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मरहबा ऐ जान-ए-जानाँ जान-ए-ईमाँ या नबी / Marhaba Aye Jaan-e-Jaanan Jaan-e-Iman Ya Nabi

मरहबा, मरहबा, मरहबा, मरहबा मरहबा, मरहबा, मरहबा, मरहबा या नबी शम्सुद्दुहा ! या नबी बदरुद्दुजा ! या नबी ख़ैर-उल-वरा ! या नबी या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! मरहबा ऐ जान-ए-जानाँ जान-ए-ईमाँ या नबी ! मरहबा महबूब-ए-यज़्दाँ शाह-ए-ख़ूबाँ या नबी ! आप आए रौशनी फैली, अँधेरा छट गया मरहबा सद मरहबा ऐ मेहर-ए-ताबाँ या नबी ! मरहबा, मरहबा, मरहबा, मरहबा मरहबा ऐ जान-ए-जानाँ जान-ए-ईमाँ या नबी ! अव्वल-ओ-आख़िर सब कुछ जाने, देखे ब'ईद-ओ-क़रीब ग़ैब की ख़बरें देने वाला, अल्लाह का वो हबीब प्यारी सूरत, हँसता चेहरा, मुँह से झड़ते फूल हुस्न-ए-सरापा, नूर का पैकर, हक़ का प्यारा रसूल या नबी शम्सुद्दुहा ! या नबी बदरुद्दुजा ! या नबी ख़ैर-उल-वरा ! या नबी या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! बहर-ओ-बर, शम्स-ओ-क़मर, हूर-ओ-मलक, जिन्न-ओ-बशर दो जहाँ है आप ही के ज़ेर-ए-एहसाँ, या नबी ! मरहबा ऐ जान-ए-जानाँ जान-ए-ईमाँ या नबी ! आप की आमद का सदक़ा दोनों 'आलम पा गए हम गदाओं का भी भर दें आज दामाँ, या नबी ! मरहबा, मरहबा, मरहबा, मरहबा मरहबा ऐ जान-ए-जानाँ जान-ए-ईमाँ या नबी ! सरकार जिहा सोहणा, आया ...

नूर वाला आया है नूर ले कर आया है / Noor Wala Aaya Hai Noor Le Kar Aaya Hai

नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! ना'त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे या रसूलल्लाह का ना'रा लगाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! जश्न-ए-मीलाद-ए-मुबारक कैसे छोड़ें हम भला जिन का खाते हैं उन्हीं के गीत गाते जाएँगे नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है सारे 'आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या रसूलल्लाह ! अस्सलातु व-स्सलामु 'अलैका या हबीबल्लाह ! चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते ज...

चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का / Chalo Karein Mil Kar Charcha Huzoor Ka

'आशिक़ों का राज है, महफ़िलों का ताज है जल्से हैं, जुलूस हैं, झूमता समाज है 'इश्क़ का मिज़ाज है, 'इश्क़ का मिजाज़ है चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! उतरा है चाँद घर में मौला के नूर का होने लगा है घर-घर चर्चा हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का फैली है नूरी किरने देखो जगह जगह आया है ये महीना कैफ़-ओ-सुरूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का मीलाद-ए-मुस्तफ़ा की महफ़िल सजाएँगे हम ये फ़ैसला है, यारो ! अहल-ए-श'ऊर का जिब्रील की है सुन्नत पढ़ लो हदीस में लहराएगा जहाँ में परचम हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! बजता है नाम उन का दिल की धड़क धड़क में साँसों में गूँजता है तराना हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का खोया है उन के नाम...

