मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम / Mustafa Jaan-e-Rehmat Pe Lakhon Salam (Short & Full)
Mustafa Jane Rehmat Pe Lakhon Salam Lyrics in Hindi & English
मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम
शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद
गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम
नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद
नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम
'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं
उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम
फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद
ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूद
हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम
दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान
कान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम
जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहा
उस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम
जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकी
उन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम
जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया
उस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम
नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूद
ऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम
पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियाँ
उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम
वो दहन जिस की हर बात वह्य-ए-ख़ुदा
चश्मा-ए-'इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम
वो ज़बाँ जिस को सब कुन की कुंजी कहें
उस की नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम
उस की बातों की लज़्ज़त पे लाखों दुरूद
उस के ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम
जिस की तस्कीं से रोते हुए हँस पड़ें
उस तबस्सुम की 'आदत पे लाखों सलाम
हाथ जिस सम्त उट्ठा ग़नी कर दिया
मौज-ए-बहर-ए-समाहत पे लाखों सलाम
जिस को बार-ए-दो-'आलम की पर्वा नहीं
ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
'ईद-ए-मुश्किल-कुशाई के चमके हिलाल
नाख़ुनों की बिशारत पे लाखों सलाम
कुल जहाँ मिल्क और जव की रोटी ग़िज़ा
उस शिकम की क़ना'अत पे लाखों सलाम
खाई क़ुरआँ ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़सम
उस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम
जिस सुहानी घड़ी चमका तयबा का चाँद
उस दिल-अफ़रोज़ सा'अत पे लाखों सलाम
किस को देखा ये मूसा से पूछे कोई
आँखों वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम
उन के आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँ
शेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
उन के मौला की उन पर करोरों दुरूद
उन के असहाब-ओ-'इतरत पे लाखों सलाम
सय्यिदा ज़ाहिरा तय्यिबा ताहिरा
जान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम
हसन-ए-मुज्तबा सय्यिद-उल-अस्ख़िया
राकिब-ए-दोश-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ-क़बा
बेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम
बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबी
उस हरीम-ए-बराअत पे लाखों सलाम
या'नी है सूरा-ए-नूर जिन की गवाह
उन की पुरनूर सूरत पे लाखों सलाम
साया-ए-मुस्तफ़ा माया-ए-इस्तफ़ा
'इज़्ज़-ओ-नाज़-ए-ख़िलाफ़त पे लाखों सलाम
या'नी उस अफ़ज़लुल-ख़ल्क़ बा'दर्रुसुल
सानि-यसनैन-ए-हिजरत पे लाखों सलाम
अस्दक़ुस्सादिक़ीं सय्यिद-उल-मुत्तक़ीं
चश्म-ओ-गोश-ए-विज़ारत पे लाखों सलाम
वो 'उमर जिस के आ'दा पे शैदा सक़र
उस ख़ुदा-दोस्त हज़रत पे लाखों सलाम
दुर्र-ए-मंसूर क़ुरआँ की सिल्क-ए-बही
ज़ौज-ए-दो-नूर-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
मुर्तज़ा शेर-ए-हक़ अश्ज'उल अश्ज'ईं
साक़ी-ए-शीर-ओ-शरबत पे लाखों सलाम
अस्ल-ए-नस्ल-ए-सफ़ा वज्ह-ए-वस्ल-ए-ख़ुदा
बाब-ए-फ़स्ल-ए-विलायत पे लाखों सलाम
ग़ौस-ए-आ'ज़म इमामुत्तुक़ा वन्नुक़ा
जल्वा-ए-शान-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस की मिम्बर हुई गर्दन-ए-औलिया
