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नसीबों को जगाया है अली ने / Naseebon Ko Jagaya Hai Ali Ne

नसीबों को जगाया है 'अली ने हमें अपना बनाया है 'अली ने वो ततहीरे वो 'इज़्ज़त बेटियों की बचाना ख़ुद सिखाया है 'अली ने मिटेगी मुस्तफ़ा की नस्ल कैसे कि जब शजरा चलाया है 'अली ने 'अली के नाम पर हम क्यूँ मरे ना हमें जीना सिखाया है 'अली ने ग़मों ने जब भी मुझ को आ के घेरा मुझे आ कर बचाया है 'अली ने गदा, शहबाज़ ! उन के दर का हूँ मैं जिन्हें अपना बनाया है 'अली ने शायर: शहबाज़ अली ना'त-ख़्वाँ: हम्माद काज़मी शहबाज़ क़मर फ़रीदी naseebo.n ko jagaaya hai 'ali ne hame.n apna banaaya hai 'ali ne wo tat.heere wo 'izzat betiyo.n ki bachaana KHud sikhaaya hai 'ali ne miTegi mustafa ki nasl kaise ki jab shajra chalaaya hai 'ali ne 'ali ke naam par ham kyu.n mare na hame.n jeena sikhaaya hai 'ali ne Gamo.n ne jab bhi mujh ko aa ke ghera mujhe aa kar bachaaya hai 'ali ne gada, Shahbaz ! un ke dar ka hu.n mai.n jinhe.n apna banaaya hai 'ali ne Poet: Shahbaz Ali Naat-Khwaan: Hammad Kazmi Sha

साक़ी-ए-बावफ़ा मनम | दम हमा दम अली अली / Saqi-e-Bawafa Manam | Dam Hama Dam Ali Ali

साक़ी-ए-बा-वफ़ा मनम, दम हमा दम 'अली 'अली सूफ़ी-ए-बा-सफ़ा मनम, दम हमा दम 'अली 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली साक़ी हूँ, बा-वफ़ा हूँ, मेरे दम में है 'अली सूफ़ी हूँ, बा-सफ़ा हूँ, मेरे दम में है 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली 'आशिक़-ए-मुर्तज़ा मनम, दम हमा दम 'अली 'अली मुतरिब-ए-ख़ुश-नवा मनम, दम हमा दम 'अली 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली 'आशिक़ हूँ मुर्तज़ा का, मेरे दम में है 'अली मेरी तर्ब ख़ुश-नवा है, मेरे दम में है 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली शाह-ए-शरी'अतम तुई, पीर-ए-तरीक़तम तुई हक़ ब-हक़ीक़तम तुई, दम हमा दम 'अली 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली दम हमा दम, हमा दम, दम हमा दम मौला 'अली तू शाह-ए-शरी'अत है, तरीक़त का पीर है हक़ भी है और हक़ीक़त, ऐ मौला या 'अली

पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा / Padhna Qaseeda Haq De Wali Da | Parhna Qaseeda Haq De Wali Da

मन कुंतु मौला, मन कुंतु मौला फ़-हाज़ा 'अलियुन मौला मौला पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा सारे लगाओ ना'रा 'अली दा ज़हरा दा शौहर, पीराँ दा पीर ए मैं की दसेवाँ किन्ना अमीर ए तहतुस्सरा तों 'अर्श-ए-'उला ताईं सारे दा सारा रक़बा अली दा पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा सारे लगाओ ना'रा 'अली दा मन कुंतु मौला, मन कुंतु मौला फ़-हाज़ा 'अलियुन मौला मौला मौला ते मेरा, पीराँ दा पीर ए मैं की दसेवाँ, किन्ना अमीर ए तहतुस्सरा तों 'अर्श-ए-'उला ताईं सारे दा सारा रक़बा अली दा पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा सारे लगाओ ना'रा 'अली दा मन कुंतु मौला, मन कुंतु मौला फ़-हाज़ा 'अलियुन मौला मौला हिक 'आम बाल ए, हिक ख़ास बाल ए जेह्ड़ा ख़ास बाल ए, ज़हरा दा लाल ए नेज़े ते चढ़के क़ुरआँ सुणाया सब नूँ पढ़ाया कलमा नबी दा पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा सारे लगाओ ना'रा 'अली दा मन कुंतु मौला, मन कुंतु मौला फ़-हाज़ा 'अलियुन मौला मौला का'बे दा गौहर का'बे दे अंदर आया बना के दीवार नूँ दर तेरह रजब दा है आज मंज़र का'बे इच पहला सज्दा 'अली दा पढ़ना क़सीदा हक़ दे वली दा सारे ल

