ौस-ए-आज़म जीलानी !
तुम महबूब-ए-सुबहानी, या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी !
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
अग़वास-ओ-अब्दाल से बढ़ कर रुत्बा ग़ौस-ए-आज़म का
सारे वलियों की गर्दन पर तलवा ग़ौस-ए-आज़म का
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
डूबी कश्ती बारह बरस की पल भर में बाहर आई
मुख़ालिफ़ थी हवा दरिया में इक ऐसी लहर आई
गई दरिया में कश्ती डूब साहिल पे ख़बर आई
ज़ईफ़ा एक रोती पीटती आक़ा के दर आई
दुआ माँगी जनाब-ए-ग़ौस ने कश्ती उभर आई
ज़माने ! तूने मेरे ग़ौस की दरिया-दिली देखी
डूबी कश्ती बारह बरस की पल भर में बाहर आई
करता है फ़रमां-बरदारी दरिया ग़ौस-ए-आज़म का
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
पल भर में अब्दाल बनाया ऐसे चोर और डाकू को
रात को जो आया था चुराने जुब्बा ग़ौस-ए-आज़म का
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
चोर को अब्दाल, आक़ा ! कह दिया तो हो गया
गो उसने मुर्दे को ज़िंदा कह दिया तो हो गया
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
दम दम दम दम दम दस्त-गीर
ग़ौस-ए-आज़म ! आप की नज़र-ए-विलायत ने अगर
जिस को भी अल्लाह वाला कह दिया तो हो गया
या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
पीरान-ए-पीर ! रौशन-ज़मीर ! या ग़ौस-ए-आज़म दस्त-गीर !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! ग़ौस-ए-आज़म !
ग़ौस-ए-आज़म ! मीरां !
नातख्वां:
शब्बीर बरकाती, महमूद रज़ा क़ादरी और हस्सान रज़ा क़ादरी
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