उस क़दम की करामत पे लाखों सलाम
एक मेरा ही रहमत में दा'वा नहीं
शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम
काश ! महशर में जब उन की आमद हो और
भेजें सब उन की शौकत पे लाखों सलाम
मुझ से ख़िदमत के क़ुदसी कहें हाँ रज़ा
मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम
शायर:
इमाम अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
आतिफ़ असलम
मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम
शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद
गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम
नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद
नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम
'अर्श की ज़ेब-ओ-ज़ीनत पे 'अर्शी दुरूद
फ़र्श की तीब-ओ-नुज़हत पे लाखों सलाम
नूर-ए-'ऐन-ए-लताफ़त पे अल्तफ़ दुरूद
ज़ेब-ओ-ज़ैन-ए-नज़ाफ़त पे लाखों सलाम
सर्व-ए-नाज़-ए-क़िदम मग़्ज़-ए-राज़-ए-हिकम
यक्का ताज़-ए-फ़ज़ीलत पे लाखों सलाम
नुक़्ता-ए-सिर्र-ए-वहदत पे यक्ता दुरूद
मर्कज़-ए-दौर-ए-कसरत पे लाखों सलाम
साहिब-ए-रज'अत-ए-शम्स-ओ-शक़्क़ुल-क़मर
नाइब-ए-दस्त-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस के ज़ेर-ए-लिवा आदम-ओ-मन सिवा
उस सज़ा-ए-सियादत पे लाखों सलाम
'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं
उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम
अस्ल-ए-हर-बूद-ओ-बहबूद तुख़्म-ए-वुजूद
क़ासिम-ए-कंज़-ए-ने'मत पे लाखों सलाम
फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद
ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शर्क़-ए-अनवार-ए-क़ुदरत पे नूरी दुरूद
फ़त्क़-ए-अज़्हार-ए-क़ुर्बत पे लाखों सलाम
बे-सहीम-ओ-क़सीम-ओ-'अदील-ओ-मसील
जौहर-ए-फ़र्द-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
सिर्र-ए-ग़ैब-ए-हिदायत पे ग़ैबी दुरूद
'इत्र-ए-जैब-ए-निहायत पे लाखों सलाम
माह-ए-लाहूत-ए-ख़ल्वत पे लाखों दुरूद
शाह-ए-नासूत-ए-जल्वत पे लाखों सलाम
कंज़-ए-हर-बेकस-ओ-बे-नवा पर दुरूद
हिर्ज़-ए-हर-रफ़्ता-ताक़त पे लाखों सलाम
परतव-ए-इस्म-ए-ज़ात-ए-अहद पर दुरूद
नुस्ख़ा-ए-जामि'इय्यत पे लाखों सलाम
मतला'-ए-हर-स'आदत पे अस'अद दुरूद
मक़्ता'-ए-हर-सियादत पे लाखों सलाम
ख़ल्क़ के दाद-रस, सब के फ़रियाद-रस
कहफ़-ए-रोज़-ए-मुसीबत पे लाखों सलाम
मुझ से बेकस की दौलत पे लाखों दुरूद
मुझ से बेबस की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
शम'-ए-बज़्म-ए-दना हू में गुम कुन अना
शर्ह-ए-मत्न-ए-हुविय्यत पे लाखों सलाम
इंतिहा-ए-दूई इब्तिदा-ए-यकी
जम'-ए-तफ़रीक़-ओ-कसरत पे लाखों सलाम
कसरत-ए-बो'द-ए-क़िल्लत पे अक्सर दुरूद
'इज़्ज़त-ए-बो'द-ए-ज़िल्लत पे लाखों सलाम
रब्ब-ए-आ'ला की ने'मत पे आ'ला दुरूद
हक़ त'आला की मिन्नत पे लाखों सलाम
हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूद
हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम
फ़रहत-ए-जान-ए-मोमिन पे बेहद दुरूद
ग़ैज़-ए-क़ल्ब-ए-ज़लालत पे लाखों सलाम
सबब-ए-हर-सबब, मुंतहा-ए-तलब
'इल्लत-ए-जुम्ला-'इल्लत पे लाखों सलाम
मसदर-ए-मज़हरिय्यत पे अज़हर दुरूद
मज़हर-ए-मसदरिय्यत पे लाखों सलाम
जिस के जल्वे से मुरझाई कलियाँ खिलें
उस गुल-ए-पाक मम्बत पे लाखों सलाम
क़द्द-ए-बे-साया के साया-ए-मरहमत
ज़िल्ल-ए-मम्दूद-ए-राफ़त पे लाखों सलाम
ताइरान-ए-क़ुदुस जिस की हैं क़ुमरिय्याँ
उस सही सर्व-क़ामत पे लाखों सलाम
वस्फ़ जिस का है आईना-ए-हक़नुमा
उस ख़ुदा-साज़ तल'अत पे लाखों सलाम
जिस के आगे सर-ए-सरवराँ ख़म रहें
उस सर-ए-ताज-ए-रिफ़'अत पे लाखों सलाम
वो करम की घटा गेसू-ए-मुश्क-सा
लक्का-ए-अब्र-ए-राफ़त पे लाखों सलाम
लैलतुल-क़द्र में मतल'इल-फ़ज्र हक़
माँग की इस्तिक़ामत पे लाखों सलाम
लख़्त लख़्त-ए-दिल-ए-हर जिगर चाक से
शाना करने की हालत पे लाखों सलाम
दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान
कान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम
चश्मा-ए-मेहर में मौज-ए-नूर-ए-जलाल
उस रग-ए-हाशिमिय्यत पे लाखों सलाम
जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहा
उस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम
जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकी
उन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम
उन की आँखों पे वो साया-अफ़्गन मुज़ा
ज़ुल्ला-ए-क़स्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम
अश्क-बारी-ए-मुज़गाँ पे बरसे दुरूद
सिल्क-ए-दुर्र-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
मा'नी-ए-क़द-रआ, मक़्सद-ए-मा-तग़ा
नर्गिस-ए-बाग़-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया
उस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम
नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूद
ऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम
जिन के आगे चराग़-ए-क़मर झिलमिलाए
उन 'इज़ारों की तल'अत पे लाखों सलाम
उन के ख़द की सुहूलत पे बेहद दुरूद
उन के क़द की रशाक़त पे लाखों सलाम
जिस से तारीक दिल जगमगाने लगे
उस चमक वाली रंगत पे लाखों सलाम
चाँद से मुँह पे ताबाँ दरख़्शाँ दुरूद
नमक-आगीं सबाहत पे लाखों सलाम
शबनम-ए-बाग़-ए-हक़ या'नी रुख़ का 'अरक़
उस की सच्ची बराक़त पे लाखों सलाम
ख़त की गिर्द-ए-दहन वो दिल-आरा फबन
सब्ज़ा-ए-नहर-ए-रहमत पे लाखों सलाम
रीश-ए-ख़ुश मो'तदिल, मरहम-ए-रेश-ए-दिल
हाला-ए-माह-ए-नुदरत पे लाखों सलाम
पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियाँ
उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम
वो दहन जिस की हर बात वह्य-ए-ख़ुदा
चश्मा-ए-'इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम
जिस के पानी से शादाब जान-ओ-जिनाँ
उस दहन की तरावत पे लाखों सलाम
जिस से खारी कुँवें शीरा-ए-जाँ बने
उस ज़ुलाल-ए-हलावत पे लाखों सलाम
वो ज़बाँ जिस को सब कुन की कुंजी कहें
उस की नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम
उस की प्यारी फ़साहत पे बेहद दुरूद
उस की दिलकश बलाग़त पे लाखों सलाम
उस की बातों की लज़्ज़त पे लाखों दुरूद
उस के ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम
वो दु'आ जिस का जोबन बहार-ए-क़बूल
उस नसीम-ए-इजाबत पे लाखों सलाम
जिन के गुच्छे से लच्छे झड़ें नूर के
उन सितारों की नुज़हत पे लाखों सलाम
जिस की तस्कीं से रोते हुए हँस पड़ें
उस तबस्सुम की 'आदत पे लाखों सलाम
जिस में नहरें हैं शीर-ओ-शकर की रवाँ
उस गले की नज़ारत पे लाखों सलाम
दोश-बर-दोश है जिन से शान-ए-शरफ़
ऐसे शानों की शौकत पे लाखों सलाम
हजर-ए-अस्वद-ए-का'बा-ए-जान-ओ-दिल
या'नी मोहर-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम
रू-ए-आईना-ए-'इल्म पुश्त-ए-हुज़ूर
पुश्ति-ए-क़स्र-ए-मिल्लत पे लाखों सलाम
हाथ जिस सम्त उट्ठा ग़नी कर दिया
मौज-ए-बहर-ए-समाहत पे लाखों सलाम
जिस को बार-ए-दो-'आलम की पर्वा नहीं
ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
का'बा-ए-दीन-ओ-ईमाँ के दोनों सुतूँ
सा'इदैन-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
जिस के हर ख़त में है मौज-ए-नूर-ए-करम
उस कफ़-ए-बहर-ए-हिम्मत पे लाखों सलाम
नूर के चश्में लहराएँ, दरिया बहें
उँगलियों की करामत पे लाखों सलाम
'ईद-ए-मुश्किल-कुशाई के चमके हिलाल
नाख़ुनों की बिशारत पे लाखों सलाम
रफ़'-ए-ज़िक्र-ए-जलालत पे अरफ़ा' दुरूद
शरह-ए-सद्र-ए-सदारत पे लाखों सलाम
दिल समझ से वरा है मगर यूँ कहूँ
गुंचा-ए-राज़-ए-वहदत पे लाखों सलाम
कुल जहाँ मिल्क और जव की रोटी ग़िज़ा
उस शिकम की क़ना'अत पे लाखों सलाम
जो कि 'अज़्म-ए-शफ़ा'अत पे खिंच कर बंधी
उस कमर की हिमायत पे लाखों सलाम
अंबिया तह करें ज़ानू उन के हुज़ूर
ज़ानूओं की वजाहत पे लाखों सलाम
साक़-ए-अस्ल-ए-क़दम शाख़-ए-नख़्ल-ए-करम
शम'-ए-राह-ए-इसाबत पे लाखों सलाम
खाई क़ुरआँ ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़सम
उस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम
जिस सुहानी घड़ी चमका तयबा का चाँद
उस दिल-अफ़रोज़ सा'अत पे लाखों सलाम
पहले सज्दे पे रोज़-ए-अज़ल से दुरूद
यादगारी-ए-उम्मत पे लाखों सलाम
ज़र'-ए-शादाब-ओ-हर-ज़र'-ए-पुर-शीर से
बरकात-ए-रज़ा'अत पे लाखों सलाम
भाइयों के लिए तर्क पिस्ताँ करें
दूध पीतों की निस्फ़त पे लाखों सलाम
महद-ए-वाला की क़िस्मत पे सदहा दुरूद
बुर्ज-ए-माह-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
अल्लाह अल्लाह वो बचपने की फबन !
