आऊँ तेरे दर पर जीलानी / Aaun Tere Dar Par Jilani
ग़फ़लत में कटी मोरी सगरी उमरिया करो मो पे अपनी दया, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! मुझ पर भी करम हो, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! ज़माने में नहीं सुनता कोई फ़रियाद, जीलानी ! ख़ुदा-रा आप ही कीजे मेरी इमदाद, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! करो इमदाद, ऐ लख़्त-ए-दिल-ए-मुश्किल-कुशा-हैदर ! गिरा हूँ गर्दिशों में, हूँ बड़ा नाशाद, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! फ़साने ग़म के तुम से ना कहूँ तो फिर कहूँ किस से ? मेरी सुन लो मेरी सुन लो मेरी रूदाद, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! मेरी शाम-ए-ख़ज़ाँ सुब्ह-ए-बहाराँ में बदल जाए रुख़-ए-पुरनूर दिखला कर करो तुम शाद, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! समंदर में ग़मों के पाएगा ये साहिल-ए-तस्कीं उजागर देख ले आ कर तेरा बग़दाद, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! आऊँ तेरे दर पर, जीलानी ! शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: मेहमूद अत्तारी Gaflat me.n...