दर-ए-ग़रीब-नवाज़ | ज़माना छूटे हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़ / Dar-e-Gharib Nawaz | Zamana Chhute Hum Na Chhodenge Dar-e-Ghareeb Nawaz

या ग़रीब नवाज़ ! मोरे ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़ ज़माना छूटे, हम न छोड़ेंगे दर-ए-ग़रीब-नवाज़ मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! हमें नाज़ है बस तुझ पर, किसी और पे नाज़ नहीं तेरे जैसा ज़माने में कोई बंदा-नवाज़ नहीं तेरे देने दिलाने का अंदाज़ निराला है किसी और का दुनिया में ऐसा अंदाज़ नहीं मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! ऐ चिश्त नगर वाले ! तुम मेरा भरम रख लो सदक़े में मुहम्मद के हम सब पे करम कर दो मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! फ़रियाद मेरी सुन लो, ऐ हिन्द के महाराजा ! मैं आस लगाए ह

मत पूछो बरेली में हम ने सौ साल में क्या क्या देखा है / Mat Poochho Bareilly Mein Hum Ne Sau Saal Mein Kya Kya Dekha Hai

मत पूछो बरेली में हम ने सौ साल में क्या क्या देखा है दरबार-ए-रज़ा की गलियों में फ़िरदौस का रस्ता देखा है अम्बर को बरसता देखा है, बादल को गरजता देखा है रुख़्सत पे वो ताज-ए-शरी'अत की लाखों को सिसकता देखा है ऐ ताज-ए-शरी'अत ! एक झलक चेहरे की तेरे पाने के लिए कितनों को तड़पता देखा है, कितनों को तरसता देखा है चूमेगा निगाहें बरसो तक और नाज़ करेगा नस्लों तक जिस ने भी हमारे अख़्तर का वो चाँद सा चेहरा देखा है जो तुम से मिला गुल बन के खिला, जो तुम से फिरा ज़िल्लत में गिरा गुस्ताख़-ए-रज़ा को तो हम ने दर दर पे भटकता देखा है क्यूँ मेरे रज़ा से जलता है ? इतना सा लिए मुँह फिरता है क्या तू ने करोड़ों लोगों के सैलाब का मज्मा' देखा है ? जो जल के हसद में रंग लाए, गुलफ़ाम ! वो सब ही मुरझाए हम ने तो रज़ा के गुलशन का हर फूल महकता देखा है शायर: गुलफ़ाम रज़ा हस्सानी ना'त-ख़्वाँ: गुलफ़ाम रज़ा हस्सानी mat poochho bareli me.n ham ne sau saal me.n kya kya dekha hai darbaar-e-raza ki galiyo.n me.n firdaus ka rasta dekha hai ambar ko barsta dekha hai, baadal ko garajta dekha

फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो / Fida Aap Ka Ye Ghulam Aap Par Ho

मता'-ए-दिल-ओ-जाँ निसार आप पर हो फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो बड़ी मुद्दतों से ये चाहत है दिल की हों शहर-ए-नबी में, सलाम आप पर हो कभी अश्क-बारी, कभी आह-ओ-ज़ारी ख़ुलूस-ए-मोहब्बत तमाम आप पर हो उहुद का वो मैदाँ, वो ताइफ़ की वादी वो ख़ाक-ए-मदीना निसार आप पर हो ये इक जान क्या गर करोड़ों हों जानें फ़ना, ऐ हबीब-ए-अनाम ! आप पर हो इसी के हैं क़ाबिल मेरे मुस्तफ़ा तो कि क़ुर्बान सारा जहान आप पर हो दर-ए-मुस्तफ़ा पर जो जाओ तो कहना सना-ख़्वाँ का आक़ा सलाम आप पर हो ख़ुदा बिन्त-ए-ताहिर की क़िस्मत में लिख दे हो दीदार उन का कलाम आप पर हो शायर: बिन्त-ए-ताहिर ना'त-ख़्वाँ: यासिर सुहरवर्दी mata'-e-dil-o-jaa.n nisaar aap par ho fida aap ka ye Gulaam aap par ho ba.Di muddato.n se ye chaahat hai dil ki ho.n shahr-e-nabi me.n, salaam aap par ho kabhi ashk-baari, kabhi aah-o-zaari KHuloos-e-mohabbat tamaam aap par ho uhud ka wo maidaa.n, wo taaif ki waadi wo KHaak-e-madina nisaar aap par ho ye ik jaan kya gar karo.Do.n ho.n jaane.n fana, ai habeeb-e-anaam ! aap par ho is

