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ये मेहर-ओ-माह सितारों की दिल-कशी क्या है / Ye Mehr-o-Mah Sitaron Ki Dilkashi Kya Hai

ये मेहर-ओ-माह सितारों की दिल-कशी क्या है नबी के हुस्न के आगे ये चाँदनी क्या है नबी की ना'त पढ़ी जा रही है महफ़िल में ज़रा बताइए लब पर ये ख़ामोशी क्या है अगर है आना तो आना नबी के रौज़े पर ऐ मौत ! तुझ को बताऊँगा ज़िंदगी क्या है नबी के शहर में जन्नत तलाश करता है ज़रा मुझे तो बता उस जगह कमी क्या है लगा के तख़्त को ठोकर कहा ये शाहों ने तेरी गदाई के आगे शहनशही क्या है नबी के 'इश्क़ ने लफ़्ज़ों को कर दिया अनमोल नबी की ना'त है वर्ना ये शा'इरी क्या है हैं जिस के मौला नबी, उस के हैं 'अली मौला अब इस में और समझना है क्या, 'अली क्या है ख़मोश रह के वो दुश्मन को मात देते थे इसी से जान लो मे'यार-ए-अज़हरी क्या है पहन के बैठे हैं गुलज़ार जुब्बा-ए-मौला इसी से जान लो गुलज़ार वास्ती क्या है ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ye mehr-o-maah sitaaro.n ki dil-kashi kya hai nabi ke husn ke aage ye chaandni kya hai nabi ki naa't pa.Dhi jaa rahi hai mehfil me.n zara bataaiye lab par ye KHaamoshi kya hai agar hai aana to aan...

मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा हो / Mustafa Khair-ul-wara Ho

मुस्तफ़ा ! ख़ैर-उल-वरा हो सरवर-ए-हर-दो-सरा हो अपने अच्छों का तसद्दुक़ हम बदों को भी निबाहो किस के फिर हो कर रहें हम गर तुम्हीं हम को न चाहो बद हँसें तुम उन की ख़ातिर रात भर रोओ कराहो बद करें हर दम बुराई तुम कहो उन का भला हो हम वही ना-शुस्ता-रू हैं तुम वही बहर-ए-'अता हो हम वही शायान-ए-रद हैं तुम वही शान-ए-सख़ा हो हम वही बे-शर्म-ओ-बद हैं तुम वही कान-ए-हया हो हम वही नंग-ए-जफ़ा हैं तुम वही जान-ए-वफ़ा हो हम वही क़ाबिल सज़ा के तुम वही रहम-ए-ख़ुदा हो चर्ख़ बदले, दहर बदले तुम बदलने से वरा हो अब हमीं हों सहव हाशा ऐसी भूलों से जुदा हो 'उम्र भर तो याद रक्खा वक़्त पर क्या भूलना हो वक़्त-ए-पैदायिश न भूले कैफ़-यन्सा क्यूँ क़ज़ा हो ये भी, मौला ! 'अर्ज़ कर दूँ भूल अगर जाओ तो क्या हो वो हो जो तुम पर गिराँ है वो हो जो हरगिज़ न चाहो वो हो जिस का नाम लेते दुश्मनों का दिल बुरा हो वो हो जिस के रद की ख़ातिर रात-दिन वक़्फ़-ए-दु'आ हो मर मिटें बर्बाद बंदे ख़ाना आबाद आग का हो शाद हो इब्लीस मल'ऊँ ग़म किसे इस क़हर का हो तुम को हो वल्लाह तुम को जान-ओ-दिल तुम पर फ़िदा हो तुम को ...

या मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा तेरे जेआ कोई नहीं / Ya Mustafa Khair-ul-wara Tere Jeya Koi Nahin

या मुस्तफ़ा ख़ैर-उल-वरा ! तेरे जेआ कोई नहीं किह्नूँ कह्वाँ तेरे जेआ, तेरे जेआ कोई नहीं तेरे जेआ सोहणा नबी लब्भाँ ते ताँ जे होवे कोई मैनूँ ते है एनाँ पता, तेरे जेआ कोई नहीं अक़्सा दे विच, आक़ा मेरे ! पढ़ के नमाज़ पिछे तेरे नबियाँ ने वी एहो कह्या, तेरे जेआ कोई नहीं गोदी च ले के सरकार नूँ, सोहणे मिठल मँठार नूँ आखे हलीमा सा'दिया, तेरे जेआ कोई नहीं मन मोहणियाँ नबी सोहणियाँ ! क़ुरआन है तेरा ना'त-ख़्वाँ 'अरब-ओ-'अजम दे वालिया, तेरे जेआ कोई नहीं रब नईं कह्या तेरा मोड़ दा, दिल नईं कदी तेरा तोड़ दा मन दा ख़ुदा तेरी रज़ा, तेरे जेआ कोई नहीं होवे फ़क़ीर या बादशाह भावें गदा नियाज़ी जेआ सब खौंदे ने सदक़ा तेरा, तेरे जेआ कोई नहीं शायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दी ओवैस रज़ा क़ादरी ya mustafa KHair-ul-wara ! tere jeya koi nahi.n kihnu.n kahwaa.n tere jeya, tere jeya koi nahi.n tere jeya sohna nabi labbhaa.n te taa.n je howe koi mainu.n te hai enaa.n pata, tere jeya koi nahi.n aqsa de wich, aaqa mere ! pa.Dh ke namaaz pichhe tere n...

मँगते ख़ाली हाथ न लौटे कितनी मिली ख़ैरात न पूछो / Mangte Khali Haath Na Laute Kitni Mili Khairat Na Poochho

मँगते ख़ाली हाथ न लौटे, कितनी मिली ख़ैरात न पूछो उन का करम फिर उन का करम है, उन के करम की बात न पूछो कुंतु-कंज़न राज़-ए-मशिय्यत जल्वा-ए-असरा नूर-ए-हिदायत जगमग जगमग दोनों 'आलम, कैसी है वो ज़ात न पूछो 'इश्क़-ए-नबी कौनैन की दौलत 'इश्क़-ए-नबी बख़्शिश की ज़मानत इस से बढ़ कर दस्त-ए-तलब में है भी कोई सौग़ात न पूछो रश्क-ए-जिनाँ तयबा की गलियाँ, हर ज़र्रा फ़िरदौस-ब-दामाँ चारों तरफ़ अनवार का 'आलम, रहमत की बरसात न पूछो ज़ाहिर में तस्कीन-ए-दिल-ओ-जाँ, बातिन में मे'राज-ए-दिल-ओ-जाँ नाम-ए-नबी फिर नाम-ए-नबी है, नाम-ए-नबी की बात न पूछो हाल अगर कुछ अपना सुनाया, उन के करम का शिकवा होगा मैं अपने हालात में ख़ुश हूँ, मुझ से मेरे हालात न पूछो ताज-ए-शफ़ा'अत सर पर पहने हश्र का दूल्हा आ पहुँचा है आँखें खोलो ग़ौर से देखो, किस की है बारात न पूछो मैं क्या और क्या मेरी हक़ीक़त, सब कुछ है सरकार की निस्बत मैं तो बुरा हूँ लेकिन मेरी लाज है किस के हाथ न पूछो ख़ालिद ! मैं सिर्फ़ इतना कहूँगा, जाग उठा अश्कों का मुक़द्दर याद-ए-नबी में रोते रोते कैसे कटी है रात न पूछो शायर: ख़ालिद महमूद नक़्शबंदी ना'त...

