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मुझ को मिली है इज़्ज़त अत्तार की बदौलत / Mujh Ko Mili Hai Izzat Attar Ki Badaulat

मुझ को मिली है 'इज़्ज़त 'अत्तार की बदौलत चमकी है मेरी क़िस्मत 'अत्तार की बदौलत अपना बनाया मुझ को, सीने लगाया मुझ को जो भी है मेरी वुक़'अत 'अत्तार की बदौलत 'अत्तार का मैं सग हूँ, समझो न दर-ब-दर हूँ क्या ख़ूब मेरी निस्बत 'अत्तार की बदौलत सर पर सजे 'अमामे, पुर-नूर दाढ़ियाँ हैं ज़िंदा हुई है सुन्नत 'अत्तार की बदौलत अल्लाह ! मुस्तफ़ा की, मेरे ग़ौस और रज़ा की पैदा हो दिल में उल्फ़त 'अत्तार की बदौलत बिगड़ी बना दे, मौला ! हर ग़म मिटा दे, मौला ! पूरी हो मेरी हाजत 'अत्तार की बदौलत है बिलाल-ए-क़ादरी की आख़िर यही तमन्ना रौशन हो इस की तुर्बत 'अत्तार की बदौलत ना'त-ख़्वाँ: अब्दुल हबीब अत्तारी mujh ko mili hai 'izzat 'attar ki badaulat chamki hai meri qismat 'attar ki badaulat apna banaaya mujh ko, seene lagaaya mujh ko jo bhi hai meri wuq'at 'attar ki badaulat 'attar ka mai.n sag hu.n, samjho na dar-ba-dar hu.n kya KHoob meri nisbat 'attar ki badaulat sar par saje 'amaame, pur-noor daa.Dhiyaa...

ऐ मर्कज़-ए-इरफ़ान फ़िदा तुझ पे मेरी जान | अत्तार मेरी जान / Aye Markaz-e-Irfan Fida Tujh Pe Meri Jaan | Attar Meri Jaan

'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! ऐ मर्कज़-ए-'इरफ़ान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान रौशन है तेरी ज़ात ज़िया-ए-मदनी से ऐ माह-ए-दरख़्शान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान ऐ मर्कज़-ए-'इरफ़ान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! जो देखता है तेरा दिल-अफ़रोज़ तबस्सुम हो जाता है क़ुर्बान, फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान ऐ मर्कज़-ए-'इरफ़ान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान भूली नहीं दुनिया को तेरी 'इश्क़ में डूबी वो महफ़िल-ए-मुल्तान, फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान ऐ मर्कज़-ए-'इरफ़ान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार-ए-ख़ुदा-दान ! फ़िदा तुझ पे मेरी जान 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी जान ! 'अत्तार मेरी ...

मस्लक का तू इमाम है इल्यास क़ादरी / Maslak Ka Tu Imam Hai Ilyas Qadri

मस्लक का तू इमाम है, इल्यास क़ादरी ! तदबीर तेरी ताम है, इल्यास क़ादरी ! फ़िक्र-ए-रज़ा को कर दिया 'आलम पे आशकार ये तेरा ऊँचा काम है, इल्यास क़ादरी ! सरमस्ती-ए-रज़ा की हर 'आलम में धूम है साक़ी-ए-दौर-ए-जाम है, इल्यास क़ादरी ! सुन्नत की ख़ुश्बूओं से ज़माना महक उठा फ़ैज़ान तेरा आम है, इल्यास क़ादरी ! अमरीका, यूरप, एशिया, अफ़्रीक़ा हर ज़मीं करती तुझे सलाम है, इल्यास क़ादरी ! तन्हा चला तू साथ तेरे हो गया जहाँ मीठा तेरा कलाम है, इल्यास क़ादरी ! सर पर 'अमामा, माथे पे सज्दों का नूर है जो भी तेरा ग़ुलाम है, इल्यास क़ादरी ! है बदर-ए-रज़वी भी तेरे किरदार का असीर इस का तुझे सलाम है, इल्यास क़ादरी ! शायर: मुफ़्ती बदर-उल-क़ादरी रज़वी मिस्बाही ना'त-ख़्वाँ: जुनैद शैख़ अत्तारी हसनैन रज़ा अत्तारी maslak ka tu imaam hai, ilyas qadri ! tadbeer teri taam hai, ilyas qadri ! fikr-e-raza ko kar diya 'aalam pe aashkaar ye tera uncha kaam hai, ilyas qadri ! sarmasti-e-raza ki har 'aalam me.n dhoom hai saaqi-e-daur-e-jaam hai, ilyas qadri ! sunnat ki KHushbuo.n se zamaana ma...

