अल्लाह मुआफ़ कर दे / Allah Muaf Kar De
अल्लाह ! मु'आफ़ कर दे मौला ! तू मु'आफ़ कर दे जब मुश्किलों ने घेरा, तू ने बचा लिया है दुनिया ने जब गिराया, तू ने उठा लिया है मेरे करीम ! मुझ को यूँ ही सँभाल रखना बिगड़ा जो काम मेरा, तू ने बना दिया है अल्लाह ! मु'आफ़ कर दे मौला ! तू मु'आफ़ कर दे 'इस्याँ का शोर हर पल, दिन-रात है मुसलसल मुझ को बचा ले, मौला ! मेरे सामने है दलदल रस्ता न कोई रहबर, हामी न कोई यावर प्यासा हूँ भेज दे अब तू रहमतों के बादल अल्लाह ! मु'आफ़ कर दे मौला ! तू मु'आफ़ कर दे रमज़ान का वसीला, झोली को मेरी भर दे जो हों मुरादें मेरी, तू सब को पूरी कर दे शब्बीर तेरे दर पे बन के सवाली आया कर दरगुज़र ख़ताएँ, तौबा क़ुबूल कर दे अल्लाह ! मु'आफ़ कर दे मौला ! तू मु'आफ़ कर दे शायर: शब्बीर अबू तालिब नशीद-ख़्वाँ: शब्बीर अबू तालिब allah ! mu'aaf kar de maula ! tu mu'aaf kar de jab mushkilo.n ne ghera, tu ne bacha liya hai duniya ne jab giraaya, tu ne uTha liya hai mere kareem ! mujh ko yu.n hi sambhaal rakhna big.Da jo kaam mera, tu ne bana diya hai allah ! ...