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हम आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है | ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है / Hum Aashiq-e-Sarkar Pe Jo Rang Chadha Hai | Ye Rang-e-Raza Rang-e-Raza Rang-e-Raza Hai

हम 'आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जिस रंग से हर रंग वहाबी का उड़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जो दिल में दिया 'इश्क़-ए-रिसालत का जला है और आँखों में जो ख़्वाब मदीने का सजा है जो विर्द-ए-ज़बाँ सल्ले-'अला सल्ले-'अला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है सुन्नी का वहाबी से कोई मेल नहीं है मस्लक है रज़ा का ये कोई खेल नहीं है सुन्नी तो वहाबी से मिलेगा न मिला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है गुस्ताख़-ए-नबी से न डरे हैं न डरेंगे तलवार के साए में भी हक़ बात कहेंगे ये मर्द-ए-मुजाहिद ने स'ऊदी से कहा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है इक हुज्जतुल-इस्लाम हैं, इक मुफ़्ती-ए-आ'ज़म इन दोनों से टकराए किसी में भी नहीं दम सुल्तान-ए-ज़माना भी यहाँ आ के झुका है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है बद-मज़हबों को फूलने-फलने नहीं देंगे सरकार के दुश्मन को सँभलने नहीं देंगे ये दर्स हमें ताज-ए-शरी'अत ने दिया है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है वो माँ हो, बहन-भाई हो या कोई हो अपना सरकार के दुश्मन से त'अल्लुक़...

या शाह-ए-उमम इक नज़र-ए-करम / Ya Shah-e-Umam Ik Nazar-e-Karam

या शाह-ए-उमम ! इक नज़र-ए-करम मोरी लाज तुम्हारे हाथ, सरकार ! मोरी नय्या लगा दो अपने करम से पार सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! टूटी हुई आस हूँ मैं, दुख से भरा दिल है मेरा नज़र-ए-करम बहर-ए-ख़ुदा, कोई नहीं तेरे सिवा सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! ग़मख़्वार-ए-जहाँ तस्कीन-ए-जाँ ! इक शब तो मुझे भी हो दीदार मोरी नय्या लगा दो अपने करम से पार या शाह-ए-उमम ! इक नज़र-ए-करम मोरी लाज तुम्हारे हाथ, सरकार ! मोरी नय्या लगा दो अपने करम से पार बाग़-ए-इरम शहर तेरा, जिस की हवा मुश्क-ए-ख़ुतन नाम तेरा सल्ले-'अला, रूह-ए-बयाँ, जान-ए-सुख़न सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! हों दूर मेरे सब रंज-ओ-अलम फिर आऊँ मदीने में इक बार मोरी नय्या लगा दो अपने करम से पार या शाह-ए-उमम ! इक नज़र-ए-करम मोरी लाज तुम्हारे हाथ, सरकार ! मोरी नय्या लगा दो अपने करम से पार 'आसी हूँ मैं, बिगड़े नसीब, रख लो भरम, रब के हबीब ! रूह-ए-अदब, जान-ए-अदीब, तुम ही तो हो सब के तबीब सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मुर्सलीं ! सल्लल्लाह सय्यिद-उल-मु...

गुनाहों की नहीं जाती है आदत या रसूलल्लाह / Gunahon Ki Nahin Jati Hai Aadat Ya Rasool Allah

गुनाहों की नहीं जाती है 'आदत, या रसूलल्लाह ! तुम्हीं अब कुछ करो, माह-ए-रिसालत या रसूलल्लाह ! गुनाहों से मुझे हो जाए नफ़रत, या रसूलल्लाह ! निकल जाए बुरी हर एक ख़सलत, या रसूलल्लाह ! गुनह लम्हा-ब-लम्हा हाए ! अब बढ़ते ही जाते हैं नहीं पर इस पे हाए कुछ नदामत, या रसूलल्लाह ! गुनह कर कर के हाए ! हो गया दिल सख़्त पत्थर से करूँ किस से कहाँ जा कर शिकायत, या रसूलल्लाह ! मैं बचना चाहता हूँ हाए ! फिर भी बच नहीं पाता गुनाहों की पड़ी है ऐसी 'आदत, या रसूलल्लाह ! कमर आ'माल-ए-बद ने हाए ! मेरी तोड़ कर रख दी तबाही से बचा लो, जान-ए-रहमत या रसूलल्लाह ! मेरे मुँह की सियाही से अँधेरी रात शरमाए मेरा चेहरा हो ताबाँ, नूर-ए-'इज़्ज़त या रसूलल्लाह ! ब-वक़्त-ए-नज़'अ, आक़ा ! हो न जाऊँ मैं कहीं बर्बाद मेरा ईमान रख लेना सलामत, या रसूलल्लाह ! तेरे रब की क़सम मैं लाइक़-ए-नार-ए-जहन्नम हूँ बचा सकती है बस तेरी शफ़ा'अत, या रसूलल्लाह ! यहाँ जैसे हमारी 'ऐब-पोशी आप करते हैं वहाँ भी आप रख लीजेगा 'इज़्ज़त, या रसूलल्लाह ! फ़साद-ए-नफ़्स-ए-ज़ालिम से बचा लो अज़ प-ए-शैख़ैन करो शैतान से मेरी हिफ़ाज़त, या ...

