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जश्न-ए-नबी करेंगे बड़ी धूम-धाम से | आला हज़रत के दीवाने / Jashn-e-Nabi Karenge Badi Dhoom Dhaam Se | Ala Hazrat Ke Deewane

जश्न-ए-नबी करेंगे बड़ी धूम-धाम से मतलब नहीं है हम को यज़ीदी निज़ाम से तकलीफ़ जिस को होगी दुरूद-ओ-सलाम से तकलीफ़ उस को देंगे रज़ा के कलाम से आ'ला हज़रत के दीवाने आ'ला हज़रत के दीवाने सुन कर रज़ा का ज़िक्र तलबगार हो गए जो सो रहे थे नींद से बेदार हो गए जब बात आ गई है नबी के वक़ार पर ये जान लुटाने को भी तय्यार हो गए आ'ला हज़रत के दीवाने आ'ला हज़रत के दीवाने मर्कज़ मेरा बरेली है मेरी वफ़ा के साथ बीमार चल रहे हैं मुकम्मल शिफ़ा के साथ गुस्ताख़ देख लेंगे ये मैदान-ए-हश्र में हैं क़ादरी फ़क़ीर, रहेंगे रज़ा के साथ आ'ला हज़रत के दीवाने आ'ला हज़रत के दीवाने चारों तरफ़ से कुफ़्र के शो'ले उबल पड़े करने लगे हुज़ूर पे हमले बड़े बड़े कोई कहे हुज़ूर को अपनी तरह बशर ज़िक्र-ए-नबी को कोई कहे ग़ैर-मो'तबर कोई नबी के 'इल्म पे ता'ना-ज़नी करे कलमा पढ़े उन्हीं का, उन्हीं को बुरा कहे तौहीन कर रही थीं ये बातिल जमा'अतें मग़्मूम हो रही थीं दिलों की समा'अतें 'आशिक़ नबी के रो के ये कहते थे बार-बार कब आएगा हमारे 'अक़ीदों का पहरे-दार नामूस-ए-मुस्तफ़ा की हिफ़ाज़त करेगा कौन ? न...

वही फ़ातिमा है वही फ़ातिमा है / Wahi Fatima Hai Wahi Fatima Hai

नबी ने जिसे दिल का टुकड़ा कहा है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है ज़माना कहाँ उस का समझेगा रुत्बा खड़े जिस की आमद पे होते थे आक़ा लक़ब जिस को ख़ातून-ए-जन्नत मिला है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है उसी से सियादत के महके चमन हैं उसी के तो बेटे हुसैन-ओ-हसन हैं कि शौहर भी जिस का वो शेर-ए-ख़ुदा है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है किया ज़िक्र पर्दे का जब फ़ातिमा ने तो ख़ुद रूह उस की निकाली ख़ुदा ने अँधेरे में जिस का जनाज़ा उठा है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है किसी से शिकायत न होंटों पे शिकवे हुए जितने फ़ाक़े, किए उतने सज्दे वो जिस ने फ़क़ीरों को फिर भी दिया है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है जो सरदार है जन्नती औरतों की उसी से है 'इज़्ज़त हमारे घरों की ज़फ़र बज़्मी ! हर बेटी जिस पर फ़िदा है वही फ़ातिमा है, वही फ़ातिमा है शायर: ज़फ़र बज़्मी ना'त-ख़्वाँ: इस्लाम बरकाती nabi ne jise dil ka Tuk.Da kaha hai wahi faatima hai, wahi faatima hai zamaana kahaa.n us ka samjhega rutba kha.De jis ki aamad pe hote the aaqa laqab jis ko KHaatoon-e-jannat mila hai wahi faatima hai, wahi faa...

हश्र में फिर मिलेंगे मेरे दोस्तो / Hashr Mein Phir Milenge Mere Dosto

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है पयाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कहना सब जीते-जी के हैं शिकवे-गिले आज से ख़त्म दुनिया के सब सिलसिले शम'अ ढलने को है, दम निकलने को है अब है क़िस्सा तमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को नहला के पहना दिए हैं कफ़न रो चुके मिल के माँ-बाप भाई-बहन मौत भी, दोस्तो ! आज हैरत में है हो चुका एहतिमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! ख़ुश्बुओं में कफ़न को बसाने लगे मेरी मय्यत को दुल्हन बनाने लगे दोस्तो ! अब उठाओ जनाज़ा मेरा हो चुका इंतिज़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को ज़ेर-ए-ज़मीं लोग दफ़ना गए किस-क़दर संग-दिल हो के फ़रमा गए दोस्तो ! चैन की नींद सोते रहो बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कैसी दुनिया है, यारो ! ग़ज़ब रे ग़ज़ब चंद दिनों में यहाँ भूल जाते हैं सब जिस बहाने मेरी याद आ जाए तो पढ़ना तुम ये कलाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री ...

