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उन के करम से काम सारा हो गया / Un Ke Karam Se Kaam Sara Ho Gaya

उन के करम से काम सारा हो गया सब्ज़ गुंबद का नज़ारा हो गया कर लिया अल्लाह ने उस को पसंद जो मेरे आक़ा का प्यारा हो गया नाम-ए-नामी मुस्तफ़ा सल्ले-'अला बे-सहारों का सहारा हो गया जिस ने देखा रौज़ा-ए-पुरनूर को उस को जन्नत का नज़ारा हो गया चाँद दो टुकड़े हुआ, सूरज फिरा उन की उँगली का इशारा हो गया मोहसिन -ए-'आसी ! यक़ीं है क़ब्र में वो कहेंगे तू हमारा हो गया ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद मोइज़ अशरफ़ी un ke karam se kaam saara ho gaya sabz gumbad ka nazaara ho gaya kar liya allah ne us ko pasand jo mere aaqa ka pyaara ho gaya naam-e-naami mustafa salle-'ala be-sahaaro.n ka sahaara ho gaya jis ne dekha rauza-e-purnoor ko us ko jannat ka nazaara ho gaya chaand do Tuk.De huaa, sooraj phira un ki ungli ka ishaara ho gaya Mohsin -e-'aasi ! yaqee.n hai qabr me.n wo kahenge tu hamaara ho gaya Naat-Khwaan: Syed Moiz Ashrafi Unke Karam Se Kaam Sara Ho Gaya Lyrics | Unke Karam Se Kaam Sara Ho Gaya Lyrics in Hindi | Unke Karam Se Kaam Sara Ho Gaya Lyrics in En...

काम आप का बंदों को सदा रब से मिलाना | सरकार-ए-मदीना / Kaam Aap Ka Bandon Ko Sada Rab Se Milana | Sarkar-e-Madina

काम आप का बंदों को सदा रब से मिलाना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! क्यूँ आप पे क़ुर्बान न हो सारा ज़माना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! आप आए तो आने लगीं राहत की हवाएँ आप आए तो छाने लगीं रहमत की घटाएँ हर एक को हासिल हुआ ख़ुशियों का ख़ज़ाना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! सर पर है सजा ख़त्म-ए-नबुव्वत का हसीं ताज अल्लाह ने बख़्शी है फ़क़त आप को मे'राज क़ुरआन में है आप की 'अज़मत का तराना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! हम भूल नहीं सकते हैं ताइफ़ का वो मंज़र मारे गए पत्थर पे जहाँ आप को पत्थर रोके से नहीं रुक गया वो अश्क बहाना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! की आप ने अक़्सा में रसूलों की इमामत सफ़ बाँधे खड़ी पीछे थी नबियों की जमा'अत बुर्राक़ पे फिर आप हुए 'अर्श रवाना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! 'उश्शाक़ की दिन-रात यही रब से गुज़ारिश ख़्वाहिश है अगर कोई तो वो आप की ख़्वाहिश हो आप की नगरी में हमारा भी ठिकाना सरकार-ए-मदीना ! सरकार-ए-मदीना ! क्यूँकर वो किसी और के रस्ते पे चलेगा क्यूँकर वो किसी और की सीरत में ढलेगा है दिल से 'अज़ीज़ आप का ही एक दिवाना सरकार-ए-म...