ये वक़्त की निदा है रमज़ान जा रहा है | अल-वदा माह-ए-रमज़ाँ / Ye Waqt Ki Nida Hai Ramzan Ja Raha Hai | Alvida Mah-e-Ramzan

अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा है रब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है नेकी बस इक कमाओ, लाखों में अज्र पाओ अल्लाह की रहमतों का ला-फ़ानी सिलसिला है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अब ग़फ़लतों को छोड़ो, मालिक से रिश्ता जोड़ो अगले बरस में क्या हो, कब कौन जानता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! माह-ए-सियाम का बस इतना सा फ़लसफ़ा है शैतान को सज़ा है, रहमान की 'अता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! शर्मिंदगी के आँसू रहमत के अब्र लाएँ बंदों का अपने रब से क्या ख़ूब राब्ता है अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! अल-वदा' माह-ए-रमज़ाँ ! ये वक़्त की निदा है, रमज़ान जा रहा है रब को मना लो तुम भी ये दिल की इल्तिजा है शा...

पत्ता पत्ता बूटा बूटा ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया / Patta Patta Boota Boota Zikr-e-Khuda Mein Khoya

पत्ता पत्ता, बूटा बूटा ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया डाली डाली, ग़ुंचा ग़ुंचा ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया पर्बत पर्बत, धरती धरती, अम्बर अम्बर वासिफ़ सहरा सहरा, दरिया दरिया ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया क़रिया क़रिया, वादी वादी, गुलशन गुलशन ज़ाकिर क़तरा क़तरा, ज़र्रा ज़र्रा ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया क़ुमरी क़ुमरी, तूती तूती, बुलबुल बुलबुल हामिद चिड़िया मैना हर परवाना ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया रिम-झिम रिम-झिम गिरती बारिश गीत उसी के गाए चलता दरिया, बहता झरना ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया सुंदर सुंदर दिल के अंदर नाम उजागर उस के मेरी जाँ का गोशा गोशा ज़िक्र-ए-ख़ुदा में खोया शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी फ़रहान अली क़ादरी साहिल रज़ा क़ादरी patta patta, booTa booTa zikr-e-KHuda me.n khoya Daali Daali, Guncha Guncha zikr-e-KHuda me.n khoya parbat parbat, dharti dharti, ambar ambar waasif sehra sehra, dariya dariya zikr-e-KHuda me.n khoya qariya qariya, waadi waadi, gulshan gulshan zaakir qatra qatra, zarra zarra zikr-e-KHuda me.n khoya qumri qumri, tooti tooti, bulbul bulbu...

इश्क़ से माला-माल होते हैं | उन के नौकर कमाल होते हैं / Ishq Se Malamal Hote Hain | Un Ke Naukar Kamal Hote Hain

कमाल होते हैं, कमाल होते हैं कमाल होते हैं, कमाल होते हैं 'इश्क़ से माला-माल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं कमाल होते हैं, कमाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं अपने मँगतों के सर पे शाम-ओ-सहर बीबी ज़हरा के लाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं 'इश्क़ से माला-माल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं मेरे लजपाल के सख़ी दर से सब के पूरे सवाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं कमाल होते हैं, कमाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं उन का सदक़ा जो लोग खाते हैं वही टुकड़े हलाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं 'इश्क़ से माला-माल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं 'इश्क़-ए-ख़ैर-उल-वरा में जब देखो आगे आगे बिलाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं कमाल होते हैं, कमाल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं 'आशिक़ों को, सुहैल फ़ारूक़ी ! यार ही के ख़याल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं 'इश्क़ से माला-माल होते हैं उन के नौकर कमाल होते हैं शायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ी ना'त-ख़्वाँ: उमैर ज़ुबैर kamaal hote hai.n, kamaal hote hai.n kamaal hote hai.n...

