Posts

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है / Mera Har Gham Mitane Ko Mera Allah Kafi Hai

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरी बिगड़ी बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है लहू मेरे जिगर का है उसी के फ़ज़्ल से जारी उसी की मेहरबानी से है साँसों की रवादारी मेरा जीवन बचाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही सब्ज़ा उगाता है, वही गुलशन सजाता है अनाजों का शजर उस के करम से लहलहाता है मुझे खाना खिलाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है समुंदर के लबों में और बल खाती घटाओं में वही तो बाँटता है रोज़ ताज़ा दम हवाओं में नया मौसम बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है हवाओं को चलाता है, वही बरसात लाता है वही गेहूँ के पौधों में नई बाली उगाता है मेरी खेती लगाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही दरिया में मूसा के लिए रस्ता बनाता है वही यूनुस को मछली के शिकम में भी बचाता है हर एक मंज़र दिखाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है चमकता है फ़लक पर चाँद, सूरज जगमगाता है फ़लक के नीले पर्दों पर भी तारा टिमटिमाता है रुख़-ए-'आलम ...

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जाफ़र इमाम-ए-जाफ़र / Imamon Mein Ek Imam-e-Bartar Imam-e-Jafar Imam-e-Jafar

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम जा'फ़र 'अली के गुलशन के हैं गुल-ए-तर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र वो लख़्त-ए-जिगर-ए-बतूल भी हैं, वो बाग़-ए-ज़हरा के फूल भी हैं शुजा'अतों के 'अज़ीम पैकर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा तुम्हारी सोहबत से बहरा-वर थे वो करते थे इस का ज़िक्र अक्सर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! तुम्हारी 'इज़्ज़त, तुम्हारी शोहरत, तुम्हारी 'अज़मत, तुम्हारी रिफ़'अत नियाज़ तेरी हो क्यूँ न घर-घर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! वसी पे नज़र-ए-करम ख़ुदा-रा, नसब की निस्बत की लाज रख ले हर एक मंज़िल के तुम हो रहबर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! शायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी imaamo.n me.n ik imaam-e-bartar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far 'ali ke gulshan ke hai.n gul-e-tar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far wo laKHt-e-jigar-e-batool bhi hai.n wo baaG-e-zahra ke phool bhi hai.n shujaa'ato.n ke '...

बाहर से ठीक ठाक हूँ मैं पर मेरे हुज़ूर / Bahar Se Theek Thaak Hun Main Par Mere Huzoor

बाहर से ठीक-ठाक हूँ मैं पर, मेरे हुज़ूर ! कुछ टूट-फूट है मेरे अंदर, मेरे हुज़ूर ! मैं ग़म-ज़दा हूँ, मेरी तरफ़ मुस्कुराइए मैं गिर रहा हूँ थाम लें आ कर, मेरे हुज़ूर ! अल्लाह ! मेरी शिकस्ता-दिली बरक़रार रख आते हैं याद पहले से बढ़ कर मेरे हुज़ूर दस्त-ए-तलब को चाहे तू ना भी दराज़ कर दे देंगे भीक ख़ुद ही बुला कर मेरे हुज़ूर या रसूलल्लाह ! इक निगाह-ए-करम आप की चाहिए इन अँधेरों को फिर रौशनी चाहिए शायर: दानिश एजाज़ ना'त-ख़्वाँ: मुनीब क़ुरैशी महमूद रज़ा क़ादरी baahar se Theek-Thaak hu.n mai.n par, mere huzoor ! kuchh TooT-phooT hai mere andar, mere huzoor ! mai.n Gam-zada hu.n, meri taraf muskuraaiye mai.n gir raha hu.n thaam le.n aa kar, mere huzoor ! allah ! meri shikasta-dili barqaraar rakh aate hai.n yaad pehle se ba.Dh kar mere huzoor dast-e-talab ko chaahe tu na bhi daraaz kar de denge bheek KHud hi bula kar mere huzoor ya rasoolallah ! ik nigaah-e-karam aap ki chaahiye in andhero.n ko phir raushani chaahiye Poet: Danish Ejaz Naat-Khwaan: Muneeb Qureshi M...

आओ मौला अली की शान सुनो / Aao Maula Ali Ki Shan Suno

हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! 'अली 'अली 'अली 'अली ! मौला 'अली ! 'अली 'अली 'अली 'अली ! मौला 'अली ! हम 'अली वाले हैं, हम 'अली वाले हैं हम 'अली वाले हैं, हम 'अली वाले हैं आओ मौला 'अली की शान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! हुसैनियों को सँवारता है 'अली के नाम का ना'रा 'अदू का चेहरा बिगाड़ता है 'अली के नाम का ना'रा 'अली का ज़िक्र है मीज़ान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! आओ मौला 'अली की शान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! ग़दीर-ए-ख़ुम में मेरे नबी ने हर एक को ये बताया मैं जिस का मौला हूँ, उस का मौला है ये हुसैन का बाबा नबी-ए-पाक का फ़रमान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! वो जिस ने बच्चों में ...

इश्क़ हमारा हैदर है / Ishq Hamara Haider Hai

मौला ! मौला ! मौला ! मौला ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगार ला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है नाज़-ए-शह-ए-कौनैन है वो, बाबा-ए-हसनैन है वो शौहर-ए-सय्यिदा-ज़हरा, क़ल्ब-ओ-जिगर का चैन है वो नाइब-ए-आक़ा हैदर है, चौथा ख़लीफ़ा हैदर है दीं पे फ़िदा है, जान-ए-वफ़ा है, रब का प्यारा हैदर है 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है 'अली नूँ याद करो रल के फ़रियाद करो है ग़रीबाँ दा एहो आसरा 'अली साडे दिलाँ विच, 'अली साडे सावाँ विच 'अली साडे आसे-पासे, 'अली ए निगावाँ विच 'आशिक़ाँ दे डेरे बरी 'अली दियाँ रावाँ विच रब रखे सारियाँ नूँ 'अली दी पनावाँ विच नफ़्स-ए-नबी हैदर मौला, रब का वली हैदर मौला दोनों जहाँ में है बेशक अख़ी-ए-नबी हैदर मौला ख़ुल्द का रस्ता हैदर है, 'इल्म का दरिया हैदर है जान-ए-पयम्बर, बोले क़लंदर, विर्द हमारा हैदर है...

मन कुंतो मौला / Man Kunto Maula

'अली इमाम-ए-मन-अस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-’अली हज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा ब-नाम-ए-'अली मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौला फ़-'अलीयुन मौला, फ़-'अलीयुन मौला मन-कुंतो मौला मौला 'अली 'अली ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौला अहल-ए-नज़र की आँख का तारा 'अली 'अली अहल-ए-वफ़ा के दिल का सहारा 'अली 'अली मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! जो हुए का'बे में पैदा और शहादत पाई मस्जिद में ख़ुदा के घर का वो मालिक, वो बशर यूँ भी और यूँ भी 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! आ'ज़म ! ये मग़्फ़िरत की सनद है हमारे पास हम हैं 'अली के और हमारा 'अली मौला मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौ...

मंज़र फ़िज़ा-ए-दहर में सारा अली का है | जिस सम्त देखता हूँ नज़ारा अली का है / Manzar Fiza-e-Dahar Mein Sara Ali Ka Hai | Jis Samt Dekhta Hun Nazara Ali Ka Hai

मंज़र फ़िज़ा-ए-दहर में सारा 'अली का है जिस सम्त देखता हूँ, नज़ारा 'अली का है दुनिया-ए-आश्ती की फबन, मुज्तबा हसन लख़्त-ए-जिगर नबी का तू प्यारा 'अली का है हस्ती की आब-ओ-ताब, हुसैन आसमाँ जनाब ज़हरा का लाल, राज दुलारा 'अली का है मरहब दो-नीम है सर-ए-मक़्तल पड़ा हुआ उठने का अब नहीं कि ये मारा 'अली का है कुल का जमाल जुज़्व के चेहरे से है 'अयाँ घोड़े पे हैं हुसैन, नज़ारा 'अली का है ऐ अर्ज़-ए-पाक ! तुझ को मुबारक कि तेरे पास परचम नबी का, चाँद सितारा 'अली का है तुम दख़्ल दे रहे हो 'अक़ीदत के बाब में देखो मु'आमला ये हमारा 'अली का है हम फ़क़्र-ए-मस्त, चाहने वाले 'अली के हैं दिल पर हमारे सिर्फ़ इजारा 'अली का है दुनिया में और कौन है अपना ब-जुज़ 'अली हम बेकसों को है तो सहारा 'अली का है तू क्या है और क्या है तेरे 'इल्म की बिसात तुझ पर करम, नसीर ! ये सारा 'अली का है शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीर ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दी manzar fiza-e-dahar me.n saara 'ali ka hai jis samt dekhta hu.n, nazaara...

अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे / Ali Wale Jahan Baithe Wahin Jannat Bana Baithe

फ़क़ीरों का है क्या चाहे जहाँ बस्ती बसा बैठे 'अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे फ़राज़-ए-दार हो, मक़्तल हो, ज़िंदाँ हो कि सहरा हो जहाँ ज़िक्र-ए-'अली छेड़ा वहाँ दीवाने आ बैठे कोई मौसम, कोई भी वक़्त, कोई भी 'इलाक़ा हो जली 'इश्क़-ए-'अली की शम'अ और परवाने आ बैठे 'अली वालों का मरना भी कोई मरने में मरना है चले अपने मकाँ से और 'अली के दर पे जा बैठे इधर रुख़्सत किया सब ने, उधर आए 'अली लेने यहाँ सब रो रहे थे हम वहाँ महफ़िल सजा बैठे अभी मैं क़ब्र में लेटा ही था इक नूर सा फैला मेरी बालीं पे ख़ुद आ कर 'अली-ए-मुर्तज़ा बैठे ये कौन आया कि इस्तिक़बाल को सब अंबिया उट्ठे न बैठेगा कोई तब तक, न जब तक मुस्तफ़ा बैठे शायर: रज़ा सिरसीवी ना'त-ख़्वाँ: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी हाफ़िज़ अहसन क़ादरी faqeero.n ka hai kya chaahe jahaa.n basti basa baiThe 'ali waale jahaa.n baiThe wahi.n jannat bana baiThe faraaz-e-daar ho, maqtal ho, zindaa.n ho ki sahra ho jahaa.n zikr-e-'ali chhe.Da wahaa.n deewane aa baiThe koi mausam, k...

नफ़स नफ़स में अली अली हो नज़र नज़र में अली अली हो / Nafas Nafas Mein Ali Ali Ho Nazar Nazar Mein Ali Ali Ho

एहतिमाम ऐसा मवद्दत में किए जाऊँगा ज़िक्र-ए-हैदर मैं सुनाऊँगा सुने जाऊँगा मेरे अंदर का जो मीसम है यही कहता है चाहे कट जाए ज़ुबाँ नाम जपे जाऊँगा 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो नफ़स नफ़स में 'अली 'अली हो, नज़र नज़र में 'अली 'अली हो गली गली में 'अली 'अली हो, नगर नगर में 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो करम के गौहर लुटाएँ हैदर, तो जाम-ए-'इरफ़ाँ पिलाएँ हैदर जो रोज़-ओ-शब के पहर पहर में, सहर सहर में 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो बहार ज़िक्र-ए-'अली की मस्ती में रक़्स करती उतर रही है शजर शजर में, कली कली में, समर समर में 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो 'अली 'अली हो, 'अली 'अली हो उसे बनाएँ 'अली क़लंदर, हों उस के चाकर सभी सिकंदर वो जिस के भी जिस्म-ओ-जान-ओ-रूह-ओ-दिल-ओ-जिगर में 'अली 'अली हो 'अ...

जिस के हाथों में है ज़ुल्फ़िक़ार-ए-नबी | नारा-ए-हैदरी या अली या अली / Jis Ke Hathon Mein Hai Zulfiqar-e-Nabi | Nara-e-Haidari Ya Ali Ya Ali