सर झुकाता हूँ मैं ख़ुदा के लिए / Sar Jhukata Hun Main Khuda Ke Liye

सर झुकाता हूँ मैं ख़ुदा के लिए जान हाज़िर है मुस्तफ़ा के लिए हाथ उठे भी न थे दु'आ के लिए मुस्तफ़ा आ गए 'अता के लिए साथ ज़ैनब सकीना सुग़रा के निकले असग़र भी कर्बला के लिए हादिसा सर से टल ही जाएगा मेरी माँ है अभी दु'आ के लिए है मुजाहिद खड़ा मुसल्ले पर रुक गई रेल इक़्तिदा के लिए मैं हर इक नेक काम करता हूँ अपने अल्लाह की रज़ा के लिए झूम कर तुम पढ़ो, नदीम रज़ा ! ना'त है रूह की ग़िज़ा के लिए शायर: नदीम रज़ा फ़ैज़ी ना'त-ख़्वाँ: नदीम रज़ा फ़ैज़ी sar jhukaata hu.n mai.n KHuda ke liye jaan haazir hai mustafa ke liye haath uThe bhi na the du'aa ke liye mustafa aa gaye 'ata ke liye saath zainab sakeena suGra ke nikle asGar bhi karbala ke liye haadisa sar se Tal hi jaaega meri maa.n hai abhi du'aa ke liye hai mujaahid kha.Da musalle par ruk gai rail iqtida ke liye mai.n har ik nek kaam karta hu.n apne allah ki raza ke liye jhoom kar tum pa.Dho, Nadeem Raza ! naa't hai rooh ki Giza ke liye Poet: Nadeem Raza Faizi Naat-Khwaan: Nad...

मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया / Mazhar-e-Noor-e-Khuda Sarkar Taj-ul-Auliya

मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया जल्वा-ए-शम्सुद्दुहा सरकार ताज-उल-औलिया मालिक-ए-'इल्म-ए-लदुन्नी, पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा तेवर-ए-शेर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया रौशनी जिस की विलायत की है फैली चार-सू वो चराग़-ए-फ़ातिमा सरकार ताज-उल-औलिया ज़ोहद-ओ-तक़्वा, पारसाई में यक़ीनन आप हैं नाइब-ए-ग़ौस-उल-वरा, सरकार ताज-उल-औलिया ! बैठे बैठे ही करा देते हैं का'बे का तवाफ़ जान लो इस से है क्या सरकार ताज-उल-औलिया अपने मँगतों को कभी मायूस लौटाते नहीं मम्बा'-ए-जूद-ओ-सख़ा सरकार ताज-उल-औलिया जिस तरफ़ भी देखिए है 'उर्स-ए-सद-साला की धूम मरहबा सद मरहबा सरकार ताज-उल-औलिया बटता है शाम-ओ-सहर फ़ैज़ान ग़ौस-ए-पाक का ऐसा है रौज़ा तेरा, सरकार ताज-उल-औलिया ! भीक लेने आए हैं मँगते तेरे दरबार में हो करम सब पर शहा सरकार ताज-उल-औलिया ! नाज़ कर अपने मुक़द्दर पर, ऐ शहर-ए-नागपुर ! तुझ में है जल्वा-नुमा सरकार ताज-उल-औलिया हश्र तक फूले-फले ये मस्लक-ए-अहमद-रज़ा है यही दिल की दु'आ, सरकार ताज-उल-औलिया ! हर तरफ़ फैली है जो गुलज़ार की ये निकहतें आप ही की है 'अता, सरकार ताज-उल-औलिया ! शायर: सय्यिद शाह गु...