ज़रा छेड़ तू नग़्मा-ए-क़ादरिय्यत कि हर तार बोलेगा तन तन तना तन / Zara Chhed Tu Naghma-e-Qadriyyat Ke Har Taar Bolega Tan Tan Tana Tan

ज़रा छेड़ तू नग़्मा-ए-क़ादरिय्यत, कि हर तार बोलेगा तन तन तना तन तेरी रूह हरगिज़ रहेगी न रक़्साँ, जो गर्दिश में रहती है गन गन गना गन अबू-जहल हाथों में कँकरियाँ लाया, तो सरकार ने उन को कलमा पढ़ाया मगर फिर भी ईमाँ वो नारी न लाया, पलट के वो भागा था दन दन दना दन चले 'अर्श की सैर को मेरे आक़ा, तो जन्नत से बुर्राक़ ख़िदमत में आया हवाओं से गुज़रे, फ़ज़ाओं से गुज़रे, चले जा रहे थे वो सन सन सना सन बस इतनी सी है इल्तिजा, मेरे आक़ा ! कि कल रोज़-ए-महशर हो जिस वक़्त बरपा लबों पर रहे विर्द सल्ले-'अला का, मैं ना'तें पढ़े जाऊँ मन मन मना मन ये है नूरी टकसाल नूरी मियाँ की, यहाँ जन्नती सिक्के ढलते रहे हैं यहाँ खोटे सिक्के की जा ही नहीं है, हर इक सिक्का बजता है खन खन खना खन ग़ुलाम-ए-शहंशाह-ए-बग़दाद मैं हूँ, मेरा दोहरा रिश्ता है ख़्वाजा पिया से गले में मेरे चिश्ती पट्टा पड़ा है, मैं हूँ क़ादरी सुन्नी टन टन टना टन ग़ुलाम-ए-शहंशाह-ए-बरकात मैं हूँ, मेरा दोहरा रिश्ता है अच्छे मियाँ से गले में मेरे नूरी पट्टा पड़ा है, मैं हूँ क़ादरी सुन्नी टन टन टना टन ज़बाँ पर मेरी नाम नूरी का आया, तो नूरानियत ने गले से लगाया ...

ऐ शह-ए-अबरार अहलन व सहलन मरहबा / Aye Shah-e-Abrar Ahlan Wa Sahlan Marhaba

Aye Shah-e-Abrar Ahlan Wa Sahlan Marhaba Lyrics in Hindi, English & Urdu ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा महबूब-ए-ग़फ़्फ़ार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा मख़ज़न-ए-अनवार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा दो जग के मुख़्तार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा सय्यिद-ओ-सालार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा दे दिए रब ने तुझ को ख़ज़ाने बे-बहा मालिक-ओ-मुख़्तार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा रोज़-ए-महशर हो साया-कुनाँ हम पर तेरे गेसू-ए-ख़मदार, अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा जगमगा दो दिल, सरकार ! दिखला कर हमें नूरानी रुख़्सार, अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा 'इस्याँ का बीमार अब तो शिफ़ा पाए, शहा ! हो करम, सरकार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ शह-ए-अबरार ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ऐ मेरे सरदार ! अहलव्-व...

तमाम आलम के जिन्न-ओ-इंसाँ ख़ुशी के नग़मात गा रहे हैं / Tamam Alam Ke Jinn-o-Insan Khushi Ke Naghmat Ga Rahe Hain

Tamam Alam Ke Jinn-o-Insan Lyrics in Hindi, English & Urdu तमाम 'आलम के जिन्न-ओ-इंसाँ ख़ुशी के नग़मात गा रहे हैं बनी है जिन के लिए ये दुनिया वो आज तशरीफ़ ला रहे हैं सबा ने पूछा, ऐ फूल ! तेरा लिबास कितना महक रहा है तो फूल बोला नबी के तलवों की हम भी ख़ैरात पा रहे हैं ज़माना करवट बदल रहा है, हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं मलाइका आमिना के आँगन में आज ख़ुशियाँ मना रहे हैं नबी बचपना था क्या सलोना, कि चाँद था आप का खिलौना कभी खिलौने को तोड़ते हैं, कभी खिलौना बना रहे हैं ना'त-ख़्वाँ: सैफ़ रज़ा कानपुरी सय्यिद कैफ़ी अली रज़वी tamaam 'aalam ke jinn-o-insaa.n KHushi ke naGmaat ga rahe hai.n bani hai jin ke liye ye duniya wo aaj tashreef laa rahe hai.n saba ne poochha, ai phool ! tera libaas kitna mahak raha hai to phool bola nabi ke talwo.n ki ham bhi KHairaat paa rahe hai.n zamaana karwaT badal raha hai, huzoor tashreef laa rahe hai.n malaaika aamina ke aangan me.n aaj KHushiyaa.n mana rahe hai.n nabi ka bachpan tha kya salona, ki chaand thaa aap ka khilauna kabhi k...

