जश्न का मंज़र था माहौल सुहाना था | अर्श न क्यूँ सजता सरकार ने आना था / Jashn Ka Manzar Tha Mahaul Suhana Tha | Arsh Na Kyun Sajta Sarkar Ne Aana Tha
जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था फ़र्श पे नग़्मे थे आक़ा की रिसालत के 'अर्श पे चर्चे थे सरकार की 'अज़मत के हूरों के लब पर ख़ुशियों का तराना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था रुत बदल जाए और रात सँवर जाए हुक्म ख़ुदा का हुआ कि वक़्त ठहर जाए रुक गया फ़ौरन जो गर्दिश में ज़माना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था मस्जिद-ए-अक़्सा में क्या मंज़र थे प्यारे पीछे क़तारों में हाज़िर थे नबी सारे आगे मुसल्ले पर सुल्तान-ए-ज़माना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था मंज़िल-ए-सिदरा पर जिब्रील ने 'अर्ज़ किया शाह-ए-दो-'आलम ! मैं आगे नहीं चल सकता ये ही हद मेरी, यही मेरा ठिकाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था एक वसीला है ...