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आक़ा हमारी फ़िक्र को कासा अता करें / Aaqa Hamari Fikr Ko Kasa Ata Karen

आक़ा ! हमारी फ़िक्र को कासा 'अता करें आक़ा ! सदा ग़रीब है, लहजा 'अता करें आक़ा ! शिकम की भूक ने अँधा बना दिया आक़ा ! दयार-ए-नूर का टुकड़ा 'अता करें किस तरह रोज़-ए-हश्र उठाऊँगा अपना सर आक़ा ! गुनाहगार हूँ, पर्दा 'अता करें नज़रें झुका के गुज़रूँ मवाजह शरीफ़ से आक़ा ! गदा-ए-दर को सलीक़ा 'अता करें आक़ा ! हमारी क़ौम से इंसाफ़ खो गया आक़ा ! 'उमर के नाम का सदक़ा 'अता करें ज़ुल्म-ओ-सितम के बा'द भी लब पर हो या नबी आक़ा ! बिलाल जैसा कलेजा 'अता करें फिर से यज़ीदियत की हवा तेज़ हो गई आक़ा ! हुसैन जैसा सहारा 'अता करें आक़ा ! हमारे बच्चें हों हसनैन के ग़ुलाम बेटी कनीज़-ए-फ़ातिमा-ज़हरा 'अता करें आक़ा ! जनाब-ए-अम्मी-ख़दीजा के नाम पर आक़ा ! हमारी माओं को पर्दा 'अता करें आक़ा ! 'अता हो दर्द-ए-मसीहाई आप का आक़ा ! निगाह मुर्दा है, जल्वा 'अता करें मैं भी बहिश्त-ए-ख़ुल्द का नक़्शा बनाऊँगा आक़ा ! मुझे भी नक़्श-ए-कफ़-ए-पा 'अता करें दो-चार अश्क बूँद से तस्कीन न मिली आक़ा ! हमारी आँखों को दरिया 'अता करें आक़ा ! बहुत सताया है दुनिया की चाह ने आक़ा ! हमारे 'इश्क़

न हो आराम जिस बीमार को सारे ज़माने से / Na Ho Aaram Jis Bimar Ko Sare Zamane Se

न हो आराम जिस बीमार को सारे ज़माने से उठा ले जाए थोड़ी ख़ाक उन के आस्ताने से तुम्हारे दर के टुकड़ों से पड़ा पलता है इक 'आलम गुज़ारा सब का होता है इसी मोहताज-ख़ाने से शब-ए-असरा के दूल्हा पर निछावर होने वाली थी नहीं तो क्या ग़रज़ थी इतनी जानों के बनाने से कोई फ़िरदौस हो या ख़ुल्द हो हम को ग़रज़ मतलब लगाया अब तो बिस्तर आप ही के आस्ताने से न क्यूँ उन की तरफ़ अल्लाह सौ सौ प्यार से देखे जो अपनी आँखें मलते हैं तुम्हारे आस्ताने से तुम्हारे तो वो एहसाँ और ये ना-फ़रमानियाँ अपनी हमें तो शर्म सी आती है तुम को मुँह दिखाने से बहारे ख़ुल्द सदक़े हो रही है रू-ए-'आशिक़ पर खिली जाती हैं कलियाँ दिल की तेरे मुस्कुराने से ज़मीं थोड़ी सी दे दे बहर-ए-मदफ़न अपने कूचे में लगा दे, मेरे प्यारे ! मेरी मिट्टी भी ठिकाने से पलटता है जो ज़ाइर उस से कहता है नसीब उस का अरे ग़ाफ़िल ! क़ज़ा बेहतर है याँ से फिर के जाने से बुला लो अपने दर पर अब तो हम ख़ाना-बदोशों को फिरें कब तक ज़लील-ओ-ख़्वार दर दर बे-ठिकाने से न पहुँचे उन के क़दमों तक, न कुछ हुस्न-ए-'अमल ही है हसन ! क्या पूछते हो हम गए गुज़रे ज़माने से शायर: मौलाना