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया / Wohi Rab Hai Jis Ne Tujh Ko Hamatan Karam Banaya

वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया हमें भीक माँगने को तेरा आस्ताँ बताया तुझे हम्द है, ख़ुदाया ! तुम्हीं हाकिम-ए-बराया, तुम्हीं क़ासिम-ए-'अताया तुम्हीं दाफ़े'-ए-बलाया, तुम्हीं शाफ़े'-ए-ख़ताया कोई तुम सा कौन आया वो कुँवारी पाक मरयम, वो "नफ़ख़्तु-फ़ीह" का दम है 'अजब निशान-ए-आ'ज़म, मगर आमिना का जाया वही सब से अफ़्ज़ल आया यही बोले सिदरा वाले, चमन-ए-जहाँ के थाले सभी मैं ने छान डाले, तेरे पाए का न पाया तुझे यक ने यक बनाया फ़-इज़ा फ़रग़्त फ़न्सब, ये मिला है तुम को मंसब जो गदा बना चुके अब उठो वक़्त-ए-बख़्शिश आया करो क़िस्मत-ए-'अताया व-इलल-इलाहि-फ़र्ग़ब, करो 'अर्ज़ सब के मतलब कि तुम्हीं को तकते हैं सब, करो उन पर अपना साया बनो शाफ़े'-ए-ख़ताया अरे ऐ ख़ुदा के बंदो ! कोई मेरे दिल को ढूँडो मेरे पास था अभी तो, अभी क्या हुआ ख़ुदाया ! न कोई गया न आया हमें, ऐ रज़ा ! तेरे दिल का पता चला ब-मुश्किल दर-ए-रौज़ा के मुक़ाबिल वो हमें नज़र तो आया ये न पूछ कैसा पाया कभी ख़ंदा-ज़ेर-ए-लब है, कभी गिर्या सारी शब है कभी ग़म कभी तरब है, न सबब समझ में आया न उसी ने कुछ बताया ...

ख़ुदाया दौर-ए-रहमत देखता मैं | नबी का हुस्न-ए-तलअत देखता मैं / Khudaya Daur-e-Rehmat Dekhta Main | Nabi Ka Husn-e-Talat Dekhta Main

ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं उन्हीं के दर पे होती सुब्ह मेरी वहीं पर शाम-ए-फ़ुर्क़त देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं मदीने की गली में सर झुकाए रसूल-ए-हक़ की 'अज़मत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं सहाबी काश मैं होता नबी का करम की हर 'इनायत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं जबीन-ए-शौक़ सज्दे में झुका कर 'इबादत की हक़ीक़त देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं बिछाता अपनी पल्कें उन की रह में 'अजब रंग-ए-'अक़ीदत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुदाया ! दौर-ए-रहमत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं कभी जो मस्जिद-ए-नबवी में होता जमाल-ए-बज़्म-ए-जन्नत देखता मैं नबी का हुस्न-ए-तल'अत देखता मैं ख़ुद...

जाह-ओ-जलाल दो न ही माल-ओ-मनाल दो / Jaah-o-Jalal Do Na Hi Maal-o-Manal Do

जाह-ओ-जलाल दो न ही माल-ओ-मनाल दो सोज़-ए-बिलाल बस मेरी झोली में डाल दो दुनिया के सारे ग़म मेरे दिल से निकाल दो ग़म अपना, या हबीब ! बरा-ए-बिलाल दो हिज्र-ओ-फ़िराक़ तो मिला, दो इज़्तिराब भी बेताब क़ल्ब अज़ प-ए-सोज़-ए-बिलाल दो बहती रहे जो हर घड़ी बस याद में, शहा ! वो चश्म-ए-अश्कबार प-ए-ज़ुल-जलाल दो सीना मदीना हो मेरा, दिल भी मदीना हो फ़िक्र-ए-मदीना दो मुझे मदनी ख़याल दो हर आन बस तसव्वुर-ए-तयबा में गुम रहूँ ऐसा बुलंद, शाह-ए-मदीना ! ख़याल दो दो दर्द सुन्नतों का प-ए-शाह-ए-कर्बला उम्मत के दिल से लज़्ज़त-ए-'इस्याँ निकाल दो ख़ुल्क़-ए-'अज़ीम से मुझे हिस्सा 'अता करो बे-जा हंसी की ख़स्लत-ए-बद को निकाल दो ज़िक्र-ओ-दुरूद हर घड़ी विर्द-ए-ज़बाँ रहे मेरी फ़ुज़ूल-गोई की 'आदत निकाल दो दोनों जहाँ की आफ़तें, मौला ! मुसीबतें सदक़े में मेरे ग़ौस के, सरकार ! टाल दो 'अत्तार को बुला के मदीने में दो बक़ी'अ दो फूलों के तुफ़ैल हों पूरे सुवाल दो शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी हाजी मुश्ताक़ अत्तारी jaah-o-jalaal do na hi maal-o-manaal do soz-e-bilaal bas ...

