अली हक़ अली, अली हक़ अली (शहादत को गोद तू ने लिया) / Ali Haq Ali, Ali Haq Ali (Shahaadat Ko God Tu Ne Liya)
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
शहादत को गोद तू ने लिया
मोहब्बत की रस्म तुझ से चली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
बुलंदी-ए-फ़िक्र मंसब तेरा
हर इक आईना मुहद्दब तेरा
निगाह-ए-रसूल मकतब तेरा
हुआ कोई सानी भला ! कब तेरा
वलियुल-वली, तू ही है अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
तू शेर-ए-ख़ुदा, है मुश्किल-कुशा
फ़िरासत नसब, सदाक़त-नुमा
हमिय्यत सिपर, शुजाअ'त क़बा
हिदायत गजर, शरीअ'त असा
तरीक़त मकाँ, तसव्वुफ़ गली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
रज़ा और सब्र जादा तेरा
ग़ुबार-ए-सफ़र लिबादा तेरा
अमल की तरह इरादा तेरा
निगाहों से दिल कुशादा तेरा
तेरा शो'ला-ए-लताफ़त कली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
दुआ-ए-ग़रीब का हम-सफ़र
बिगड़ते नसीब का चारागर
वो का'बा, ख़ुदा का वो पहला घर
पड़ी उस पे तेरी पहली नज़र
जहाँ तेरी पहली धड़कन चली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
तलब को शदीद तू ने किया
समाअ'त को दीद तू ने किया
मुझे भी मुरीद तू ने किया
करम ये मज़ीद तू ने किया
कि जाँ तेरी आहटों में ढली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
शायर:
मुज़फ़्फ़र वारसी
नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
अली हक़ अली, अली हक़ अली
शहादत को गोद तू ने लिया
मोहब्बत की रस्म तुझ से चली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
बुलंदी-ए-फ़िक्र मंसब तेरा
हर इक आईना मुहद्दब तेरा
निगाह-ए-रसूल मकतब तेरा
हुआ कोई सानी भला ! कब तेरा
वलियुल-वली, तू ही है अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
तू शेर-ए-ख़ुदा, है मुश्किल-कुशा
फ़िरासत नसब, सदाक़त-नुमा
हमिय्यत सिपर, शुजाअ'त क़बा
हिदायत गजर, शरीअ'त असा
तरीक़त मकाँ, तसव्वुफ़ गली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
रज़ा और सब्र जादा तेरा
ग़ुबार-ए-सफ़र लिबादा तेरा
अमल की तरह इरादा तेरा
निगाहों से दिल कुशादा तेरा
तेरा शो'ला-ए-लताफ़त कली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
दुआ-ए-ग़रीब का हम-सफ़र
बिगड़ते नसीब का चारागर
वो का'बा, ख़ुदा का वो पहला घर
पड़ी उस पे तेरी पहली नज़र
जहाँ तेरी पहली धड़कन चली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
तलब को शदीद तू ने किया
समाअ'त को दीद तू ने किया
मुझे भी मुरीद तू ने किया
करम ये मज़ीद तू ने किया
कि जाँ तेरी आहटों में ढली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
अली हक़ अली, अली हक़ अली
शायर:
मुज़फ़्फ़र वारसी
नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
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سبحان اللہ
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