हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैं / Hamare Qaid-o-Rahbar Hussain Zinda Hain
हमारे क़ाइद-ओ-रहबर हुसैन ज़िंदा हैं रसूल-ए-पाक के मज़हर हुसैन ज़िंदा हैं नबी के दीन की ख़ातिर शहीद हो कर भी हर एक सुन्नी के अंदर हुसैन ज़िंदा हैं डरे वो जिन का जहाँ में नहीं कोई हामी हुसैनियों को हो क्यूँ डर, हुसैन ज़िंदा हैं तुम्हारा तख़्त-ए-हुकूमत अभी पलट देंगे यज़ीदियो ! न करो शर, हुसैन ज़िंदा हैं जिनाँ में क़ासिम-ओ-'अब्बास सैर करते हैं वहीं पे अकबर-ओ-असग़र, हुसैन ज़िंदा हैं शहीदों को कभी मुर्दा गुमान न करना ख़ुदा भी कहता है यकसर हुसैन ज़िंदा हैं उन्हें जो मुर्दा समझते हैं वो करे मातम मेरा 'अक़ीदा है दिलबर हुसैन ज़िंदा हैं लगाया ग़ौस-ओ-रज़ा, ख़्वाजा ने यही ना'रा हमारे मौला-ओ-सरवर हुसैन ज़िंदा हैं अभी तो बाक़ी है कर्बल का आख़िरी मैदाँ बता दो कुफ़्र को जा कर हुसैन ज़िंदा हैं यज़ीद-ए-वक़्त का दिल काँप जाए दहशत से ऐ सुन्नियो ! कहो मिल कर, हुसैन ज़िंदा हैं ज़मीन-ए-कर्ब-ओ-बला कह रही है क्या तुझ से सुन, ऐ यज़ीद के लश्कर ! हुसैन ज़िंदा हैं इसी से जान लो है कौन फ़ातेह-ए-कर्बल यज़ीद मर गया है पर हुसैन ज़िंदा हैं मता'-ए-'इश्क़ की ख़ैरात माँग लो, अय्यूब ! सरापा 'इश्क़ के पैकर हुसै...