Posts

ADVERTISEMENT

मदीने की अँगूठी है नगीना ग़ौस-ए-आज़म का / Madine Ki Angoothi Hai Nageena Ghaus-e-Azam Ka

मदीने की अँगूठी है, नगीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का जहाँ में बटता है हर-सू ख़ज़ीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का मुरीदी ला-तख़फ़ की दी तसल्ली हम ग़ुलामों को डुबो सकता नहीं तूफ़ाँ सफ़ीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का वसीला क़ुर्ब-ए-रब का हैं मुहम्मद मुस्तफ़ा बेशक मुहम्मद तक पहुँचने का है ज़ीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का न जाने किस बिना पर मुश्क-ओ-अम्बर फ़ख़्र करते हैं ज़रा सुँघवाओ उन सब को पसीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का हर एक सुन्नी के घर में ग्यारहवीं का जश्न होता है वहाबी सोज़ है प्यारा महीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का क़दम मेरा सभी वलियों की गर्दन पर, ये फ़रमाया क़दम ये है तो कैसा होगा सीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का हमारी ज़िंदगी भी ख़िदमत-ए-मख़्लूक़ में गुज़रे इलाही ! कर 'अता हम को क़रीना ग़ौस-ए-आ'ज़म का सर-ए-महशर पुकारा जाएगा यूँ नाम नज़्मी का ये नज़्मी कौन है ? हाँ हाँ वही ना ग़ौस-ए-आ'ज़म का शायर: नज़्मी मियाँ मारेहरवी ना'त-ख़्वाँ: मुहम्मद शरीफ़ रज़ा पाली madine ki angooThi hai, nageena Gaus-e-aa'zam ka jahaa.n me.n baT.ta hai har-soo KHazeena Gaus-e-aa'zam ka mureedi laa-taKHaf ki di tasalli ham Gulaamo.n ko Dubo...

रब ने बनाया है कुछ ऐसा रुत्बा ग़ौस-ए-आज़म का / Rab Ne Banaya Hai Kuchh Aisa Rutba Ghaus-e-Azam Ka

रब ने बनाया है कुछ ऐसा रुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म का जिन्न-ओ-बशर के लब पे सजा है ख़ुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म का जितने वली आए हैं जहाँ में, सब हैं अहल-ए-शान मगर सब वलियों की गर्दन पर है तल्वा ग़ौस-ए-आ'ज़म का उन की जन्नत, उन की हुकूमत, रब उन का तो सब उन का खाता है ये सारा ज़माना सदक़ा ग़ौस-ए-आ'ज़म का करते हैं फ़रियाद-रसाई अपनी तुर्बत-ए-अनवर से दुनिया के जिस कोने में हो शैदा ग़ौस-ए-आ'ज़म का क़ब्र में गर पूछेंगे फ़रिश्ते, क्या है तेरी पहचान बता ? कह दूँगा लाया हूँ देखो शजरा ग़ौस-ए-आ'ज़म का निस्बत हो जिस को उस दर से, क्यूँ वो डरे गुलज़ार ! भला चीर के रख दे शेर-ए-बबर को कुत्ता ग़ौस-ए-आ'ज़म का शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी rab ne banaaya hai kuchh aisa rutba Gaus-e-aa'zam ka jinn-o-bashar ke lab pe saja hai KHutba Gaus-e-aa'zam ka jitne wali aaye hai.n jahaa.n me.n, sab hai.n ahl-e-shaan magar sab waliyo.n ki gardan par hai talwa Gaus-e-aa'zam ka un ki jannat, un ki hukoomat, rab un ka to sab...

