क़िस्मत को जगमगाने माह-ए-सियाम आया | रमज़ान आ गया है / Qismat Ko Jagmagane Mah-e-Siyam Aaya | Ramzan Aa Gaya Hai
या शहर रमदान मरहबा ! या शहर रमदान मरहबा ! रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! क़िस्मत को जगमगाने माह-ए-सियाम आया बंदों को बख़्शवाने माह-ए-सियाम आया रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है या शहर रमदान मरहबा ! या शहर रमदान मरहबा ! ऐ मोमिनो ! मुबारक दुनिया की आख़िरत की फिर ने'मतें दिलाने माह-ए-सियाम आया रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! क़ुरआन की तिलावत का ज़ौक़ 'इबादतों का इक बार फिर बढ़ाने माह-ए-सियाम आया रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है या शहर रमदान मरहबा ! या शहर रमदान मरहबा ! सद-शुक्र पा रहे हैं इफ़्तार और सहर के लम्हात ये सुहाने, माह-ए-सियाम आया रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! रमदान करीम ! आओ, 'उबैद ! भर लें हम अपनी झोलियों को बख़्शिश के दुर्र लुटाने माह-ए-सियाम आया रमज़ान आ गया है, रमज़ान आ गया है या शहर रमदान मरहबा ! या शहर रमदान मरहबा ! शायर: ओवैस रज़ा क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी ...