करम कर दो मेरे आक़ा ख़ुदारा / Karam Kar Do Mere Aaqa Khudara
करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा जो हर ग़म की दवा है, वो है नाम-ए-मुहम्मद मदद कुन या मुहम्मद, मदद कुन या मुहम्मद सदा देता है तन्हा ग़म का मारा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा मैं क्यूँ दुनिया में, आक़ा ! सहारे ढूँडता हूँ तेरे होते हुए भी मैं अपने ढूँडता हूँ ये ग़फ़लत है, ये है मेरा ख़सारा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा ज़माने को ख़बर क्या, जो ज़ाहिर है वो क्या है मेरे दिल का फ़साना कहाँ तुझ से छुपा है न खुल जाए कहीं पर्दा हमारा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा जनाब-ए-सय्यिदा ! गर सिफ़ारिश आप कर दें मेरी आक़ा सुनेंगे, मेरी झोली भरेंगे भरम रह जाएगा कुछ तो हमारा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा मेरा कश्कोल भर दें, झुकाए सर खड़ा हूँ तेरे दर का गदा हूँ, कहाँ का मैं ज़िया हूँ सदा बस्ता रहे तेरा दवारा सहारा दो, सहारा दो, सहारा करम कर दो, मेरे आक़ा ! ख़ुदा-रा शायर: मुहम्मद रफ़ीक़ ज़िया क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद रफ़ीक़ ज़िया क़ादरी श...