शाह-ए-जीलाँ पीर-ए-पीराँ मीर-ए-मीराँ / Shah-e-Jeelan Peer-e-Peeran Meer-e-Meeran

शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है, या ग़ौस ! मगर तेरा करम कामिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ दुहाई या मुहिय्युद्दीन दुहाई बला इस्लाम पर नाज़िल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ 'अज़ूमन क़ातिलन 'इंदल-क़िताली मदद को आ दम-ए-बिस्मिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ख़ुदा-रा नाख़ुदा आ दे सहारा हवा बिगड़ी भँवर हाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तेरा वक़्त और पड़े यूँ दीन पर वक़्त न तू 'आजिज़ न तू ग़ाफ़िल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ रही हाँ शामत-ए-आ'माल ये भी जो तू चाहे अभी ज़ाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ग़यूरा ! अपनी ग़ैरत का तसद्दुक़ वही कर जो तेरे क़ाबिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ ख़ुदा-रा मरहम-ए-ख़ाक-ए-क़दम दे जिगर ज़ख़्मी है दिल घाइल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ तेरे बाबा का फिर तेरा करम है ये मुँह वरना किसी क़ाबिल है, या ग़ौस ! शाह-ए-जीलाँ, पीर-ए-पीराँ, मीर-ए-मीराँ...

तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है या ग़ौस / Talab Ka Munh To Kis Qabil Hai Ya Ghaus

तलब का मुँह तो किस क़ाबिल है, या ग़ौस ! मगर तेरा करम कामिल है, या ग़ौस ! दुहाई या मुहिय्युद्दीन दुहाई बला इस्लाम पर नाज़िल है, या ग़ौस ! वो सँगीं बिद'अतें वो तेज़ी-ए-कुफ़्र कि सर पर तेग़ दिल पर सिल है, या ग़ौस ! 'अज़ूमन क़ातिलन 'इंदल-क़िताली मदद को आ दम-ए-बिस्मिल है, या ग़ौस ! ख़ुदा-रा नाख़ुदा आ दे सहारा हवा बिगड़ी भँवर हाइल है, या ग़ौस ! जिला दे दीं, जला दे कुफ़्र-ओ-इल्हाद कि तू मुह्यी है तू क़ातिल है, या ग़ौस ! तेरा वक़्त और पड़े यूँ दीन पर वक़्त न तू 'आजिज़ न तू ग़ाफ़िल है, या ग़ौस ! रही हाँ शामत-ए-आ'माल ये भी जो तू चाहे अभी ज़ाइल है, या ग़ौस ! ग़यूरा ! अपनी ग़ैरत का तसद्दुक़ वही कर जो तेरे क़ाबिल है, या ग़ौस ! ख़ुदा-रा मरहम-ए-ख़ाक-ए-क़दम दे जिगर ज़ख़्मी है दिल घाइल है, या ग़ौस ! न देखूँ शक्ल-ए-मुश्किल तेरे आगे कोई मुश्किल सी ये मुश्किल है, या ग़ौस ! वो घेरा रिश्ता-ए-शिर्क-ए-ख़फ़ी ने फँसा ज़ुन्नार में ये दिल है, या ग़ौस ! किये तरसा-ओ-गब्र अक़्ताब-ओ-अब्दाल ये महज़ इस्लाम का साइल है, या ग़ौस ! तू क़ुव्वत दे मैं तन्हा काम बिस्यार बदन कमज़ोर दिल काहिल है, या ग़ौस ! 'अदू बद-दीन मज़ह...

पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद या ग़ौस / Pade Mujh Par Na Kuchh Uftad Ya Ghous

