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ताजदार-ए-हरम ऐ शहंशाह-ए-दीं | तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम / Tajdar-e-Haram Aye Shahanshah-e-Deen | Tum Pe Har Dam Karodon Durood-o-Salam

ताजदार-ए-हरम, ऐ शहंशाह-ए-दीं ! तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम हो करम मुझ पे, या सय्यिदल-मुरसलीं ! तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम दूर रह कर न दम टूट जाए कहीं काश ! तयबा में, ऐ मेरे माह-ए-मुबीं ! दफ़्न होने को मिल जाए दो गज़ ज़मीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम कोई हुस्न-ए-'अमल पास मेरे नहीं फँस न जाऊँ क़ियामत में मौला कहीं ऐ शफ़ी'-ए़-उमम ! लाज रखना तुम्हीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम दोनों 'आलम में कोई भी तुम सा नहीं सब हसीनों से बढ़ कर के तुम हो हसीं क़ासिम-ए-रिज़्क़-ए-रब्ब-उल-'उला हो तुम्हीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम फ़िक्र-ए-उम्मत में रातों को रोते रहे 'आसियों के गुनाहों को धोते रहे तुम पे क़ुर्बान जाऊँ, मेरे मह-ज़बीं ! तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम फूल रहमत के हर दम लुटाते रहे याँ ग़रीबों की बिगड़ी बनाते रहे हौज़-ए-कौसर पे मत भूल जाना कहीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम ज़ुल्म, कुफ़्फ़ार के हँस के सहते रहे फिर भी हर आन हक़ बात कहते रहे कितनी मेहनत से की तुम ने तब्लीग़-ए-दीं तुम पे हर दम करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम मौत के वक़्त कर दो निगाह-ए

उन की चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है / Un Ki Chaukhat Ho To Kasa Bhi Pada Sajta Hai | Un Ki Chokhat Ho To Kasa Bhi Para Sajta Hai

उन की चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है दर बड़ा हो तो सवाली भी खड़ा सजता है ऐसा आक़ा हो तो लाज़िम है ग़ुलामी पे ग़ुरूर ऐसी निस्बत हो तो फिर बोल बड़ा सजता है ताज-ए-शाही के मुक़द्दर में ये ज़ेबाई कहाँ जिस क़दर उन की ग़ुलामी का कड़ा सजता है ये ग़ुलामी कहीं कमतर नहीं होने देती उन का नौकर हो तो शाहों में खड़ा सजता है कान में हुर्र के मुक़द्दर ने ये सरगोशी की तू नगीना है, अँगूठी में जड़ा सजता है सरवर-ए-दीं के मुसल्ले पे ख़ुदा जानता है मुर्तज़ा पीछे हो, सिद्दीक़ खड़ा सजता है सरवर-ए-दीं के मुसल्ले पे ख़ुदा जानता है आगे असहाब के सिद्दीक़ खड़ा सजता है जब 'अता करने पे बैठें हों 'अली-ओ-सय्यिदा फिर तो जन्नत के लिए कोई अड़ा सजता है मौला शब्बर से ख़ुदा जाने सख़ी महदी तक गुलशन-ए-ज़हरा का हर फूल बड़ा सजता है मुझ से कहते हैं यही अहल-ए-मोहब्बत, सरवर ! ना'त का नग़्मा तेरे लब पे बड़ा सजता है शायर: सरवर हुसैन नक़्शबंदी ना'त-ख़्वाँ: सरवर हुसैन नक़्शबंदी मुहम्मद आ'ज़म क़ादरी क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी असद रज़ा अत्तारी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी un ki chaukhaT ho to kaasa bhi pa.Da sajt

प्यारी माँ मुझ को तेरी दुआ चाहिए / Pyari Maa Mujh Ko Teri Dua Chahiye

प्यारी माँ ! मुझ को तेरी दु'आ चाहिए तेरे आँचल की ठंडी हवा चाहिए लोरी गा गा के मुझ को सुलाती है तू मुस्कुरा कर सवेरे जगाती है तू मुझ को इस के सिवा और क्या चाहिए प्यारी माँ ! मुझ को तेरी दु'आ चाहिए तेरी ममता के साए में फूलूँ-फलूँ थाम कर तेरी ऊँगली मैं बढ़ती चलूँ आसरा बस तेरे प्यार का चाहिए प्यारी माँ ! मुझ को तेरी दु'आ चाहिए तेरी ख़िदमत से दुनिया में 'अज़मत मेरी तेरे क़दमों के नीचे है जन्नत मेरी 'उम्र-भर सर पे साया तेरा चाहिए प्यारी माँ ! मुझ को तेरी दु'आ चाहिए नशीद-ख़्वाँ: हिबा मुज़म्मिल क़ादरी आइशा अब्दुल बासित pyaari maa.n ! mujh ko teri du'aa chaahiye tere aanchal ki Thandi hawa chaahiye lori gaa gaa ke mujh ko sulaati hai tu muskura kar sawere jagaati hai tu mujh ko is ke siwa aur kya chaahiye pyaari maa.n ! mujh ko teri du'aa chaahiye teri mamta ke saae me.n phoolu.n-phalu.n thaam kar teri ungli mai.n ba.Dhti chalu.n aasra bas tere pyaar ka chaahiye pyaari maa.n ! mujh ko teri du'aa chaahiye teri KHidmat se duniy

या रब मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे / Ya Rab Meri Qismat Mein Ik Aisa Safar Likh De

या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे मैं शहर मदीने के हर कूचा-गली घूमूँ फिर फिर के मैं नक़्श-ए-क़दम-पाक-ए-नबी चूमूँ महबूब के क़दमों में हो जाए मेरा घर लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे जानिब जो मदीने की जब क़ाफ़िले चलते हैं मेरा दिल भी तड़पता है, आँसू नहीं रुकते हैं मरने से क़ब्ल इस दर पर मेरी ये नज़र लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे कल रोज़-ए-क़यामत में जब कर्ब की हालत हो मेरे सर पे भी प्यारे नबी की नज़र-ए-शफ़ा'अत हो करता हूँ मोहब्बत उन से, संग उन के हशर लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे या रब ! मेरी क़िस्मत में इक ऐसा सफ़र लिख दे मक्के में, मदीने में मेरी शाम-ओ-सहर लिख दे डूबा है गुनाहों में रूहानी भी सर-ता-क़दम शेवा है मगर तेरा, ऐ मेरे मौला ! करम हक़दार नहीं हूँ फिर भी दु'आओं में असर लिख दे मक्के में, मद

सब नबियों से आला मेरा काली कमली वाला / Sab Nabiyon Se Aala Mera Kali Kamli Wala

सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला काली कमली वाला आक़ा, शहर मदीने वाला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला वो बद्र-ए-मुनीर नुबुव्वत का, असहाब हैं इस का हाला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला वो ख़त्म-ए-रुसुल, मौला-ए-कुल वो फ़ख़्र-ए-रुसुल, दाना-ए-सुबुल तेरा चेहरा वद्दुहा ऐसा कोई हसीन न आया तुझ जैसा मा-ज़ाग़-बसर है आँख तेरी वल्लैल कमाल है ज़ुल्फ़ तेरी तेरे हुस्न का ऐसा जादू रहा दिल पे किसी के न क़ाबू हुस्न क़ुरैशी हाशमी का सब नबियों से निराला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला काली कमली वाला आक़ा, शहर मदीने वाला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला तेरे आने से ये महका जहाँ किसी ख़ुश्बू में ये महक कहाँ यासीन चमकती तुझ को मिली खिले फूल, कली हर एक खिली तू ने देखा ज़र्रे चमक उठे हुआ चाँद ऊँगली से दो टुकड़े तेरा लु'आब शहद से भी मीठा आब-ए-कौसर से भी मीठा हर ख़ुश्बू से दो-बाला, तेरा पसीना आ'ला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला काली कमली वाला आक़ा, शहर मदीने वाला सब नबियों से आ'ला मेरा काली कमली वाला और करती रहूँ मिदहत उन की और

