अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल / Adam Se Layi Hai Hasti Mein Aarzoo-e-Rasool
'अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल कहाँ-कहाँ लिए फिरती है जुस्तजू-ए-रसूल ख़ुशा वो दिल कि हो जिस दिल में आरज़ू-ए-रसूल ख़ुशा वो आँख जो हो मह्व-ए-हुस्न-ए-रू-ए-रसूल तलाश-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-मुस्तफ़ा की क़सम चुने हैं आँखों से ज़र्रात-ए-ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल फिर उन के नश्शा-ए-'इरफ़ाँ का पूछना क्या है जो पी चुके हैं अज़ल में मय-ए-सुबू-ए-रसूल बलाएँ लूँ तेरी, ऐ जज़्ब-ए-शौक़-ए-सल्ले-'अला कि आज दामन-ए-दिल खिच रहा है सू-ए-रसूल शगुफ़्ता गुलशन-ए-ज़हरा का हर गुल-ए-तर है किसी में रंग-ए-'अली और किसी में बू-ए-रसूल इलाही ! हश्र के दिन इस लिबास में उट्ठूँ मली हुई हो मेरे तन से ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल 'अजब तमाशा हो मैदान-ए-हश्र में, बेदम ! कि सब हों पेश-ए-ख़ुदा और मैं रू-ब-रू-ए-रसूल शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: फ़रीद अयाज़ हाजी तस्लीम आरिफ़ असद इक़बाल कलकत्तवी 'adam se laai hai hasti me.n aarzoo-e-rasool kahaa.n-kahaa.n liye phirti hai justjoo-e-rasool KHusha wo dil ki ho jis dil me.n aarzoo-e-rasool KHusha wo aankh jo ho mahw-e-husn-e-roo-e-rasool tal...