गली गली सज गई शहर शहर सज गया | जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे / Gali Gali Saj Gai Shahar Shahar Saj Gaya | Jo Amina Ke Laal Ka Milad Karenge (Part 1 | Part 2)

गली गली सज गई, शहर शहर सज गया आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा से प्यार है, दिल से ये इक़रार है हर कोई मीलाद-ए-नबी करने को तय्यार है मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे ! झंडे लगाओ ! घर को सजाओ ! कर के चराग़ाँ ख़ुशियाँ मनाओ ! सरकार आए ! मरहबा ! दिलदार आए ! मरहबा ! ग़म-ख़्वार आए ! मेरे लज-पाल आए ! मरहबा ! क्या नूर है, ख़ुश्बू है, उजालों का समाँ है सरकार के परचम से सजा सारा जहाँ है चेहरे भी सजे, दिल भी सजे, घर भी सजे हैं जो सज न सका ये तो बता घर वो कहाँ है गली गली सज गई, शहर शहर सज गया आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा से प्यार है, दिल से ये इक़रार है हर कोई मीलाद-ए-नबी करने को तय्यार है मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे ...

दिल भी क़ुर्बान जाँ भी क़ुर्बान मीलाद-ए-नबी आ गया / Dil Bhi Qurban Jaan Bhi Qurban Milad-e-Nabi Aa Gaya

दिल भी क़ुर्बान, जाँ भी क़ुर्बान मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नबी आ गया जिन से है ईमान, जिन से है क़ुरआन प्यारा नबी आ गया, प्यारा नबी आ गया सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की आमद ! मरहबा ! मौला की आमद ! मरहबा ! सब झूम के बोलो ! मरहबा ! जश्न-ए-विलादत मिल के मनाओ ज़िक्र करो और ना'त सुनाओ महफ़िल-ए-दुरूद घर पे सजाओ मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नबी आ गया दिल भी क़ुर्बान, जाँ भी क़ुर्बान मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नबी आ गया जिन से है ईमान, जिन से है क़ुरआन प्यारा नबी आ गया, प्यारा नबी आ गया जश्न-ए-नबी की धूम मची है हर-जा पर मीलाद-ए-नबी है घर को सजाओ, सब को बताओ मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नबी आ गया दिल भी क़ुर्बान, जाँ भी क़ुर्बान मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नबी आ गया जिन से है ईमान, जिन से है क़ुरआन प्यारा नबी आ गया, प्यारा नबी आ गया सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की आमद ! मरहबा ! मौला की आमद ! मरहबा ! सब झूम के बोलो ! मरहबा ! आया नबी तो आया सवेरा दूर हुआ ज़ुल्मत का अँधेरा मुज़्दा बख़्शिशों का सब को सुनाओ मीलाद-ए-नबी आ गया, मीलाद-ए-नब...

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ मुझे जिस ने रब से मिला दिया / Main Nisar Kyun Na Raza Pe Hun Mujhe Jis Ne Rab Se Mila Diya

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया उसी रब का हम्द-सरा हूँ मैं, कि श'ऊर-ए-फ़िक्र-ए-रज़ा दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया मैं रज़ा रज़ा ही कहा करूँ, मुझे 'इश्क़-ए-शाह-ए-दना दिया मुझे भीक लेने के वासिते दर-ए-मुस्तफ़ा का पता दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया तेरे दर से शान सहाबा की मेरे ज़ेहन-ओ-दिल पर अयाँ हुई मुझे अहल-ए-बैत का मर्तबा तेरी फ़िक्र ने ही बता दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया न जमाल-ए-हक़ का श'ऊर था, न था फ़हम-ए-बातिल-ओ-बातिलाँ मुझे हक़ से तू ने मिला दिया, मुझे राह-ए-हक़ पे चला दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया तेरे नाम पर मैं फ़िदा हुआ, मेरे लब पे नाम तेरा रहा तेरे नाम ने, तेरे 'इश्क़ ने मुझे नेक-नाम बना दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया न था कुछ श'ऊर-ए-सुख़न-वरी, न था कुछ सलीक़ा-ए-ना'त भी तेरी ना'त-गोई ने, ऐ रज़ा ! मुझे ना'त पढ़ना सिखा दिया मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे ज...