अहलन व सहलन मरहबा | आ गए आ गए आ गए सरकार / Ahlan Wa Sahlan Marhaba | Aa Gaye Aa Gaye Aa Gaye Sarkar

Ahlan Wa Sahlan Marhaba Lyrics in Hindi, English & Urdu या मुस्तफ़ा ! या मुज्तबा ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ! आ गए, आ गए, आ गए सरकार आ गए, आ गए, आ गए सरकार फिर सजे बाज़ार सारे, मरहबा सद-मरहबा हो गए रौशन नज़ारे, मरहबा सद-मरहबा आ गए, आ गए, आ गए सरकार आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! आ गए मुज्तबा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! सय्यिद-उल-अस्फ़िया ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! अंबिया-ओ-मुर्सलीं सब साहिब-ए-'अज़मत मगर आप हैं सब से ही प्यारे, मरहबा सद-मरहबा आ गए, आ गए, आ गए सरकार अहलव्-व-सहलन मरहबा ! अहलव्-व-सहलन मरहबा ! आप जब पैदा हुए तो झुक गए बहर-ए-सलाम आसमाँ के बुर्ज सारे, मरहबा सद-मरहबा आ गए, आ गए, आ गए सरकार आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! आ गए मुज्तबा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! सय्यिद-उल-अस्फ़िया ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! उन की आमद पर मनाओ ख़ूब ख़ुशियाँ, मोमिनो ! हैं ये क़ुरआँ में इशारे, मरहबा सद-मरहबा आ गए, आ गए, आ गए सरकार आ गए, आ गए, आ गए सरकार शाह के मीलाद की कैसी ख़ुशी है देखिए ...

बारहवीं का नूर दिल पे छा गया / Barahwin Ka Noor Dil Pe Chha Gaya | Barvi Ka Noor Dil Pe Cha Gaya (All Versions)

Barvi Ka Noor Dil Pe Cha Gaya Lyrics in Hindi, English & Urdu आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! मंठार की आमद ! मरहबा ! मुख़्तार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की आमद ! मरहबा ! दाता की आमद ! मरहबा ! आ'ला की आमद ! मरहबा ! मौला की आमद ! मरहबा ! बारहवीं का नूर दिल पे छा गया आ गए नबी, आख़िरी नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया आ गए नबी, आख़िरी नबी क्यूँ बारहवीं पे है सभी को प्यार आ गया आया इसी दिन अहमद-ए-मुख़्तार आ गया घर आमिना के सय्यिद-ए-अबरार आ गया ख़ुशियाँ मनाओ, ग़म-ज़दो ! ग़म-ख़्वार आ गया या ख़ुदा ! करम तेरा मोमिनों पे ये हुआ बख़्शवाने को ख़ता आ गए हैं मुस्तफ़ा 'आसियो ! सुनो, रहमत-ए-ख़ुदा आ गए नबी, आख़िरी नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया आ गए नबी, आख़िरी नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया आ गए नबी, आख़िरी नबी मुहम्मद-ए-मुस्तफ़ा ! सब से आख़िरी नबी ! अहमद-ए-मुज्तबा ! सब से आख़िरी नबी ! हैं शफ़ी'-उल-वरा ! सब से आख़िरी नबी ! आमिना का लाडला ! सब से आख़िरी नबी ! या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! निसार तेरी ...