ऐ हबीब अहमद-ए-मुज्तबा दिल-ए-मुब्तला का सलाम लो / Aye Habib Ahmad-e-Mujtaba Dil-e-Mubtala Ka Salam Lo

ऐ हबीब अहमद-ए-मुज्तबा ! दिल-ए-मुब्तला का सलाम लो जो वफ़ा की राह में खो गया, उसी गुम-शुदा का सलाम लो मैं तलब से बाज़ न आऊँगा, तू करम का हाथ बढ़ाए जा जो तेरे करम से है आशना, उसी आशना का सलाम लो तेरे आस्ताँ की तलाश में, तेरी जुस्तुजू के ख़याल में जो लुटा चुका है मता'-ए-दिल, उसी बे-नवा का सलाम लो कोई मर रहा है बहिश्त पर, कोई चाहता है नजात को मैं तुझी को चाहूँ ख़ुदा करे, मेरी इस वफ़ा का सलाम लो तेरे ग़म ने मुझ को पनाह दी, तेरे ग़म से मुझ को है वासिता मेरे आँसुओं की ज़बान से दिल-ए-ग़म-नवा का सलाम लो मेरी हाज़री हो मदीने में, मिले लुत्फ़ मुझ को भी जीने में तेरा नूर हो मेरे सीने में, मेरी इस दु'आ का सलाम लो वो हुसैन जिस ने छिड़क के ख़ूँ चमन-ए-वफ़ा को हरा किया उसी जाँ-निसार का वासिता, कि हर इक गदा का सलाम लो यही रोज़-ओ-शब है दु'आ-ए-दिल, कि मरुँ तो तेरे दयार में यही मुद्द'आ-ए-हयात है, इसी मुद्द'आ का सलाम लो तमाम औलिया के बुलंद सर हैं क़दम पे जिन के झुके हुए उसी प्यारे ग़ौस का वासिता, कि हर इक गदा का सलाम लो वो स'ईद ख़स्ता-ओ-बे-नवा, वो क़तील तेग़-ए-फ़िराक़ का जिसे शौक़ है तेर...

अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल / Adam Se Layi Hai Hasti Mein Aarzoo-e-Rasool

'अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल कहाँ-कहाँ लिए फिरती है जुस्तजू-ए-रसूल ख़ुशा वो दिल कि हो जिस दिल में आरज़ू-ए-रसूल ख़ुशा वो आँख जो हो मह्व-ए-हुस्न-ए-रू-ए-रसूल तलाश-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-मुस्तफ़ा की क़सम चुने हैं आँखों से ज़र्रात-ए-ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल फिर उन के नश्शा-ए-'इरफ़ाँ का पूछना क्या है जो पी चुके हैं अज़ल में मय-ए-सुबू-ए-रसूल बलाएँ लूँ तेरी, ऐ जज़्ब-ए-शौक़-ए-सल्ले-'अला कि आज दामन-ए-दिल खिच रहा है सू-ए-रसूल शगुफ़्ता गुलशन-ए-ज़हरा का हर गुल-ए-तर है किसी में रंग-ए-'अली और किसी में बू-ए-रसूल इलाही ! हश्र के दिन इस लिबास में उट्ठूँ मली हुई हो मेरे तन से ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल 'अजब तमाशा हो मैदान-ए-हश्र में, बेदम ! कि सब हों पेश-ए-ख़ुदा और मैं रू-ब-रू-ए-रसूल शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: फ़रीद अयाज़ हाजी तस्लीम आरिफ़ असद इक़बाल कलकत्तवी 'adam se laai hai hasti me.n aarzoo-e-rasool kahaa.n-kahaa.n liye phirti hai justjoo-e-rasool KHusha wo dil ki ho jis dil me.n aarzoo-e-rasool KHusha wo aankh jo ho mahw-e-husn-e-roo-e-rasool tal...

