शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है / Shaah-e-Deen Mehrban Mustafa Hai
मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है मम्बा'-ए-फ़ज़्ल-ए-रब्ब-ए-'उला है मख़ज़न-ए-हर-ज़माँ मुस्तफ़ा है ज़ुल्मतें कुफ़्र की कट गई हैं रौशनी हर तरफ़ छा गई है नूर-ए-हक़ का हसीं आईना है रहमत-ए-बे-कराँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है जिस का नक़्श-ए-क़दम सादगी है वो नबी ज़ीस्त की ताज़गी है दो जहाँ का वही आसरा है ज़ीनत-ए-गुल्सिताँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है हक़ का पैग़ाम जिस की ज़ुबाँ है नूर का इक हसीं कहकशाँ है रहबर-ओ-पेशवा, रहनुमा है रश्क-ए-अर्ज़-ओ-समाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है जिस की सूरत कमाल-ए-नुबुव्वत जिस की सीरत जमाल-ए-हक़ीक़त हक़ की पहचान का रास्ता है सरवर-ए-दो-जहाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है लब पे ना'त-ए-नबी की सदा है दिल में याद-ए-नबी की ज़िया है सोज़-ए- ग़ालिब की अब ये दवा है राहत-ए-क़ल्ब-ओ-जाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-...