है नूरी पसीने की महक से ये चमन फूल | सर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूल तज़मीन के साथ / Hai Noori Paseene Ki Mahak Se Ye Chaman Phool | Sar-Ta-Ba-Qadam Hai Tan-e-Sultan-e-Zaman Phool With Tazmeen
है नूरी पसीने की महक से ये चमन फूल हर ख़ार बना दम से तेरे रश्क-ए-'अदन फूल है नूरी नयन, नूरी सुख़न, नूरी बतन फूल सर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूल लब फूल दहन फूल ज़क़न फूल बदन फूल ना'लैन के ज़र्रों की चमक 'अर्श ने पाई क़ुरआँ ने क़सम मक्का मदीना की है खाई इक मैं ही नहीं बल्कि है क़ुर्बान ख़ुदाई दंदान-ओ-लब-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-रुख़-ए-शह के फ़िदाई हैं दुर्र-ए-'अदन, ला'ल-ए-यमन, मुश्क-ए-ख़ुतन, फूल हो क़ल्ब मो'अत्तर मेरा, सरकार-ए-मदीना ! माँगा ये करूँ रब से दु'आ रोज़-ओ-शबीना महफूज़ रहे हश्र तक ईमाँ का ख़ज़ीना वल्लाह जो मिल जाए मेरे गुल का पसीना माँगे न कभी 'इत्र, न फिर चाहे दुल्हन फूल सरकार-ए-मदीना का है पुर-नूर सरापा ख़ाकी की नज़र ख़ाक करे उस का नज़ारा अफ़लाक के तारों ने लगाया यही ना'रा दिल अपना भी शैदाई है उस नाख़ुन-ए-पा का इतना भी मह-ए-नौ पे न ऐ चर्ख़-ए-कुहन ! फूल जब ख़ाक मिली मुझ को तेरे बाब-ए-करम की फिर पंजतन-ए-पाक की तौसीफ़ रक़म की ऐ शरीफ़-ए-रज़ा ! तुझ को मिली भीक हरम की क्या बात, रज़ा ! उस चमनिस्तान-ए-करम की ज़हरा है कली जिस में, हुसैन और हसन फूल कलाम: इमाम ...