नूरी महफ़िल पे चादर तनी नूर की नूर फैला हुआ आज की रात है / Noori Mehfil Pe Chadar Tani Noor Ki Noor Phaila Hua Aaj Ki Raat Hai

नूरी महफ़िल पे चादर तनी नूर की नूर फैला हुआ आज की रात है चाँदनी में हैं डूबे हुए दो जहाँ कौन जल्वा-नुमा आज की रात है 'अर्श पर धूम है, फ़र्श पर धूम है कम-नसीबी है उस की जो महरूम है फिर मिलेगी ये शब किस को मा'लूम है हम पे लुत्फ़-ए-ख़ुदा आज की रात है मोमिनो ! आज गंज-ए-सख़ा लूट लो लूट लो, ऐ मरीज़ो ! शिफ़ा लूट लो 'आसियो ! रहमत-ए-मुस्तफ़ा लूट लो बाब-ए-रहमत खुला आज की रात है अब्र-ए-रहमत हैं महफ़िल पे छाए हुए आसमाँ से मलाइक हैं आए हुए ख़ुद मुहम्मद हैं तशरीफ़ लाए हुए किस-क़दर जाँ-फ़िज़ा आज की रात है माँग लो माँग लो चश्म-ए-तर माँग लो दर्द-ए-दिल और हुस्न-ए-नज़र माँग लो सब्ज़ गुंबद के साए में घर माँग लो माँगने का मज़ा आज की रात है इस तरफ़ नूर है, उस तरफ़ नूर है सारा 'आलम मसर्रत से मा'मूर है जिस को देखो वही आज मसरूर है महक उट्ठी फ़ज़ा आज की रात है वक़्त लाए ख़ुदा सब मदीने चलें लूटने रहमतों के ख़ज़ीने चलें सब के मंज़िल की जानिब सफ़ीने चलें मेरी, साइम ! दु'आ आज की रात है शायर: अल्लामा साइम चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: अल्हाज मुहम्मद सिद्दीक़ इस्माइल ओवैस रज़ा क़ादरी ...

सोया हुआ नसीब जगाने की रात है | अपने ख़ुदा को आज मनाने की रात है / Soya Hua Naseeb Jagane Ki Raat Hai | Apne Khuda Ko Aaj Manane Ki Raat Hai

सोया हुआ नसीब जगाने की रात है अपने ख़ुदा को आज मनाने की रात है हर-सू बरस रही है 'अताओं की बारिशें दस्त-ए-दु'आ को आज उठाने की रात है दोनों जहाँ की रिफ़'अतें इस के तुफ़ैल हैं अपना सर-ए-नियाज़ झुकाने की रात है तीरा-दिलों में इस से ही आएगी रौशनी ज़िक्र-ए-ख़ुदा की शम'अ जलाने की रात है दिल की ज़मीं को अश्कों से सैराब कीजिए दस्त-ए-अमल में फूल खिलाने की रात है उतरेगा इस के दम से सभी मा'सियत का ज़ंग आँसू नदामतों के बहाने की रात है सरवर ! बसा के अपने दिलों में ख़ुदा का ख़ौफ़ हर एक रंज-ओ-ग़म को मिटाने की रात है शायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदी ना'त-ख़्वाँ: सरवर हुसैन नक़्शबंदी soya huaa naseeb jagaane ki raat hai apne KHuda ko aaj manaane ki raat hai har-soo baras rahi hai 'ataao.n ki baarishe.n dast-e-du'aa ko aaj uThaane ki raat hai dono.n jahaa.n ki rif'ate.n is ke tufail hai.n apna sar-e-niyaaz jhukaane ki raat hai teera-dilo.n me.n is se hi aayegi raushani zikr-e-KHuda ki sham'a jalaane ki raat hai dil ki zamee.n ko ashko.n se ...

पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह | कलमा शरीफ़ / Parho La Ilaha Illallah | Kalma Sharif

ला इलाहा इल्लल्लाह ! ला इलाहा इल्लल्लाह ! ला इलाहा इल्लल्लाह ! ला इलाहा इल्लल्लाह ! ख़ुदा की रिज़ा चाहते हैं दो 'आलम ख़ुदा चाहता है रिज़ा-ए-मुहम्मद मुहम्मद बरा-ए-जनाब-ए-इलाही जनाब-ए-इलाही बरा-ए-मुहम्मद करते हैं आओ ज़िक्र-ए-ख़ुदा ईमान भी हो जाए ताज़ा पा जाएँ हम भी रब की रिज़ा पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह हैं मुहम्मद पाक रसूलुल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह दुनिया को पढ़ा के दर्स-ए-वफ़ा जाँ दीन-ए-नबी पे कर के फ़िदा ये इब्न-ए-'अली ने सब से कहा पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह हैं मुहम्मद पाक रसूलुल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह सहराओं में, सुनसानों में ग़ज़वात के सब मैदानों में असहाब-ए-नबी की थी ये सदा पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह हैं मुहम्मद पाक रसूलुल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह सब रंज-ओ-अलम टल जाएँगे दिल चैन तुम्हारे पाएँगे गर चाहते हो हर दुख से शिफ़ा पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह हैं मुहम्मद पाक रसूलुल्लाह पढ़ो ला इलाहा इल्लल्लाह माँ-बाप के ख़िदमत-गार बनो तुम जन्नत के हक़दार बनो और लेते रहो तुम इन से द...

मौला शब-ए-बरात है तौबा क़ुबूल हो / Maula Shab-e-Barat Hai Tauba Qubool Ho

तू करीम ही जो ठहरा, तो करम के क्या ठिकाने तू नवाज़ने पे आए, तो नवाज़ दे ज़माने मौला ! शब-ए-बरात है, तौबा क़ुबूल हो हम 'आसियों पे 'अफ़्व-ओ-करम का नुज़ूल हो ये मग़्फ़िरत की रात है, ग़ाफ़िल न होइए 'अय्याशियों में आज न ये शब गुज़ारिए हर जुर्म बख़्श देगा ख़ुदा आज बिल-यक़ीं कुछ क़तरे आँसू ख़ौफ़-ए-ख़ुदा से बहाइए मौला ! शब-ए-बरात है, तौबा क़ुबूल हो हम 'आसियों पे 'अफ़्व-ओ-करम का नुज़ूल हो दर पर ख़ुदा के आएँ कि तौबा की रात है सज्दे में सर झुकाएँ कि तौबा की रात है रो रो के, गिड़गिड़ा के मु'आफ़ी तलब करें बख़्शेगा रब ख़ताएँ कि तौबा की रात है मौला ! शब-ए-बरात है, तौबा क़ुबूल हो हम 'आसियों पे 'अफ़्व-ओ-करम का नुज़ूल हो मौला ! मैं शर्मसार हूँ अपने गुनाह पर मुझ को शब-ए-बरात के सदक़े मु'आफ़ कर मौला ! ये मानता हूँ गुनहगार हूँ मगर क़ुर्बान जान-ओ-दिल से हूँ तेरे हबीब पर मौला ! शब-ए-बरात है, तौबा क़ुबूल हो हम 'आसियों पे 'अफ़्व-ओ-करम का नुज़ूल हो अब्र-ए-करम में आज नहाने की रात है सोया हुआ नसीब जगाने की रात है पढ़ के नमाज़, कर के गुनाहों से तौबा आज ख़ल्लाक़-ए-दो-जहाँ को मनाने की र...

बख़्श दे मुझ को ख़ुदाया / Bakhsh De Mujh Ko Khudaya

मौला मौला ! मेरे मौला मौला ! मेरे मौला मौला ! मेरे मौला ! मौला मौला ! मेरे मौला मौला ! मेरे मौला मौला ! मेरे मौला ! बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! तेरे दर पर ये तेरा बंदा चला आया मैं 'आसी हूँ, मैं मुजरिम हूँ, तू है रहमान मौला ! मेरी इक एक धड़कन का तू है निगरान मौला ! अगर चाहे तू, मौला ! फिर सभी आसानियाँ हैं वगरना राएगाँ मेरी सभी क़ुर्बानियाँ हैं तू मेरे हाल पर अपने करम का कर दे साया बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! तेरे दरबार में दिल से मैं तौबा कर रहा हूँ तू क़ादिर है, मैं तेरे इस ग़ज़ब से डर रहा हूँ भटक चुका था आख़िर पर, ख़ुदा ! अब लौट आया हूँ कि अपनी आँख में अश्क-ए-नदामत भर के लाया हूँ कि तेरी बारगाह में हाल-ए-दिल मैं ने सुनाया बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! बख़्श दे मुझ को, ख़ुदाया ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मौला मौला मेरे ! मौला मौला मेरे ! मौला मौला मेरे मौला ! मौला मौला मेरे ! मौला मौला मेरे ! मौला मौला मेरे मौ...