करम फिर रसूल-ए-ख़ुदा कीजिएगा / Karam Phir Rasool-e-Khuda Kijiyega

करम फिर रसूल-ए-ख़ुदा कीजिएगा मुझे फिर मदीने बुला लीजिएगा फिरूँ जिस में आराम से रात-दिन मैं वो गलियाँ मुझे भी दिखा दीजिएगा जियूँ मैं जहाँ तक, पियूँ आब-ए-ज़रका मरुँ आब-ए-कौसर पीला दीजिएगा मेरे अशरफ़ी पीर-ओ-मुर्शिद के सदक़े ज़रा रुख़ से पर्दा हटा दीजिएगा जो था 'इश्क़-ए-मुर्शिद में ख़ुसरौ ने देखा वो मंज़र मुझे भी दिखा दीजिएगा मरे जब के यूसुफ़ तो आप उस की, आक़ा ! नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ा दीजिएगा शायर: यूसुफ़ अशरफ़ी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी karam phir rasool-e-KHuda kijiyega mujhe phir madine bula lijiyega phiru.n jis me.n aaraam se raat-din mai.n wo galiya.n mujhe bhi dikha dijiyega jiyu.n mai.n jaha.n tak, piyu.n aab-e-zarqa maru.n aab-e-kausar pila dijiyega mere ashrafi peer-o-murshid ke sadqe zara ruKH se parda haTa dijiyega jo tha 'ishq-e-murshid me.n KHusrau ne dekha wo manzar mujhe bhi dikha dijiyega mare jab ke Yusuf to aap us ki, aaqa ! namaaz-e-janaaza pa.Dha dijiyega Poet: Yusuf Ashrafi Naat-Khwaan: Owais Raza Qadri Karam Phir Rasool

मस्त-ए-मय-ए-अलस्त है वो बादशाह-ए-वक़्त है / Mast-e-Mai-e-Alast Hai Wo Baadshah-e-Waqt Hai

मस्त-ए-मय-ए-अलस्त है, वो बादशाह-ए-वक़्त है बंदा-ए-दर जो है तेरा, वो बे-नियाज़-ए-तख़्त है सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन उन की गदाई के तुफ़ैल हम को मिली सिकंदरी रंग ये लाई बंदगी, औज पे अपना बख़्त है सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन गर्दिश-ए-दौर, या नबी ! वीरान दिल को कर गई ताब न मुझ में अब रही, दिल मेरा लख़्त-लख़्त है सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन ग़ुंचा-ए-दिल खिलाइए, जल्वा-ए-रुख़ दिखाइए जाम-ए-नज़र पिलाइए, तिश्नगी मुझ को सख़्त है सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन अख़्तर -ए-ख़स्ता ! तयबा को सब चले तुम भी अब चलो जज़्ब से दिल के काम लो, उठो कि वक़्त-ए-रफ़्त है सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन शायर: अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी mast-e-mai-e-alast hai, wo baadshaah-e-waqt hai banda-e-dar jo hai tera, wo be-niyaaz-e-taKHt hai salle-'ala nabiyyena, salle-'ala muhammadin un ki gadaai ke tufail ham ko mili sikandari rang ye laai

दिल्ली राजस्थान तुम्हारा या ख़्वाजा | सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा या ख़्वाजा / Dilli Rajasthan Tumhara Ya Khwaja | Sara Hindustan Tumhara Ya Khwaja

दिल्ली राजस्थान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! हिन्द में नव्वे लाख को कलमा पढ़वाया हम पर है एहसान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! सारा अना सागर कूज़े में भर आया सुनते ही फ़रमान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! तुम पे है फ़ैज़ान जनाब-ए-'उस्माँ का हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! तुम पे है फ़ैज़ान मदीने वाले का हम पे है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! फ़ैज़-ए-मदीना मिलता है अजमेर से ही रौज़ा है ज़ीशान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! रहे सलामत सुन्नी-दावत-ए-इस्लामी ये तो है फ़ैज़ान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! हरगिज़ न सम्मान वो पाएगा जग में जो भी करे अपमान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! इन दोनों पर ख़ास करम तुम फ़रमाना शाकिर और रिज़वान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! सय्यिद को तयबा की गलियाँ दिखला दो है अदना दरबान तुम्हारा, या ख़्वाजा ! शायर: सय्यिद मुहम्मद क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: क़ारी रिज़वान ख़ान सय्यिद मुईनुद्दीन चिश्ती dilli rajasthan tumhaara, ya KHwaaja ! saara hindustaan tumhaara, ya KHwaaja ! hind me.n nawwe laakh ko kalma pa.Dhwaaya ham par hai ehsaan tumhaara, ya KHwaaja ! saar

