बटता है काइनात में सदक़ा बतूल का / Batta Hai Kainat Mein Sadqa Batool Ka
बटता है काइनात में सदक़ा बतूल का सुल्तान-ए-दो-जहान है बाबा बतूल का सच है कि मेरी अम्माँ भी उन की कनीज़ है मेरा है बाप-दादा भी मँगता बतूल का रहती हैं मेरी देख लो मौजें लगी हुई मुझ पर करम हुआ है ये कैसा बतूल का शामी बाज़ार-ए-शाम में हैरान थे खड़े क़ुरआन पढ़ रहा था बेटा बतूल का मौला 'अली ने कह दिया ज़हरा की शान में अल्लाह ही जानता है रुत्बा बतूल का नज़रों से मैं ने चूमा है चौखट को बार-बार देखा है मैं ने बारहा हुजरा बतूल का अजमल की है तौक़ीर भी, पहचान भी यही अदना सा इक ग़ुलाम है ज़हरा बतूल का शायर: यासीन अजमल चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: ख़ावर नक़्शबंदी रैहान क़ुरैशी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी baT.ta hai kaainaat me.n sadqa batool ka sultaan-e-do-jahaan hai baaba batool ka sach hai ki meri ammaa.n bhi un ki kaneez hai mera hai baap-daada bhi mangta batool ka rehti hai.n meri dekh lo mauje.n lagi hui mujh par karam huwa hai ye kaisa batool ka shaami baazaar-e-shaam me.n hairaan the kha.De qur.aan pa.Dh raha tha beTa batool ka maula 'ali ne keh diya zah...