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इस बरस हज न हम कर सके हैं | आह महरूम हज से हुए हैं / Is Baras Hajj Na Hum Kar Sake Hain | Aah Mehroom Hajj Se Hue Hain

इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं अपनी क़िस्मत पे हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं याद 'अर्फ़ात की आ रही है वो खड़े हो के तुझ को मनाना सब ख़यालों में नक़्श आ रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं उन से पूछो जो हज पर चले थे जम'अ ज़ाद-ए-सफ़र कर रहे थे नज़्र हालात वो हो गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं साल भर हज के वो मुंतज़िर थे कितनी मुश्किल से दिन कट रहे थे जीते-जी अब तो वो मर गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं आक़ा ! किस से कहूँ अपनी बिपता कौन ज़ख़्मों पे मरहम रखेगा तेरे दर पर भी न आ सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं बख़्त ऐसा उजागर 'अता हो हर बरस हज का मौसम लिखा हो हाल-ए-दिल कह के हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं शायर: अल्लामा...

तू सब को हज पे बुला रहा है | मुझे भी हज पे बुला ले मौला / Tu Sab Ko Hajj Pe Bula Raha Hai | Mujhe Bhi Hajj Pe Bula Le Maula

तू सब को हज पे बुला रहा है मुझे भी हज पे बुला ले, मौला ! तुझे मुहम्मद का वासिता है मुझे भी हज पे बुला ले, मौला ! ज़बाँ पे लब्बैक की सदा हो करूँ हरम का तवाफ़ मैं भी यही तमन्ना है मेरे दिल की ये इज़्न मुझ को भी दे, ख़ुदाया ! हो सामने तेरा प्यारा का'बा पियूँ मैं ज़मज़म का जाम, मौला ! शरफ़ 'अता कर मुझे भी, मौला ! है वासिता तुझ को मुस्तफ़ा का ग़िलाफ़-ए-का'बा से मैं लिपट कर दु'आएँ माँगूँ मैं ख़ूब रोऊँ मु'आफ़ी माँगूँ मैं तुझ से, मौला ! तू बख़्श देना मुझे, ख़ुदाया ! मिना-ओ-मुज़्दलिफ़ा और 'अरफ़ात - के भी जल्वों को देखूँ, मौला ! करम ये फ़रमा दे तुझ को, मौला ! है वासिता बिन्त-ए-मुस्तफ़ा का मैं चूमूँ प्यारा वो संग-ए-अस्वद मुझे भी हासिल हो ये स'आदत ऐ ख़ालिक़-ए-कुल ऐ मालिक-ए-कुल ! ये पूरी कर दे मेरी तमन्ना हरम से हो कर मदीने जाऊँ जहाँ पे सरदार-ए-दो-जहाँ हैं पकड़ के उन की सुनहरी जाली तलब करूँ सदक़ा पंजतन का है आरज़ू उन के दर पे जाऊँ मैं हाल दिल का उन्हें बताऊँ जब उन की चौखट पे सर को रक्खूँ हो ख़ातिमा मेरी ज़िंदगी का शरफ़ दे शौक़-ए-फ़रीदी को भी दर-ए-शह-ए-दीं पे हाज़िरी...

अल्लाह की रिज़ा है गर आप को जो पानी | कर लीजिए क़ुर्बानी / Allah Ki Riza Hai Gar Aap Ko Jo Paani | Kar Lijiye Qurbani

'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! क़ुर्बानी क़ुर्बानी क़ुर्बानी क़ुर्बानी अल्लाह की रिज़ा है गर आप को जो पानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी सुन्नत अदा करेंगे, राज़ी ख़ुदा करेंगे हुक्म-ए-ख़ुदा पे जानें अपनी फ़िदा करेंगे इख़्लास दिल में हो और हो जज़्बा-ए-ईमानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! हुक्म-ए-ख़ुदा मिला जब रब के ख़लील को क़ुर्बान कर दो अपने तुम इस्मा'ईल को हुक्म-ए-ख़ुदा के आगे ख़म कर दी है पेशानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! बेटा है ऐसा बेटा रब के ख़लील का मक़बूल है वो बंदा रब्ब-ए-जलील का क़ुर्बान मुझ को कर दे, ऐ मेरे बाबा जानी ! कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! रब के हबीब का भी फ़रमान है यही फ़रहान ! हमा...

