माल-ओ-दौलत की चाहत बड़ी चीज़ है | या नबी आप का आस्ताना मिले / Mal-o-Daulat Ki Chahat Badi Cheez Hai | Ya Nabi Aap Ka Aastana Mile
माल-ओ-दौलत की चाहत बड़ी चीज़ है मिटने वाली तमन्ना नहीं चाहिए या नबी ! आप का आस्ताना मिले और कोई ख़ज़ाना नहीं चाहिए मौत के वक़्त का डर सताता है अब बिस्तर-ए-मर्ग है और है जाँ ब-लब आख़री वक़्त है आप आ जाइए मरने वाले को दुनिया नहीं चाहिए मुस्तफ़ा की ग़ुलामी मिली है मुझे ख़ूबसूरत निशानी मिली है मुझे जिन का साया नहीं उन के साए में हूँ मुझ को ग़ैरों का साया नहीं चाहिए रो रहा है गुनहगार तन्हाई में मेरे अपने भी हैं मेरी रुस्वाई में आप के सामने हूँ करम कीजिए दूसरों का सहारा नहीं चाहिए है वफ़ा का अमीं यार-ए-ग़ार-ए-नबी जिस के पीछे 'अली ने नमाज़ें पढ़ी उस को चौथा ख़लीफ़ा भी ठुकराएगा जिस को पहला ख़लीफ़ा नहीं चाहिए ऐसे किरदार हैं उन के दरबार में जिन का सानी नहीं कोई संसार में मेरे आगे सख़ावत है 'उस्मान की मुझ को हातिम का क़िस्सा नहीं चाहिए 'आशिक़-ए-मुस्तफ़ा बाप ने ये कहा मेरी बेटी ग़रीबों के घर जाएगी जिन के दिल में नबी की मोहब्बत नहीं उन अमीरों का रिश्ता नहीं चाहिए 'इश्क़-ए-सरकार हम को मिला है यहीं छोड़ कर हम न जाएँगे ये दर कहीं आ'ला हज़रत का नक़्श-ए-क़दम मिल गया नज्दियों का ...