क़ल्ब-ए-आशिक़ है अब पारा पारा | अलविदा अलविदा माह-ए-रमज़ाँ / Qalb-e-Aashiq Hai Ab Para Para | Alvida Alvida Mahe Ramzan

क़ल्ब-ए-'आशिक़ है अब पारा पारा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! कुल्फ़त-ए-हिज्र-ओ-फ़ुर्क़त ने मारा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! तेरे आने से दिल ख़ुश हुआ था और ज़ौक़-ए-'इबादत बढ़ा था आह ! अब दिल पे है ग़म का ग़लबा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! मस्जिदों में बहार आ गई थी जूक़-दर-जूक़ आते नमाज़ी हो गया कम नमाज़ों का जज़्बा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! बज़्म-ए-इफ़्तार सजती थी कैसी ! ख़ूब सहरी की रौनक़ भी होती सब समाँ हो गया सूना सूना अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! तेरे दीवाने अब रो रहे हैं मुज़्तरिब सब के सब हो रहे हैं हाए ! अब वक़्त-ए-रुख़्सत है आया अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! तेरा ग़म हम को तड़पा रहा है आतिश-ए-शौक़ भड़का रहा है फट रहा है तेरे ग़म में सीना अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! याद रमज़ाँ की तड़पा रही है आँसूओं की झड़ी लग गई है कह रहा है ये हर एक क़तरा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ाँ ! हसरता ! माह-ए-रमज़ाँ की रुख़्सत क़ल्ब-ए-'उश्शाक़ पर है क़ियामत कौन देगा उन्हें अब दिलासा अल-वदा' अल-वदा', माह-ए-रमज़ा...

या अल्लाह या रहमान या रहीम या हय्यु या क़य्यूम / Ya Allah Ya Rahman Ya Rahim Ya Hayyu Ya Qayyum

अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अव्वल हम्द सना इलाही जो मालिक हर हर दा उस दा नाम चतारण वाला किसे मैदान न हर दा या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! रहमत दा दरिया, इलाही ! हर दम वगदा तेरा जे इक क़तरा बख़्शे मैनूँ, कम बण जावे मेरा या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! रहमत दा मींह पा, ख़ुदाया ! बाग़ सुका कर हर्या बूटा आस उमीद मेरी दा कर दे मेवे भर्या या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! 'अद्ल करें ते थर थर कंबण उचियाँ शानाँ वाले फ़ज़्ल करें ते बख़्शे जासण मैं वर्गे मुँह काले या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! अल्लाह हू अल्लाह हू ! जे मैं वेखाँ 'अमलाँ वल्ले, कख नइयों मेरे पल्ले जे मैं वेखाँ रहमत वल्ले, बल्ले बल्ले बल्ले या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या हय्यु या क़य्यूम ! शा...

शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है / Shaah-e-Deen Mehrban Mustafa Hai

मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! मुस्तफ़ा ! शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है मम्बा'-ए-फ़ज़्ल-ए-रब्ब-ए-'उला है मख़ज़न-ए-हर-ज़माँ मुस्तफ़ा है ज़ुल्मतें कुफ़्र की कट गई हैं रौशनी हर तरफ़ छा गई है नूर-ए-हक़ का हसीं आईना है रहमत-ए-बे-कराँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है जिस का नक़्श-ए-क़दम सादगी है वो नबी ज़ीस्त की ताज़गी है दो जहाँ का वही आसरा है ज़ीनत-ए-गुल्सिताँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है हक़ का पैग़ाम जिस की ज़ुबाँ है नूर का इक हसीं कहकशाँ है रहबर-ओ-पेशवा, रहनुमा है रश्क-ए-अर्ज़-ओ-समाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है जिस की सूरत कमाल-ए-नुबुव्वत जिस की सीरत जमाल-ए-हक़ीक़त हक़ की पहचान का रास्ता है सरवर-ए-दो-जहाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-कौन-ओ-मकाँ मुस्तफ़ा है लब पे ना'त-ए-नबी की सदा है दिल में याद-ए-नबी की ज़िया है सोज़-ए- ग़ालिब की अब ये दवा है राहत-ए-क़ल्ब-ओ-जाँ मुस्तफ़ा है शाह-ए-दीं मेहरबाँ मुस्तफ़ा है फ़ख़्र-ए-...