काबा दिखा दे मौला / Kaba Dikha De Maula

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! 'उम्र बची है मेरी कहाँ मर ही न जाऊँ, मौला ! यहाँ का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! कभी गिर्द का'बे के मैं भी तो घूमूँ कभी मैं भी का'बे की चादर को चूमूँ मुझे भी दिखा दे, ख़ुदाया ! हरम वो बरसती है रहमत की बारिश जहाँ का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! कभी संग-ए-असवद का बोसा 'अता हो कि मरने से पहले ख़तम हर ख़ता हो तमन्ना, मेरे रब ! ये पूरी तू कर दे इसी जुस्तुजू में हूँ जीता यहाँ का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! मैं अक्सर ही यादों में का'बे को पहुँचा मैं कितना हूँ तड़पा, मैं कितना हूँ रोया है बेचैन, मौला ! ये दिल मेरा कितना करूँ कैसे मैं ये लबों से बयाँ ? का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! बहुत हो के आए हैं देखो वहाँ से कि मैं सिर्फ़ जा ही न पाया यहाँ से ज़ियारत हरम की है कितनों ने कर ली तेरी अब निगाह-ए-करम हो यहाँ का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला ! बहुत लोग जाते हैं ...

मुबारक हो तुम सब को हज का महीना | मदीने वाले से मेरा सलाम कहना / Mubarak Ho Tum Sab Ko Hajj Ka Mahina | Madine Wale Se Mera Salam Kehna

मुबारक हो तुम को ये सफ़र-ए-मदीना न थी मेरी क़िस्मत कि देखूँ मदीना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा साहिल से आते आते मौजों को चूम लेना मौजों के बा'द दिलकश ज़र्रों को चूम लेना उस पाक सर-ज़मीं की राहों को चूम लेना फूलों को चूम लेना, काँटों को चूम लेना सुल्तान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा मदीने क़ाफ़िले जाते हैं मैं भी आऊँगा हुज़ूर कितने ही आते हैं मैं भी आऊँगा चले सब यार फ़ी-अमानिल्लाह सू-ए-सरकार फ़ी-अमानिल्लाह अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा ग़ुलाम आप के कितने ग़रीब हो कर भी ग़ुलाम आते हैं जाते हैं, मैं भी आऊँगा लया मदीने दा सब ने रस्ता मैं एथे ई रह गया तरसदा तूँ जा के आक़ा नूँ दस्त-बस्ता कवीं दरूद-ओ-सलाम मेरा, सलाम मेरा सबा दर-ए-मुस्तफ़ा ते जा के कवीं दरूद-ओ-सलाम मेरा, सलाम मेरा मदावा रंज-ओ-मुसीबत का है मदीने में मुझे भी लोग सताते ह...

अर्ज़ी है यही आप से सुल्तान-ए-मदीना / Arzi Hai Yahi Aap Se Sultan-e-Madina

'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! हर साल बनाएँ मुझे मेहमान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! महशर में 'अमल पूछेगा मौला तो कहूँगा सरकार का नौकर हूँ, सना-ख़्वान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! ता-'उम्र करूँ आप की मैं मद्ह-सराई दे दीजे शरफ़ मुझ को ये, सुल्तान-ए-मदीना ! 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! इक मैं ही नहीं करता फ़क़त दा'वा-ए-उल्फ़त हैं रब के फ़रिश्ते भी फ़िदायान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! आते हैं यहाँ शाम-ओ-सहर हूर-ओ-मलाइक होगी न बयाँ मुझ से कभी शान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! हसरत है यही शौक़-ए-फ़रीदी की, ऐ आक़ा ! महशर में भी कहलाऊँ मैं मस्तान-ए-मदीना 'अर्ज़ी है यही आप से, सुल्तान-ए-मदीना ! शायर: शौक़ फ़रीदी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरी 'arzi hai yahi aap se, sultaan-e-madina ! har saal banaae.n mujhe mehmaan-e-madina 'arzi hai yahi aap se, sultaan-e-madina ! mehshar me.n 'amal poochhega maula to kahung...

