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लुत़्फ़ उन का आम हो ही जाएगा / Lutf Unka Aam Ho Hi Jayega

लुत़्फ़ उन का 'आम हो ही जाएगा शाद हर नाकाम हो ही जाएगा जान दे दो वा'दा-ए-दीदार पर नक़्द अपना दाम हो ही जाएगा शाद है फ़िरदौस या'नी एक दिन क़िस्मत-ए-ख़ुद्दाम हो ही जाएगा याद रह जाएँगी ये बे-बाकियाँ नफ़्स ! तू तो राम हो ही जाएगा बे-निशानों का निशाँ मिटता नहीं मिटते मिटते नाम हो ही जाएगा याद-ए-गेसू ज़िक्र-ए-हक़ है, आह कर दिल में पैदा लाम हो ही जाएगा एक दिन आवाज़ बदलेंगे ये साज़ चहचहा कोहराम हो ही जाएगा साइलो ! दामन सख़ी का थाम लो कुछ न कुछ इन'आम हो ही जाएगा याद-ए-अब्रू कर के तड़पो, बुलबुलो ! टुकड़े टुकड़े दाम हो ही जाएगा मुफ़्लिसो ! उन की गली में जा पड़ो बाग़-ए-ख़ुल्द इकराम हो ही जाएगा गर यूँही रहमत की तावीलें रहीं मद्‌ह हर इल्ज़ाम हो ही जाएगा बादा-ख़्वारी का समाँ बँधने तो दो शैख़ दुर्द-आशाम हो ही जाएगा ग़म तो उन को भूल कर लिपटा है यूँ जैसे अपना काम हो ही जाएगा मिट ! कि गर यूँही रहा क़र्ज़-ए-हयात जान का नीलाम हो ही जाएगा 'आक़िलो ! उन की नज़र सीधी रहे बौरों का भी काम हो ही जाएगा अब तो लाई है शफ़ा'अत 'अफ़्व पर बढ़ते बढ़ते 'आम हो ही जाएगा ऐ रज़ा ! हर काम...

लक़ब सिद्दीक़ बन जाए सदाक़त हो तो ऐसी हो / Laqab Siddiq Ban Jaye Sadaqat Ho To Aisi Ho

लक़ब सिद्दीक़ बन जाए, सदाक़त हो तो ऐसी हो मज़ार-ओ-ग़ार के साथी, रफ़ाक़त हो तो ऐसी हो मेरे सरकार का रौज़ा जो जन्नत से भी आ'ला है तेरी बेटी का घर है वो, करामत हो तो ऐसी हो उठाया अपने काँधों पर है सरदार-ए-दो-'आलम को ख़ुदा की इस अमानत की हिफ़ाज़त हो तो ऐसी हो दिलबर-ओ-दिलदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर सहाबा के सरदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर और हैदर के यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर हर सुन्नी का प्यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर तेरी पाकीज़ा बेटी पर ग़लत तोहमत लगी जिस दम ख़ुदा ने ख़ुद सफ़ाई दी, बराअत हो तो ऐसी हो ख़ुदा की राह में क़ुर्बान कर डाला है तन-मन-धन बदन पर टाट ओढ़ा है, सख़ावत हो तो ऐसी हो शब-ए-हिजरत तेरे दर पर मेरे आक़ा ने दस्तक दी किसी के सिदक़-ए-ईमाँ पर शहादत हो तो ऐसी हो बता मंज़र, ऐ ग़ार-ए-सौर ! दीवाने की नज़रों का कि थे महबूब झोली में, ज़ियारत हो तो ऐसी हो रसूलुल्लाह तेरे घर में दूल्हा बन के आए थे घराने हों तो ऐसे हों, क़राबत हो तो ऐसी हो दिलबर-ओ-दिलदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर सहाबा के सरदार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर और हैदर के यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर हर सुन्नी का प्यार हैं सिद्दीक़-ए-अकबर नबी के बा'द सब असहाब न...

