सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है / Sarkaar Ke Tukdon Par Mangton Ka Guzaara Hai
सब उन का उतारा है, सब उन का उतारा है
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
क़ुर्बान मैं उन की बख़्शिश के मक़्सद भी ज़बाँ पर आया नहीं
बिन माँगे दिया और इतना दिया, दामन में हमारे समाया नहीं
ईमान मिला उन के सदक़े, क़ुरआ'न मिला उन के सदक़े
रहमान मिला उन के सदक़े, वो क्या है जो हमने पाया नहीं
ख़ुर्शीद-ए-क़यामत की ताबिश माना के क़यामत ही होगी
हम उन के हैं घबराएँ क्यूँ ! क्या हम पे नबी का साया नहीं !
उन मोहसिन-ए-आज़म के यूँ तो ख़ालिद पे हज़ारों एहसाँ हैं
क़ुर्बान मगर उस एहसाँ के एहसाँ भी किया तो जताया नहीं
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
ये नाज़, ये अंदाज़, हमारे नहीं होते
झोली में अगर टुकड़े तुम्हारे नहीं होते
मिलती न अगर भीक हुज़ूर ! आप के दर से
इस ठाट से मँगतों के गुज़ारे नहीं होते
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
नात-ख़्वाँ:
शब्बीर बरकाती
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
क़ुर्बान मैं उन की बख़्शिश के मक़्सद भी ज़बाँ पर आया नहीं
बिन माँगे दिया और इतना दिया, दामन में हमारे समाया नहीं
ईमान मिला उन के सदक़े, क़ुरआ'न मिला उन के सदक़े
रहमान मिला उन के सदक़े, वो क्या है जो हमने पाया नहीं
ख़ुर्शीद-ए-क़यामत की ताबिश माना के क़यामत ही होगी
हम उन के हैं घबराएँ क्यूँ ! क्या हम पे नबी का साया नहीं !
उन मोहसिन-ए-आज़म के यूँ तो ख़ालिद पे हज़ारों एहसाँ हैं
क़ुर्बान मगर उस एहसाँ के एहसाँ भी किया तो जताया नहीं
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
ये नाज़, ये अंदाज़, हमारे नहीं होते
झोली में अगर टुकड़े तुम्हारे नहीं होते
मिलती न अगर भीक हुज़ूर ! आप के दर से
इस ठाट से मँगतों के गुज़ारे नहीं होते
सरकार के टुकड़ों पर मँगतों का गुज़ारा है
नात-ख़्वाँ:
शब्बीर बरकाती
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