अब्र-ए-करम गेसू-ए-मुहम्मद / Abr-e-Karam Gesoo-e-Muhammad

अब्र-ए-करम गेसू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम दोनों हरम अब्रू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सब से अनोखा मू-ए-मुहम्मद सब से निराली कू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सब की नज़र है सू-ए-का'बा का'बा तके है रू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम का'बे को किस ने बनाया क़िब्ला का'बे का का'बा रू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सज्दा-ए-सर है सू-ए-का'बा सज्दा-ए-दिल है सू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम सारे चमन में किस की ख़ुश्बू ख़ुश्बू है ख़ुश्बू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम किस की चमक है पैकर-ए-गिल में गुल में खिला है रू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम धारे चले हर ऊँगली से उन की देखो वो निकली जू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम किस का मू देता है गवाही मू-ए-मुहम्मद, मू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम ज़िंदा है वल्लाह ! ज़िंदा है वल्लाह ! जान-ए-दो-'आलम रू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम भीनी भीनी ख़ुश्बू लहकी खुल गए जब गेसू-ए-मुहम्मद सल्लल्लाहु 'अल

करम माँगता हूँ अता माँगता हूँ | इलाही मैं तुझ से दुआ माँगता हूँ / Karam Mangta Hoon Ata Mangta Hoon | Ilahi Main Tujh Se Dua Mangta Hoon

करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ 'अता कर तू शान-ए-करीमी का सदक़ा 'अता कर दे शान-ए-रहीमी का सदक़ा न माँगूँगा तुझ से तो माँगूँगा किस से ? तेरा हूँ, मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ जो मुफ़्लिस हैं उन को तू दौलत 'अता कर जो बीमार हैं उन को सेहत 'अता कर मरीज़ों की ख़ातिर शिफ़ा माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ मेरी जो बहन भी कुँवारी है, मौला ! उसे नेक रिश्ता 'अता कर दे, मौला ! मैं सदक़ा-ए-ज़हरा सदा माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ जो नादार हैं, कुछ नहीं जिन के पल्ले उन्हें भी दिखा दे हरम के तू जल्वे हुज़ूरी हो सब की, दु'आ माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ करम माँगता हूँ, 'अता माँगता हूँ इलाही ! मैं तुझ से दु'आ माँगता हूँ वतन के भड़कते

या रब ये करम कर दे दीदार-ए-मुहम्मद हो | दीदार-ए-आक़ा / Ya Rab Ye Karam Kar De Deedar-e-Muhammad Ho | Deedar-e-Aaqa

दीदार-ए-आक़ा, दीदार-ए-मौला, दीदार-ए-आक़ा या रब ! ये करम कर दे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो आँखों में नमी ले कर, डरते हुए क़दमों से रौज़े पे रुकूँ जा कर, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो या रब ! ये करम कर दे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो मरते ही 'अता मुझ को सज्दा-ए-इलाही हो 'अर्शों से जो रूह लौटे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो या रब ! ये करम कर दे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो सहाबा के लिए तेरे महबूब की महफ़िल थी तपती मेरी रूह को भी, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो या रब ! ये करम कर दे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो सुन्नत पे 'अमल-पैरा न 'इश्क़ में कामिल हूँ दिल फिर भी मगर चाहे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो या रब ! ये करम कर दे, दीदार-ए-मुहम्मद हो दीदार-ए-मुहम्मद हो, दीदार-ए-मुहम्मद हो शायर: शहज़ाद अली नशीद-ख़्वाँ: ओवैस-उल-हसन

दर्द-ए-दिल कर मुझे अता या रब / Dard-e-Dil Kar Mujhe Ata Ya Rab

दर्द-ए-दिल कर मुझे 'अता, या रब ! दे मेरे दर्द की दवा, या रब ! लाज रख ले गुनहगारों की नाम रहमान है तेरा, या रब ! 'ऐब मेरे न खोल महशर में नाम सत्तार है तेरा, या रब ! बे-सबब बख़्श दे, न पूछ 'अमल नाम ग़फ़्फ़ार है तेरा, या रब ! ज़ख़्म गहरा सा तेग़-ए-उल्फ़त का मेरे दिल को भी कर 'अता, या रब ! यूँ गुमूँ मैं कि तुझ से मिल जाऊँ यूँ गुमा, इस तरह मिला, या रब ! भूल कर भी न आए याद अपनी मेरे दिल से मुझे भुला, या रब ! ख़ाक कर अपने आस्ताने की यूँ हमें ख़ाक में मिला, या रब ! मेरी आँखें मेरे लिए तरसें मुझ से ऐसा मुझे छुपा, या रब ! टीस कम हो न दर्द-ए-उल्फ़त की दिल तड़पता रहे मेरा, या रब ! न भरें ज़ख़्म-ए-दिल हरे हो कर रहे गुलशन हरा-भरा, या रब ! तेरी जानिब ये मुश्त-ए-ख़ाक उड़े भेज ऐसी कोई हवा, या रब ! दाग़-ए-उल्फ़त की ताज़गी न घटे बाग़ दिल का रहे हरा, या रब ! सबक़त रहमती 'अला ग़दबी जब से तू ने सुना दिया, या रब ! आसरा हम गुनहगारों का और मज़बूत हो गया, या रब ! है अना 'इंद ज़न्नी 'अब्दी बी मेरे हर दर्द की दवा, या रब ! तू ने मेरे ज़लील हाथों में दामन-ए-मुस्तफ़ा दिया, या रब !

