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अगरचे कोई नहीं है हुज़ूर आप तो हैं / Agarche Koi Nahin Hai Huzoor Aap To Hain

अगरचे कोई नहीं है, हुज़ूर ! आप तो हैं ये मेरा पुख़्ता यक़ीं है, हुज़ूर ! आप तो हैं सुना जो शोर यहाँ पर कोई किसी का नहीं सदा-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं है, हुज़ूर ! आप तो हैं मैं हिज्र-ए-तयबा में रोया हूँ जब भी रातों में लगा है आप यहीं हैं, हुज़ूर ! आप तो हैं ग़मों के बा'द भी ज़िंदा हूँ, दिल सलामत है कि दिल में आप मकीं हैं, हुज़ूर ! आप तो हैं मेरा सुकून, मेरा चैन और मेरा दिल जहाँ हैं आप वहीं हैं, हुज़ूर ! आप तो हैं मिटाने आए थे मुझ को, वो मिट गए सारे ये मेरी फ़त्ह-ए-मुबीं है, हुज़ूर ! आप तो हैं मरा है ऐसे शबाहत मदीने में जा कर क़रीब-ए-रौज़ा जबीं है, हुज़ूर ! आप तो हैं शायर: सय्यिद शबाहत हुसैन ना'त-ख़्वाँ: ज़ोहैब अशरफ़ी agarche koi nahi.n hai, huzoor ! aap to hai.n ye mera puKHta yaqee.n hai, huzoor ! aap to hai.n suna jo shor yahaa.n par koi kisi ka nahi.n sada-e-qalb-e-hazee.n hai, huzoor ! aap to hai.n mai.n hijr-e-tayba me.n roya hu.n jab bhi raato.n me.n laga hai aap yahi.n hai.n, huzoor ! aap to hai.n Gamo.n ke baa'd bhi zinda hu.n, dil salaamat hai ki dil...

जहाँ आक़ा की मिदहत हो गई है / Jahan Aaqa Ki Midhat Ho Gai Hai

जहाँ आक़ा की मिदहत हो गई है जगह वो मिस्ल-ए-जन्नत हो गई है मुक़द्दर का सिकंदर है वो जिस को मदीने की ज़ियारत हो गई है मेरे आक़ा ने जो फ़रमा दिया है वो उम्मत की शरी'अत हो गई है ये तेरे दूध की 'अज़मत है, ज़हरा ! जो नेज़े पर तिलावत हो गई है 'अली के शाहज़ादे ! कर्बला में फ़िदा तुझ पर शहादत हो गई है नबी की ना'त की बरकत है ये सब मेरी दुनिया में शोहरत हो गई है इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ की बदौलत 'अक़ीदे की तहारत हो गई है जो दीवाना है प्यारे मुस्तफ़ा का हयात ! उस पर 'इनायत हो गई है ना'त-ख़्वाँ: अक़ीलुर्रहमान मुरादाबादी jahaa.n aaqa ki mid.hat ho gai hai jagah wo misl-e-jannat ho gai hai muqaddar ka sikandar hai wo jis ko madine ki ziyaarat ho gai hai mere aaqa ne jo farma diya hai wo ummat ki sharee'at ho gai hai ye tere doodh ki 'azmat hai, zahra ! jo neze par tilaawat ho gai hai 'ali ke shaahzaade ! karbala me.n fida tujh par shahaadat ho gai hai nabi ki naa't ki barkat hai ye sab meri duniya me.n shohrat ho gai hai imaa...

अज सिक मित्तराँ दी वधेरी ए | सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह / Aj Sik Mittran Di Wadheri Ae | Subhanallah Subhanallah

अज सिक मित्तराँ दी वधेरी ए क्यूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए ? लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए अज नैनाँ लाइयाँ क्यूँ झड़ियाँ ? अत्तैफ़ु सरा मिन तल'अतिही व-श्शज़्वु बदा मिव्वफ़्रतिही फ़सकर्तु हुना मिन नज़्रतिही नैनाँ दियाँ फ़ौजाँ सर चढ़ियाँ मुख चँद बदर शा'शानी ए मथे चमके लाट नूरानी ए काली ज़ुल्फ़ ते अख मस्तानी ए मख़्मूर अक्खीं हिन मद भरियाँ दो अबरू क़ौस मिसाल दिसन जैं तों नोक-ए-मिज़ा दे तीर छुटन लब्बाँ सुर्ख़ आखाँ कि ला'ल-ए-यमन चिट्टे दंद मोती दियाँ हिन लड़ियाँ इस सूरत नूँ मैं जान आखाँ जानान कि जान-ए-जहान आखाँ सच आखाँ ते रब्ब दी शान आखाँ जिस शान तों शानाँ सब बनियाँ एहा सूरत है बे-सूरत थीं बे-सूरत ज़ाहिर सूरत थीं बे-रंग दिसे इस मूरत थीं विच वहदत फुट्टियाँ जद घड़ियाँ दस्से सूरत राह बे-सूरत दा तौबा राह की 'ऐन हक़ीक़त दा पर कम नहीं बे-सूझत दा कोई विरलियाँ मोती लै तरियाँ एहा सूरत शाला पेश-ए-नज़र रहे वक़्त-ए-नज़ा' ते रोज़-ए-हशर विच क़ब्र ते पुल थीं जद होसी गुज़र सब खोटियाँ थीसन तद खरियाँ यु'अतीका रब्बुका दास तुसाँ फ़तरदा थीं पूरी आस असाँ लजपाल करीसी पास असाँ वश्फ़...