नूर का समाँ छाया उर्स-ए-अज़हरी आया / Noor Ka Saman Chhaya Urs-e-Azhari Aaya

नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया ज़िक्र-ओ-फ़िक्र-ए-दुनिया से हट के हुस्न-ए-अख़्तर ने दिल में जल्वा फ़रमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया मुद्दतों से थे बेचैन, रज़वियों के दोनों नैन इंतिज़ार रंग लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया हासिदों के सीने पे देखिए गिरी बिजली क़ल्ब-ए-सुन्नी मुस्काया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ज़्ल-ए-मुस्तफ़ा से वो का'बे के बने मेहमाँ वाह क्या शरफ़ पाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया देख कर, ऐ दीवानो ! हुस्न-ए-रू-ए-अख़्तर को चाँद भी है शरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया वाह वाह ! ज़रा देखो हल्क़ा ज़िक्र-ए-अख़्तर का किस-क़दर है गरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया दस्त-ए-शाह-ए-अस्जद से जाम-ए-अज़हरी पीजे कासा फिर से छलकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया ग़ौल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली में ज़लज़ला किया बरपा नज्द जिन से लरज़ाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया साल भर से पर्दे में था समाँ ये नूरानी रुख़ से पर्दा सरकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया सुन्नियो ! चले आओ साया-ए-बरेली में अब्र-ए-नूर बरसाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया 'उर्स-ए-फ़ख़्र-ए-अज़हर की बरकतें हैं ये, अय्यूब ! मेरा क़ल्ब चम...

करम हो करम ताजदार-ए-मदीना / Karam Ho Karam Tajdar-e-Madina

ऐ गुंबद-ए-ख़ज़रा के मकीं ! मेरी मदद कर या फिर ये बता कौन मेरा तेरे सिवा है करम हो करम, ताजदार-ए-मदीना ! करम चाहते हैं करम के भिकारी शहंशाह-ए-कौनैन तयबा के वाली ! मैं क़ुर्बान तुम पर, मेरी जान वारी हबीब-ए-ख़ुदा साक़ी-ए-हौज़-ए-कौसर ! ख़ुदारा ग़ुलामों पे चश्म-ए-करम हो हमें आज दे दो नवासों का सदक़ा कि मुद्दत से ख़ाली है झोली हमारी मेरा दिल भी लब्बैक बोले किसी दिन कभी सब्ज़ गुंबद को देखूँ मैं जा कर मुझे अपने रौज़े पे बुलवा लो, आक़ा ! हैं सारे जहाँ पर निगाहें तुम्हारी मुक़द्दर जो जागे तो इस तरह जागे मदीने मैं जाऊँ तो इस तरह जाऊँ दुरूदों की सौग़ात हो पास मेरे मुहम्मद मुहम्मद लबों पर हो जारी है क़ुरआन सारी किताबों से अफ़ज़ल ख़लिश ने पढ़ा है ये क़ुरआँ में, आक़ा ! सजाया गया सिदरतुल-मुंतहा को फ़लक पर जो पहुँची सवारी तुम्हारी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी ai gumbad-e-KHazra ke makee.n ! meri madad kar ya phir ye bata kaun mera tere siwa hai karam ho karam, taajdaar-e-madina ! karam chaahte hai.n karam ke bhikaari shahenshaah-e-kaunain tayba ke waali ! mai.n qurbaan t...

दुरूद-ए-अहल-ए-बैत | प्यारे नबी की ज़ात पर रब का दुरूद है / Durood-e-Ahl-e-Bait | Pyare Nabi Ki Zaat Par Rab Ka Durood Hai

ली ख़म्सतुन उत़्फ़ी बिहा ह़र्रल-वबाइल-ह़ातिमा अल-मुस्तफ़ा वल-मुर्तद़ा वबना हुमा वल-फ़ातिमा अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद व 'अला सय्यिदिना 'अलिय्यि-व्व-सय्यिदतिना फ़ातिमा व सय्यिदतिना ज़ैनब व सय्यिदिना हसन व सय्यिदिना हुसैन व 'अला आलिही व सह़बिही व बारिक व सल्लिम अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद प्यारे नबी की ज़ात पर रब का दुरूद है सुल्तान-ए-दो-जहान पर सब का दुरूद है अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद या उम्म-ए-अबीहा ! या उम्म-ए-फ़बीहा ! या अशरफ़ुन्निसा ! या फ़ातिमा ज़हरा ! या सय्यिदा ! या ज़हरा ! ज़हरा पे भेजते जो दुरूद-ओ-सलाम हैं वो सच्चे ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हैं, नेक-नाम हैं अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगार ला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार अल्लाह के शेर हैदर-ए-कर्रार पर दुरूद हज़रत हसन-हुसैन के किरदार पर दुरूद अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद ख़ुत्बों ने ज़ैनब के महल-ए-यज़ीद में वो काम किया कोई मरा भी न...