ख़ुदा महशर में पूछेगा गुज़ारी ज़िंदगी कैसी / Khuda Mehshar Mein Puchhega Guzari Zindagi Kaisi

ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसी लरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी मुझे भी मौत आनी है मगर मैं इस से ग़ाफ़िल था मेरा जीवन भी फ़ानी है मगर मैं इस से ग़ाफ़िल था कफ़न बाज़ार में आ भी चुका लेकिन मैं ग़ाफ़िल था मेरी मय्यत का तख़्ता भी बना लेकिन मैं ग़ाफ़िल था ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसी लरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी मैं ग़फ़लत में गुनाह करता रहा अफ़सोस लेकिन अब मगर अब कोई भी अफ़सोस का बनता नहीं मतलब मुझे भी मौत लेने आ गई अब क्या करूँगा मैं अँधेरी क़ब्र में अब किस तरह तनहा रहूँगा मैं ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसी लरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी अँधेरी क़ब्र में मुझ को अकेला छोड़ आएँगे यहाँ ताक़त न दौलत ना ये रिश्ते काम आएँगे हिसाब-ए-ज़िंदगी देने उठाया जाएगा मुझ को ख़ुदा के सामने महशर में लाया जाएगा मुझ को ख़ुदा महशर में पूछेगा, गुज़ारी ज़िंदगी कैसी लरज़ उठूँगा मैं और ख़ौफ़ होगा मुझ पे तब तारी ख़ुदा पूछेगा, बतला 'इल्म पर कितना रहा 'आमिल कहाँ पर ख़र्च की तूने ये दौलत कैसे की हासिल सवाल-ए-जिस्म भी होगा, सवाल-ए-ज़िंदगी होगा सवाल-ए-

ख़्वाजा है हमारा | महाराजा है हमारा / Khwaja Hai Hamara | Maharaja Hai Hamara

ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा जो अहल-ए-ख़िरद थे उन्हें दीवाना बनाया अजमेर में ख़्वाजा ने करिश्मा ये दिखाया सागर के भरे पानी को प्याले में मँगाया साबित किया पानी पे भी क़ब्ज़ा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा जब 'आरज़ी राजा के बढ़ा ज़ुल्म का चर्चा फिर अब्र-ए-करम शहर-ए-मदीना से जो उठा अल्लाह के महबूब ने भारत जिसे भेजा भारत की ज़मीं बोली ये राजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा इक रोज़ मुक़ाबिल में वो जयपाल जो आया जादू से उड़ा और फ़ज़ा में कहीं खोया ख़्वाजा की खड़ाऊँ ने सबक़ जा के सिखाया फिर क़लमा पढ़ा, बोला ये आक़ा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा इक और करामत सुनो इक दिन हुआ ऐसा पीतल की बनी गाय से भी दूध निकाला ये देख हज़ारों ने वहीं पढ़ लिया क़लमा सब ने कहा अब एक ही दाता है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा ख़्वाजा है हमारा, महाराजा है हमारा तयबा से बहार आई है, अजमेर चलो ना रहमत की घटा छाई है, अजमेर चलो न

ख़ैरात करम की कर दो अता | ऐ ख़्वाजा पिया ऐ ख़्वाजा पिया / Khairat Karam Ki Kar Do Ata | Aye Khwaja Piya Aye Khwaja Piya

ख़्वाजा ! करम कर, ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! करम कर, ख़्वाजा ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! मु'ईनुद्दीन ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! तेरे दर पे खड़े हैं तेरे गदा ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! मेरी रूह के आँगन में आए मेरे दिल की कली को महकाए तेरे प्यारे नगर की प्यारी हवा ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ईमान हमारा है कामिल तुम रब की 'अता से जानते हो होती है ग़मों की कैसे दवा ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! हल मुश्किल को फ़रमाता है इस वास्ते तू काम आता है तेरा बाबा 'अली है मुश्किल-कुशा ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! मेरे होंटों पर है तेरी सना है ख़्वाजा ख़्वाजा विर्द मेरा मेरे दिल पे लिखा है नाम तेरा ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाजा पिया ! ख़ैरात करम की कर दो 'अता ऐ ख़्वाजा पिया ! ऐ ख़्वाज