मेरे दिल में है याद-ए-मुहम्मद मेरे होंटों पे ज़िक्र-ए-मदीना / Mere Dil Mein Hai Yaad-e-Muhammad Mere Honton Pe Zikr-e-Madina

मेरे दिल में है याद-ए-मुहम्मद, मेरे होंटों पे ज़िक्र-ए-मदीना ताजदार-ए-हरम के करम से आ गया ज़िंदगी का क़रीना दिल शिकस्ता है मेरा तो क्या ग़म, इस में रहते हैं शाह-ए-दो-'आलम जब से मेहमाँ हुए हैं वो दिल में, दिल मेरा बन गया है मदीना मैं ग़ुलाम-ए-ग़ुलामान-ए-अहमद, मैं सग-ए-आस्तान-ए-मुहम्मद क़ाबिल-ए-फ़ख़्र है मौत मेरी, क़ाबिल-ए-रश्क है मेरा जीना हर ख़ता पर मेरी चश्म-पोशी, हर तलब पर 'अताओं की बारिश मुझ गुनहगार पर किस-क़दर हैं मेहरबाँ ताजदार-ए-मदीना मुझ को तूफ़ाँ की मौजों का क्या डर, वो गुज़र जाएगा रुख़ बदल कर ना-ख़ुदा हैं मेरे जब मुहम्मद, कैसे डूबेगा मेरा सफ़ीना चल मदीने को चल, ग़म के मारे ! ज़िंदगी को मिलेंगे सहारे आ गया है हरम से बुलावा, कूच करते हैं सू-ए-मदीना उन के चश्म-ए-करम की 'अता है, मेरे सीने में उन की ज़िया है याद-ए-सुल्तान-ए-तयबा के सदक़े मेरा सीना है मिस्ल-ए-नगीना दौलत-ए-'इश्क़ से दिल ग़नी है, मेरी क़िस्मत है रश्क-ए- सिकंदर मिदहत-ए-मुस्तफ़ा की बदौलत मिल गया है मुझे ये ख़ज़ीना शायर: सिकंदर लखनवी ना'त-ख़्वाँ: ख़ुर्शीद अहमद ओवैस रज़ा क़ादरी मदनी रज़ा अत्तारी

क्यूँ कर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की / Kyun Kar Na Mere Dil Mein Ho Ulfat Rasool Ki

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की चलता हूँ मैं भी, क़ाफ़िले वालो ! रुको ज़रा मिलने दो बस मुझे भी इजाज़त रसूल की पूछें जो दीन-ओ-ईमाँ नकीरैन क़ब्र में उस वक़्त मेरे लब पे हो मिदहत रसूल की क़ब्र में सरकार आएँ तो मैं क़दमों में गिरूँ गर फ़रिश्ते भी उठाएँ तो मैं उन से यूँ कहूँ अब तो पा-ए-नाज़ से मैं, ऐ फ़रिश्तो ! क्यूँ उठूँ ? मर के पहुँचा हूँ यहाँ इस दिलरुबा के वास्ते तड़पा के उन के क़दमों में मुझ को गिरा दे शौक़ जिस वक़्त हो लहद में ज़ियारत रसूल की सरकार ने बुला के मदीना दिखा दिया होगी मुझे नसीब शफ़ा'अत रसूल की या रब ! दिखा दे आज की शब जल्वा-ए-हबीब इक बार तो 'अता हो ज़ियारत रसूल की इन आँखों का वर्ना कोई मसरफ़ ही नहीं है सरकार ! तुम्हारा रुख़-ए-ज़ेबा नज़र आए या रब ! दिखा दे आज की शब जल्वा-ए-हबीब इक बार तो 'अता हो ज़ियारत रसूल की तू है ग़ुलाम उन का, 'उबैद-ए-रज़ा ! तेरे महशर में होगी साथ हिमायत रसूल की शायर: ओवैस रज़ा क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी फ़रहान अली क़ादरी लाइबा फ़ातिमा kyunkar na mere dil me.n ho ulfat rasool ki

