आक़ा का नाम लेना बड़े एहतिराम से / Aaqa Ka Naam Lena Bade Ehtiram Se
नाम-ए-अहमद का वज़ीफ़ा है हर इक ग़म का 'इलाज लाख खतरें हों इसी नाम से टल जाते हैं आक़ा का नाम लेना बड़े एहतिराम से उन पर दुरूद पढ़ना बड़े एहतिराम से ख़ाक-ए-मदीना चूमना, रहना अदब के साथ तयबा में जब भी जाना बड़े एहतिराम से महफूज़ सय्यिदा हैं, ख़ता इन से कैसे हो ज़हरा का ज़िक्र करना बड़े एहतिराम से लाज़िम है ज़िक्र-ए-हैदर-ए-कर्रार का अदब बज़्म-ए-'अली सजाना बड़े एहतिराम से तुम दश्त-ए-दर्द पार करोगे सुकून से बारह इमाम कहना बड़े एहतिराम से जन्नत के शहज़ादे, उजागर ! हसन-हुसैन चूमें ये नाम वल्लाह बड़े एहतिराम से ये नाम कोई काम बिगड़ने नहीं देता बिगड़े भी बना देता है ये नाम-ए-मुहम्मद शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी naam-e-ahmad ka wazeefa hai har ik Gam ka 'ilaaj laakh khatre.n ho.n isi naam se Tal jaate hai.n aaqa ka naam lena ba.De ehtiraam se un par durood pa.Dhna ba.De ehtiraam se KHaak-e-madina choomna, rehna adab ke saath tayba me.n jab bhi jaana ba.De ehtiraam se mehfooz sayyida hai.n, KHata in se kaise ho ...