या अव्वलु मख़लूक़िन लिल्लाह तुझे बाद-ए-ख़ुदा यकता जाना | लम-याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन तज़मीन के साथ / Ya Awwalu Makhluqin Lillah Tujhe Baad-e-Khuda Yakta Jana | Lam Yaati Nazeeruka Fee Nazarin With Tazmeen

या अव्वलु मख़लूक़िन लिल्लाह ! तुझे बा'द-ए-ख़ुदा यकता जाना हो सारी ख़ुदाई के दाता, तुम्हें मालिक-ए-कंज़-ए-ख़ुदा जाना है ज़िक्र बड़ा ऊँचा तेरा, तुझे हम ने ख़ुदा की 'अता जाना लम-याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन, मिस्ल-ए-तो न शुद पैदा जाना जग राज को ताज तोरे सर सो, है तुझ को शह-ए-दो-सरा जाना सैलाब तलातुम-ख़ेज़ उठा, हर सिम्त है इक हलचल बरपा गर्दिश में सफ़ीना आने लगा, अब हाल न जाने क्या होगा तेरी ज़ात है दाफ़े'-ए-रंज-ओ-बला, ऐ नूह की कश्ती के मौला ! अल-बहरु 'अला वल-मौजु तग़ा, मन बेकस-ओ-तूफ़ाँ होश-रुबा मंजधार में हूँ बिगड़ी है हवा, मोरी नय्या पार लगा जाना कहती है यही चश्म-ए-पुरनम, मेरी दीदा-वरी का रख लो भरम मेरे ख़्वाब में, ऐ सरकार-ए-उमम ! इक बार तो कीजिए रंजा-क़दम क्या 'अर्ज़ करूँ फ़ुर्क़त के सितम है मुझ पे पड़ा इक कोह-ए-अलम अना फ़ी 'अतशि-व्व-सख़ाका अतम, ऐ गेसू-ए-पाक ऐ अब्र-ए-करम ! बरसन हारे रिम-झिम रिम-झिम, दो बूँद इधर भी गिरा जाना दे अपना मुझे वो दर्द-ए-विला, हो दिल में तड़प तेरी पैदा मेरी ज़ीस्त का तू हासिल हो जा, हो तुझ पे हमारी जान फ़िदा जब 'इश्क़-ए-बिलाली याद आया, इक 'आशिक़-ए-स...

लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा / Laye Tashreef Duniya Mein Khairul Wara

Laye Tashreef Duniya Mein Khairul Wara Lyrics in Hindi, English & Urdu तल'अल-बद्रु 'अलैना मिन सनिय्यातिल-वदा'इ वजब-श्शुक्रु 'अलैना मा द'आ लिल्लाहि दा'इ लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा हक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामने कुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगे आए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने चाँद से ख़ूब-तर है रुख़-ए-मुस्तफ़ा उन को देखा तो ये 'आइशा ने कहा फीकी फीकी सी लगती थी उस की ज़िया चाँद जब तक रहा आमने-सामने लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा हक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामने कुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगे आए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने एक दिन बू-जहल ने नबी से कहा ये बता आज है मेरी मुट्ठी में क्या दस्त-ए-बू-जहल में कंकरी ने किया वस्फ़-ए-शाह-ए-हुदा आमने-सामने लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा हक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामने कुफ़्र अब शर्म से मुँह छुपाने लगे आए जब मुस्तफ़ा आमने-सामने कुफ़्र ने फिर उठाया ये फ़ितना नया है नबी तो करे चाँद टुकड़े ज़रा देखते देखते चाँद शक़ हो गया जब नबी ने कहा आमने-सामने लाए तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा हक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामने कुफ़्र अब शर्म ...

लो आ गई क़ुर्बानी / Lo Aa Gai Qurbani

सुन्नत है इब्राहीमी, है शेवा-ए-ईमानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी ख़्वाब था जो आया रब के ख़लील को क़ुर्बान कर रहे हैं वो इस्मा'ईल को समझे थे इब्राहीम कि ये हुक्म है रब्बानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी फ़रमाया इस्मा'ईल को रब की रज़ा को मान बेटे ख़ुदा की राह में तुझे होना है क़ुर्बान सुनते ही इस्मा'ईल ने फ़ौरन ये बात मानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी आँखों पे पट्टी बाँध के सीधा लिटा दिया गर्दन पे तेज़ छुरी को ला के टिका दिया जिब्रील ले आए वहीं दुंबा आसमानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी अल्लाह को इब्राहीम की आई अदा पसंद हर एक मुसलमान को रब ने किया पाबंद ता-हश्र है ख़लील की सुन्नत हमें निभानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी ना'त-ख़्वाँ: सुल्तान अतीक़ रहमान साहिल रज़ा क़ादरी सुन्नत है इब्राहीमी, है शेवा-ए-ईमानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी बेटे को ख़्वाब अपना सुनाया ख़लील ने राज़ी ख़ुदा पे बेटे को पाया ख़लील ने फ़रमाया इब्राहीम ने ये हुक्म है रब्बानी लो आ गई क़ुर्बानी, लो आ गई क़ुर्बानी सुन्नत है इब्राहीमी, है शेवा-ए-ईमानी ...

