जो न होता तेरा जमाल ही | सल्लू अलैहि व आलिही / Jo Na Hota Tera Jamal Hi | Sallu Alaihi Wa Aalihi
जो न होता तेरा जमाल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही जो न होता तेरा जमाल ही तो जहाँ था ख़्वाब-ओ-ख़याल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही मह-ओ-मेहर में तेरी रौशनी हुई ख़त्म तुझ पे पयंबरी नहीं तुझ सा तेरे सिवा कोई करे कौन तेरी बराबरी ये नहीं किसी की मजाल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही न फ़सील है, न महल-सरा तेरा फ़र्श है वही बोरिया तेरे जिस्म-ए-पाक पे इक क़बा वो भी तार-तार है जा-ब-जा तेरी सादगी है कमाल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही तू ख़लील है, तू कलीम है तू रऊफ़ है, तू रहीम है तू हबीब-ए-रब्ब-ए-करीम है तेरी शान सब से 'अज़ीम है नहीं कोई तेरी मिसाल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही तू कलीम है, तू करीम है तू रऊफ़ है, तू रहीम है तू हबीब-ए-रब्ब-ए-करीम है तेरी शान सब से 'अज़ीम है नहीं कोई तेरी मिसाल ही सल्लू 'अलैहि व आलिही शायर: तनवीर नक़वी ना'त-ख़्वाँ: ज़ुबैदा ख़ानम यश्फ़ीन अजमल शैख़ सय्यिदा अरीबा फ़ातिमा jo na hota tera jamaal hi sallu 'alaihi wa aalihi jo na hota tera jamaal hi to jahaa.n tha KHwaab-o-KHayaal hi sallu 'alaihi wa aalihi mah-o-mehr me.n t...