निगाह-ए-रहमत उठाइए ना हुज़ूर मेरा नहीं है कोई / Nigah-e-Rahmat Uthaiye Na Huzoor Mera Nahin Hai Koi
निगाह-ए-रहमत उठाइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई मुझे भी तयबा बुलाइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई सितारा-हा-ए-वफ़ा से मैं ने दिलों के रस्ते सजा दिए हैं ग़रीब-ख़ाने पे आइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई बड़ी अदब से ज़बान खोले, हुज़ूर से ये बिलाल बोले ग़ुलाम अपना बनाइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई ग़मों से जीना हुआ है मुश्किल, भँवर में मैं हूँ है दूर साहिल किनारे कश्ती लगाइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई दिलों की बस्ती उजड़ न जाए, दरख़्त जड़ से उखड़ न जाए बचाइए ना, सँभालिए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई उठाइए ना निगाह-ए-रहमत, जुदाई में मर न जाए 'अज़मत हुज़ूर ! रौज़ा दिखाइए ना, हुज़ूर ! मेरा नहीं है कोई शायर: अज़मत रज़ा भागलपुरी ना'त-ख़्वाँ: अज़मत रज़ा भागलपुरी nigaah-e-rahmat uThaaiye na huzoor ! mera nahi.n hai koi mujhe bhi tayba bulaaiye na huzoor ! mera nahi.n hai koi sitaara-ha-e-wafa se mai.n ne - dilo.n ke raste saja diye hai.n Gareeb-KHaane pe aaiye na huzoor ! mera nahi.n hai koi ba.Di adab se zabaan khole huzoor se ye bilaal bole Gulaam apna banaaiye n...