लहद में इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले / Lahad Mein Ishq-e-Rukh-e-Shah Ka Daag Le Ke Chale

लहद में 'इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले अँधेरी रात सुनी थी चराग़ ले के चले तेरे ग़ुलामों का नक़्श-ए-क़दम है राह-ए-ख़ुदा वो क्या बहक सके जो ये सुराग़ ले के चले जिनाँ बनेगी मुहिब्बान-ए-चार-यार की क़ब्र जो अपने सीने में ये चार बाग़ ले के चले गए, ज़ियारत-ए-दर की, सद आह ! वापस आए नज़र के अश्क पुछे दिल का दाग़ ले के चले मदीना जान-ए-जिनान-ओ-जहाँ है वो सुन लें जिन्हें जुनून-ए-जिनाँ सू-ए-ज़ाग़ ले के चले तेरे सहाब-ए-सुख़न से न नम कि नम से भी कम बलीग़ बहर-ए-बलाग़त बलाग़ ले के चले हुज़ूर-ए-तयबा से भी कोई काम बढ़ कर है कि झूटे हीला-ओ-मक्र-ओ-फ़राग़ ले के चले तुम्हारे वस्फ़-ए-जमाल-ओ-कमाल में जिब्रील मुहाल है कि मजाल-ओ-मसाग़ ले के चले गिला नहीं है मुरीद-ए-रशीद-ए-शैताँ से कि उस के वुस'अत-ए-'इल्मी का लाग़ ले के चले हर एक अपने बड़े की बड़ाई करता है हर एक मुग़बचा मुग़ का अयाग़ ले के चले मगर ख़ुदा पे जो धब्बा दरोग़ का थोपा ये किस ल'ईं की ग़ुलामी का दाग़ ले के चले वुक़ू'-ए-किज़्ब के मा'नी दुरुस्त और क़ुद्दूस हिये की फूटे 'अजब सब्ज़ बाग़ ले के चले जहाँ में कोई भी काफ़िर सा काफ़िर ऐसा है कि ...

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती है / Lab Pe Jab Naam-e-Muhammad Ki Sada Aati Hai

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती है उन के दरबार से रहमत की घटा आती है हिज्र-ए-सरकार के ग़म में जो क़ज़ा आती है उस कफ़न के लिए जन्नत से रिदा आती है मर गया 'इश्क़-ए-मुहम्मद जो बसा कर दिल में क़ब्र में उस की मदीने से हवा आती है क़ब्र में बोले नकीरैन कि सोने दो इसे इस की रग रग से हमें बू-ए-वफ़ा आती है उन का बीमार हूँ छेड़ो न, तबीबो ! मुझ को मेरी हर रोज़ मदीने से दवा आती है भीनी ख़ुश्बू से महक जाती हैं गलियाँ, गुलज़ार ! उन के रौज़े से लिपट कर जो सबा आती है शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी lab pe jab naam-e-muhammad ki sada aati hai un ke darbaar se rahmat ki ghaTa aati hai hijr-e-sarkaar ke Gam me.n jo qaza aati hai us kafan ke liye jannat se rida aati hai mar gaya 'ishq-e-muhammad jo basa kar dil me.n qabr me.n us ki madine se hawa aati hai qabr me.n bole nakeerain ki sone do ise is ki rag rag se hame.n boo-e-wafa aati hai un ka beemaar hu.n chhe.Do na, tabeebo ! mujh ko meri har roz madine se ...

लम याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन मिस्ल-ए-तो न शुद पैदा जाना / Lam Yaati Nazeeruka Fee Nazarin Misl-e-To Na Shud Paida Jana