उस ख़ुदा भाती सूरत पे लाखों सलाम
उठते बूटों की नश्व-ओ-नुमा पर दुरूद
खिलते गुंचों की नकहत पे लाखों सलाम
फ़ज़्ल-ए-पैदाइशी पर हमेशा दुरूद
खेलने से कराहत पे लाखों सलाम
ए'तिला-ए-जिबिल्लत पे 'आली दुरूद
ए'तिदाल-ए-तविय्यत पे लाखों सलाम
बे-बनावट अदा पर हज़ारों दुरूद
बे-तकल्लुफ़ मलाहत पे लाखों सलाम
भीनी भीनी महक पर महकती दुरूद
प्यारी प्यारी नफ़ासत पे लाखों सलाम
मीठी मीठी 'इबारत पे शीरीं दुरूद
अच्छी अच्छी इशारत पे लाखों सलाम
सीधी सीधी रविश पर करोरों दुरूद
सादी सादी तबी'अत पे लाखों सलाम
रोज़-ए-गर्म-ओ-शब-ए-तीरा-ओ-तार में
कोह-ओ-सहरा की ख़ल्वत पे लाखों सलाम
जिस के घेरे में हैं अंबिया-ओ-मलक
उस जहाँगीर बे'सत पे लाखों सलाम
अँधे शीशे झला-झल दमकने लगे
जल्वा-रेज़ी-ए-दा'वत पे लाखों सलाम
लुत्फ़-ए-बेदारी-ए-शब पे बेहद दुरूद
'आलम-ए-ख़्वाब-ए-राहत पे लाखों सलाम
खंदा-ए-सुब्ह-ए-'इशरत पे नूरी दुरूद
गिर्या-ए-अब्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम
नर्मी-ए-ख़ू-ए-लीनत पे दाइम दुरूद
गर्मी-ए-शान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
जिस के आगे खिंची गर्दनें झुक गईं
उस ख़ुदादाद शौकत पे लाखों सलाम
किस को देखा ये मूसा से पूछे कोई
आँखों वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम
गिर्द-ए-मह दस्त-ए-अंजुम में रख़्शाँ हिलाल
बद्र की दफ़'-ए-ज़ुल्मत पे लाखों सलाम
शोर-ए-तकबीर से थरथराती ज़मीं
जुंबिश-ए-जैश-ए-नुसरत पे लाखों सलाम
ना'रहा-ए-दिलेराँ से बन गूँजते
ग़ुर्रिश-ए-कोस-ए-जुरअत पे लाखों सलाम
वो चक़ाचाक़ ख़ंजर से आती सदा
मुस्तफ़ा ! तेरी सौलत पे लाखों सलाम
उन के आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँ
शेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
अल-ग़रज़ उन के हर मू पे लाखों दुरूद
उन की हर ख़ू-ओ-ख़स्लत पे लाखों सलाम
उन के हर नाम-ओ-निस्बत पे नामी दुरूद
उन के हर वक़्त-ओ-हालत पे लाखों सलाम
उन के मौला की उन पर करोरों दुरूद
उन के असहाब-ओ-'इतरत पे लाखों सलाम
पारहा-ए-सुहुफ़ गुंचहा-ए-क़ुदुस
अहल-ए-बैत-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम
आब-ए-तत्हीर से जिस में पौदे जमे
उस रियाज़-ए-नजाबत पे लाखों सलाम
ख़ून-ए-ख़ैरुर्रुसुल से है जिन का ख़मीर
उन की बे-लौस तीनत पे लाखों सलाम
उस बतूल-ए-जिगर-पारा-ए-मुस्तफ़ा
हजला-आरा-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
जिस का आँचल न देखा मह-ओ-मेहर ने
उस रिदा-ए-नज़ाहत पे लाखों सलाम
सय्यिदा ज़ाहिरा तय्यिबा ताहिरा
जान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम
हसन-ए-मुज्तबा सय्यिद-उल-अस्ख़िया
राकिब-ए-दोश-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
औज-ए-मेहर-ए-हुदा मौज-ए-बहर-ए-नदा
रूह-ए-रूह-ए-सख़ावत पे लाखों सलाम
शहद-ख़्वार-ए-लु'आब-ए-ज़बान-ए-नबी
चाशनी-गीर-ए-'इस्मत पे लाखों सलाम
उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ-क़बा
बेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम
दुर्र-ए-दुर्ज-ए-नजफ़ मेहर-ए-बुर्ज-ए-शरफ़
रंग-ए-रू-ए-शहादत पे लाखों सलाम
अहल-ए-इस्लाम की मादरान-ए-शफ़ीक़
बानुवान-ए-तहारत पे लाखों सलाम
जिलौ-गिय्यान-ए-बैतुश्शरफ़ पर दुरूद
परवगिय्यान-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
सिय्यमा पहली माँ कहफ़-ए-अम्न-ओ-अमाँ
हक़-गुज़ार-ए-रफ़ाक़त पे लाखों सलाम
'अर्श से जिस पे तस्लीम नाज़िल हुई
उस सरा-ए-सलामत पे लाखों सलाम
मंज़िलुन मिन क़सब ला नसब ला सख़ब
ऐसे कूशक की ज़ीनत पे लाखों सलाम
बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबी
शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद
गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम
नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद
नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम
'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं
उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम
फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद
ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूद
हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम
दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान
कान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम
जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहा
उस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम
जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकी
उन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम
जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया
उस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम
नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूद
ऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम
पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियाँ
उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम
वो दहन जिस की हर बात वह्य-ए-ख़ुदा
चश्मा-ए-'इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम
वो ज़बाँ जिस को सब कुन की कुंजी कहें
उस की नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम
उस की बातों की लज़्ज़त पे लाखों दुरूद
उस के ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम
जिस की तस्कीं से रोते हुए हँस पड़ें
उस तबस्सुम की 'आदत पे लाखों सलाम
हाथ जिस सम्त उट्ठा ग़नी कर दिया
मौज-ए-बहर-ए-समाहत पे लाखों सलाम
जिस को बार-ए-दो-'आलम की पर्वा नहीं
ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
'ईद-ए-मुश्किल-कुशाई के चमके हिलाल
नाख़ुनों की बिशारत पे लाखों सलाम
कुल जहाँ मिल्क और जव की रोटी ग़िज़ा
उस शिकम की क़ना'अत पे लाखों सलाम
खाई क़ुरआँ ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़सम
उस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम
जिस सुहानी घड़ी चमका तयबा का चाँद
उस दिल-अफ़रोज़ सा'अत पे लाखों सलाम
किस को देखा ये मूसा से पूछे कोई
आँखों वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम
उन के आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँ
शेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
उन के मौला की उन पर करोरों दुरूद
उन के असहाब-ओ-'इतरत पे लाखों सलाम
सय्यिदा ज़ाहिरा तय्यिबा ताहिरा
जान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम
हसन-ए-मुज्तबा सय्यिद-उल-अस्ख़िया
राकिब-ए-दोश-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ-क़बा
बेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम
बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबी
उस हरीम-ए-बराअत पे लाखों सलाम
या'नी है सूरा-ए-नूर जिन की गवाह
उन की पुरनूर सूरत पे लाखों सलाम
साया-ए-मुस्तफ़ा माया-ए-इस्तफ़ा
'इज़्ज़-ओ-नाज़-ए-ख़िलाफ़त पे लाखों सलाम
या'नी उस अफ़ज़लुल-ख़ल्क़ बा'दर्रुसुल
सानि-यसनैन-ए-हिजरत पे लाखों सलाम
अस्दक़ुस्सादिक़ीं सय्यिद-उल-मुत्तक़ीं
चश्म-ओ-गोश-ए-विज़ारत पे लाखों सलाम
वो 'उमर जिस के आ'दा पे शैदा सक़र
उस ख़ुदा-दोस्त हज़रत पे लाखों सलाम
दुर्र-ए-मंसूर क़ुरआँ की सिल्क-ए-बही
ज़ौज-ए-दो-नूर-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
मुर्तज़ा शेर-ए-हक़ अश्ज'उल अश्ज'ईं
साक़ी-ए-शीर-ओ-शरबत पे लाखों सलाम
अस्ल-ए-नस्ल-ए-सफ़ा वज्ह-ए-वस्ल-ए-ख़ुदा
बाब-ए-फ़स्ल-ए-विलायत पे लाखों सलाम
ग़ौस-ए-आ'ज़म इमामुत्तुक़ा वन्नुक़ा
जल्वा-ए-शान-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस की मिम्बर हुई गर्दन-ए-औलिया
उस क़दम की करामत पे लाखों सलाम
एक मेरा ही रहमत में दा'वा नहीं
शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम
काश ! महशर में जब उन की आमद हो और
भेजें सब उन की शौकत पे लाखों सलाम
मुझ से ख़िदमत के क़ुदसी कहें हाँ रज़ा
मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम
शायर:
इमाम अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
आतिफ़ असलम
मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम
