वलवला-ए-इश्क़-ओ-उल्फ़त आया क़ुर्बानी का दिन / Walwala-e-Ishq-o-Ulfat Aaya Qurbani Ka Din
क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए वलवला-ए-'इश्क़-ओ-उल्फ़त, आया क़ुर्बानी का दिन ये है इब्राहीमी सुन्नत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन जानवर और माल का सदक़ा हैं ये क़ुर्बानियाँ होगी घर-भर की हिफ़ाज़त, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन है हदीस-ए-मुस्तफ़ा और हिस्सा-ए-क़ुरआन है ये है क़ुर्बानी 'इबादत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन ऐ उजागर ! ख़ुश-दिली से जानवर क़ुर्बान कर मिलती है अल्लाह की क़ुर्बत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी ...