नज़रें झुका लो पलकें बिछा लो | नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है / Nazrein Jhuka Lo Palkein Bichha Lo | Naam-e-Muhammad Liya Ja Raha Hai
नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है होंटों पे मुस्कान अपने सजा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है मेहमान है वो प्यारे नबी का आक़ा की महफ़िल में आता है जो भी पलकों पे अपनी उस को बिठा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है पढ़ते रहो तुम दुरूदों की तस्बीह और यूँ करो तुम मोहब्बत की तशरीह तस्बीह को आँखों से अपनी लगा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है आदम से पहले और बा'द-ए-आदम है हर ज़माना नबी का ज़माना तुम भी ज़माने के संग गुनगुना लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है रखना यक़ीं तुम, आएँगे आक़ा आँगन में अपने जो महफ़िल सजेगी राहों पे उन की नज़रें जमा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है नज़रें झुका लो, पलकें बिछा लो नाम-ए-मुहम्मद लिया जा रहा है शायर: बाबू फ़राज़ ना'त-ख़्वाँ: नवल ख़ान nazre.n jhuka lo, palke.n bichha lo ...