सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़ / Sun Lo, Khuda Ke Waste ! Apne Gada Ki Arz
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ये अर्ज़ है, हुज़ूर ! बड़े बे-नवा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
उन के गदा के दर पे है यूँ बादशाह की अर्ज़
जैसे हो बादशाह के दर पर गदा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
आजिज़-नवाज़ियों पे करम है तुला हुआ
वो दिल लगा के सुनते हैं हर बे-नवा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
क़ुर्बान ! उन के नाम के, बे उन के नाम के
मक़्बूल हो न ख़ास-ए-जनाब-ए-ख़ुदा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ग़म की घटाएँ छाई हैं मुझ तीरा-बख़्त पर
ए मेहर ! सुन ले ज़र्रा-ए-बे-दस्त-ओ-पा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ए बे-कसों के हामी-ओ-यावर ! सिवा तेरे
किस को ग़रज़ है, कौन सुने मुब्तला की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ए कीमिया-ए-दिल ! मैं तेरे दर की ख़ाक हूँ
ख़ाक-ए-दर-ए-हुज़ूर से है कीमिया की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
उलझन से दूर, नूर से मा'मूर कर मुझे
ए ज़ुल्फ़-ए-पाक ! है ये असीर-ए-बला की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
दुख में रहे कोई ये गवारा नहीं उन्हें
मक़्बूल क्यूँ न हो दिल-ए-दर्द-आश्ना की अर्ज़ !
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
क्यूँ तूल दूँ, हुज़ूर ! ये दें, ये अता करें
ख़ुद जानते हैं आप मेरे मुद्दआ' की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
दामन भरेंगे दौलत-ए-फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से हम
ख़ाली कभी गई है, हसन ! मुस्तफ़ा की अर्ज़ !
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
शायर:
मौलाना हसन रज़ा खान बरेलवी
नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
ये अर्ज़ है, हुज़ूर ! बड़े बे-नवा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
उन के गदा के दर पे है यूँ बादशाह की अर्ज़
जैसे हो बादशाह के दर पर गदा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
आजिज़-नवाज़ियों पे करम है तुला हुआ
वो दिल लगा के सुनते हैं हर बे-नवा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
क़ुर्बान ! उन के नाम के, बे उन के नाम के
मक़्बूल हो न ख़ास-ए-जनाब-ए-ख़ुदा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ग़म की घटाएँ छाई हैं मुझ तीरा-बख़्त पर
ए मेहर ! सुन ले ज़र्रा-ए-बे-दस्त-ओ-पा की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ए बे-कसों के हामी-ओ-यावर ! सिवा तेरे
किस को ग़रज़ है, कौन सुने मुब्तला की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
ए कीमिया-ए-दिल ! मैं तेरे दर की ख़ाक हूँ
ख़ाक-ए-दर-ए-हुज़ूर से है कीमिया की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
उलझन से दूर, नूर से मा'मूर कर मुझे
ए ज़ुल्फ़-ए-पाक ! है ये असीर-ए-बला की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
दुख में रहे कोई ये गवारा नहीं उन्हें
मक़्बूल क्यूँ न हो दिल-ए-दर्द-आश्ना की अर्ज़ !
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
क्यूँ तूल दूँ, हुज़ूर ! ये दें, ये अता करें
ख़ुद जानते हैं आप मेरे मुद्दआ' की अर्ज़
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
दामन भरेंगे दौलत-ए-फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से हम
ख़ाली कभी गई है, हसन ! मुस्तफ़ा की अर्ज़ !
सुन लो, ख़ुदा के वास्ते ! अपने गदा की अर्ज़
शायर:
मौलाना हसन रज़ा खान बरेलवी
नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
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