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जश्न का मंज़र था माहौल सुहाना था | अर्श न क्यूँ सजता सरकार ने आना था / Jashn Ka Manzar Tha Mahaul Suhana Tha | Arsh Na Kyun Sajta Sarkar Ne Aana Tha

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था फ़र्श पे नग़्मे थे आक़ा की रिसालत के 'अर्श पे चर्चे थे सरकार की 'अज़मत के हूरों के लब पर ख़ुशियों का तराना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था रुत बदल जाए और रात सँवर जाए हुक्म ख़ुदा का हुआ कि वक़्त ठहर जाए रुक गया फ़ौरन जो गर्दिश में ज़माना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था मस्जिद-ए-अक़्सा में क्या मंज़र थे प्यारे पीछे क़तारों में हाज़िर थे नबी सारे आगे मुसल्ले पर सुल्तान-ए-ज़माना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था मंज़िल-ए-सिदरा पर जिब्रील ने 'अर्ज़ किया शाह-ए-दो-'आलम ! मैं आगे नहीं चल सकता ये ही हद मेरी, यही मेरा ठिकाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था 'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था एक वसीला है ...

बारिश-ए-रहमत-ए-किब्रिया है | मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं / Barish-e-Rahmat-e-Kibriya Hai | Mustafa Rab Se Milne Chale Hain

सर-ए-ला-मकाँ से तलब हुई सू-ए-मुंतहा वो चले नबी कोई हद है उन के 'उरूज की सल्लू 'अलैहि व आलिही बारिश-ए-रहमत-ए-किब्रिया है मुस्तफ़ा ला-मकाँ जा रहे हैं आज सारा जहाँ सज गया है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं दस्त-बस्ता मलाइक खड़े हैं ना'त सरकार की पढ़ रहे हैं हूर-ओ-ग़िलमाँ के लब पर सदा है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं जश्न में ज़र्रा ज़र्रा मगन है हर तरफ़ बजते हैं शादियाने बहर-ए-ता'ज़ीम का'बा झुका है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं अंबिया-ओ-रुसुल मुक़्तदी हैं और इमामत पे मेरे नबी हैं 'अर्श पर मरहबा की सदा है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं पहुँचे सिदरा पे सरकार जिस दम बोले जिब्रील, ऐ शाह-ए-'आलम ! बस यहीं पर मेरी इंतिहा है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं है दुरूदों की दस्तार सर पर है सलामी फ़रिश्तों के लब पर पहुँचा महबूब क़ुर्ब-ए-ख़ुदा है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं ये क़सीदा, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! तुम ने लिक्खा है जो फ़ज़्ल-ए-रब्बी सदक़ा वल्लाह मे'राज का है मुस्तफ़ा रब से मिलने चले हैं शायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदी ना'त-ख़्वाँ: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी s...

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ | मेरा मुस्तफ़ा है / Wo Mah-e-Farozan Wo Nayyar-e-Taaban | Mera Mustafa Hai

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ मेरा मुस्तफ़ा है, मेरा मुस्तफ़ा है वो बारह रबी'-उल-अव्वल को आया जो अव्वल बना है, मेरा मुस्तफ़ा है तो क्या तू ने देखा वो आना वो जाना कि हैरत में है अब तलक ये ज़माना वो रब का बुलाना, तो सब को दिखाना ये जो आ रहा है, मेरा मुस्तफ़ा है क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो के कि सिदरा से आगे बशर जा रहा है जाता है देखो वो बे-ख़ौफ़ कैसे कि सब जानता है ये राहें वो जैसे वो यूँ जा रहा है, जैसे कि कोई घर वाला अपने ही घर जा रहा है वो क़िस्सा हलीमा के आँगन का देखो जवानी से पहले तुम बचपन का पूछो अभी मुस्तफ़ा ने उठाई है उँगली क़मर से तो पूछो किधर जा रहा है कहाँ तू, ऐ शाकिर ! कहाँ उन की ना'तें कहाँ अपनी ज़ातें, कहाँ उन की बातें ये क्यूँ कह रहे हो बशर जा रहा है हक़ीक़त में ख़ैर-उल-बशर जा रहा है ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहीद महमूद क़ादरी wo maah-e-farozaa.n wo nayyar-e-taabaa.n mera mustafa hai, mera mustafa hai wo baarah rabi'-ul-awwal ko aaya jo awwal bana hai mera mustafa hai to kya tu ne dekha wo aana wo jaana ki hairat me.n hai ab talak ye...