हाजियों के बन रहे हैं क़ाफ़िले फिर या नबी / Hajiyon Ke Ban Rahe Hain Qafile Phir Ya Nabi

हाजियों के बन रहे हैं क़ाफ़िले फिर, या नबी ! फिर नज़र में फिर गए हज के मनाज़िर, या नबी ! कर रहे हैं जाने वाले हज की अब तय्यारियाँ रह न जाऊँ मैं कहीं कर दो करम फिर, या नबी ! आह ! पल्ले ज़र नहीं, रख़्त-ए-सफ़र सरवर ! नहीं तुम बुला लो तुम बुलाने पर हो क़ादिर, या नबी ! किस-क़दर था ख़ुश, मुझे जब पेश आया था सफ़र मुझ को अब की बार भी बुलवाइए फिर, या नबी ! दिल मेरा ग़मगीन है और जान भी है मुज़्तरिब मुर्शिदी का वासिता बुलवाइए फिर, या नबी ! ग़म के बादल छा रहे हैं, आह !  मेरे क़ल्ब पर हाज़िरी की दो इजाज़त मुझ को तुम फिर, या नबी ! गुंबद-ए-ख़ज़रा के जल्वे देखने कब आऊँगा कब तक अब तड़पाओगे तुम मुझ को आख़िर, या नबी ! आप ही अस्बाब, आक़ा ! फिर मुहय्या कीजिए फिर दिखा दीजे मदीने के मनाज़िर, या नबी ! किस तरह तस्कीन दूँगा मैं दिल-ए-ग़मगीन को रह गया गर हाज़िरी से मैं जो क़ासिर, या नबी ! मुझ पे क्या गुज़रेगी, आक़ा ! इस बरस गर रह गया मेरा हाल-ए-दिल तो है सब तुम पे ज़ाहिर, या नबी ! आह ! तयबा से अगर मैं दूर रह कर मर गया रूह भी रंजूर होगी किस-क़दर फिर, या नबी ! मिस्ल-ए-साबिक़ इस बरस भी कीजिए नज़र-ए-करम मैं गुज़िश्ता साल ...

मुझ को दिखा दे मौला तयबा का वो नज़ारा / Mujh Ko Dikha De Maula Tayba Ka Wo Nazara

मुझ को दिखा दे, मौला ! तयबा का वो नज़ारा वो सब्ज़ प्यारा गुंबद, दिलकश हसीं मिनारा वो शहर-ए-मुस्तफ़ा सब शहरों से है मुबारक है रहमतों का दरिया, अनवार का है धारा हसरत है मेरे दिल में शहर-ए-नबी की बेहद जाऊँगा वाँ तड़प कर, हो जाएगा इशारा सिद्दीक़, 'उमर, 'अली और 'उस्मान का है मस्कन उस शहर-ए-ज़ी-क़दर को देखूँ कभी ख़ुदारा वो ख़ाक-ए-पा मुहम्मद आँखों में मैं लगाऊँ तयबा की प्यारी गलियाँ, देखूँ हर इक किनारा उस शहर में भटक कर, सज्जाद ! 'उम्र गुज़रे और ना'तें पढ़ते पढ़ते करता रहूँ गुज़ारा शायर: सज्जाद अहमद (टाइपिस्ट) ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ अनस रज़ा अत्तारी mujh ko dikha de, maula ! tayba ka wo nazaara wo sabz pyaara gumbad, dilkash hasee.n nazaara wo shehr-e-mustafa sab shehro.n se hai mubaarak hai rahmato.n ka dariya, anwaar ka hai dhaara hasrat hai mere dil me.n shehr-e-nabi ki behad jaaunga waa.n ta.Dap kar, ho jaaega ishaara siddiq, 'umar, 'ali aur 'usmaan ka hai maskan us shehr-e-zee-qadar ko dekhu.n kabhi KHudara wo KHaak-e-paa muham...

