हम आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है | ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है / Hum Aashiq-e-Sarkar Pe Jo Rang Chadha Hai | Ye Rang-e-Raza Rang-e-Raza Rang-e-Raza Hai
हम 'आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जिस रंग से हर रंग वहाबी का उड़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जो दिल में दिया 'इश्क़-ए-रिसालत का जला है और आँखों में जो ख़्वाब मदीने का सजा है जो विर्द-ए-ज़बाँ सल्ले-'अला सल्ले-'अला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है सुन्नी का वहाबी से कोई मेल नहीं है मस्लक है रज़ा का ये कोई खेल नहीं है सुन्नी तो वहाबी से मिलेगा न मिला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है गुस्ताख़-ए-नबी से न डरे हैं न डरेंगे तलवार के साए में भी हक़ बात कहेंगे ये मर्द-ए-मुजाहिद ने स'ऊदी से कहा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है इक हुज्जतुल-इस्लाम हैं, इक मुफ़्ती-ए-आ'ज़म इन दोनों से टकराए किसी में भी नहीं दम सुल्तान-ए-ज़माना भी यहाँ आ के झुका है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है बद-मज़हबों को फूलने-फलने नहीं देंगे सरकार के दुश्मन को सँभलने नहीं देंगे ये दर्स हमें ताज-ए-शरी'अत ने दिया है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है वो माँ हो, बहन-भाई हो या कोई हो अपना सरकार के दुश्मन से त'अल्लुक़...