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हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे | हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे / Hum Apne Nabi Paak Se Yun Pyar Karenge | Har Haal Mein Sarkar Ka Milad Karenge

मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा ! हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे जश्न-ए-विलादत की रौनक़ पे, यारो ! मरते हैं सुन्नी, मरते रहेंगे अपने नबी की 'अज़मत का चर्चा करते हैं सुन्नी, करते रहेंगे कुछ जलने वाले देख के कहते हैं हमेशा सरकार की आमद पे लगाते हो क्यूँ पैसा ये पैसा तो क्या चीज़ है, हम घर भी लुटा दें कोई नहीं जहान में सरकार के जैसा हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए ! मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए ! मेरे नबी आ गए ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! प्यारे नबी आ गए ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! लजपाल नबी आ गए ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! ग़म-ख़्वार नबी आ गए ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! साहिब-ए-मे'राज नबी आसियों की लाज नबी नबियों के सरताज नबी कल भी थे और आज नबी दो जहाँ के राज वाले मेरे नबी आ गए हर ख़ारजी फ़सादी वतन से भगाएँगे पढ़ के दुरूद सब को मीलादी बनाएँगे लाएँगे हम हुज़ूर का इस्लाम तख़्त पर ला-दीनियत के सारे बुतों को गिराएँगे हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे हर हाल में

ये कहती थी घर घर में जा कर हलीमा / Ye Kehti Thi Ghar Ghar Mein Ja Kar Haleema

ये कहती थी घर घर में जा कर हलीमा मेरे घर में ख़ैर-उल-वरा आ गए हैं बड़े औज पर है मेरा अब मुक़द्दर मेरे घर हबीब-ए-ख़ुदा आ गए हैं उठी चार-सू रहमतों की घटाएँ मु'अत्तर मु'अत्तर हैं सारी फ़ज़ाएँ ख़ुशी में ये जिब्रील नग़्मे सुनाएँ वो शाफ़े'-ए-रोज़-ए-जज़ा आ गए हैं ये ज़ुल्मत से कह दो कि डेरे उठा ले कि हैं हर तरफ़ अब उजाले उजाले कहा जिन को हक़ ने सिराज-म्मुनीरा मेरे घर वो नूर-ए-ख़ुदा आ गए हैं मुक़र्रब हैं बेशक ख़लील-ओ-नजी भी बड़ी शान वाले कलीम-ओ-मसीह भी लिये 'अर्श ने जिन के क़दमों के बोसे वो उम्मी लक़ब मुस्तफ़ा आ गए हैं है सुन कर सख़ी आप का आस्ताना है दामन पसारे हुए सब ज़माना नवासों का सदक़ा, निगाह-ए-करम हो तेरे दर पे तेरे गदा आ गए हैं ख़ुदा के करम से नकीरैन आ कर कहेंगे ज़ियारत का मुज़्दा सुना कर उठो बहर-ए-ता'ज़ीम, नूर-उल-हसन ! अब लहद में रसूल-ए-ख़ुदा आ गए हैं शायर: नूर-उल-हसन ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी अल्हाज सिद्दीक़ इस्माईल ye kehti thi ghar ghar me.n jaa kar haleema mere ghar me.n KHair-ul-wara aa gae hai.n ba.De auj par hai mera ab muqaddar mere ghar

मीलाद के लम्हात हैं | सय्यिदी या मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा / Milad Ke Lamhat Hain | Syedi Ya Mustafa Marhaba Marhaba

हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! चार-सू उजाला उजाला मुस्तफ़ा के आने से ख़ुशियों भरे दिन-रात हैं मीलाद के लम्हात हैं दिल के अजब जज़्बात हैं मीलाद के लम्हात हैं हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! 'इश्क़-ए-नबी का परचम लिए ज़िक्र-ए-नबी के वास्ते क़ुदसी भी मेरे साथ हैं मीलाद के लम्हात हैं हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! चार-सू उजाला उजाला मुस्तफ़ा के आने से जल्वा-नुमा सरकार हैं रहमत भरे आसार हैं मेरे लिए सौग़ात हैं मीलाद के लम्हात हैं हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! गुमराहियों से दूर किया तारीकियों को नूर किया आक़ा के एहसानात हैं मीलाद के लम्हात हैं हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! हबीबी जद्दल-हसनैन ! या रसूलल्लाह ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! सय्यिदी या मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! मरहब

बारहवीं का नूर दिल पे छा गया / Barahwin Ka Noor Dil Pe Chha Gaya | Barwi Ka Noor Dil Pe Chha Gaya