मेराज की रतिया धूम ये थी इक राज दुलारा आवत है / Meraj Ki Ratiya Dhoom Ye Thi Ek Raj Dulara Aawat Hai

मे'राज की रतिया धूम ये थी, इक राज दुलारा आवत है लौलाक का सेहरा सर सोहत, वो अहमद प्यारा आवत है हूरों ने कहा जब बिस्मिल्लाह, ग़िलमाँ ने पुकारा इल्लल्लाह ख़ुद रब ने कहा माशा-अल्लाह महबूब हमारा आवत है जिब्रील-ए-अमीं ये कहते चले, ऐ 'अर्शियो ! तुमरे भाग जगे ता'ज़ीम को सब हो जाओ खड़े, सरदार तुम्हारा आवत है यासीं की चमक है दातन में, ताहा का करिश्मा आँखन में वल-फ़ज्र का जल्वा गालन में, वो 'अर्श का तारा आवत है मा-ज़ाग़ का कजला नैन भरे, वश्शम्स का बुटना मुख पे मले है मीम का घूँघट सेहरे तले, वो रब का सँवारा आवत है धरती से उठा आफ़ाक़ चढ़ा, मुमताज़ ! ये ग़ुल था चारों तरफ़ लो हक़ से मिलने सल्ले-'अला सरदार हमारा आवत है शायर: मुमताज़ गंगोही ना'त-ख़्वाँ: प्रोफ़ेसर अब्दुल रऊफ़ रूफ़ी हिबा मुज़म्मिल क़ादरी me'raaj ki ratiya dhoom ye thi ik raaj dulaara aawat hai laulaak ka sehra sar sohat wo ahmad pyaara aawat hai hooro.n ne kaha jab bismillah Gilmaa.n ne pukaara illallah KHud rab ne kaha maasha-allah mahboob hamaara aawat hai jibreel-e-amee.n ye kehte chale...

दे कर ख़ुदा को जान की क़ीमत ख़रीद ली / De Kar Khuda Ko Jaan Ki Qeemat Khareed Li

दे कर ख़ुदा को जान की क़ीमत ख़रीद ली हर 'आशिक़-ए-रसूल ने जन्नत ख़रीद ली आक़ा ने अपनी ज़िंदगी ग़ुर्बत में काट कर दुनिया के हर ग़रीब की ग़ुर्बत ख़रीद ली असग़र के उस तबस्सुम-ए-मा'सूम पर निसार जिस ने यज़ीदियों की हुकूमत ख़रीद ली जिस ने नबी की याद को दिल में बसा लिया समझो कि उस ने ख़ुल्द की राहत ख़रीद ली सौ बार उस दीवाना-ए-सरकार को सलाम जिस से ज़ुबैदा बीबी ने जन्नत ख़रीद ली मशहूर कर दिया मुझे आक़ा की ना'त ने मैं ने नबी की ना'त से शोहरत ख़रीद ली मे'राज-ए-मुस्तफ़ाई पे क़ुर्बान जाइए जिस ने ज़मीं के वास्ते 'अज़मत ख़रीद ली अल्लाह ने मुस्तफ़ा की रज़ा के लिए, असद ! बाज़ार-ए-मुस्तफ़ाई से उम्मत ख़रीद ली शायर: असद इक़बाल कलकत्तवी ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी de kar KHuda ko jaan ki qeemat KHareed li har 'aashiq-e-rasool ne jannat KHareed li aaqa ne apni zindagi Gurbat me.n kaaT kar duniya ke har Gareeb ki Gurbat KHareed li asGar ke us tabassum-e-maa'soom par nisaar jis ne yazeediyo.n ki hukoomat KHareed li jis ne nabi ki yaad ko dil me.n basa liya sa...

