रब ने बनाया है कुछ ऐसा रुत्बा ग़ौस-ए-आज़म का / Rab Ne Banaya Hai Kuchh Aisa Rutba Ghaus-e-Azam Ka
रब ने बनाया है कुछ ऐसा रुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म का जिन्न-ओ-बशर के लब पे सजा है ख़ुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म का जितने वली आए हैं जहाँ में, सब हैं अहल-ए-शान मगर सब वलियों की गर्दन पर है तल्वा ग़ौस-ए-आ'ज़म का उन की जन्नत, उन की हुकूमत, रब उन का तो सब उन का खाता है ये सारा ज़माना सदक़ा ग़ौस-ए-आ'ज़म का करते हैं फ़रियाद-रसाई अपनी तुर्बत-ए-अनवर से दुनिया के जिस कोने में हो शैदा ग़ौस-ए-आ'ज़म का क़ब्र में गर पूछेंगे फ़रिश्ते, क्या है तेरी पहचान बता ? कह दूँगा लाया हूँ देखो शजरा ग़ौस-ए-आ'ज़म का निस्बत हो जिस को उस दर से, क्यूँ वो डरे गुलज़ार ! भला चीर के रख दे शेर-ए-बबर को कुत्ता ग़ौस-ए-आ'ज़म का शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी rab ne banaaya hai kuchh aisa rutba Gaus-e-aa'zam ka jinn-o-bashar ke lab pe saja hai KHutba Gaus-e-aa'zam ka jitne wali aaye hai.n jahaa.n me.n, sab hai.n ahl-e-shaan magar sab waliyo.n ki gardan par hai talwa Gaus-e-aa'zam ka un ki jannat, un ki hukoomat, rab un ka to sab...