है इश्क़-ए-मुहम्मद से पुर मेरा सीना / Hai Ishq-e-Muhammad Se Pur Mera Seena
मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! है 'इश्क़-ए-मुहम्मद से पुर मेरा सीना जो दिल मुज़्तरिब हो तो वज्ह-ए-सकीना यहीं कैफ़-ओ-मस्ती, यहीं जाम-ओ-मीना यहीं मेरा मरना, यहीं मेरा जीना है 'इश्क़-ए-मुहम्मद से पुर मेरा सीना जो दिल मुज़्तरिब हो तो वज्ह-ए-सकीना मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मेरी सोच में भी, मेरी बात में भी मेरे ख़्वाब में भी, ख़यालात में भी मेरे ज़िक्र में भी, मुनाजात में भी है आवाज़ अश्कों की बरसात में भी है 'इश्क़-ए-मुहम्मद से पुर मेरा सीना जो दिल मुज़्तरिब हो तो वज्ह-ए-सकीना मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! लगा लीजिए क़हक़हे, जा रहा हूँ मैं अश्कों में अपने बहे जा रहा हूँ जुदाई का ग़म भी सहे जा रहा हूँ मगर बेख़ुदी में कहे जा रहा हूँ है 'इश्क़-ए-मुहम्मद से पुर मेरा सीना जो दिल मुज़्तरिब हो तो वज्ह-ए-सकीना मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! लगी पूछने मुझ से सारी ख़ुदाई तुझे खा गई है ये किस की जुदाई तू है जान-ओ-दिल से ये किस का फ़िदाई मेरे ख़ाना-ए-दिल से आवाज़ आई है ...