बारहवीं का नूर दिल पे छा गया, आ गए नबी, आ गए नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया, आ गए नबी, आ गए नबी परचमों की है बहार, है ख़ुशी ये शानदार हर तरफ़ बरस रही है रहमतों की जो फुवार हर तरफ़ समाँ कैफ़ से भरा, आ गए नबी, आ गए नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया, आ गए नबी, आ गए नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया, आ गए नबी, आ गए नबी हर ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा कह रहा है मरहबा इंस-ओ-जिन्न, फ़रिश्ते, हूर, हो रहे हैं सब फ़िदा शान की अदा, चेहरा चाँद सा, आ गए नबी, आ गए नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया, आ गए नबी, आ गए नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया, आ गए नबी, आ गए नबी मस्ती-ओ-सुरूर में बज़्म-ए-काइनात है 'आशिक़ों में धूम है, जश्न वाली रात है सज गई ज़मीं, 'अर्श सज गया, आ गए नबी, आ गए नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया, आ गए नबी, आ गए नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-किब्रिया, आ गए नबी, आ गए नबी रब्बि हब ली उम्मती, लब पे है दु'आ सजी रब ने भी करम किया, ये दु'आ क़ुबूल की फिर न क्यूँ गदा सारे हों फ़िदा, आ गए नबी, आ गए नबी बारहवीं का नूर दिल पे छा गया, आ गए नबी, आ गए नबी नूर से सजा 'अर्श-ए-क

मीलाद का मौसम आया है / Milad Ka Mausam Aaya Hai

मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है रब ने ये जहाँ चमकाया है मीलाद का मौसम आया है रहमत का उजाला छाया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है झंडे हैं लगे, गलियाँ हैं सजी हर-सू है नबी की धूम मची सरकार की आमद के सदक़े गुलज़ार-ए-जहाँ मुस्काया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है है जगमग जगमग सारा जगत और चारों-तरफ़ बरसे रहमत झूमे तन-मन, लगी उन की लगन 'आलम ख़ुशियों से नहाया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है हम क्यूँ न करें चर्चा उन का हम गाएँ न क्यूँ नग़्मा उन का अल्लाह ने जिन के सदक़े में ये सारा जहान बनाया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है जब दाई हलीमा ने देखा दिल-जाँ से हुईं उन पर शैदा फिर ले के चलीं ये कहते हुए इक चाँद ये हम ने पाया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है सुब्हान-अल्लाह ! क्या सूरत है माशा-अल्लाह ! क्या सीरत है बे-मिस्ल जमाल-ओ-रंगत है रब ने उन्हें ऐसा बनाया है मीलाद का मौसम आया है मीलाद का मौसम आया है रहमत हैं, सिराज-ए-मुनीर भी हैं शाहिद हैं, बशीर-ओ-नज़ीर भी हैं यासीं

नूर वाला आया है / Noor Wala Aaya Hai

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! ना'त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे या रसूलल्लाह का ना'रा लगाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! जश्न-ए-मीलाद-ए-मुबारक कैसे छोड़ें हम भला जिन का खाते हैं उन्हीं के गीत गाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते ज

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली / Thandi Thandi Hawa Rehmaton Ki Chali

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली बन के मौज-ए-करम मुस्तफ़ा आ गए हल मेरी हो गईं ख़ुद-ब-ख़ुद मुश्किलें सारे 'आलम के मुश्किल-कुशा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आमिना का मुक़द्दर सँवारा गया गोद में चाँद जिस की उतारा गया हूर-ओ-ग़िल्माँ सलामी को झुकने लगे पढ़ते रिज़वान सल्ले 'अला आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! दोनों 'आलम की क़िस्मत बदलने लगी नूर में सारी कौनैन ढलने लगी ख़ुश-मुक़द्दर हलीमा ! मुबारक तुझे गोद में तेरी ख़ैर-उल-वरा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! बन गई है ज़मीं रश्क-ए-बाग़-ए-जिनाँ सज गए आसमाँ, खिल उठे गुल्सिताँ माँग लो रहमतें, खोल लो झोलियाँ दे ने ख़ैरात हाजत-रवा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आज कोई भी, साइम ! न ख़ाली रहे सब मुरादें मिलें, हर मुसीबत टले मदनी आक़ा की आमद का सदक़ा मिले भीक ले ने को हम, या ख़ुदा ! आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! शायर: अल्लामा साइम चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: हूरिया फ़हीम क़ाद

जश्न है मीलाद का / Jashn Hai Milad Ka

भीनी भीनी हैं हवाएँ, जश्न है मीलाद का महकी महकी हैं फ़िज़ाएँ, जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! वो हबीब-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा ! मेरे हाजत-रवा ! मरहबा मरहबा ! आ गए मुस्तफ़ा ! सब्ज़-परचम और बर्क़ी क़ुमक़ुमों से क्यूँ न आज घर-मुहल्ले जगमगाएँ, जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का आमिना के घर में आई आज वो फ़स्ल-ए-बहार मुँह छुपाती हैं ख़िज़ाएँ, जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का आ गए मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! वो हबीब-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा ! मेरे हाजत-रवा ! मरहबा मरहबा ! आ गए मुस्तफ़ा ! उन की बे'सत अहल-ए-ईमाँ पर है एहसान-ए-ख़ुदा क्यूँ न मोमिन झूम जाएँ, जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का जश्न है मीलाद का ये जश्न है मीलाद का रब ने जब फ़रमा दिया है, ज़ालिका फ़ल्यफ़रहू क्यूँ न फिर ख़ुशियाँ मनाएँ, जश्न है मीलाद का ज