तुझे रब ने क्या बनाया मक्का मदीने वाले / Tujhe Rab Ne Kya Banaya Makka Madine Wale
तुझे रब ने क्या बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये कोई समझ न पाया, मक्का-मदीने वाले ! तेरा फ़ैज़-ए-'आम जारी, तेरी ज़िंदगी निराली तुझे हर वली में पाया, मक्का-मदीने वाले ! कहा सब ने नफ़्सी-नफ़्सी, तेरे लब पे रब्बि-हब-ली तेरे पाए का न पाया, मक्का-मदीने वाले ! न कोई बता सका है, न कोई बता सकेगा तुझे रब ने कब बनाया, मक्का-मदीने वाले ! है दु'आ-ए-अहल-ए-सुन्नत कि जहान-ए-रंग-ओ-बू में रहे सय्यिदों का साया, मक्का-मदीने वाले ! सवा लाख अंबिया हों या हज़ारों हूर-ओ-ग़िल्माँ तेरा गीत सब ने गाया, मक्का-मदीने वाले ! ये सभी का है 'अक़ीदा कि ब-क़ौल-ए-आ'ला-हज़रत तुझे यक ने यक बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये है फ़ातिमा का सदक़ा, मैं तेरे नसब का हिस्सा मुझे हाशमी बनाया, मक्का-मदीने वाले ! शायर: सय्यिद हाशमी मियाँ ना'त-ख़्वाँ: मुईन क़ादरी बैंगलोर tujhe rab ne kya banaaya, makka-madine waale ! ye koi samajh na paaya, makka-madine waale ! tera faiz-e-'aam jaari, teri zindagi niraali tujhe har wali ne paaya, makka-madine waale ! kaha sab ne nafsi-nafsi, tere lab pe rabbi-...