जिस के हाथों में है ज़ुल्फ़िक़ार-ए-नबी जिस के पहलू में है राहवार-ए-नबी दुख़्तर-ए-मुस्तफ़ा जिस की दुल्हन बनी जिस के बेटों से नस्ल-ए-नबी है चली हाँ वही, हाँ वही, वो 'अली-यो-वली ना'रा-ए-हैदरी या 'अली या 'अली जिस के बारे में फ़रमाएँ प्यारे नबी जिस का मौला हूँ मैं, उस का मौला 'अली जिस की तलवार की जग में शोहरत हुई जिस के कुंबे से रस्म-ए-शुजा'अत चली हाँ वही, हाँ वही, वो 'अली-यो-वली ना'रा-ए-हैदरी या 'अली या 'अली जिस को शाह-ए-विलायत का दर्जा मिला जीते जी जिस को जन्नत का मुज़्दा मिला सय्यिद-ए-दो-जहाँ जिस को रुत्बा मिला सिलसिले सारे जिस पर हुए मुंतही हाँ वही, हाँ वही, वो 'अली-यो-वली ना'रा-ए-हैदरी या 'अली या 'अली जो 'अली का हुआ, वो नबी का हुआ या 'अली कह दिया सारा ग़म टल गया वो हैं ख़ैबर-शिकन और शेर-ए-ख़ुदा नाम से उन के हर रंज-ओ-कुल्फ़त टली हाँ वही, हाँ वही, वो 'अली-यो-वली ना'रा-ए-हैदरी या 'अली या 'अली सय्यिदों के वही जद्द-ए-आ'ला भी हैं मेरे नाना भी हैं, मेरे दादा भी हैं मेरे आक़ा भी हैं, मेरे मौला भी...

अली की याद आए नजफ़ की याद आए / Ali Ki Yaad Aaye Najaf Ki Yaad Aaye

ख़ुशा ज़मीन-ए-मु'अल्ला, ज़हे-फ़ज़ा-ए-नजफ़ रियाज़-ए-ख़ुल्द भी है शाइक़-ए-हवा-ए-नजफ़ मिली अँगूठी भी वैसी ही था नगीं जैसा नजफ़ बरा-ए-'अली था, 'अली बरा-ए-नजफ़ मरीज़-ए-'इश्क़-ए-विला हूँ कि सुब्ह-ओ-शाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए उसी से रखता हूँ रिश्ता हर एक आन जिसे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए मरीज़-ए-'इश्क़-ए-विला हूँ कि सुब्ह-ओ-शाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए या 'अली ! 'अली या 'अली ! 'अली या 'अली ! 'अली या 'अली ! इज़ाफ़ा होता है मेरे मरज़ की शिद्दत में तड़प रहा हूँ मैं हर दम नजफ़ की फ़ुर्क़त में ये धड़कनों की सदा आए गाम-गाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए मरीज़-ए-'इश्क़-ए-विला हूँ कि सुब्ह-ओ-शाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए बिना 'अली के मेरा ज़िंदगी में जी न लगे ख़ुशी मिले भी कोई तो मुझे ख़ुशी न लगे मिला है साँसों की सूरत 'अली का नाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए मरीज़-ए-'इश्क़-ए-विला हूँ कि सुब्ह-ओ-शाम मुझे 'अली की याद आए, नजफ़ की याद आए या 'अली ! 'अली या 'अली ! ...

कुर्सी पर कोई भी बैठे राजा तो मेरा ख़्वाजा है / Kursi Par Koi Bhi Baithe Raja To Mera Khwaja Hai

या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! ख़्वाजा ! या ख़्वाजा ! मैं गदा-ए-ख़्वाजा-ए-चिस्त हूँ, मुझे इस गदाई पे नाज़ है मेरा नाज़ ख़्वाजा पे क्यूँ न हो, मेरा ख़्वाजा बंदा-नवाज़ है उस के करम के सब हैं भिकारी, क्या राजा महाराजा है कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा हैदर का लाडला है, वो ज़हरा का लाल है बेशक मेरा मु'ईन मुहम्मद की आल है दीवानों को किस बात का आख़िर मलाल है ख़्वाजा को अपनी परजा का पूरा ख़याल है मु'ईनुद्दीन... कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा हर आँख चाहती है ज़ियारत मु'ईन की हर दिल में बस गई है मोहब्बत मु'ईन की इस सर-ज़मीन-ए-हिन्द के शाहों ने कह दिया महशर तलक रहेगी हुकूमत मु'ईन की मु'ईनुद्दीन... कुर्सी पर कोई भी बैठे, राजा तो मेरा ख़्वाजा है सारे हिन्द का है राजा मेरा ख़्वाजा महाराजा हम ग़रीबों की सदाओं ने बुलाया है तुझे हिन्द का शाह मुहम्मद ने बनाया है तुझे कैसे आएगा कोई...