अल मदद ख़्वाजा-ए-दीं | हिन्द के माह-ए-मुबीं / Al Madad Khwaja-e-Deen | Hind Ke Mah-e-Mubeen

अल-मदद, ख़्वाजा-ए-दीं ! हिन्द के माह-ए-मुबीं ! इक दश्त को ख़्वाजा ने गुलज़ार बनाया है इक वादी-ए-ज़ुल्मत को ज़ौ-बार बनाया है अल्लाह ने ख़्वाजा को मुख़्तार बनाया है कुल हिन्द के वलियों का सरदार बनाया है अल-मदद, ख़्वाजा-ए-दीं ! हिन्द के माह-ए-मुबीं ! अब क़ल्ब-ओ-नज़र सब कुछ जागीर तुम्हारी है हर दिल की सतह पर अब तस्वीर तुम्हारी है हो कुफ़्र की गर्दन ख़म क्यूँ-कर न तेरे आगे किरदार-ए-मु'अज़्ज़म जब शमशीर तुम्हारी है अल-मदद, ख़्वाजा-ए-दीं ! हिन्द के माह-ए-मुबीं ! गुल बन के महक उठा, जो तुझ से जुड़ा, ख़्वाजा ! वो ग़र्क़ हुवा समझो, जो तुझ से फिरा, ख़्वाजा ! क्यूँ-कर न हों गिरवीदा हम तेरी बुज़ुर्गी पर नाज़ाँ है तेरे ऊपर जब पीर तेरा, ख़्वाजा ! अल-मदद, ख़्वाजा-ए-दीं ! हिन्द के माह-ए-मुबीं ! कश्मीर से तामिल तक उस का ही 'इलाक़ा है भारत का हर इक ज़र्रा उस का ही असासा है कुर्शी पे कोई बैठे, क्या इस से ग़रज़ हम को ता-हश्र मेरा ख़्वाजा इस हिन्द का राजा है अल-मदद, ख़्वाजा-ए-दीं ! हिन्द के माह-ए-मुबीं ! रहमत की फ़ज़ाओं में बा-ख़ैर चले जाओ दुनिया की महाफ़िल से रुख़ फेर चले जाओ मिलना है अगर तुम को भारत के शह

सिक्का मेरे ख़्वाजा का | चलता है जहाँ भर में सिक्का मेरे ख़्वाजा का / Sikka Mere Khwaja Ka | Chalta Hai Jahan Bhar Mein Sikka Mere Khwaja Ka

मेरे ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ ! मेरे ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ ! मेरे ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ ! मेरे ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ ! ख़्वाजा मेरे ख़्वाजा ! दिल में समा जा शाहों का शाह तू 'अली का दुलारा शाह-ए-अजमेर ! मेरा मसीहा है तू दर्द-मंदों के दुख का मदावा है तू तेरी निस्बत का दामन रहे हाथ में बस दवा है यही रंज-ओ-ग़म के लिए भारत में नहीं है बस चर्चा मेरे ख़्वाजा का चलता है जहाँ भर में सिक्का मेरे ख़्वाजा का यहाँ भीक मिलती है बे-गुमाँ, ये बड़े सख़ी का है आस्ताँ यहाँ सब की भरती हैं झोलियाँ, ये दर-ए-ग़रीब-नवाज़ है दुनिया से किये पर्दा सदियाँ हुईं ख़्वाजा को है आज भी भारत पर क़ब्ज़ा मेरे ख़्वाजा का चलता है जहाँ भर में सिक्का मेरे ख़्वाजा का गर दिल का सुकूँ चाहो, अजमेर चले आओ देता है सुकूँ दिल को रौज़ा मेरे ख़्वाजा का है 'इश्क़ हमारा ख़्वाजा ! है प्यार हमारा ख़्वाजा ! दिलदार हमारा ख़्वाजा ! ग़म-ख़्वार हमारा ख़्वाजा ! अजमेर में आएँ, ख़्वाजा ! और हाल सुनाएँ, ख़्वाजा ! बस झोली भर दो, ख़्वाजा ! अब रंग में रंग दो, ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! 'अज़मत मेरे ख़्वाजा की तुम कैसे घटाओगे महबूब-ए-ख़ुदा से है र