मिल्क-ए-ख़ास-ए-किब्रिया हो / Milk-e-Khas-e-Kibriya Ho

मिल्क-ए-ख़ास-ए-किब्रिया हो मालिक-ए-हर मा-सिवा हो कोई क्या जाने कि क्या हो 'अक़्ल-ए-'आलम से वरा हो कंज़-ए-मकतूम-ए-अज़ल में दुर्र-ए-मकनून-ए-ख़ुदा हो सब से अव्वल, सब से आख़िर इब्तिदा हो, इंतिहा हो थे वसीले सब नबी तुम अस्ल मक़्सूद-ए-हुदा हो पाक करने को वुज़ू थे तुम नमाज़-ए-जाँ-फ़िज़ा हो सब बिशारत की अज़ाँ थे तुम अज़ाँ का मुद्द'आ हो सब तुम्हारी ही ख़बर थे तुम मुअख़्ख़र मुब्तदा हो क़ुर्ब-ए-हक़ की मंज़िलें थे तुम सफ़र का मुंतहा हो क़ब्ल-ए-ज़िक्र इज़्मार क्या जब रुत्बा साबिक़ आप का हो तूर-ए-मूसा चर्ख़-ए-'ईसा क्या मुसाविय्य-ए-दना हो सब जिहत के दाइरे में शश-जिहत से तुम वरा हो सब मकाँ तुम ला-मकाँ में तन हैं तुम जान-ए-सफ़ा हो सब तुम्हारे दर के रस्ते एक तुम राह-ए-ख़ुदा हो सब तुम्हारे आगे शाफ़े' तुम हुज़ूर-ए-किब्रिया हो सब की है तुम तक रसाई बारगह तक तुम रसा हो वो कलस रौज़े का चमका सर झुकाओ, कज-कुलाहो ! वो दर-ए-दौलत पे आए झोलियाँ फैलाओ, शाहो ! शायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी milk-e-KHaas-e-kibriya ho maalik-e-har maa-siwa ho koi...

इक रोज़ मोमिनो तुम्हें मरना ज़रूर है / Ek Roz Momino Tumhein Marna Zaroor Hai

इक रोज़, मोमिनो ! तुम्हें मरना ज़रूर है पढ़ते रहो नमाज़ ये क़ौल-ए-रसूल है पढ़ते रहो नमाज़ तो चेहरे पे नूर है पढ़ते नहीं नमाज़ तो अपना क़ुसूर है अपने किए की आप सज़ा जल्द पाओगे पढ़ते नहीं नमाज़ जहन्नम में जाओगे तौबा करो, ख़ुदा-रा नमाज़ें पढ़ा करो मक्र-ओ-फ़रेब झूट से हर दम बचा करो पढ़ते हैं जो नमाज़ जमा'अत से सर-ब-सर तय्यार कर रहे हैं वो जन्नत में अपना घर बख्शाएँगे ख़ुदा से उसे शाह-ए-बहर-ओ-बर मुस्लिम में और बुख़ारी में लिक्खी है ये ख़बर जो तर्क की नमाज़ तो वो नास हो गया जिस ने पढ़ी नमाज़ तो वो पास हो गया पढ़ते रहो नमाज़ तो बेहतर ये काम है दीन-ए-रसूल-ए-पाक का इस से क़ियाम है मत खाओ सूद, सूद का खाना हराम है बस ये दु'आ ख़ुदा से मेरी सुब्ह-ओ-शाम है पाबंद बे-नमाज़ी को कर दो नमाज़ का और उस के दिल में शौक़ तुम भर दो नमाज़ का ऐ मोमिनो ! नमाज़ को करना न तुम क़ज़ा क़ुरआन में ये साफ़ ये कहता है किब्रिया मरने के बा'द हश्र में दूल्हा बनाएगी सेहरा निजात का यही सर पे सजाएगी ऐ मोमिनो ! नमाज़ ख़ुदा से मिलाएगी मरने के बा'द गुलशन-ए-जन्नत दिलाएगी सारी 'इबादतों में 'इबादत नमाज़ है ऐ मोमिनो ! ये दीन...

