मँगते ख़ाली हाथ न लौटे कितनी मिली ख़ैरात न पूछो / Mangte Khali Haath Na Laute Kitni Mili Khairat Na Poochho
मँगते ख़ाली हाथ न लौटे, कितनी मिली ख़ैरात न पूछो उन का करम फिर उन का करम है, उन के करम की बात न पूछो कुंतु-कंज़न राज़-ए-मशिय्यत जल्वा-ए-असरा नूर-ए-हिदायत जगमग जगमग दोनों 'आलम, कैसी है वो ज़ात न पूछो 'इश्क़-ए-नबी कौनैन की दौलत 'इश्क़-ए-नबी बख़्शिश की ज़मानत इस से बढ़ कर दस्त-ए-तलब में है भी कोई सौग़ात न पूछो रश्क-ए-जिनाँ तयबा की गलियाँ, हर ज़र्रा फ़िरदौस-ब-दामाँ चारों तरफ़ अनवार का 'आलम, रहमत की बरसात न पूछो ज़ाहिर में तस्कीन-ए-दिल-ओ-जाँ, बातिन में मे'राज-ए-दिल-ओ-जाँ नाम-ए-नबी फिर नाम-ए-नबी है, नाम-ए-नबी की बात न पूछो हाल अगर कुछ अपना सुनाया, उन के करम का शिकवा होगा मैं अपने हालात में ख़ुश हूँ, मुझ से मेरे हालात न पूछो ताज-ए-शफ़ा'अत सर पर पहने हश्र का दूल्हा आ पहुँचा है आँखें खोलो ग़ौर से देखो, किस की है बारात न पूछो मैं क्या और क्या मेरी हक़ीक़त, सब कुछ है सरकार की निस्बत मैं तो बुरा हूँ लेकिन मेरी लाज है किस के हाथ न पूछो ख़ालिद ! मैं सिर्फ़ इतना कहूँगा, जाग उठा अश्कों का मुक़द्दर याद-ए-नबी में रोते रोते कैसे कटी है रात न पूछो शायर: ख़ालिद महमूद नक़्शबंदी ना'त...