मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है / Mera Har Gham Mitane Ko Mera Allah Kafi Hai
मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरी बिगड़ी बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है लहू मेरे जिगर का है उसी के फ़ज़्ल से जारी उसी की मेहरबानी से है साँसों की रवादारी मेरा जीवन बचाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही सब्ज़ा उगाता है, वही गुलशन सजाता है अनाजों का शजर उस के करम से लहलहाता है मुझे खाना खिलाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है समुंदर के लबों में और बल खाती घटाओं में वही तो बाँटता है रोज़ ताज़ा दम हवाओं में नया मौसम बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है हवाओं को चलाता है, वही बरसात लाता है वही गेहूँ के पौधों में नई बाली उगाता है मेरी खेती लगाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही दरिया में मूसा के लिए रस्ता बनाता है वही यूनुस को मछली के शिकम में भी बचाता है हर एक मंज़र दिखाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है चमकता है फ़लक पर चाँद, सूरज जगमगाता है फ़लक के नीले पर्दों पर भी तारा टिमटिमाता है रुख़-ए-'आलम ...