मेरी हसरत मेरी चाहत मिटा देते तो अच्छा था / Meri Hasrat Meri Chahat Mita Dete To Achchha Tha
मेरी हसरत, मेरी चाहत मिटा देते तो अच्छा था मुझे आक़ा मदीने में बुला लेते तो अच्छा था वहीं रहते, वहीं जीते, वहीं पर जान दे देते अगर तयबा में घर अपना बना लेते तो अच्छा था हमें वैसे भी ये दुनिया किसी दिन छोड़ जाना है अगर ये जान आक़ा पर लुटा देते तो अच्छा था ज़माने की मोहब्बत में बहुत आँसू बहाते हो नबी की याद में आँसू बहा लेते तो अच्छा था दु'आ के वास्ते पीरों से और बाबा से कहते हो कभी तुम बाप और माँ से दु'आ लेते तो अच्छा था यक़ीनन क़ब्र में दीदार होगा आप का लेकिन किसी दिन ख़्वाब में चेहरा दिखा देते तो अच्छा था मना' किस ने किया है पीर से उल्फ़त नहीं रखना मगर माँ-बाप को पहले मना लेते तो अच्छा था सुनाते हैं ज़माने भर को ना'त-ए-मुस्तफ़ा, 'अज़मत ! अगर इक ना'त आक़ा को सुना लेते तो अच्छा था शायर: अज़मत रज़ा भागलपुरी ना'त-ख़्वाँ: अज़मत रज़ा भागलपुरी meri hasrat, meri chaahat miTa dete to achchha tha mujhe aaqa madine me.n bula lete to achchha tha wahi.n rehte, wahi.n jeete, wahi.n par jaan de dete agar tayba me.n ghar apna bana lete to achchha tha ...