ग़ुलामों को आक़ा मदीना दिखा दो / Ghulamon Ko Aaqa Madina Dikha Do
ग़ुलामों को आक़ा ! मदीना दिखा दो तुम्हें याद कर के बहुत रो रहे हैं बड़ी हसरतें ले के बैठे हैं दिल में किसी दिन भी, आक़ा ! मदीना दिखा दो कोई मुझ से पूछे तेरे दिल में क्या है मेरे दिल में, लोगो ! मदीना बसा है जिसे देखने की तमन्ना में रोए उसी दर को, आक़ा ! बुला कर दिखाओ ग़ुलामों के दिल में मदीना बसा है हर इक दिल में आक़ा ये सदमा लगा है ग़मों के समंदर में हम रो रहे हैं कि पल भर में, आक़ा ! मदीना दिखा दो बड़ी मतलबी दुनिया हँसती है मुझ पर कि कब जा रहे हो तुम आक़ा के दर पर इसी कश्मकश में ये दिल रो रहा है किसी दिन भी, आक़ा ! मदीना दिखा दो वो सब से हैं आ'ला, अरे दुनिया वालो ! वो नबियों के सुल्तान हैं, दुनिया वालो ! मेरे दिल की धड़कन पे हैं वो बसे तो मेरी धड़कनों को मदीना दिखा दो मदीने से आ कर बताते हैं हाजी बड़ा ख़ुश-नुमा है मदीना मदीना मेरा दिल ये सुन कर बहुत रो रहा है कि आक़ा मुझे भी मदीना दिखा दो बहुत क़ाफ़िले मैं ने देखे हैं जाते हर इक लब पे मुस्कान तयबा सजा है मैं तयबा की गलियों में खो जाऊँ जा कर मेरे आक़ा ! तयबा का मंज़र दिखा दो सभी जाने वाले ये क्यूँ रो रहे हैं ख़ुशी के ये आँ...