अर्ज़ी है यही आप से सुल्तान-ए-मदीना / Arzi Hai Yahi Aap Se Sultan-e-Madina
'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! हर साल बनाएँ मुझे मेहमान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! महशर में 'अमल पूछेगा मौला तो कहूँगा सरकार का नौकर हूँ, सना-ख़्वान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! ता-'उम्र करूँ आप की मैं मद्ह-सराई दे दीजे शरफ़ मुझ को ये, सुल्तान-ए-मदीना ! 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! इक मैं ही नहीं करता फ़क़त दा'वा-ए-उल्फ़त हैं रब के फ़रिश्ते भी फ़िदायान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! आते हैं यहाँ शाम-ओ-सहर हूर-ओ-मलाइक होगी न बयाँ मुझ से कभी शान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! हसरत है यही शौक़-ए-फ़रीदी की, ऐ आक़ा ! महशर में भी कहलाऊँ मैं मस्तान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! शायर: शौक़ फ़रीदी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरी 'arzi hai yahi aap se, sultaan-e-madina ! har saal banaae.n mujhe mehmaan-e-madina 'arzi hai yahi aap se, sultaan-e-madina ! mehshar me.n 'amal poochhega maula to kahung...