रंज-ओ-अलम ने मारा कर दे करम ख़ुदाया / Ranj-o-Alam Ne Mara Kar De Karam Khudaya

कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! रंज-ओ-अलम ने मारा, कर दे करम ख़ुदाया ! तेरा ही है सहारा, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! वक़्त-ए-अजल मुयस्सर दीदार-ए-मुस्तफ़ा हो यूँ ख़ातिमा हो मेरा, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! हालात-ए-पुर-अलम ने जीना किया है मुश्किल आफ़ात ने है घेरा, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! आलाइशें गुनाहों की दूर कर दे धो कर 'अफ़्व-ओ-करम का जाला, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! दुनिया-ओ-क़ब्र-ओ-महशर हर-जा 'अता हो मुझ को फ़ज़्ल-ओ-करम का साया, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! हो 'आफ़ियत मुक़द्दर, ईमाँ रहे सलामत रहमत से पाऊँ हिस्सा, कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम ख़ुदाया ! कर दे करम

गुनाहों की आदत छुड़ा मेरे मौला / Gunahon Ki Aadat Chhuda Mere Maula

गुनाहों की 'आदत छुड़ा, मेरे मौला ! मुझे नेक इंसाँ बना, मेरे मौला ! जो तुझ को, जो तेरे नबी को पसंद है मुझे ऐसा बंदा बना, मेरे मौला ! तू मस्जूद मेरा, मैं साजिद हूँ तेरा तू मालिक, मैं बंदा तेरा, मेरे मौला ! तू लेगा अगर 'अद्ल से काम अपने मैं हूँ मुस्तहिक़ नार का, मेरे मौला ! जो रहमत तेरी शामिल-ए-हाल हो तो ठिकाना है जन्नत मेरा, मेरे मौला ! तुझे तो ख़बर है मैं कितना बुरा हूँ तू 'ऐबों को मेरे छुपा, मेरे मौला ! मेरी ता-क़यामत जो नस्लें हों, या रब ! हों सब 'आशिक़-ए-मुस्तफ़ा, मेरे मौला ! न मोहताज कर तू जहाँ में किसी का मुझे मुफ़्लिसी से बचा, मेरे मौला ! हैं का'बे पे नज़रें 'उबैद-ए-रज़ा की हो मक़बूल हर इक दु'आ, मेरे मौला ! शायर: ओवैस रज़ा क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी gunaaho.n ki 'aadat chhu.Da, mere maula ! mujhe nek insaa.n bana, mere maula ! jo tujh ko, jo tere nabi ko pasand hai mujhe aisa banda bana, mere maula ! tu masjood mera, mai.n saajid hu.n tera tu maalik, mai.n banda tera, mere maula ! tu leg

गुनाहों पे हूँ शर्मिंदा इलाही दरगुज़र कर दे / Gunahon Pe Hun Sharminda Ilahi Darguzar Kar De

