मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख / Milta Hai Kya Namaz Mein Sajde Mein Ja Ke Dekh
मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख अल्लाह के हुज़ूर तू सर को झुका के देख मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख बेशक बुराइयों से बचाती नमाज़ है बंदों को किब्रिया से मिलाती नमाज़ है मुश्किल को, रंज-ओ-ग़म को मिटाती नमाज़ है आए न गर यक़ीन तो फिर आज़मा के देख मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख ख़ल्लाक़-ए-काएनात का फ़रमान है नमाज़ मोमिन की आन-बान है, पहचान है नमाज़ इक दीन का सुतून है और शान है नमाज़ पढ़ कर नमाज़ अपने ख़ुदा को मना के देख मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख करती नमाज़ सुर्ख़रू रब के हुज़ूर है ज़ाहिर का हुस्न और ये बातिन का नूर है शैतानी वार को भी ये कर देती चूर है दुनिया से हट, नमाज़ में दिल को लगा के देख मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख रिश्वत से तेरे दिल में कराहत ये लाएगी ग़ाफ़िल ! नमाज़ सूद से तुझ को बचाएगी आदाब ज़िंदगी के तुझे ये सिखाएगी इक बार ख़ुद को राह-ए-ख़ुदा में तू ला के देख मिलता है क्या नमाज़ में सज्दे में जा के देख शौक़-ए-फ़रीदी ! रब की रिज़ा है नमाज़ में आती नज़र नबी की अदा है नमाज़ में इब्न-ए-'अली का सर भी कटा है नमाज़ में कित...