रब तआला की इनायत हैं इमाम-ए-जाफ़र / Rab Tala Ki Inayat Hain Imam-e-Jafar

रब त'आला की 'इनायत हैं इमाम-ए-जा'फ़र फ़ातिमा ज़हरा की 'इत्रत हैं इमाम-ए-जा'फ़र अहल-ए-दिल बोल उठे ये देख के सीरत उन की मज़हर-ए-शान-ए-रिसालत हैं इमाम-ए-जा'फ़र उन के शागिर्दों में शामिल हैं इमाम-ए-आ'ज़म ऐसे बा-रिफ़'अत-ओ-'अज़मत हैं इमाम-ए-जा'फ़र सर-ब-ख़म वक़्त का सुल्तान भी है उन के हुज़ूर ऐसे सुल्तान-ए-विलायत हैं इमाम-ए-जा'फ़र मेरी मुश्किल को वो आसान करेंगे पल में दाफ़े'-ए-रंज-ओ-मुसीबत हैं इमाम-ए-जा'फ़र उन की चौखट पे न झुक जाएँ क्यूँ दिल 'उल्मा के 'इल्म की बाँटते दौलत हैं इमाम-ए-जा'फ़र ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी rab ta'aala ki 'inaayat hai.n imaam-e-jaa'far faatima zahra ki 'itrat hai.n imaam-e-jaa'far ahl-e-dil bol uThe ye dekh ke seerat un ki maz.har-e-shaan-e-risaalat hai.n imaam-e-jaa'far un ke shaagirdo.n me.n shaamil hai.n imaam-e-aa'zam aise baa-rif'at-o-'azmat hai.n imaam-e-jaa'far sar-ba-KHam waqt ka sultaan bhi hai un ke huzoor aise sultaan-e-wilaaya...

मुसल्लम-उस-सुबूत है फ़ज़ीलत-ए-मुआविया / Musallam-us-Suboot Hai Fazeelat-e-Muawiya

मुसल्लम-उस-सुबूत है फ़ज़ीलत-ए-मु'आविया 'अयाँ है शम्स की तरह करामत-ए-मु'आविया वो जिस से रूठ जाएँ तो रसूल उस से रूठ जाएँ नबी से इस तरह की है क़राबत-ए-मु'आविया ख़ुदा के फ़ज़्ल से मिली उन्हें वो 'अज़मत-ए-गिराँ कोई न तौल पाएगा जलालत-ए-मु'आविया नसब में हैं तजल्लियाँ क़बीला-ए-रसूल की क़ुरैशियत से बढ़ गई शराफ़त-ए-मु'आविया हैं उन की ख़्वाहर-ए-'अज़ीज़ जुमला मोमिनों की माँ बड़ी शरफ़-मआब है नजाबत-ए-मु'आविया गुल-ए-हयात उन का है सहाबियत से 'इत्र-बेज़ इसी लिए है नौ-ब-नौ नज़ारत-ए-मु'आविया तमाम मोमिनों के आप प्यारे मामूँ-जान हैं हमें बहुत 'अज़ीज़ है ये निस्बत-ए-मु'आविया हसन के दस्त-ए-पाक से बने ख़लीफ़ा-ए-रसूल रिज़ा-ए-आल-ए-मुस्तफ़ा ख़िलाफ़त-ए-मु'आविया मु'आविया के प्यार से हमारा बेड़ा पार है गुनाह बख़्शवाएगी शफ़ा'अत-ए-मु'आविया उन्हें कोई बुरा कहे तो उस के मुँह में ख़ाक-ओ-आग न सुन सकेंगे हम कभी इहानत-ए-मु'आविया जो 'आशिक़-ए-रसूल हैं वो उन से प्यार करते हैं फ़क़त मुनाफ़िक़ों को है 'अदावत-ए-मु'आविया यज़ीद के फ़रेब का मु'आविया से क्या ह...