आई फिर याद मदीने की रुलाने के लिए / Aai Phir Yaad Madine Ki Rulane Ke Liye

आई फिर याद मदीने की रुलाने के लिए दिल तड़प उट्ठा है दरबार में जाने के लिए काश ! मैं उड़ता फिरूँ ख़ाक-ए-मदीना बन कर और मचलता रहूँ सरकार को पाने के लिए ग़म नहीं छोड़ दे ये सारा ज़माना भी मुझे मेरे आक़ा तो हैं सीने से लगाने के लिए मेरे लजपाल ने रुस्वा न कभी होने दिया जब पुकारा उन्हें आए हैं बचाने के लिए ये तो बस उन का करम है कि वो सुन लेते हैं वर्ना ये लब कहाँ फ़रियाद सुनाने के लिए बख़्श दी ना'त की दौलत जो हमें आक़ा ने कितना प्यारा है वसीला उन्हें पाने के लिए फिर मुयस्सर तुझे दीदार-ए-मदीना होगा वो बुलाएँगे तुझे जल्वा दिखाने के लिए मुझ गुनहगार-ओ-ख़ताकार को महशर में, 'अदील ! होंगे मौजूद वो दामन में छुपाने के लिए शायर: अदील सुल्तानी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दी ओवैस रज़ा क़ादरी हाजी मुहम्मद मुश्ताक़ अत्तारी aai phir yaad madine ki rulaane ke liye dil ta.Dap uTTha hai darbaar me.n jaane ke liye kaash ! mai.n u.Dta phiru.n KHaak-e-madina ban kar aur machalta rahu.n sarkaar ko paane ke liye Gam nahi.n chho.D de ye saara zamaana bhi mujhe m...

हम सुन्नी बरेली वाले हैं / Hum Sunni Bareilly Wale Hain

हम सुन्नी बरेली वाले हैं, हम सुन्नी बरेली वाले हैं बस्ती-बस्ती क़रिया-क़रिया, ना'रा लगाने वाले हैं यूँ हम को भगाना भारत से आसान नहीं है दुश्मन का ख़्वाजा पिया अजमेरी की हम चादर चढ़ाने वाले हैं क्यूँ मस्लक-ए-आ'ला-हज़रत का ना'रा न लगाएँ जीते-जी जब कि रज़ा के नाम का हम तो सदक़ा खाने वाले हैं यूँ हम को मिटाना दुनिया से आसान नहीं है अमरिका दीन-ए-नबी की ख़ातिर हम तो सर को कटाने वाले हैं ना'त-ख़्वाँ: सलीम रज़ा पीलीभीती hum sunni bareilly waale hai.n, hum sunni bareilly waale hai.n basti-basti qariya-qariya, naa'ra lagaane waale hai.n yu.n ham ko bhagaana bhaarat se aasaan nahi.n hai dushman ka KHwaja piya ajmeri ki ham chaadar cha.Dhaane waale hai.n kyu.n maslak-e-aa'la-hazrat ka naa'ra na lagaae.n jeete-ji jab ki raza ke naam ka ham to sadqa khaane waale hai.n yu.n ham ko miTaana duniya se aasaan nahi.n hai amrica deen-e-nabi ki KHaatir ham to sar ko kaTaane waale hai.n Naat-Khwaan: Saleem Raza Pilibhiti Hum Sunni Bareilly Wale Hain L...

सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ मदीना मदीना / Sukoon-e-Dil-o-Jaan Madina Madina

अपनी आँखों से मदीने का समाँ देखते हैं कितने ख़ुश-बख़्त हैं जो उन का जहाँ देखते हैं मुझ को मा'लूम है इक दिन वो बुलाएँगे ज़रूर आ'ला अदना मेरे आक़ा जी कहाँ देखते हैं सुकून-ए-दिल-ओ-जाँ मदीना मदीना दुखी दिल का दरमाँ मदीना मदीना तू क़ुर्बां हुआ सरवर-ए-दो-जहाँ पर सो मैं तेरे क़ुर्बां मदीना मदीना मक़ाम-ए-नुमूद-ओ-नुमाइश नहीं ये है ये, क़ल्ब-ए-नादाँ ! मदीना मदीना क़दम बा-अदब और आवाज़ धीमी हों जब पेश मिज़्गाँ मदीना मदीना चमकता दमकता ख़ला से नज़ारा फ़रोज़ाँ दरख़्शाँ मदीना मदीना जो का'बे को जाए, मदीने भी आए नबी का है फ़रमाँ मदीना मदीना वतन से भी बढ़ कर वतन कोई, 'आबिद ! तो कह दूँगा हाँ हाँ मदीना मदीना शायर: आबिद रशीद ना'त-ख़्वाँ: जवेरिआ सलीम apni aankho.n se madine ka samaa.n dekhte hai.n kitne KHush-baKHt hai.n jo un ka jahaa.n dekhte hai.n mujh ko maa'loom hai ik din wo bulaaenge zaroor aa'la adna mere aaqa ji kahaa.n dekhte hai.n sukoon-e-dil-o-jaa.n madina madina dukhi dil ka darmaa.n madina madina tu qurbaa.n huaa sarwar-e-do-jahaa.n par ...

अल-विदा अल-विदा साथियो अल-विदा | ख़त्म आख़िर हुआ ये सफ़र दोस्तो / Al Wida Al Wida Sathiyo Al Wida | Khatm Aakhir Hua Ye Safar Dosto

अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' चश्म-ए-पुर-नम है और दिल ख़फ़ा है मेरा एक दूजे से हम हो रहे हैं जुदा फिर न जाने मिलेंगे नहीं कुछ पता वक़्त-ए-फ़ुर्क़त अचानक है यूँ आ पड़ा कितनी मग़्मूम है आज बाद-ए-सबा दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' ऐ मेरे हम-सफ़र बा-वफ़ा दोस्तो ! याद आओगे मुझ को सदा, दोस्तो ! ये चमन की बहारें फ़ज़ा, दोस्तो ! नक़्श है दिल में हर इक अदा, दोस्तो ! रब सलामत रखे आप सब को सदा दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' मेरे उस्ताद ने है सजाया मुझे रास्ता ख़ैर का है दिखाया मुझे बाप की तरह चलना सिखाया मुझे और चलने के क़ाबिल बनाया मुझे उन की आग़ोश-ए-शफ़क़त मे...

आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूले / Aankhon Ko Wo Pur Kaif Nazare Nahin Bhoole

आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूले वो दिन जो मदीने में गुज़ारे नहीं भूले फिर कीजे करम, या नबी ! हसनैन का सदक़ा शहर आप का ये दर्द के मारे नहीं भूले बेचैन है, इक बार उठे फिर वही उँगली महताब को आक़ा के इशारे नहीं भूले गिर जाऊँ मैं जी चाहे मेरा फिर से भँवर में आक़ा ने दिए थे जो सहारे नहीं भूले इस्लाम के गुलशन को बचाया था जिन्हों ने कर्बल को वो ज़हरा के दुलारे नहीं भूले तयबा की हसीं रात में, फ़ारूक़ी ! हमारी तक़दीर के चमके जो सितारे नहीं भूले शायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी क़ारी शाहिद महमूद aankho.n ko wo pur-kaif nazaare nahi.n bhoole wo din jo madine me.n guzaare nahi.n bhoole phir keeje karam, ya nabi ! hasnain ka sadqa shehr aap ka ye dard ke maare nahi.n bhoole bechain hai, ik baar uThe phir wahi ungli mahtaab ko aaqa ke ishaare nahi.n bhoole gir jaau.n mai.n jee chaahe mera phir se bhanwar me.n aaqa ne diye the jo sahaare nahi.n bhoole islaam ke gulshan ko bachaaya tha jinho.n ne karbal ko wo zahra ke dulaare nahi.n bhoole ta...

