मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा या ग़ौस / Mere Labon Par Subh-o-Masa Hai Naam Tumhara Ya Ghous
ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्तगीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्तगीर ! जीलानी सरकार ! कर दो बेड़ा पार झोली फैलाए मँगते आए तेरे दुवार मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! तेरे नाम पे वारी जाऊँ, या ग़ौस पिया सरकार ! तेरी चौखट पे मर जाऊँ, या ग़ौस पिया सरकार ! ग़ौस-ए-आ'ज़म शाह-ए-जीलानी ! आप रुत्बे में हैं ला-सानी आप के आगे ब-सद ता'ज़ीम हर वली की ख़म है पेशानी मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! बग़दाद के वाली, मीराँ ! मैं तेरा सुवाली, मीराँ ! चौखट पे खड़ा हूँ, मीराँ ! मेरी झोली भर दो, मीराँ ! वलियों के वली हो, मीराँ ! मेरे ग़ौस-ए-जली हो, मीराँ ! क़िब्ला-ए-अहल-ए-सफ़ा हो तुम ताजदार-ए-औलिया हो तुम ग़ौस-ए-आ'ज़म ! क़ादरियों का दो जहाँ में आसरा हो तुम मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! तेरे दर की, शाह-ए-जीलानी ! औलिया करते हैं दरबानी पंजतन का तू है दिल-जानी हर तरफ़ है तेरी सुल्तानी तेरे नाम पे वारी ...