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है / Mera Har Gham Mitane Ko Mera Allah Kafi Hai

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरी बिगड़ी बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है लहू मेरे जिगर का है उसी के फ़ज़्ल से जारी उसी की मेहरबानी से है साँसों की रवादारी मेरा जीवन बचाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही सब्ज़ा उगाता है, वही गुलशन सजाता है अनाजों का शजर उस के करम से लहलहाता है मुझे खाना खिलाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है समुंदर के लबों में और बल खाती घटाओं में वही तो बाँटता है रोज़ ताज़ा दम हवाओं में नया मौसम बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है हवाओं को चलाता है, वही बरसात लाता है वही गेहूँ के पौधों में नई बाली उगाता है मेरी खेती लगाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है वही दरिया में मूसा के लिए रस्ता बनाता है वही यूनुस को मछली के शिकम में भी बचाता है हर एक मंज़र दिखाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है चमकता है फ़लक पर चाँद, सूरज जगमगाता है फ़लक के नीले पर्दों पर भी तारा टिमटिमाता है रुख़-ए-'आलम ...

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जाफ़र इमाम-ए-जाफ़र / Imamon Mein Ek Imam-e-Bartar Imam-e-Jafar Imam-e-Jafar

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम जा'फ़र 'अली के गुलशन के हैं गुल-ए-तर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र वो लख़्त-ए-जिगर-ए-बतूल भी हैं, वो बाग़-ए-ज़हरा के फूल भी हैं शुजा'अतों के 'अज़ीम पैकर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा तुम्हारी सोहबत से बहरा-वर थे वो करते थे इस का ज़िक्र अक्सर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! तुम्हारी 'इज़्ज़त, तुम्हारी शोहरत, तुम्हारी 'अज़मत, तुम्हारी रिफ़'अत नियाज़ तेरी हो क्यूँ न घर-घर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! वसी पे नज़र-ए-करम ख़ुदा-रा, नसब की निस्बत की लाज रख ले हर एक मंज़िल के तुम हो रहबर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! शायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी imaamo.n me.n ik imaam-e-bartar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far 'ali ke gulshan ke hai.n gul-e-tar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far wo laKHt-e-jigar-e-batool bhi hai.n wo baaG-e-zahra ke phool bhi hai.n shujaa'ato.n ke '...

बाहर से ठीक ठाक हूँ मैं पर मेरे हुज़ूर / Bahar Se Theek Thaak Hun Main Par Mere Huzoor

बाहर से ठीक-ठाक हूँ मैं पर, मेरे हुज़ूर ! कुछ टूट-फूट है मेरे अंदर, मेरे हुज़ूर ! मैं ग़म-ज़दा हूँ, मेरी तरफ़ मुस्कुराइए मैं गिर रहा हूँ थाम लें आ कर, मेरे हुज़ूर ! अल्लाह ! मेरी शिकस्ता-दिली बरक़रार रख आते हैं याद पहले से बढ़ कर मेरे हुज़ूर दस्त-ए-तलब को चाहे तू ना भी दराज़ कर दे देंगे भीक ख़ुद ही बुला कर मेरे हुज़ूर या रसूलल्लाह ! इक निगाह-ए-करम आप की चाहिए इन अँधेरों को फिर रौशनी चाहिए शायर: दानिश एजाज़ ना'त-ख़्वाँ: मुनीब क़ुरैशी महमूद रज़ा क़ादरी baahar se Theek-Thaak hu.n mai.n par, mere huzoor ! kuchh TooT-phooT hai mere andar, mere huzoor ! mai.n Gam-zada hu.n, meri taraf muskuraaiye mai.n gir raha hu.n thaam le.n aa kar, mere huzoor ! allah ! meri shikasta-dili barqaraar rakh aate hai.n yaad pehle se ba.Dh kar mere huzoor dast-e-talab ko chaahe tu na bhi daraaz kar de denge bheek KHud hi bula kar mere huzoor ya rasoolallah ! ik nigaah-e-karam aap ki chaahiye in andhero.n ko phir raushani chaahiye Poet: Danish Ejaz Naat-Khwaan: Muneeb Qureshi M...

