मुझे मदीने की दो इजाज़त नबी-ए-रहमत शफ़ी-ए-उम्मत / Mujhe Madine Ki Do Ijazat Nabi-e-Rahmat Shafi-e-Ummat
मुझे मदीने की दो इजाज़त नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! पिलाओ बुलवा के जाम-ए-उल्फ़त नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! अगर नहीं मेरी ऐसी क़िस्मत सदा हुज़ूरी की पाऊँ लज़्ज़त रुलाए मुझ को तुम्हारी फ़ुर्क़त नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! 'अता हो मुझ को ग़म-ए-मदीना तपाँ जिगर, चाक चाक सीना बढ़े मोहब्बत की ख़ूब शिद्दत नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! लगाओ सीने में आग ऐसी क़रार पाए न दिल कभी भी रुलाए हर दम तुम्हारी उल्फ़त नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! मैं नाम पर तेरे वारी जाऊँ मैं 'इश्क़ में तेरे घर लुटाऊँ मिले वो जज़्बा, मिले वो हिम्मत नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! हुसैन इब्न-ए-'अली का सदक़ा हमारे ग़ौस-ए-जली का सदक़ा 'अता मदीने में हो शहादत नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! हर इक नबी, हर वली का सदक़ा तुझे तेरी हर गली का सदक़ा दे तयबा में मरने की स'आदत नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! इमाम अहमद रज़ा का सदक़ा हमारे मुर्शिद ज़िया का सदक़ा बक़ी'-ए-ग़र्क़द करो 'इनायत नबी-ए-रहमत शफ़ी'-ए-उम्मत ! वसीला ख़ुल्फ़ा-ए-राशिदीं का तमाम असहाब-ओ-ताबि'ईं का जवार जन्नत में हो 'इनायत ...