ऐ शहंशाह-ए-मदीना अस्सलातु वस्सलाम / Aye Shahenshah-e-Madina Assalatu Wassalam

ऐ शहंशाह-ए-मदीना ! अस्सलातु वस्सलाम ज़ीनत-ए-'अर्श-ए-मु'अल्ला ! अस्सलातु वस्सलाम रब्बी हब ली उम्मती कहते हुए पैदा हुए हक़ ने फ़रमाया कि बख़्शा, अस्सलातु वस्सलाम दस्त-बस्ता सब फ़रिश्ते पढ़ते हैं उन पर दुरूद क्यूँ न हो फिर विर्द अपना अस्सलातु वस्सलाम मोमिनो ! पढ़ते नहीं क्यूँ अपने आक़ा पर दुरूद है फ़रिश्तों का वज़ीफ़ा अस्सलातु वस्सलाम मोमिनो ! पढ़ते रहो तुम अपने आक़ा पर दुरूद है फ़रिश्तों का वज़ीफ़ा अस्सलातु वस्सलाम बुत-शिकन आया ये कह कर, सर के बल बुत गिर गए झूम कर कहता था का'बा अस्सलातु वस्सलाम सर झुका कर बा-अदब 'इश्क़-ए-रसूलुल्लाह में कह रहा था हर सितारा अस्सलातु वस्सलाम ग़ुंचे चटके फूल महके चहचहाईं बुलबुलें गुल खिला बाग़-ए-अहद का अस्सलातु वस्सलाम मैं वो सुन्नी हूँ, जमील-ए-क़ादरी ! मरने के बा'द मेरा लाशा भी कहेगा अस्सलातु वस्सलाम शायर: मौलाना जमीलुर्रहमान रज़वी क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दी ओवैस रज़ा क़ादरी ai shahanshah-e-madina ! assalaatu wassalaam zeenat-e-'arsh-e-mu'alla ! assalaatu wassalaam rabbi hab li ummati k...

तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग / Tere Rang Rang Tere Rang Rang

या अल्लाहु ! या अल्लाहु ! या अल्लाहु अल्लाह ! तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग हर-सू, हर-जा हर-सू, हर-जा तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तू ने 'अता किया, मैं ने भुला दिया तू ने फिर से दिया, न शुक्र किया तू ने और दिया, देता ही गया मुँह मोड़ दिए दरियाओं के मैं ने हवा में उड़ना सीख लिया मेरी अगली नज़र सितारों पर फिर भी मैं तेरे सहारों पर तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग मैं जहाँ भी जाऊँ दुनिया में तेरे जल्वे मेरे संग संग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग मैं ज़ात-पात में, ऊँच-नीच में और फ़िर्क़ों में बटा हुआ जो सच्चाई को धुँदला दे दिल ऐसी गर्द से अटा हुआ शिकवा नहीं जिस्म की मिट्टी से और रूह भी अब बेताब नहीं तेरे हुक्म पे चलना एक तरफ़ तेरा नाम भी लेना याद नहीं कम से कम मुझ को लौटा दे शैतान और नफ़्स की जंग जंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग मैं जहाँ भी जाऊँ दुनिया में तेरे जल्वे मेरे संग संग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग तेरे रंग रंग, तेरे रंग रंग वे बुल्...

अल्लाहु जल्ल जलालुहू | तेरी शान अम्म नवालुहू / Allahu Jalla Jalaluhu | Teri Shan Amma Nawaluhu

अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तेरी शान 'अम्म नवालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू है मेरी ज़बान पे ज़िक्र-ए-हू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तेरे नाम पर, ऐ मेरे ख़ुदा ! मेरा दिल फ़िदा, मेरी जाँ फ़िदा मेरी रूह की है यही ग़िज़ा तेरा नाम लब पे रहे सदा हो तेरी रिज़ा मेरी आरज़ू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तेरी शान 'अम्म नवालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तुझे बे-नियाज़ी का वास्ता हो क़बूल ये मेरी इल्तिजा कि बराए अहमद-ए-मुज्तबा हो मु'आफ़ मेरी हर इक ख़ता सर-ए-हश्र रख मेरी आबरू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तेरी शान 'अम्म नवालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू न हिसाब रोज़-ए-हिसाब हो मेरे दाएँ हाथ किताब हो मेरे लब पे ना'त-ए-जनाब हो न सवाल हो न जवाब हो मैं रहूँ हुज़ूर के रू-ब-रू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू तेरी शान 'अम्म नवालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू अल्लाहु जल्ल जलालुहू मैं गुनाहगार हूँ, ऐ ख़ुदा ! कोई नेक काम न कर सका कि न हो सका तेरा हक़ अदा ते...