आओ मौला अली की शान सुनो / Aao Maula Ali Ki Shan Suno

हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! 'अली 'अली 'अली 'अली ! मौला 'अली ! 'अली 'अली 'अली 'अली ! मौला 'अली ! हम 'अली वाले हैं, हम 'अली वाले हैं हम 'अली वाले हैं, हम 'अली वाले हैं आओ मौला 'अली की शान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! हुसैनियों को सँवारता है 'अली के नाम का ना'रा 'अदू का चेहरा बिगाड़ता है 'अली के नाम का ना'रा 'अली का ज़िक्र है मीज़ान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! आओ मौला 'अली की शान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली 'अली मौला ! ग़दीर-ए-ख़ुम में मेरे नबी ने हर एक को ये बताया मैं जिस का मौला हूँ, उस का मौला है ये हुसैन का बाबा नबी-ए-पाक का फ़रमान सुनो 'अली है दीन की पहचान सुनो हैदर मौला ! 'अली मौला ! हैदर मौला ! 'अली मौला ! वो जिस ने बच्चों में ...

इश्क़ हमारा हैदर है / Ishq Hamara Haider Hai

मौला ! मौला ! मौला ! मौला ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शेर-ए-ख़ुदा ! मुश्किल-कुशा ! शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगार ला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है नाज़-ए-शह-ए-कौनैन है वो, बाबा-ए-हसनैन है वो शौहर-ए-सय्यिदा-ज़हरा, क़ल्ब-ओ-जिगर का चैन है वो नाइब-ए-आक़ा हैदर है, चौथा ख़लीफ़ा हैदर है दीं पे फ़िदा है, जान-ए-वफ़ा है, रब का प्यारा हैदर है 'इश्क़ हमारा हैदर है, दिल का उजाला हैदर है नूर-ए-नबी है, शेर-ए-जली है, जान से प्यारा हैदर है 'अली नूँ याद करो रल के फ़रियाद करो है ग़रीबाँ दा एहो आसरा 'अली साडे दिलाँ विच, 'अली साडे सावाँ विच 'अली साडे आसे-पासे, 'अली ए निगावाँ विच 'आशिक़ाँ दे डेरे बरी 'अली दियाँ रावाँ विच रब रखे सारियाँ नूँ 'अली दी पनावाँ विच नफ़्स-ए-नबी हैदर मौला, रब का वली हैदर मौला दोनों जहाँ में है बेशक अख़ी-ए-नबी हैदर मौला ख़ुल्द का रस्ता हैदर है, 'इल्म का दरिया हैदर है जान-ए-पयम्बर, बोले क़लंदर, विर्द हमारा हैदर है...

मन कुंतो मौला / Man Kunto Maula

'अली इमाम-ए-मन-अस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-’अली हज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा ब-नाम-ए-'अली मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौला फ़-'अलीयुन मौला, फ़-'अलीयुन मौला मन-कुंतो मौला मौला 'अली 'अली ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौला अहल-ए-नज़र की आँख का तारा 'अली 'अली अहल-ए-वफ़ा के दिल का सहारा 'अली 'अली मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! जो हुए का'बे में पैदा और शहादत पाई मस्जिद में ख़ुदा के घर का वो मालिक, वो बशर यूँ भी और यूँ भी 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! आ'ज़म ! ये मग़्फ़िरत की सनद है हमारे पास हम हैं 'अली के और हमारा 'अली मौला मौला 'अली मौला ! मौला 'अली मौला ! मन-कुंतो मौला, मन-कुंतो मौ...