गुनाहों पे हूँ शर्मिंदा, इलाही ! दरगुज़र कर दे बड़ा मुजरिम हूँ मैं तेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे ख़ता कोई नहीं छोड़ी, कभी 'इस्याँ नहीं छोड़ा बस अब करता हूँ मैं तौबा, इलाही ! दरगुज़र कर दे खिलौना हाथ का अपने बना रक्खा है शैताँ ने बना ले अपना तू बंदा, इलाही ! दरगुज़र कर दे तेरे देने से, ऐ मौला ! तेरा तो कुछ न बिगड़ेगा मगर बन जाएगा मेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे अगर मुझ पर तेरी रहमत न हो इक पल, ख़ुदा-वंदा ! तो हो जाऊँगा मैं रुस्वा, इलाही ! दरगुज़र कर दे ख़ताएँ याद कर के आज मैं आँसू बहाता हूँ तू रहमत का बहा दरिया, इलाही ! दरगुज़र कर दे भिकारी बन के आया हूँ, तू अपने दर से, ऐ दाता ! मुझे ख़ाली नहीं लौटा, इलाही ! दरगुज़र कर दे वो जिस पे चल के बंदों ने तेरा इन'आम पाया है दिखा मुझ को भी वो रस्ता, इलाही ! दरगुज़र कर दे सँवर जाए मेरी दुनिया, सँवर जाए मेरी 'उक़्बा जो हो जाए करम तेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे नबी का वासिता दे कर, सदा दे है तेरा जौहर रज़ा का दे दे परवाना, इलाही ! दरगुज़र कर दे शायर: क़ारी जमशेद जौहर नशीद-ख़्वाँ: क़ारी जमशेद जौहर हाफ़िज़ अब्दुल बासित हस्सानी gunaah

ऐ ज़हरा के बाबा सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए / Aye Zahra Ke Baba Sunen Iltija Madina Bula Lijiye

ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा मदीना बुला लीजिए सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को ये दुनिया बहुत आज़माती है मुझ को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआ मदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे-क़रारी न कट जाए, आक़ा ! यूँही 'उम्र सारी कहाँ ज़िंदगानी का कुछ है पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुज़ूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी, सरकार-ए-'आली ! कहाँ जाए, आक़ा ! ये मँगता भला मदीना बुला लीजिए वो रमज़ान तेरा, वो दालान तेरा वो अज्वा, वो ज़मज़म, ये मेहमान तेरा तेरे दर पे इफ़्तार का वो मज़ा मदीना बुला लीजिए जहाँ के सभी ज़र्रे शम्स-ओ-क़मर हैं जहाँ पे अबू-बक्र-ओ-'उस्माँ, 'उमर हैं जहाँ जल्वा-फ़रमा हैं हम्ज़ा चचा मदीना बुला लीजिए हुआ है जहाँ से जहाँ ये मुनव्वर जहाँ आए जिब्रील क़ुरआन ले कर मुझे देखना है वो ग़ार-ए-हिरा मदीना बुला लीजिए जिसे सब हैं कहते नक़ी ख़ाँ का बेटा वो अहमद रज़ा है बरेली में लेटा उसी आ'ला

हुज़ूर आप के दर का मैं अदना गदा हूँ | हुज़ूर आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ / Huzoor Aap Ke Dar Ka Main Adna Gada Hun | Huzoor Aap Ke Tukdon Par Jee Raha Hun

हुज़ूर ! आप के दर का मैं अदना गदा हूँ मेरे दम में, आक़ा ! ये दम आप का है हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ मैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है मैं सब से बुरा हूँ, मैं ये मानता हूँ हुज़ूर ! आप का हूँ, यही जानता हूँ बड़ा नाज़ है मुझ को मेरे मुस्तफ़ा पर 'अता जो किया है भरम आप का है हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ मैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है फ़लक़ है क्यूँ रौशन ज़रा ये तो सोचो ज़माना है रौशन ज़रा ये तो समझो यहाँ पर भी, आक़ा ! क़दम आप का है वहाँ पर भी आक़ा ! क़दम आप का है हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ मैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है ये क़ुरआँ जो रब ने नाज़िल किया है हुज़ूर ! आप का ही क़सीदा लिखा है ख़ुदा कह रहा है हबीब-ए-ख़ुदा से ये लोह भी तुम्हारी, क़लम आप का है हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ मैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है उसे गर्दिशें अब मिटाएँगी कैसे हवाएँ उसे अब बुझाएँगी कैसे दिया बन के जलता है सीने में हर-दम मेरे मुस्तफ़ा ! ये जो ग़म आप का है हुज़ूर ! आप के टुकड़ों पर जी रहा हूँ मैं कुछ भी नहीं हूँ, करम आप का है ज़ुबाँ पे ये जिस के ये हर-दम सदा हो मदद अल-मद