मुझ को मिली है इज़्ज़त अत्तार की बदौलत / Mujh Ko Mili Hai Izzat Attar Ki Badaulat
मुझ को मिली है 'इज़्ज़त 'अत्तार की बदौलत चमकी है मेरी क़िस्मत 'अत्तार की बदौलत अपना बनाया मुझ को, सीने लगाया मुझ को जो भी है मेरी वुक़'अत 'अत्तार की बदौलत 'अत्तार का मैं सग हूँ, समझो न दर-ब-दर हूँ क्या ख़ूब मेरी निस्बत 'अत्तार की बदौलत सर पर सजे 'अमामे, पुर-नूर दाढ़ियाँ हैं ज़िंदा हुई है सुन्नत 'अत्तार की बदौलत अल्लाह ! मुस्तफ़ा की, मेरे ग़ौस और रज़ा की पैदा हो दिल में उल्फ़त 'अत्तार की बदौलत बिगड़ी बना दे, मौला ! हर ग़म मिटा दे, मौला ! पूरी हो मेरी हाजत 'अत्तार की बदौलत है बिलाल-ए-क़ादरी की आख़िर यही तमन्ना रौशन हो इस की तुर्बत 'अत्तार की बदौलत ना'त-ख़्वाँ: अब्दुल हबीब अत्तारी mujh ko mili hai 'izzat 'attar ki badaulat chamki hai meri qismat 'attar ki badaulat apna banaaya mujh ko, seene lagaaya mujh ko jo bhi hai meri wuq'at 'attar ki badaulat 'attar ka mai.n sag hu.n, samjho na dar-ba-dar hu.n kya KHoob meri nisbat 'attar ki badaulat sar par saje 'amaame, pur-noor daa.Dhiyaa...