सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ मदीना मदीना / Sukoon-e-Dil-o-Jaan Madina Madina
अपनी आँखों से मदीने का समाँ देखते हैं कितने ख़ुश-बख़्त हैं जो उन का जहाँ देखते हैं मुझ को मा'लूम है इक दिन वो बुलाएँगे ज़रूर आ'ला अदना मेरे आक़ा जी कहाँ देखते हैं सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ मदीना मदीना दुखी दिल का दरमाँ मदीना मदीना तू क़ुर्बां हुआ सरवर-ए-दो-जहाँ पर सो मैं तेरे क़ुर्बां मदीना मदीना मक़ाम-ए-नुमूद-ओ-नुमाइश नहीं ये है ये, क़ल्ब-ए-नादाँ ! मदीना मदीना क़दम बा-अदब और आवाज़ धीमी हों जब पेश मिज़्गाँ मदीना मदीना चमकता दमकता ख़ला से नज़ारा फ़रोज़ाँ दरख़्शाँ मदीना मदीना जो का'बे को जाए, मदीने भी आए नबी का है फ़रमाँ मदीना मदीना वतन से भी बढ़ कर वतन कोई, 'आबिद ! तो कह दूँगा हाँ हाँ मदीना मदीना शायर: आबिद रशीद ना'त-ख़्वाँ: जवेरिआ सलीम apni aankho.n se madine ka samaa.n dekhte hai.n kitne KHush-baKHt hai.n jo un ka jahaa.n dekhte hai.n mujh ko maa'loom hai ik din wo bulaaenge zaroor aa'la adna mere aaqa ji kahaa.n dekhte hai.n sukoon-e-dil-o-jaa.n madina madina dukhi dil ka darmaa.n madina madina tu qurbaa.n huaa sarwar-e-do-jahaa.n par ...