जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ | वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है / Jis Ko Kehte Hain Sultan-e-Paigambaran | Wo Paigambar Madine Mein Maujood Hai
जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है रहबरों की जिसे सरबराही मिली ऐसा रहबर मदीने में मौजूद है अहल-ए-दुनिया के सरदार हैं अंबिया रब ने ऊँचा किया सब का है मर्तबा अंबिया जिस को सरदार अपना कहें हाँ वो अफ़सर मदीने में मौजूद है जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है रोज़ आते हैं रब के फ़रिश्ते जहाँ मुस्तफ़ा ने कहा जिस को बाग़-ए-जिनाँ जिस की 'अज़मत पे नाज़ाँ है 'अर्श-ए-बरीं ऐसा इक घर मदीने में मौजूद है जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है किस-क़दर उस के दिल में था इश्क़-ए-नबी साँप ने डँस लिया और उफ़ तक न की अस्दक़ु-स्सदिक़ीं राहतुल-'आशिक़ीं यार-ए-सरवर मदीने में मौजूद है जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है जो फ़िराक़-ए-मदीना में रंजूर है कौन कहता है तयबा से वो दूर है ज़ाहिरन हो कहीं हाँ मगर फ़िक्र में वो गदागर मदीने में मौजूद है जिस को कहते हैं सुल्तान-ए-पैग़ंबराँ वो पैग़ंबर मदीने में मौजूद है मैं हूँ, शौक़-ए-फ़रीदी ! ग़ुलाम-ए-नबी मुझ को उन से जुदा मत समझना कभी दूर हूँ...