शम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम
मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूद
गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरम
नौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूद
नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम
'अर्श की ज़ेब-ओ-ज़ीनत पे 'अर्शी दुरूद
फ़र्श की तीब-ओ-नुज़हत पे लाखों सलाम
नूर-ए-'ऐन-ए-लताफ़त पे अल्तफ़ दुरूद
ज़ेब-ओ-ज़ैन-ए-नज़ाफ़त पे लाखों सलाम
सर्व-ए-नाज़-ए-क़िदम मग़्ज़-ए-राज़-ए-हिकम
यक्का ताज़-ए-फ़ज़ीलत पे लाखों सलाम
नुक़्ता-ए-सिर्र-ए-वहदत पे यक्ता दुरूद
मर्कज़-ए-दौर-ए-कसरत पे लाखों सलाम
साहिब-ए-रज'अत-ए-शम्स-ओ-शक़्क़ुल-क़मर
नाइब-ए-दस्त-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस के ज़ेर-ए-लिवा आदम-ओ-मन सिवा
उस सज़ा-ए-सियादत पे लाखों सलाम
'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगीं
उस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम
अस्ल-ए-हर-बूद-ओ-बहबूद तुख़्म-ए-वुजूद
क़ासिम-ए-कंज़-ए-ने'मत पे लाखों सलाम
फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूद
ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
शर्क़-ए-अनवार-ए-क़ुदरत पे नूरी दुरूद
फ़त्क़-ए-अज़्हार-ए-क़ुर्बत पे लाखों सलाम
बे-सहीम-ओ-क़सीम-ओ-'अदील-ओ-मसील
जौहर-ए-फ़र्द-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
सिर्र-ए-ग़ैब-ए-हिदायत पे ग़ैबी दुरूद
'इत्र-ए-जैब-ए-निहायत पे लाखों सलाम
माह-ए-लाहूत-ए-ख़ल्वत पे लाखों दुरूद
शाह-ए-नासूत-ए-जल्वत पे लाखों सलाम
कंज़-ए-हर-बेकस-ओ-बे-नवा पर दुरूद
हिर्ज़-ए-हर-रफ़्ता-ताक़त पे लाखों सलाम
परतव-ए-इस्म-ए-ज़ात-ए-अहद पर दुरूद
नुस्ख़ा-ए-जामि'इय्यत पे लाखों सलाम
मतला'-ए-हर-स'आदत पे अस'अद दुरूद
मक़्ता'-ए-हर-सियादत पे लाखों सलाम
ख़ल्क़ के दाद-रस, सब के फ़रियाद-रस
कहफ़-ए-रोज़-ए-मुसीबत पे लाखों सलाम
मुझ से बेकस की दौलत पे लाखों दुरूद
मुझ से बेबस की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
शम'-ए-बज़्म-ए-दना हू में गुम कुन अना
शर्ह-ए-मत्न-ए-हुविय्यत पे लाखों सलाम
इंतिहा-ए-दूई इब्तिदा-ए-यकी
जम'-ए-तफ़रीक़-ओ-कसरत पे लाखों सलाम
कसरत-ए-बो'द-ए-क़िल्लत पे अक्सर दुरूद
'इज़्ज़त-ए-बो'द-ए-ज़िल्लत पे लाखों सलाम
रब्ब-ए-आ'ला की ने'मत पे आ'ला दुरूद
हक़ त'आला की मिन्नत पे लाखों सलाम
हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूद
हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम
फ़रहत-ए-जान-ए-मोमिन पे बेहद दुरूद
ग़ैज़-ए-क़ल्ब-ए-ज़लालत पे लाखों सलाम
सबब-ए-हर-सबब, मुंतहा-ए-तलब
'इल्लत-ए-जुम्ला-'इल्लत पे लाखों सलाम
मसदर-ए-मज़हरिय्यत पे अज़हर दुरूद
मज़हर-ए-मसदरिय्यत पे लाखों सलाम
जिस के जल्वे से मुरझाई कलियाँ खिलें
उस गुल-ए-पाक मम्बत पे लाखों सलाम
क़द्द-ए-बे-साया के साया-ए-मरहमत
ज़िल्ल-ए-मम्दूद-ए-राफ़त पे लाखों सलाम
ताइरान-ए-क़ुदुस जिस की हैं क़ुमरिय्याँ
उस सही सर्व-क़ामत पे लाखों सलाम
वस्फ़ जिस का है आईना-ए-हक़नुमा
उस ख़ुदा-साज़ तल'अत पे लाखों सलाम
जिस के आगे सर-ए-सरवराँ ख़म रहें
उस सर-ए-ताज-ए-रिफ़'अत पे लाखों सलाम
वो करम की घटा गेसू-ए-मुश्क-सा
लक्का-ए-अब्र-ए-राफ़त पे लाखों सलाम
लैलतुल-क़द्र में मतल'इल-फ़ज्र हक़
माँग की इस्तिक़ामत पे लाखों सलाम
लख़्त लख़्त-ए-दिल-ए-हर जिगर चाक से
शाना करने की हालत पे लाखों सलाम
दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान
कान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम
चश्मा-ए-मेहर में मौज-ए-नूर-ए-जलाल
उस रग-ए-हाशिमिय्यत पे लाखों सलाम
जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहा
उस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम
जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकी
उन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम
उन की आँखों पे वो साया-अफ़्गन मुज़ा
ज़ुल्ला-ए-क़स्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम
अश्क-बारी-ए-मुज़गाँ पे बरसे दुरूद
सिल्क-ए-दुर्र-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम
मा'नी-ए-क़द-रआ, मक़्सद-ए-मा-तग़ा
नर्गिस-ए-बाग़-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम
जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गया
उस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम
नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूद
ऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम
जिन के आगे चराग़-ए-क़मर झिलमिलाए
उन 'इज़ारों की तल'अत पे लाखों सलाम
उन के ख़द की सुहूलत पे बेहद दुरूद
उन के क़द की रशाक़त पे लाखों सलाम
जिस से तारीक दिल जगमगाने लगे
उस चमक वाली रंगत पे लाखों सलाम
चाँद से मुँह पे ताबाँ दरख़्शाँ दुरूद
नमक-आगीं सबाहत पे लाखों सलाम
शबनम-ए-बाग़-ए-हक़ या'नी रुख़ का 'अरक़
उस की सच्ची बराक़त पे लाखों सलाम
ख़त की गिर्द-ए-दहन वो दिल-आरा फबन
सब्ज़ा-ए-नहर-ए-रहमत पे लाखों सलाम
रीश-ए-ख़ुश मो'तदिल, मरहम-ए-रेश-ए-दिल
हाला-ए-माह-ए-नुदरत पे लाखों सलाम
पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियाँ
उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम
वो दहन जिस की हर बात वह्य-ए-ख़ुदा
चश्मा-ए-'इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम
जिस के पानी से शादाब जान-ओ-जिनाँ
उस दहन की तरावत पे लाखों सलाम
जिस से खारी कुँवें शीरा-ए-जाँ बने
उस ज़ुलाल-ए-हलावत पे लाखों सलाम
वो ज़बाँ जिस को सब कुन की कुंजी कहें
उस की नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम
उस की प्यारी फ़साहत पे बेहद दुरूद
उस की दिलकश बलाग़त पे लाखों सलाम
उस की बातों की लज़्ज़त पे लाखों दुरूद
उस के ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम
वो दु'आ जिस का जोबन बहार-ए-क़बूल
उस नसीम-ए-इजाबत पे लाखों सलाम
जिन के गुच्छे से लच्छे झड़ें नूर के
उन सितारों की नुज़हत पे लाखों सलाम
जिस की तस्कीं से रोते हुए हँस पड़ें
उस तबस्सुम की 'आदत पे लाखों सलाम
जिस में नहरें हैं शीर-ओ-शकर की रवाँ
उस गले की नज़ारत पे लाखों सलाम
दोश-बर-दोश है जिन से शान-ए-शरफ़
ऐसे शानों की शौकत पे लाखों सलाम
हजर-ए-अस्वद-ए-का'बा-ए-जान-ओ-दिल
या'नी मोहर-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम
रू-ए-आईना-ए-'इल्म पुश्त-ए-हुज़ूर
पुश्ति-ए-क़स्र-ए-मिल्लत पे लाखों सलाम
हाथ जिस सम्त उट्ठा ग़नी कर दिया
मौज-ए-बहर-ए-समाहत पे लाखों सलाम
जिस को बार-ए-दो-'आलम की पर्वा नहीं
ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम
का'बा-ए-दीन-ओ-ईमाँ के दोनों सुतूँ
सा'इदैन-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
जिस के हर ख़त में है मौज-ए-नूर-ए-करम
उस कफ़-ए-बहर-ए-हिम्मत पे लाखों सलाम
नूर के चश्में लहराएँ, दरिया बहें
उँगलियों की करामत पे लाखों सलाम
'ईद-ए-मुश्किल-कुशाई के चमके हिलाल
नाख़ुनों की बिशारत पे लाखों सलाम
रफ़'-ए-ज़िक्र-ए-जलालत पे अरफ़ा' दुरूद
शरह-ए-सद्र-ए-सदारत पे लाखों सलाम
दिल समझ से वरा है मगर यूँ कहूँ
गुंचा-ए-राज़-ए-वहदत पे लाखों सलाम
कुल जहाँ मिल्क और जव की रोटी ग़िज़ा
उस शिकम की क़ना'अत पे लाखों सलाम
जो कि 'अज़्म-ए-शफ़ा'अत पे खिंच कर बंधी
उस कमर की हिमायत पे लाखों सलाम
अंबिया तह करें ज़ानू उन के हुज़ूर
ज़ानूओं की वजाहत पे लाखों सलाम
साक़-ए-अस्ल-ए-क़दम शाख़-ए-नख़्ल-ए-करम
शम'-ए-राह-ए-इसाबत पे लाखों सलाम
खाई क़ुरआँ ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़सम
उस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम
जिस सुहानी घड़ी चमका तयबा का चाँद
उस दिल-अफ़रोज़ सा'अत पे लाखों सलाम
पहले सज्दे पे रोज़-ए-अज़ल से दुरूद
यादगारी-ए-उम्मत पे लाखों सलाम
ज़र'-ए-शादाब-ओ-हर-ज़र'-ए-पुर-शीर से
बरकात-ए-रज़ा'अत पे लाखों सलाम
भाइयों के लिए तर्क पिस्ताँ करें
दूध पीतों की निस्फ़त पे लाखों सलाम
महद-ए-वाला की क़िस्मत पे सदहा दुरूद
बुर्ज-ए-माह-ए-रिसालत पे लाखों सलाम
अल्लाह अल्लाह वो बचपने की फबन !
