दामन में लिए ख़ैर है आई शब-ए-मेराज / Daman Mein Liye Khair Hai Aai Shab-e-Meraj
दामन में लिए ख़ैर है आई शब-ए-मे'राज महरूम नहीं लौटेगा कोई शब-ए-मे'राज बंदों को ख़ुदा से है मिलाई शब-ए-मे'राज 'आसी के मुक़द्दर को जगाई शब-ए-मे'राज उम्मत के लिए प्यारा नमाज़ों का वो तोहफ़ा सरकार को है रब से दिलाई शब-ए-मे'राज हक़दार-ए-जहन्नम थे गुनाहों के सबब हम सरकार ने है लाज बचाई शब-ए-मे'राज हम ख़ाक के ज़र्रे हैं, ख़ुदा उन का ही जाने आक़ा की कहाँ तक है रसाई शब-ए-मे'राज आते हैं शह-ए-कौन-ओ-मकाँ सर को झुका लो हूरों ने सदा है ये लगाई शब-ए-मे'राज जब शाह चले फ़र्श से, पलकों को अपनी राहों में मलाइक ने बिछाई शब-ए-मे'राज जन्नत के फ़रिश्तों की जमा'अत है ज़मीं पर है नूर में ये दुनिया नहाई शब-ए-मे'राज पा लेता है हर चीज़ वो, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! देता है ख़ुदा को जो दुहाई शब-ए-मे'राज शायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदी ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ अनस रज़ा अत्तारी daaman me.n liye KHair hai aai shab-e-me'raaj mahroom nahi.n lauTega koi shab-e-me'raaj bando.n ko KHuda se hai milaai shab-e-me'raaj 'aasi ke muqaddar ko jagaai shab-e-me...