वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया / Wohi Rab Hai Jis Ne Tujh Ko Hamatan Karam Banaya
वही रब है जिस ने तुझ को हमा-तन करम बनाया हमें भीक माँगने को तेरा आस्ताँ बताया तुझे हम्द है, ख़ुदाया ! तुम्हीं हाकिम-ए-बराया, तुम्हीं क़ासिम-ए-'अताया तुम्हीं दाफ़े'-ए-बलाया, तुम्हीं शाफ़े'-ए-ख़ताया कोई तुम सा कौन आया वो कुँवारी पाक मरयम, वो "नफ़ख़्तु-फ़ीह" का दम है 'अजब निशान-ए-आ'ज़म, मगर आमिना का जाया वही सब से अफ़्ज़ल आया यही बोले सिदरा वाले, चमन-ए-जहाँ के थाले सभी मैं ने छान डाले, तेरे पाए का न पाया तुझे यक ने यक बनाया फ़-इज़ा फ़रग़्त फ़न्सब, ये मिला है तुम को मंसब जो गदा बना चुके अब उठो वक़्त-ए-बख़्शिश आया करो क़िस्मत-ए-'अताया व-इलल-इलाहि-फ़र्ग़ब, करो 'अर्ज़ सब के मतलब कि तुम्हीं को तकते हैं सब, करो उन पर अपना साया बनो शाफ़े'-ए-ख़ताया अरे ऐ ख़ुदा के बंदो ! कोई मेरे दिल को ढूँडो मेरे पास था अभी तो, अभी क्या हुआ ख़ुदाया ! न कोई गया न आया हमें, ऐ रज़ा ! तेरे दिल का पता चला ब-मुश्किल दर-ए-रौज़ा के मुक़ाबिल वो हमें नज़र तो आया ये न पूछ कैसा पाया कभी ख़ंदा-ज़ेर-ए-लब है, कभी गिर्या सारी शब है कभी ग़म कभी तरब है, न सबब समझ में आया न उसी ने कुछ बताया ...