दिखा दे इलाही वो प्यारा मदीना | मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना / Dikha De Ilahi Wo Pyara Madina | Muhammad Muhammad Madina Madina

दिखा दे, इलाही ! वो प्यारा मदीना इलाही ! बना दे मदीना ये सीना मैं मर जाऊँ मेरे कफ़न पे ये लिखना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना चली जिस तरफ़ से नबी की सवारी शजर ने, हजर ने दी झुक कर सलामी सभी कर रहे हैं नबी की ग़ुलामी नबी ने सिखाया हर इक शय को जीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना खड़े हैं सवाली दर-ए-मुस्तफ़ा पर वहाँ कोई आ'ला न कोई तवंगर चलो आओ माँगें हबीब-ए-ख़ुदा से कि हाथों में है जिन के सारा ख़ज़ीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना बुला लो मदीने में, आक़ा ! बुला लो गिरा जा रहा हूँ, सँभालो सँभालो ख़ता-कार हूँ मुझ को, आक़ा ! निभा लो लगा दो मेरा पार, आक़ा ! सफ़ीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना किया जब भी करते थे आक़ा 'इबादत तो क़ुरआन करता था उन की तिलावत ये ऐसा ख़ुदा की क़सम मो'जिज़ा है मिला इन के सदक़े में बख़्शिश का ज़ीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना मुहम्मद मुहम्मद मदीना मदीना ये आँखों का रोना, ये दिल का तड़पना तसव्वुर में आक़ा के दर से लिपट...

मुझ को ये कह के सताते हैं ज़माने वाले / Mujh Ko Ye Keh Ke Satate Hain Zamane Wale

मुझ को ये कह के सताते हैं ज़माने वाले कब बुलाएँगे तुझे सब को बुलाने वाले रास्ता रोक न पाएँगे ज़माने वाले जब मदीने में बुलाएँगे बुलाने वाले जब चलूँ शहर-ए-मदीना से तो सरकार कहें लौट आ जा, ओ मेरे शहर से जाने वाले मुझ को इस बात का हर रात यक़ीं रहता है आप हैं आज मेरे ख़्वाब में आने वाले आप को देख के महशर में कहेंगे 'आसी आ गए हम को जहन्नम से बचाने वाले काश ! महशर में ये कह कह के बुलाएँ आक़ा आ इधर आ मेरे ना'लैन उठाने वाले दीन की राह में घर-बार लुटा देते हैं ऐसे होते हैं मुहम्मद के घराने वाले अब कोई ख़ौफ़ नहीं मुझ को, ज़माने वालो ! मेरे ख़्वाजा हैं मेरी लाज बचाने वाले हश्र तक फूले-फले मस्लक-ए-आ'ला-हज़रत मिट गए ख़ुद ही ज़माने से मिटाने वाले उन से कह दो कि वो आईने में चेहरा देखें अपने जैसा मेरे आक़ा को बताने वाले ना'त-ख़्वाँ: अंबर मुशाहिदी सैफ़ रज़ा कानपुरी mujh ko ye keh ke sataate hai.n zamaane waale kab bulaaenge tujhe sab ko bulaane waale raasta rok na paaenge zamaane waale jab madine me.n bulaaenge bulaane waale jab chalu.n shehr-e-madina se to sar...