Lamyati Nazeero Kafi Nazarin Lyrics in Hindi & English लम-याति नज़ीरुका फ़ी नज़रिन, मिस्ल-ए-तो न शुद पैदा जाना जग राज को ताज तोरे सर सो, है तुझ को शह-ए-दो-सरा जाना अल-बहरु 'अला वल-मौजु तग़ा, मन बेकस-ओ-तूफ़ाँ होश-रुबा मंजधार में हूँ बिगड़ी है हवा, मोरी नय्या पार लगा जाना या शम्सु ! नज़रति इला लैली, चू ब-तयबा रसी 'अर्ज़े ब-कुनी तोरी जोत की झल झल जग में रची, मेरी शब ने न दिन होना जाना लका बदरुन फ़िल-वजहिल-अजमल, ख़त-हाला-ए-मह ज़ुल्फ़ अब्र-ए-अजल तोरे चंदन चंद्र परो कुंडल, रहमत की भरन बरसा जाना अना फ़ी 'अतशि-व्व-सख़ाका अतम, ऐ गेसू-ए-पाक ऐ अब्र-ए-करम ! बरसन हारे रिम-झिम रिम-झिम, दो बूँद इधर भी गिरा जाना या क़ाफ़िलती ज़ीदी अजलक, रहमे बर हसरत-ए-तिश्ना-लबक मोरा जियरा लरजे दरक दरक, तयबा से अभी न सुना जाना वाहन लिसुवै'आतिन ज़हबत, आँ अहद-ए-हुज़ूर-ए-बार-गहत जब याद आवत मोहे कर न परत, दर्दा वो मदीने का जाना अल-क़ल्बु शजि-व्वल्हम्मु-शुजूँ, दिल ज़ार चुनाँ जाँ-ज़ेर चुनूँ पत अपनी बिपत मैं का से कहूँ, मेरा कौन है तेरे सिवा जाना अर्रुहु़ फ़िदाका फ़ज़िद हरक़ा, यक शो'ला दिगर बर्ज़न 'इश्क़ा ...

लब पे सल्ले-अला के तराने अश्क आँखों में आए हुए हैं / Lab Pe Salle Ala Ke Tarane Ashk Aankhon Mein Aaye Hue Hain

लब पे सल्ले-'अला के तराने, अश्क आँखों में आए हुए हैं ये हवा ये फ़ज़ा कह रही है, आक़ा तशरीफ़ लाए हुए हैं हर-सू चर्चा है ख़ैर-उल-वरा का, जश्न-ए-मीलाद है मुस्तफ़ा का नूर है ये हबीब-ए-ख़ुदा का, रास्ते जगमगाए हुए हैं जिन की ख़ातिर ये 'आलम बनाया, 'अर्श पर जिन को रब ने बुलाया ऐ हलीमा ! ये तेरा मुक़द्दर, वो तेरे घर में आए हुए हैं मैं मदीने की गलियों पे क़ुर्बां, जिन से गुज़रे हैं शाह-ए-मदीना इस तरह से महकते हैं रस्ते, 'इत्र जैसे लगाए हुए हैं नाम नबियों के बेशक बड़े हैं, 'अज़मतों के नगीने जड़े हैं मुक़तदी बन के पीछे खड़े हैं, वो जो पहले से आए हुए हैं झुक रहा है फ़लक भी ज़मीं भी, ऐसी चौखट न देखी कहीं भी जिस जगह जिब्राईल-ए-अमीं भी अपनी गर्दन झुकाए हुए हैं दर खुले उन की जूद-ओ-सख़ा के, फ़ैज़ जारी हैं लुत्फ़-ओ-'अता के आएँ दरबार में मुस्तफ़ा के, जो भी ग़म के सताए हुए हैं ज़िंदगी दूर रह के अधूरी, हसरत-ए-दीद कब होगी पूरी अपनी पलकों पे हम भी, ज़हूरी ! चंद आँसू सजाए हुए हैं आज पूरी हुई दिल की हसरत, क्यूँ न जी भर के कर लूँ ज़ियारत क़ब्र में अपना जल्वा दिखाने मेरे सरकार आए हुए हैं शायर: म...

लो चाँद नज़र आया मीलाद मुबारक हो / Lo Chand Nazar Aaya Milad Mubarak Ho

Lo Chand Nazar Aaya Milad Mubarak Ho Lyrics in Hindi, English & Urdu मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! आमद-ए-मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! चेहरा-ए-वद्दुहा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो है अब्र-ए-करम छाया, मीलाद मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! बी आमिना के अँगना में आ गए हुज़ूर 'आलम पे नूर बन कर है छा गए हुज़ूर वो रब की 'अता आए, हो सब को मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो आमद-ए-मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! चेहरा-ए-वद्दुहा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा ! ज़रा प्यार से बोलो ! मरहबा ! ज़रा ज़ोर से बोलो ! मरहबा ! सब झूम के बोलो ! हर साल जश्न-ए-आक़ा यूँ ही मनाएँगे झंडे लगाएँगे, घर को सजाएँगे महबूब-ए-ख़ुदा आए, हो सब हो मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-वि...

