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दिल से मीलाद हम मनाएँगे / Dil Se Milad Hum Manayenge

दिल से मीलाद हम मनाएँगे दिल से मीलाद हम मनाएँगे हर दुकान, हर मकान सज गया है आज क्या ज़मीन-ओ-आसमान सज गया है आज ये जहान वो जहान सज गया है आज ये मकान ला-मकान सज गया है आज पूरे दिल से, पूरी दुनिया हम सजाएँगे, हम सजाएँगे ज़िंदगी भर जश्न-ए-आक़ा हम मनाएँगे, हम मनाएँगे पूरे दिल से, पूरी दुनिया हम सजाएँगे, हम सजाएँगे होंटों पे मोहब्बत के फ़साने वही लाए अल्लाह की रहमत के ख़ज़ाने वही लाए सरकार ने मख़्लूक़ पे एहसान किए हैं अल्लाह की बख़्शिश के बहाने वही लाए पूरे दिल नाल सारी दुनिया असीं सजावाँगे, असीं सजावाँगे सारी ज़िंदगी जश्न-ए-आक़ा असीं मनावाँगे, गज-वज मनावाँगे पूरे दिल से, पूरी दुनिया हम सजाएँगे, हम सजाएँगे ज़िंदगी भर जश्न-ए-आक़ा हम मनाएँगे, हम मनाएँगे पूरे दिल से, पूरी दुनिया हम सजाएँगे, हम सजाएँगे घर घर में चराग़ाँ करो, झंडे भी लगाओ वो आ गए सरकार हैं जज़्बात जगाओ हालात हों मख़्दूश या महँगाई के 'आलम हर हाल में सरकार का मीलाद मनाओ पूरा दिल सी आखी दुनिया अमें सजावाना, अमें सजावाना ज़िंदगी भर जश्न-ए-आक़ा अमें मनावाना, अमें मनावाना पूरे दिल से, पूरी दुनिया हम सजाएँगे, हम सजाएँगे ज़िंद...

मैं हूँ सुन्नी आला हज़रत से मेरी पहचान है / Main Hun Sunni Aala Hazrat Se Meri Pehchan Hai

रज़ा हमारी जान, रज़ा हमारी जान रज़ा हमारी जान, रज़ा हमारी जान 'इश्क़-ओ-मोहब्बत 'इश्क़-ओ-मोहब्बत आ'ला हज़रत, आ'ला हज़रत 'इल्म-ओ-हिकमत, 'इल्म-ओ-हिकमत आ'ला हज़रत, आ'ला हज़रत मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है अहल-ए-हक़ अहल-ए-मोहब्बत का यही ए'लान है मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है आ'ला हज़रत बू-हनीफ़ा के हुए हैं जा-नशीं जिन के आगे सब फ़क़ीहों की हुई है ख़म जबीं देखिए अहमद रज़ा की क्या ही ऊँची शान है मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है हज़रत-ए-अहमद-रज़ा के 'उर्स की हर-सू है धूम 'आशिक़ान-ए-मुस्तफ़ा का है बरेली में हुजूम 'आम दुनिया में रज़ा का हर तरफ़ फ़ैज़ान है मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है आ'ला हज़रत ने किया 'इश्क़-ए-नबी पर ऐसा काम उन को दुनिया कह उठी 'इश्क़-ओ-मोहब्बत का इमाम 'इश्क़-ए-आक़ा ने रज़ा को कर दिया ज़ीशान है मैं हूँ सुन्नी आ'ला हज़रत से मेरी पहचान है कंज़ुल-ईमाँ और फ़तावा रज़विया लिख कर दिया जो बुज़ुर्गों का 'अक़ीदा था उसे न...

जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए / Jaan-e-Jinan-o-Raunaq-e-Gulzar Aa Gaye

लजपाल आ गए ! लजपाल आ गए ! ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ आया सोहणा जग ते ! मरहबा ! मन मोहणा जग ते ! मरहबा ! उम्मत दा वाली ! मरहबा ! जे दी शान निराली ! मरहबा ! पंद्रह सदियाँ तों ! मरहबा ! जेह्दा जश्न ए जारी ! मरहबा ! मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा ! जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए आज आमिना के घर शह-ए-अबरार आ गए ज़ाहिर हुआ वो जल्वा-ए-सूरत जनाब का क़ुदसी भी लेने सदक़ा-ए-रुख़्सार आ गए ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ अर्ज़-ओ-समा, ज़मान-ओ-मकाँ यक ज़बाँ हैं आज ख़ल्लाक़-ए-काइनात के शहकार आ गए जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए आज आमिना के घर शह-ए-अबरार आ गए मेहर-ए-समा, सितारे, क़मर और कहकशाँ ख़ैरात लेने नूर से अनवार आ गए आया सोहणा जग ते ! मरहबा ! मन मोहणा जग ते ! मरहबा ! उम्मत दा वाली ! मरहबा ! जे दी शान निराली ! मरहबा ! पंद्रह सदियाँ तों ! मरहबा ! जेह्दा जश्न ए जारी ! मरहबा ! मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा ! ये रस्म-ए-...

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम / Mustafa Jaan-e-Rehmat Pe Lakhon Salam

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम 'अर्श की ज़ेब-ओ-ज़ीनत पे 'अर्शी दुरूद फ़र्श की तीब-ओ-नुज़हत पे लाखों सलाम नूर-ए-'ऐन-ए-लताफ़त पे अल्तफ़ दुरूद ज़ेब-ओ-ज़ैन-ए-नज़ाफ़त पे लाखों सलाम सर्व-ए-नाज़-ए-क़िदम मग़्ज़-ए-राज़-ए-हिकम यक्का ताज़-ए-फ़ज़ीलत पे लाखों सलाम नुक़्ता-ए-सिर्र-ए-वहदत पे यक्ता दुरूद मर्कज़-ए-दौर-ए-कसरत पे लाखों सलाम साहिब-ए-रज'अत-ए-शम्स-ओ-शक़्क़ुल-क़मर नाइब-ए-दस्त-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम जिस के ज़ेर-ए-लिवा आदम-ओ-मन सिवा उस सज़ा-ए-सियादत पे लाखों सलाम 'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम अस्ल-ए-हर-बूद-ओ-बहबूद तुख़्म-ए-वुजूद क़ासिम-ए-कंज़-ए-ने'मत पे लाखों सलाम फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम शर्क़-ए-अनवार-ए-क़ुदरत पे नूरी दुरूद फ़त्क़-ए-अज़्हार-ए-क़ुर्बत पे लाख...