तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो / Tum Zaat-e-Khuda Se Na Juda Ho Na Khuda Ho
तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो अल्लाह को मा'लूम है क्या जानिए क्या हो ये क्यूँ कहूँ मुझ को ये 'अता हो ये 'अता हो वो दो कि हमेशा मेरे घर भर का भला हो जिस बात में मशहूर-ए-जहाँ है लब-ए-'ईसा ऐ जान-ए-जहाँ ! वो तेरी ठोकर से अदा हो टूटे हुए दम, जोश पे तूफ़ान-ए-म'आसी दामन न मिले उन का तो क्या जानिए क्या हो यूँ झुक के मिले हम से कमीनों से वो जिस को अल्लाह ने अपने ही लिए ख़ास किया हो मिट्टी न हो बर्बाद पस-ए-मर्ग, इलाही ! जब ख़ाक उड़े मेरी मदीने की हवा हो मँगता तो है मँगता कोई शाहों में दिखा दे जिस को मेरे सरकार से टुकड़ा न मिला हो क़ुदरत ने अज़ल में ये लिखा उन की जबीं पर जो उन की रज़ा हो वही ख़ालिक़ की रज़ा हो हर वक़्त करम बंदा-नवाज़ी पे तुला है कुछ काम नहीं इस से बुरा हो कि भला हो सौ जा से गुनहगार का हो रख़्त-ए-'अमल चाक पर्दा न खुले गर तेरे दामन से बंधा हो अबरार निको-कार ख़ुदा के हैं ख़ुदा के उन का है वो उन का है जो बद हो जो बुरा हो ऐ नफ़्स ! उन्हें रंज दिया अपनी बदी से क्या क़हर किया तू ने, अरे तेरा बुरा हो अल्लाह यूँही 'उम्र गुज़र जाए गदा की सर ख़म हो ...