सैर-ए-गुलशन कौन देखे दश्त-ए-तयबा छोड़ कर / Sair-e-Gulshan Kaun Dekhe Dasht-e-Tayba Chhod Kar

सैर-ए-गुलशन कौन देखे दश्त-ए-तयबा छोड़ कर सू-ए-जन्नत कौन जाए दर तुम्हारा छोड़ कर सरगुज़श्त-ए-ग़म कहूँ किस से तेरे होते हुए किस के दर पर जाऊँ तेरा आस्ताना छोड़ कर बे-लिक़ा-ए-यार उन को चैन आ जाता अगर बार बार आते न यूँ जिब्रील सिदरा छोड़ कर कौन कहता है दिल-ए-बे-मुद्द'आ है ख़ूब चीज़ मैं तो कोड़ी को न लूँ उन की तमन्ना छोड़ कर मर ही जाऊँ मैं अगर इस दर से जाऊँ दो क़दम क्या बचे बीमार-ए-ग़म क़ुर्ब-ए-मसीहा छोड़ कर किस तमन्ना पर जिएँ, या रब ! असीरान-ए-क़फ़स आ चुकी बाद-ए-सबा बाग़-ए-मदीना छोड़ कर बख़्शवाना मुझ से 'आसी का रवा होगा किसे किस के दामन में छुपूँ दामन तुम्हारा छोड़ कर ख़ुल्द कैसा ? नफ़्स-ए-सरकश ! जाऊँगा तयबा को मैं बद-चलन हट कर खड़ा हो मुझ से रस्ता छोड़ कर ऐसे जल्वे पर करूँ मैं लाख हूरों को निसार क्या ग़रज़ क्यूँ जाऊँ जन्नत को मदीना छोड़ कर हश्र में एक एक का मूँह तकते फिरते हैं 'अदू आफ़तों में फँस गए उन का सहारा छोड़ कर मर के जीते हैं जो उन के दर पे जाते हैं, हसन ! जी के मरते हैं जो आते हैं मदीना छोड़ कर शायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी साबिर रज़ा अज़ह...

वो नबियों में सब से बड़ी शान वाले | हमारा नबी सब से प्यारा नबी / Wo Nabiyon Mein Sab Se Badi Shan Wale | Hamara Nabi Sab Se Pyara Nabi

हमारा नबी सब से प्यारा नबी हमारा नबी सब से प्यारा नबी वो नबियों में सब से बड़ी शान वाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले मुज़म्मिल, मुदस्सिर, वो यासीन-ओ-ताहा हैं बा'द-अज़-ख़ुदा के वो रुत्बे में आ'ला मिलेंगे तुम्हें हर वरक़ पर हवाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! मुहम्मद हमारे हसीं ख़ूब-तर हैं वो नबियों में अफ़ज़ल, वो आ'ला बशर हैं वो इक शब में 'अर्श-ए-बरीं जाने वाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले वो नबियों में सब से बड़ी शान वाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले वो महशर में उम्मत का बन कर सहारा उसी के बिना तो नहीं है गुज़ारा पिलाएँगे कौसर के सब को पियाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले या नबी ! या नबी ! या नबी ! या नबी ! नबी की इहानत नहीं है गवारा मुहम्मद से उल्फ़त है ईमाँ हमारा मुहम्मद पे दिल से फ़िदा हम जियाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले वो नबियों में सब से बड़ी शान वाले जहाँ भर में उन से हैं हर-सू उजाले वो आए तो वहदत का फ़रमान समझे वो आए तो इंसाँ को इंसान समझे दिलों से जहालत के सब टूटे ताले जहाँ भर म...