जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए / Jaan-e-Jinan-o-Raunaq-e-Gulzar Aa Gaye
लजपाल आ गए ! लजपाल आ गए ! ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ आया सोहणा जग ते ! मरहबा ! मन मोहणा जग ते ! मरहबा ! उम्मत दा वाली ! मरहबा ! जे दी शान निराली ! मरहबा ! पंद्रह सदियाँ तों ! मरहबा ! जेह्दा जश्न ए जारी ! मरहबा ! मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा ! जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए आज आमिना के घर शह-ए-अबरार आ गए ज़ाहिर हुआ वो जल्वा-ए-सूरत जनाब का क़ुदसी भी लेने सदक़ा-ए-रुख़्सार आ गए ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ ए पंद्रह सौवाँ ने जश्न-ए-विलादत थाँ थाँ धुम्माँ पै गय्याँ अर्ज़-ओ-समा, ज़मान-ओ-मकाँ यक ज़बाँ हैं आज ख़ल्लाक़-ए-काइनात के शहकार आ गए जान-ए-जिनान-ओ-रौनक़-ए-गुलज़ार आ गए आज आमिना के घर शह-ए-अबरार आ गए मेहर-ए-समा, सितारे, क़मर और कहकशाँ ख़ैरात लेने नूर से अनवार आ गए आया सोहणा जग ते ! मरहबा ! मन मोहणा जग ते ! मरहबा ! उम्मत दा वाली ! मरहबा ! जे दी शान निराली ! मरहबा ! पंद्रह सदियाँ तों ! मरहबा ! जेह्दा जश्न ए जारी ! मरहबा ! मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा ! ये रस्म-ए-...