शुजाअत नाज़ करती है जलालत नाज़ करती है / Shujaat Naaz Karti Hai Jalalat Naaz Karti Hai
शुजा'अत नाज़ करती है, जलालत नाज़ करती है वो सुल्तान-ए-ज़माँ हैं, उन पे शौकत नाज़ करती है सदाक़त नाज़ करती है, अमानत नाज़ करती है हमिय्यत नाज़ करती है, मुरव्वत नाज़ करती है शह-ए-ख़ूबाँ पे हर ख़ूबी-ओ-ख़स्लत नाज़ करती है करीम ऐसे हैं वो उन पर करामत नाज़ करती है जहान-ए-हुस्न में भी कुछ निराली शान है उन की नबी के गुल पे गुलज़ारों की ज़ीनत नाज़ करती है शहंशाह-ए-शहीदाँ हो, अनोखी शान वाले हो हुसैन इब्न-ए-'अली ! तुम पर शहादत नाज़ करती है बिठा कर शाना-ए-अक़दस पे कर दी शान दो-बाला नबी के लाडलों पर हर फ़ज़ीलत नाज़ करती है ज़बीन-ए-नाज़ उन की जल्वा-गाह-ए-हुस्न है किस की रुख़-ए-ज़ेबा पे हज़रत की मलाहत नाज़ करती है निगाह-ए-नाज़ से नक़्शा बदल देते हैं 'आलम का अदा-ए-सरवर-ए-ख़ूबाँ पे नुदरत नाज़ करती है फ़िदाई हूँ तो किस का हूँ, कोई देखे मेरी क़िस्मत क़दम पर जिस हसीं की जान-ए-तल'अत नाज़ करती है ख़ुदा के फ़ज़्ल से, अख़्तर ! मैं उन का नाम-लेवा हूँ मैं हूँ क़िस्मत पे नाज़ाँ, मुझ पे क़िस्मत नाज़ करती है शायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: साबिर रज़ा अज़हरी सुरत सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी वासिफ़ रज़ा नूरी...