हुसैन सब से अज़ीम-तर है / Hussain Sab Se Azeemtar Hai
है मेरा मौला या हुसैन है तेरा मौला या हुसैन आक़ा का प्यारा या हुसैन है सब का मौला या हुसैन हुसैन का ज़िक्र 'अर्श पर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है ये हुक्म-ए-सुल्तान-ए-बहर-ओ-बर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है जनाब-ए-मौला हसन बिरादर जनाब-ए-ज़हरा है जिस की मादर जनाब-ए-मौला 'अली पिदर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है जलाल देखा हुसैन का जब पुकार उट्ठा यज़ीदी लश्कर जनाब-ए-हैदर का ये पिसर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है ज़ुबाँ पे क़ुरआँ की है तिलावत ये देख कर है जहाँ में हैरत कि नोक-ए-नेज़ा पे रक्खा सर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है जो बाग़ी दीन-ए-रसूल का है जो बाग़ी इब्न-ए-बतूल का है वो आज भी फिरता दर-ब-दर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है फ़क़त ख़ुदा की रज़ा की ख़ातिर नबी के दीं की बक़ा की ख़ातिर लुटा दिया जिस ने अपना घर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है चला जो मैदाँ में ले के ख़ंजर तो थरथराया यज़ीदी लश्कर वो शेर-ए-हैदर है, वो निडर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है हुआ है हैराँ जहान सारा जो एक कासे में सागर आया करम ये उस का ही ख़्वाजा पर है हुसैन सब से 'अज़ीम-तर है जहाँ से, ...