या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है / Ya Ghaus ! Ho Tum Abdul Qadir, Itna Hi Sahaara Kaafi Hai
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
हम क़ादरियों को मुश्किल में बस ! नाम तुम्हारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
बग़दाद के गुलशन में जा कर जन्नत की तमन्ना कौन करे !
या ग़ौस ! तुम्हारे रोज़े का आशिक़ को नज़ारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
सूखी हुई खेती फल जाए, आई हुई आफ़त टल जाए
रहमत भरी ऊँगली का तेरी बस ! एक इशारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
पीर-ए-पीरां ! मीर-ए-मीरां ! ग़ौसुल-आज़म ! शाह-ए-जीलां !
हर वक़्त मुरीदों को तेरे, तेरा ही सहारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
दुनिया-तलबी से हूँ मैं जुदा, अंदाज़ फ़क़ीराना है ज़िया !
सरकार की भीक पे हो जाए दुनिया में गुज़ारा, काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
हम क़ादरियों को मुश्किल में बस ! नाम तुम्हारा काफ़ी है
नातख्वां:
हुसैन यूसुफ़ मेमन
हम क़ादरियों को मुश्किल में बस ! नाम तुम्हारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
बग़दाद के गुलशन में जा कर जन्नत की तमन्ना कौन करे !
या ग़ौस ! तुम्हारे रोज़े का आशिक़ को नज़ारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
सूखी हुई खेती फल जाए, आई हुई आफ़त टल जाए
रहमत भरी ऊँगली का तेरी बस ! एक इशारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
पीर-ए-पीरां ! मीर-ए-मीरां ! ग़ौसुल-आज़म ! शाह-ए-जीलां !
हर वक़्त मुरीदों को तेरे, तेरा ही सहारा काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
दुनिया-तलबी से हूँ मैं जुदा, अंदाज़ फ़क़ीराना है ज़िया !
सरकार की भीक पे हो जाए दुनिया में गुज़ारा, काफ़ी है
या ग़ौस ! हो तुम अब्दुल क़ादिर, इतना ही सहारा काफ़ी है
हम क़ादरियों को मुश्किल में बस ! नाम तुम्हारा काफ़ी है
नातख्वां:
हुसैन यूसुफ़ मेमन
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