ले के आसमानी वो किताब आ गए / Le Ke Aasmani Wo Kitab Aa Gaye

ले के आसमानी वो किताब आ गए कुफ़्र के सवालों का जवाब आ गए नूर नूर हो गया है, आ गए हैं नूर चूर चूर हो गया है कुफ़्र का ग़ुरूर आमिना की गोद में जब आ गए हुज़ूर उन के साथ कितने इंक़िलाब आ गए ले के आसमानी वो किताब आ गए हर चमन की जान हैं, बहार हैं नबी ताजदारों के भी ताजदार हैं नबी सारे बे-क़रारों के क़रार हैं नबी बन के वो ज़मीं के माहताब आ गए ले के आसमानी वो किताब आ गए दोनों 'आलम का नगीना याद आ गया या'नी वो जान-ए-मदीना याद आ गया मुझ को आक़ा का पसीना याद आ गया जब भी मेरे सामने गुलाब आ गए ले के आसमानी वो किताब आ गए उन की रहमतों का न हिसाब है कोई वर्ना इतने इतने गुनहगार उम्मती लाज हम ग़ुलामों की बचाए हैं नबी उम्मतों पे कितनों की 'अज़ाब आ गए ले के आसमानी वो किताब आ गए किस में दम है, ताहिर ! उन को देख पाने का उस सरापा नूर से नज़रें मिलाने का या'नी कि क़रीब से क़रीब आने का मेरे मुस्तफ़ा जो बे-हिजाब आ गए ले के आसमानी वो किताब आ गए शायर: ताहिर रज़ा रामपुरी ना'त-ख़्वाँ: ताहिर रज़ा रामपुरी le ke aasmaani wo kitaab aa gae kufr ke sawaalo.n ka jawaab ...

लहद में वो सूरत दिखाई गई है / Lahad Mein Wo Soorat Dikhai Gai Hai

लहद में वो सूरत दिखाई गई है मेरी सोई क़िस्मत जगाई गई है नहीं था किसी को जो मंज़र पे लाना तो क्यूँ बज़्म-ए-'आलम सजाई गई है सबा से न की जाए क्यूँकर मोहब्बत बहुत उन के कूचे में आई गई है वहाँ थी फ़िदा मिस्र में इक ज़ुलैख़ा यहाँ सदक़े सारी ख़ुदाई गई है ये क्या कम सनद है मेरी मग़्फ़िरत की तेरे दर से मय्यत उठाई गई है गुनहगार उम्मत पे रहमत की दौलत सर-ए-हश्र खुल कर लुटाई गई है शराब-ए-तुहूर उन के दस्त-ए-करम से सर-ए-हौज़-ए-कौसर पिलाई गई है बहुत शाद हैं क़ब्र में अहल-ए-निस्बत नबी की ज़ियारत कराई गई है किसे ताब-ए-नज़्ज़ारा जाली के आगे नज़र एहतिरामन झुकाई गई है लहद से, नसीर ! अब चलो तुम भी उठ कर उन्हें देखने को ख़ुदाई गई है शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीर ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद अली फ़ैज़ी lahad me.n wo soorat dikhaai gai hai meri soi qismat jagaai gai hai nahi.n tha kisi ko jo manzar pe laana to kyu.n bazm-e-'aalam sajaai gai hai saba se na ki jaae kyunkar mohabbat bahut un ke kooche me.n aai gai hai wahaa.n thi fida misr me.n ik zulaiKHa yahaa.n sadqe saari KHudaai g...

रुक गई है ज़मीं रुक गया आसमाँ | आज प्यारे मुहम्मद की मेराज है / Ruk Gai Hai Zameen Ruk Gaya Aasman | Aaj Pyare Muhammad Ki Meraj Hai

लाखों दुरूद और लाखों सलाम लाखों दुरूद और लाखों सलाम शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है हुक्म-ए-रब्बुल-'उला से सजे दो जहाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! आए जिब्रील जब सू-ए-ख़ैर-उल-वरा चूमते हैं अदब से पा-ए-मुस्तफ़ा बा'द-ए-तस्लीम कहती है उन की ज़ुबाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! सब से पहले गए का'बा-ए-नूर पर बैत-ए-अक़्दस पे फिर बैत-ए-मा'मूर पर सिदरतुल-मुंतहा से गए ला-मकाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँ आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह ! उठ गए दरमियाँ जो हिजाबात थे रब त'आला से महव-ए-मुला...