इस बरस हज न हम कर सके हैं | आह महरूम हज से हुए हैं / Is Baras Hajj Na Hum Kar Sake Hain | Aah Mehroom Hajj Se Hue Hain
इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं अपनी क़िस्मत पे हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं याद 'अर्फ़ात की आ रही है वो खड़े हो के तुझ को मनाना सब ख़यालों में नक़्श आ रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं उन से पूछो जो हज पर चले थे जम'अ ज़ाद-ए-सफ़र कर रहे थे नज़्र हालात वो हो गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं साल भर हज के वो मुंतज़िर थे कितनी मुश्किल से दिन कट रहे थे जीते-जी अब तो वो मर गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं आक़ा ! किस से कहूँ अपनी बिपता कौन ज़ख़्मों पे मरहम रखेगा तेरे दर पर भी न आ सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं बख़्त ऐसा उजागर 'अता हो हर बरस हज का मौसम लिखा हो हाल-ए-दिल कह के हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं शायर: अल्लामा...