किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से / Kis Bulandi Pe Sitara Hai Mera Bachpan Se
नाम-ए-मुहम्मद सल्ले-'अला आँखों की ठंडक, दिल की जिला आओ उन का ज़िक्र करें जो हैं दाफ़े'-ए-रंज-ओ-बला किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से मैं ने देखी नहीं ग़ुर्बत कभी अपने घर में उन के टुकड़ों पे गुज़ारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से उन की रहमत से ही बनते हैं मेरे काम सभी उन की निस्बत ही वसीला है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से या नबी या नबी करते हुए दिन गुज़रे हैं यही इक विर्द-वज़ीफ़ा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से आल के साथ सहाबा का भी लाज़िम है अदब साफ़-सुथरा ये 'अक़ीदा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से ये दु'आ माँगो कि टूटे न कभी फ़ारूक़ी उन की यादों से ज...