बक़ा-ए-अल्लाहु अकबर हुसैन का ख़ैमा / Baqa-e-Allahu Akbar Hussain Ka Khaima

बक़ा-ए-अल्लाहु अकबर हुसैन का ख़ैमा नबी के दीन का मेहवर हुसैन का ख़ैमा नबी का दीन टिका है इन्हीं सुतूनों पर है जिन सुतूनों के ऊपर हुसैन का ख़ैमा बड़े बड़ों से बचाया गया न तख़्त-ए-यज़ीद बचा के ले गए असग़र हुसैन का ख़ैमा ग़लाज़तों के अँधेरे यज़ीदी ख़ैमों में 'इबादतों से मुनव्वर हुसैन का ख़ैमा जनाब-ए-सय्यिदा ज़हरा ने इस को ओढ़ा है ये जो लपेटे है चादर हुसैन का ख़ैमा इसी में रहते हैं शेर-ए-ख़ुदा के शेर सभी सँभल के देख, ऐ लश्कर ! हुसैन का ख़ैमा लगा रहा है ये ना'रा "हुसैन ज़िंदाबाद" यज़ीदी महल पे चढ़ कर हुसैन का ख़ैमा जो हाथ बढ़ता है नामूस-ए-दीन की जानिब तो काट देता है बढ़ कर हुसैन का ख़ैमा खड़ा है फ़ख़्र से सब्र-ओ-रज़ा के पैकर में ज़मीन-ए-कर्ब-ओ-बला पर हुसैन का ख़ैमा खड़े हैं तालिब-ए-बै'अत झुकाए सर अपना खड़ा है सर को उठा कर हुसैन का ख़ैमा ये जब से चाँद मुहर्रम का आ गया है नज़र बना हुआ है मेरा घर हुसैन का ख़ैमा सवार-ए-दोश-ए-पयम्बर इसी के अंदर हैं बुलंद क्यूँ न हो, अज़हर ! हुसैन का ख़ैमा शायर: अज़हर फ़ारूक़ी बरेलवी ना'त-ख़्वाँ: ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ाली baqa-e-allahu akbar husain ka ...

ग़ुलामों को आक़ा मदीना दिखा दो / Ghulamon Ko Aaqa Madina Dikha Do

ग़ुलामों को आक़ा ! मदीना दिखा दो तुम्हें याद कर के बहुत रो रहे हैं बड़ी हसरतें ले के बैठे हैं दिल में किसी दिन भी, आक़ा ! मदीना दिखा दो कोई मुझ से पूछे तेरे दिल में क्या है मेरे दिल में, लोगो ! मदीना बसा है जिसे देखने की तमन्ना में रोए उसी दर को, आक़ा ! बुला कर दिखाओ ग़ुलामों के दिल में मदीना बसा है हर इक दिल में आक़ा ये सदमा लगा है ग़मों के समंदर में हम रो रहे हैं कि पल भर में, आक़ा ! मदीना दिखा दो बड़ी मतलबी दुनिया हँसती है मुझ पर कि कब जा रहे हो तुम आक़ा के दर पर इसी कश्मकश में ये दिल रो रहा है किसी दिन भी, आक़ा ! मदीना दिखा दो वो सब से हैं आ'ला, अरे दुनिया वालो ! वो नबियों के सुल्तान हैं, दुनिया वालो ! मेरे दिल की धड़कन पे हैं वो बसे तो मेरी धड़कनों को मदीना दिखा दो मदीने से आ कर बताते हैं हाजी बड़ा ख़ुश-नुमा है मदीना मदीना मेरा दिल ये सुन कर बहुत रो रहा है कि आक़ा मुझे भी मदीना दिखा दो बहुत क़ाफ़िले मैं ने देखे हैं जाते हर इक लब पे मुस्कान तयबा सजा है मैं तयबा की गलियों में खो जाऊँ जा कर मेरे आक़ा ! तयबा का मंज़र दिखा दो सभी जाने वाले ये क्यूँ रो रहे हैं ख़ुशी के ये आँ...