चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का / Chalo Karein Mil Kar Charcha Huzoor Ka
'आशिक़ों का राज है, महफ़िलों का ताज है जल्से हैं, जुलूस हैं, झूमता समाज है 'इश्क़ का मिज़ाज है, 'इश्क़ का मिजाज़ है चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! उतरा है चाँद घर में मौला के नूर का होने लगा है घर-घर चर्चा हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का फैली है नूरी किरने देखो जगह जगह आया है ये महीना कैफ़-ओ-सुरूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का मीलाद-ए-मुस्तफ़ा की महफ़िल सजाएँगे हम ये फ़ैसला है, यारो ! अहल-ए-श'ऊर का जिब्रील की है सुन्नत पढ़ लो हदीस में लहराएगा जहाँ में परचम हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का आए शाह-ए-अंबिया ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! क्या समाँ है नूर का ! मरहबा या मुस्तफ़ा ! बजता है नाम उन का दिल की धड़क धड़क में साँसों में गूँजता है तराना हुज़ूर का जगह-जगह घर-घर चर्चा हुज़ूर का चलो करें मिल कर चर्चा हुज़ूर का खोया है उन के नाम...