आक़ा मदीनावाळा क्यारे बोलावशो / આકા મદીનાવાળા ક્યારે બોલાવશો / Aaqa Madina Wara Kyare Bolawsho

આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબાની યાદમાં દિલડું તડપે છે ક્યારે જોવડાવશો, આકા ! ક્યારે જોવડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? લીલો લીલો ગુંબદ ને સોનેરી જાળી મિમ્બર ને દ્વાર વચ્ચે જન્નતની ક્યારી આવી જા જોવા એવું ક્યારે સંભળાવશો ? ક્યારે સંભળાવશો, આકા ! ક્યારે સંભળાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબાની યાદમાં ના'તો લખે છે દાસ તમારો એને ગાતો રહે છે આપના દ્વારે એને ક્યારે ગવડાવશો ? ક્યારે ગવડાવશો, આકા ! ક્યારે ગવડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? પાપોનાં દલદલમાં એવો ફસાણો સત કર્મોથી હું તો સાવ અજાણો પાપોની ટેવ મારી ક્યારે છોડાવશો ? ક્યારે છોડાવશો, આકા ! ક્યારે છોડાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, આકા ! ક્યારે બોલાવશો ? તયબા વાસીઓને જ્યારે હું મળ્યો સાંભળીને વાતો ત્યાંની મનમાં હું રડ્યો મેહમાન ત્યાંનો મને ક્યારે બનાવશો ? ક્યારે બનાવશો, આકા ! ક્યારે બનાવશો ? આકા મદીનાવાળા ! આપ બતાવો ક્યારે બોલાવશો, ...

तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो / Tum Zaat-e-Khuda Se Na Juda Ho Na Khuda Ho

तुम ज़ात-ए-ख़ुदा से न जुदा हो न ख़ुदा हो अल्लाह को मा'लूम है क्या जानिए क्या हो ये क्यूँ कहूँ मुझ को ये 'अता हो ये 'अता हो वो दो कि हमेशा मेरे घर भर का भला हो जिस बात में मशहूर-ए-जहाँ है लब-ए-'ईसा ऐ जान-ए-जहाँ ! वो तेरी ठोकर से अदा हो टूटे हुए दम, जोश पे तूफ़ान-ए-म'आसी दामन न मिले उन का तो क्या जानिए क्या हो यूँ झुक के मिले हम से कमीनों से वो जिस को अल्लाह ने अपने ही लिए ख़ास किया हो मिट्टी न हो बर्बाद पस-ए-मर्ग, इलाही ! जब ख़ाक उड़े मेरी मदीने की हवा हो मँगता तो है मँगता कोई शाहों में दिखा दे जिस को मेरे सरकार से टुकड़ा न मिला हो क़ुदरत ने अज़ल में ये लिखा उन की जबीं पर जो उन की रज़ा हो वही ख़ालिक़ की रज़ा हो हर वक़्त करम बंदा-नवाज़ी पे तुला है कुछ काम नहीं इस से बुरा हो कि भला हो सौ जा से गुनहगार का हो रख़्त-ए-'अमल चाक पर्दा न खुले गर तेरे दामन से बंधा हो अबरार निको-कार ख़ुदा के हैं ख़ुदा के उन का है वो उन का है जो बद हो जो बुरा हो ऐ नफ़्स ! उन्हें रंज दिया अपनी बदी से क्या क़हर किया तू ने, अरे तेरा बुरा हो अल्लाह यूँही 'उम्र गुज़र जाए गदा की सर ख़म हो ...

तुझे रब ने क्या बनाया मक्का मदीने वाले / Tujhe Rab Ne Kya Banaya Makka Madine Wale

तुझे रब ने क्या बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये कोई समझ न पाया, मक्का-मदीने वाले ! तेरा फ़ैज़-ए-'आम जारी, तेरी ज़िंदगी निराली तुझे हर वली में पाया, मक्का-मदीने वाले ! कहा सब ने नफ़्सी-नफ़्सी, तेरे लब पे रब्बि-हब-ली तेरे पाए का न पाया, मक्का-मदीने वाले ! न कोई बता सका है, न कोई बता सकेगा तुझे रब ने कब बनाया, मक्का-मदीने वाले ! है दु'आ-ए-अहल-ए-सुन्नत कि जहान-ए-रंग-ओ-बू में रहे सय्यिदों का साया, मक्का-मदीने वाले ! सवा लाख अंबिया हों या हज़ारों हूर-ओ-ग़िल्माँ तेरा गीत सब ने गाया, मक्का-मदीने वाले ! ये सभी का है 'अक़ीदा कि ब-क़ौल-ए-आ'ला-हज़रत तुझे यक ने यक बनाया, मक्का-मदीने वाले ! ये है फ़ातिमा का सदक़ा, मैं तेरे नसब का हिस्सा मुझे हाशमी बनाया, मक्का-मदीने वाले ! शायर: सय्यिद हाशमी मियाँ ना'त-ख़्वाँ: मुईन क़ादरी बैंगलोर tujhe rab ne kya banaaya, makka-madine waale ! ye koi samajh na paaya, makka-madine waale ! tera faiz-e-'aam jaari, teri zindagi niraali tujhe har wali ne paaya, makka-madine waale ! kaha sab ne nafsi-nafsi, tere lab pe rabbi-...