तयबा बुलाना आक़ा तयबा बुलाना / Tayba Bulana Aaqa Tayba Bulana | Taiba Bulana Aaqa Taiba Bulana

तयबा बुलाना, आक़ा ! तयबा बुलाना तयबा बुला के दिल की हसरत मिटाना सुब्ह और शाम लूँगा, तेरा प्यारा नाम लूँगा क़ब्र में, आक़ा ! तेरे दामन को थाम लूँगा ऐसी घड़ी में रुख़ से पर्दा हटाना जल्वा दिखाना, आक़ा ! जल्वा दिखाना तेरा जब दीदार होगा, दिल को क़रार होगा तेरे ही करम से, आक़ा ! बेड़ा सब का पार होगा 'ऐब हमारे अपने दामन में छुपाना बख़्शिश कराना, आक़ा ! बख़्शिश कराना रहमत है, नूर है, कैफ़ है, सुरूर है जल्से में देखो, यारो ! जल्वा-ए-हुज़ूर है नूरानी जल्सा है ये कितना सुहाना नबी का दीवाना सब हैं नबी का दीवाना या इलाही ! मेरी ये इल्तिजा क़ुबूल हो सब की लहद में, यारो ! जल्वा-ए-रसूल हो देखूँगा जी भर के उन का मुस्कुराना अपना बनाना, आक़ा ! अपना बनाना ना'त-ख़्वाँ: सज्जाद निज़ामी अदनान प्रतापगढ़ी tayba bulaana, aaqa ! tayba bulaana tayba bula ke dil ki hasrat miTaana subh aur shaam lunga, tera pyaara naam lunga qabr me.n, aaqa ! tere daaman ko thaam lunga aisi gha.Di me.n ruKH se parda haTaana jalwa dikhaana, aaqa ! jalwa dikhaana tera jab deedaar hoga, dil ko qaraar hoga te

सोहबत अल्लाह वालों की / Sohbat Allah Walon Ki

अपना रंग दिखा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की ज़ुल्म-ओ-सितम हो, दर्द हो, ग़म हो या कोई हो रंज-ओ-अलम तार-ए-त'अल्लुक़ रब से जोड़ो, कर देगा वो नज़र-ए-करम तार से तार मिला जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अपना रंग दिखा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की ज़िक्र-ए-हक़ की, फ़िक्र-ए-हक़ की सच्ची लगन मिल जाती है क़ल्ब को अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह की धुन मिल जाती है मा'सियत छुड़वा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अपना रंग दिखा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह वालों की सोहबत में जो इंसान आ जाते हैं रुत्बे आ'ला, बाला, बर-तर अल्लाह से पा जाते हैं बिगड़े हाल बना जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अपना रंग दिखा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की अल्लाह से मिलवा जाती है सोहबत अल्लाह वालों की वज्द में डूबा रहता है दिल, आँसू बहते

अल-मदद पीरान-ए-पीर ग़ौस-उल-आज़म दस्तगीर / Al-Madad Peeran-e-Peer Ghaus-ul-Azam Dastageer

रुत्बा ये विलायत में क्या ग़ौस ने पाया है अल्लाह ने वलियों का सरदार बनाया है है दस्त-ए-'अली सर पर, हसनैन का साया है मेरे ग़ौस की ठोकर ने मुर्दों को जिलाया है अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! लाखों ने उसी दर से तक़दीर बना ली है बग़दादी सँवरिया की हर बात निराली है डूबी हुई कश्ती भी दरिया से निकाली है ये नाम अदब से लो, ये नाम जलाली है अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! हर फ़िक्र से तुम हो कर आज़ाद चले जाओ ले कर के लबों पर तुम फ़रियाद चले जाओ मिलना है अगर तुम को वलियों के शहंशा से ख़्वाजा से इजाज़त लो, बग़दाद चले जाओ अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर ! ग़ौर कीजे कि निगाह-ए-ग़ौस का क्या हाल है है क़ुतुब कोई, वली कोई, कोई अब्दाल है दूर है जो ग़ौस से, बद-बख़्त है, बद-हाल है जो दीवाना ग़ौस का है सब में बे-मिसाल है दीन में ख़ुश-हाल है, दुनिया में माला-माल है अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म द