पड़े मुझ पर न कुछ उफ़्ताद, या ग़ौस ! मदद पर हो तेरी इमदाद, या ग़ौस ! उड़े तेरी तरफ़ बा'द-ए-फ़ना ख़ाक न हो मिट्टी मेरी बर्बाद, या ग़ौस ! मेरे दिल में बसें जल्वे तुम्हारे ये वीराना बने बग़दाद, या ग़ौस ! न भूलूँ भूल कर भी याद तेरी न याद आए किसी की याद, या ग़ौस ! मुरीदी ला-तख़फ़ फरमाते आओ बलाओं में है ये नाशाद, या ग़ौस ! गले तक आ गया सैलाब ग़म का चला मैं आइये फ़रियाद, या ग़ौस ! नशेमन से उड़ा कर भी न छोड़ा अभी है घात में सय्याद, या ग़ौस ! ख़मीदा सर गिरिफ़्तार-ए-क़ज़ा है कशीदा ख़ंजर-ए-जल्लाद, या ग़ौस ! अँधेरी रात, जंगल, मैं अकेला मदद का वक्त है फ़रियाद, या ग़ौस ! खिला दो ग़ुंचा-ए-ख़ातिर कि तुम हो बहार-ए-गुलशन-ए-ईजाद, या ग़ौस ! मेरे ग़म कि कहानी आप सुन लें कहूँ मैं किस से ये रूदाद, या ग़ौस ! रहूँ आज़ाद-ए-क़ैद-ए-'इश्क़ कब तक करो इस क़ैद से आज़ाद, या ग़ौस ! करोगे कब तक अच्छा मुझ बुरे को मेरे हक़ में है क्या इर्शाद, या ग़ौस ! ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-क़ब्र-ओ-ग़म-ए-हश्र ख़ुदा-रा कर दो मुझ को शाद, या ग़ौस ! हसन मँगता है दे दे भीक दाता रहे ये राज-पाट आबाद, या ग़ौस ! शायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी ना'त-ख़्व...

मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा या ग़ौस / Mere Labon Par Subh-o-Masa Hai Naam Tumhara Ya Ghous

ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्तगीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्तगीर ! जीलानी सरकार ! कर दो बेड़ा पार झोली फैलाए मँगते आए तेरे दुवार मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! तेरे नाम पे वारी जाऊँ, या ग़ौस पिया सरकार ! तेरी चौखट पे मर जाऊँ, या ग़ौस पिया सरकार ! ग़ौस-ए-आ'ज़म शाह-ए-जीलानी ! आप रुत्बे में हैं ला-सानी आप के आगे ब-सद ता'ज़ीम हर वली की ख़म है पेशानी मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! बग़दाद के वाली, मीराँ ! मैं तेरा सुवाली, मीराँ ! चौखट पे खड़ा हूँ, मीराँ ! मेरी झोली भर दो, मीराँ ! वलियों के वली हो, मीराँ ! मेरे ग़ौस-ए-जली हो, मीराँ ! क़िब्ला-ए-अहल-ए-सफ़ा हो तुम ताजदार-ए-औलिया हो तुम ग़ौस-ए-आ'ज़म ! क़ादरियों का दो जहाँ में आसरा हो तुम मेरे लबों पर सुब्ह-ओ-मसा है नाम तुम्हारा, या ग़ौस ! मेरी तरफ़ भी लुत्फ़-ओ-करम का कर दो इशारा, या ग़ौस ! तेरे दर की, शाह-ए-जीलानी ! औलिया करते हैं दरबानी पंजतन का तू है दिल-जानी हर तरफ़ है तेरी सुल्तानी तेरे नाम पे वारी ...

फ़ासलों को ख़ुदारा मिटा दो | जालियों पर निगाहें जमी हैं / Faslon Ko Khudara Mita Do | Jaliyon Par Nigahen Jami Hain

Rukh Se Parda Ab Apne Hata Do Lyrics in Hindi, English & Urdu फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं अपना जल्वा इसी में दिखा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं रुख़ से पर्दा अब अपने हटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं ग़ौस-उल-आ'ज़म हो, ग़ौस-उल-वरा हो नूर हो नूर-ए-सल्ले-'अला हो क्या बयाँ आप का मर्तबा हो ! दस्त-गीर और मुश्किल-कुशा हो आज दीदार अपना करा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं एक मुजरिम सियाह-कार हूँ मैं हर ख़ता का सज़ा-वार हूँ मैं मेरे चारों तरफ़ है अँधेरा रौशनी का तलबग़ार हूँ मैं इक दिया ही समझ कर जला दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों पर निगाहें जमी हैं वज्द में आएगा सारा 'आलम हम पुकारेंगे, या ग़ौस-ए-आ'ज़म वो निकल आएँगे जालियों से और क़दमों में गिर जाएँगे हम फिर कहेंगे कि बिगड़ी बना दो जालियों पर निगाहें जमी हैं फ़ासलों को ख़ुदा-रा मिटा दो जालियों प...