वो दिन आएगा इक बार मैं मदीने जाऊँगा / Wo Din Aayega Ek Baar Main Madine Jaunga

वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा करने रौज़े का दीदार, मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा शाह-ए-मदीना, रहमत-ए-'आलम, नबियों के सरदार देखें, कब दिखलाएँ अपना नूरानी दरबार मैं तो हूँ कब से तय्यार, मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा मुझ को यक़ीं है, करम करेंगे आमिना बी के लाल उन को तो मा'लूम है, वल्लाह ! मेरे दिल का हाल कहते हैं ये दिल के तार, मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा देखा नहीं उन का दर अब तक, क्या होगा अंजाम ! मेरे दिल की धड़कन मुझ को देती है पैग़ाम मरने से पहले इक बार मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा देख के मुझ 'आसी को उन को आ जाएगा प्यार नूरानी चादर में छुपा लेंगे उस दम सरकार ले कर जब अश्कों के हार मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा क्या ग़म है कि जकड़े हुए है दूरी की ज़ंजीर मिल जाएगी मुझ को मेरे ख़्वाबों की ता'बीर जिस दिन चाहेंगे सरकार, मैं मदीने जाऊँगा वो दिन आएगा इक बार, मैं मदीने जाऊँगा है आमिना में मीम, हलीमा में मीम है मेहराब में है मीम तो म...

मैं आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार या अल्लाह / Main Aasi Hun Magar Tu Hai Bada Gaffar Ya Allah

या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या करीम ! या हय्यु ! या क़य्यूम ! या अल्लाह ! या रहमान ! या रहीम ! या करीम ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! करम से अपने कर दे मेरा बेड़ा पार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! समा जाए मेरे दिल में मोहब्बत के तेरे जल्वे जिधर देखूँ नज़र आएँ तेरे अनवार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! रहूँ तेरी रिज़ा पर मैं हमेशा साबिर-ओ-शाकिर न दे दुनिया का कोई ग़म मुझे आज़ार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! फ़क़त इक तेरी रहमत है, मुझे जिस का सहारा है मैं बेकस हूँ, नहीं कोई मेरा ग़म-ख़्वार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! तमन्ना है कि अपनी ज़िंदगी में देख लूँ फिर भी तेरे प्यारे तेरे महबूब का दरबार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! तेरे दरिया-ए-रहमत में हो तुग़्यानी प-ए-बख़्शिश हो क़ासिम हश्र में जब हाज़िर-ए-दरबार, या अल्लाह ! मैं 'आसी हूँ मगर तू है बड़ा ग़फ़्फ़ार, या अल्लाह ! शायर: क़ासिम शाह ब...

काबा है तेरा बड़ा मोहतरम / Kaba Hai Tera Bada Mohtaram

मेरे ख़ुदा ऐ रहनुमा ! तेरे लिए ही है हम्द-ओ-सना ऐ बादशाह ! का'बा तेरा, है तेरे बंदों की जा-ए-पनाह का'बा है तेरा बड़ा मोहतरम दिखता यहाँ है निशान-ए-करम है तेरे बंदों पे तेरी 'अता जो आज करते यहाँ सर हैं ख़म लब्बैक की है लबों पे सदा ला इलाहा इलल्लाह तकबीर से है मु'अत्तर फ़िज़ा ला इलाहा इलल्लाह का'बा तेरा जिस जा आबाद है इस्लाम की जा-ए-बुनियाद है सारे जहाँ का है मर्कज़ यही दुनिया यहाँ से ही आबाद है तेरे ख़लील की ये याद है अब बुत-परस्तों से आज़ाद है का'बा है तेरा बड़ा मोहतरम दिखता यहाँ है निशान-ए-करम लब्बैक की है लबों पे सदा ला इलाहा इलल्लाह तकबीर से है मु'अत्तर फ़िज़ा ला इलाहा इलल्लाह एहराम में सब हैं इक रंग में आते नज़र सब हैं इक ढंग में कोई खड़ा है कोई दौड़ता सब हैं यहाँ अपने आहंग में अदना है कोई न आ'ला कोई दर पर तेरे हैं बराबर सभी का'बा है तेरा बड़ा मोहतरम दिखता यहाँ है निशान-ए-करम लब्बैक की है लबों पे सदा ला इलाहा इलल्लाह तकबीर से है मु'अत्तर फ़िज़ा ला इलाहा इलल्लाह गोरे भी आए हैं काले भी हैं दुख दर्द अपने सुनाने को हैं 'अरब...