उस ख़ुदा भाती सूरत पे लाखों सलाम
उठते बूटों की नश्व-ओ-नुमा पर दुरूद
खिलते गुंचों की नकहत पे लाखों सलाम
फ़ज़्ल-ए-पैदाइशी पर हमेशा दुरूद
खेलने से कराहत पे लाखों सलाम
ए'तिला-ए-जिबिल्लत पे 'आली दुरूद
ए'तिदाल-ए-तविय्यत पे लाखों सलाम
बे-बनावट अदा पर हज़ारों दुरूद
बे-तकल्लुफ़ मलाहत पे लाखों सलाम
भीनी भीनी महक पर महकती दुरूद
प्यारी प्यारी नफ़ासत पे लाखों सलाम
मीठी मीठी 'इबारत पे शीरीं दुरूद
अच्छी अच्छी इशारत पे लाखों सलाम
सीधी सीधी रविश पर करोरों दुरूद
सादी सादी तबी'अत पे लाखों सलाम
रोज़-ए-गर्म-ओ-शब-ए-तीरा-ओ-तार में
कोह-ओ-सहरा की ख़ल्वत पे लाखों सलाम
जिस के घेरे में हैं अंबिया-ओ-मलक
उस जहाँगीर बे'सत पे लाखों सलाम
अँधे शीशे झला-झल दमकने लगे
जल्वा-रेज़ी-ए-दा'वत पे लाखों सलाम
लुत्फ़-ए-बेदारी-ए-शब पे बेहद दुरूद
'आलम-ए-ख़्वाब-ए-राहत पे लाखों सलाम
खंदा-ए-सुब्ह-ए-'इशरत पे नूरी दुरूद
गिर्या-ए-अब्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम
नर्मी-ए-ख़ू-ए-लीनत पे दाइम दुरूद
गर्मी-ए-शान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
जिस के आगे खिंची गर्दनें झुक गईं
उस ख़ुदादाद शौकत पे लाखों सलाम
किस को देखा ये मूसा से पूछे कोई
आँखों वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम
गिर्द-ए-मह दस्त-ए-अंजुम में रख़्शाँ हिलाल
बद्र की दफ़'-ए-ज़ुल्मत पे लाखों सलाम
शोर-ए-तकबीर से थरथराती ज़मीं
जुंबिश-ए-जैश-ए-नुसरत पे लाखों सलाम
ना'रहा-ए-दिलेराँ से बन गूँजते
ग़ुर्रिश-ए-कोस-ए-जुरअत पे लाखों सलाम
वो चक़ाचाक़ ख़ंजर से आती सदा
मुस्तफ़ा ! तेरी सौलत पे लाखों सलाम
उन के आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँ
शेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम
अल-ग़रज़ उन के हर मू पे लाखों दुरूद
उन की हर ख़ू-ओ-ख़स्लत पे लाखों सलाम
उन के हर नाम-ओ-निस्बत पे नामी दुरूद
उन के हर वक़्त-ओ-हालत पे लाखों सलाम
उन के मौला की उन पर करोरों दुरूद
उन के असहाब-ओ-'इतरत पे लाखों सलाम
पारहा-ए-सुहुफ़ गुंचहा-ए-क़ुदुस
अहल-ए-बैत-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम
आब-ए-तत्हीर से जिस में पौदे जमे
उस रियाज़-ए-नजाबत पे लाखों सलाम
ख़ून-ए-ख़ैरुर्रुसुल से है जिन का ख़मीर
उन की बे-लौस तीनत पे लाखों सलाम
उस बतूल-ए-जिगर-पारा-ए-मुस्तफ़ा
हजला-आरा-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
जिस का आँचल न देखा मह-ओ-मेहर ने
उस रिदा-ए-नज़ाहत पे लाखों सलाम
सय्यिदा ज़ाहिरा तय्यिबा ताहिरा
जान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम
हसन-ए-मुज्तबा सय्यिद-उल-अस्ख़िया
राकिब-ए-दोश-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम
औज-ए-मेहर-ए-हुदा मौज-ए-बहर-ए-नदा
रूह-ए-रूह-ए-सख़ावत पे लाखों सलाम
शहद-ख़्वार-ए-लु'आब-ए-ज़बान-ए-नबी
चाशनी-गीर-ए-'इस्मत पे लाखों सलाम
उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ-क़बा
बेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम
दुर्र-ए-दुर्ज-ए-नजफ़ मेहर-ए-बुर्ज-ए-शरफ़
रंग-ए-रू-ए-शहादत पे लाखों सलाम
अहल-ए-इस्लाम की मादरान-ए-शफ़ीक़
बानुवान-ए-तहारत पे लाखों सलाम
जिलौ-गिय्यान-ए-बैतुश्शरफ़ पर दुरूद
परवगिय्यान-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम
सिय्यमा पहली माँ कहफ़-ए-अम्न-ओ-अमाँ
हक़-गुज़ार-ए-रफ़ाक़त पे लाखों सलाम
'अर्श से जिस पे तस्लीम नाज़िल हुई
उस सरा-ए-सलामत पे लाखों सलाम
मंज़िलुन मिन क़सब ला नसब ला सख़ब
ऐसे कूशक की ज़ीनत पे लाखों सलाम
बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबी