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ऐ मुजाहिद-ए-नबी नात गुनगुनाए जा | हक़ अल्लाह हक़ अल्लाह / Aye Mujahid-e-Nabi Naat Gungunaye Ja | Haq Allah Haq Allah

हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह ऐ मुजाहिद-ए-नबी ! ना'त गुनगुनाए जा नग़्मा-ए मुहम्मदी झूम कर सुनाए जा दो जहाँ पे छाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह परचम-ए-नबी उठा ले ख़ुदा का आसरा दर्स-ए-मुर्शिदी है ये, हक़ पे ज़िंदगी लुटा हक़ पे जाँ लुटाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह बात कर तू बा'द में, पहले तू सलाम कर जो तेरे बुज़ुर्ग हैं, उन का एहतिराम कर उन से फ़ैज़ पाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह शुक्र कर ख़ुदा का तू, तुझ को ये वतन मिला पाक सरज़मीं मिली और ये चमन मिला सर को तू झुकाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह झूट बोलना नहीं तुम कभी ज़ुबान से ला'नत-ए-ख़ुदा है ये, देख लो क़ुरआन से सच के गीत गाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह अपने मुर्शिदी का दिल इस तरह से शाद कर जो सबक़ मिले तुझे, तू दिल लगा के याद कर उन से फ़ैज़ पाए जा, ज़र्ब-ए-हक़ लगाए जा हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह, हक़ अल्लाह आए ...

जश्न-ए-विलादत के नारे | सरकार की आमद मरहबा / Jashn-e-Wiladat Ke Nare | Sarkar Ki Aamad Marhaba

सरकार की आमद ! मरहबा ! सरदार की आमद ! मरहबा ! सालार की आमद ! मरहबा ! मुख़्तार की आमद ! मरहबा ! ग़म-ख़्वार की आमद ! मरहबा ! ताजदार की आमद ! मरहबा ! हुज़ूर की आमद ! मरहबा ! पुर-नूर की आमद ! मरहबा ! ग़यूर की आमद ! मरहबा ! उस नूर की आमद ! मरहबा ! रसूल की आमद ! मरहबा ! मक़बूल की आमद ! मरहबा ! आमिना के फूल की आमद ! मरहबा ! वालिद-ए-बतूल की आमद ! मरहबा ! हबीब की आमद ! मरहबा ! लबीब की आमद ! मरहबा ! हसीब की आमद ! मरहबा ! मुजीब की आमद ! मरहबा ! मुनीब की आमद ! मरहबा ! नजीब की आमद ! मरहबा ! अच्छे की आमद ! मरहबा ! सच्चे की आमद ! मरहबा ! बशीर की आमद ! मरहबा ! नज़ीर की आमद ! मरहबा ! मुनीर की आमद ! मरहबा ! ख़बीर की आमद ! मरहबा ! बसीर की आमद ! मरहबा ! नसीर की आमद ! मरहबा ! शहीर की आमद ! मरहबा ! ज़हीर की आमद ! मरहबा ! रऊफ़ की आमद ! मरहबा ! रहीम की आमद ! मरहबा ! करीम की आमद ! मरहबा ! न'ईम की आमद ! मरहबा ! 'अलीम की आमद ! मरहबा ! हलीम की आमद ! मरहबा ! हामिद की आमद ! मरहबा ! माजिद की आमद ! मरहबा ! 'आबिद की आमद ! मरहबा ! साजिद की आमद ! मरहबा ! तबीब की आमद ! मरहबा ! ...

हश्र में फिर मिलेंगे मेरे दोस्तो / Hashr Mein Phir Milenge Mere Dosto

हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है पयाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कहना सब जीते-जी के हैं शिकवे-गिले आज से ख़त्म दुनिया के सब सिलसिले शम'अ ढलने को है, दम निकलने को है अब है क़िस्सा तमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को नहला के पहना दिए हैं कफ़न रो चुके मिल के माँ-बाप भाई-बहन मौत भी, दोस्तो ! आज हैरत में है हो चुका एहतिमाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! ख़ुश्बुओं में कफ़न को बसाने लगे मेरी मय्यत को दुल्हन बनाने लगे दोस्तो ! अब उठाओ जनाज़ा मेरा हो चुका इंतिज़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! मुझ को ज़ेर-ए-ज़मीं लोग दफ़ना गए किस-क़दर संग-दिल हो के फ़रमा गए दोस्तो ! चैन की नींद सोते रहो बस यही है मक़ाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! कैसी दुनिया है, यारो ! ग़ज़ब रे ग़ज़ब चंद दिनों में यहाँ भूल जाते हैं सब जिस बहाने मेरी याद आ जाए तो पढ़ना तुम ये कलाम आख़री आख़री हश्र में फिर मिलेंगे, मेरे दोस्तो ! बस यही है मक़ाम आख़री आख़री ...

वलवला-ए-इश्क़-ओ-उल्फ़त आया क़ुर्बानी का दिन / Walwala-e-Ishq-o-Ulfat Aaya Qurbani Ka Din

क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए वलवला-ए-'इश्क़-ओ-उल्फ़त, आया क़ुर्बानी का दिन ये है इब्राहीमी सुन्नत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन जानवर और माल का सदक़ा हैं ये क़ुर्बानियाँ होगी घर-भर की हिफ़ाज़त, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन है हदीस-ए-मुस्तफ़ा और हिस्सा-ए-क़ुरआन है ये है क़ुर्बानी 'इबादत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन ऐ उजागर ! ख़ुश-दिली से जानवर क़ुर्बान कर मिलती है अल्लाह की क़ुर्बत, आया क़ुर्बानी का दिन क़ुर्बानी है रब के लिए और शुक्राना सब के लिए आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन आया क़ुर्बानी का दिन, आया क़ुर्बानी का दिन शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी ...

इस बरस हज न हम कर सके हैं | आह महरूम हज से हुए हैं / Is Baras Hajj Na Hum Kar Sake Hain | Aah Mehroom Hajj Se Hue Hain

इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं अपनी क़िस्मत पे हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं याद 'अर्फ़ात की आ रही है वो खड़े हो के तुझ को मनाना सब ख़यालों में नक़्श आ रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं उन से पूछो जो हज पर चले थे जम'अ ज़ाद-ए-सफ़र कर रहे थे नज़्र हालात वो हो गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं साल भर हज के वो मुंतज़िर थे कितनी मुश्किल से दिन कट रहे थे जीते-जी अब तो वो मर गए हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं आक़ा ! किस से कहूँ अपनी बिपता कौन ज़ख़्मों पे मरहम रखेगा तेरे दर पर भी न आ सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं बख़्त ऐसा उजागर 'अता हो हर बरस हज का मौसम लिखा हो हाल-ए-दिल कह के हम रो रहे हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं इस बरस हज न हम कर सके हैं आह ! महरूम हज से हुए हैं शायर: अल्लामा...

अल्लाह की रिज़ा है गर आप को जो पानी | कर लीजिए क़ुर्बानी / Allah Ki Riza Hai Gar Aap Ko Jo Paani | Kar Lijiye Qurbani

'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! क़ुर्बानी क़ुर्बानी क़ुर्बानी क़ुर्बानी अल्लाह की रिज़ा है गर आप को जो पानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी सुन्नत अदा करेंगे, राज़ी ख़ुदा करेंगे हुक्म-ए-ख़ुदा पे जानें अपनी फ़िदा करेंगे इख़्लास दिल में हो और हो जज़्बा-ए-ईमानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! हुक्म-ए-ख़ुदा मिला जब रब के ख़लील को क़ुर्बान कर दो अपने तुम इस्मा'ईल को हुक्म-ए-ख़ुदा के आगे ख़म कर दी है पेशानी कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! बेटा है ऐसा बेटा रब के ख़लील का मक़बूल है वो बंदा रब्ब-ए-जलील का क़ुर्बान मुझ को कर दे, ऐ मेरे बाबा जानी ! कर लीजिए क़ुर्बानी, कर लीजिए क़ुर्बानी 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! 'ईद-ए-क़ुर्बान मुबारक ! मुबारक मुबारक मुबारक ! क़ुर्बानी मुबारक ! रब के हबीब का भी फ़रमान है यही फ़रहान ! हमा...

हम सुन्नी बरेली वाले हैं / Hum Sunni Bareilly Wale Hain

हम सुन्नी बरेली वाले हैं, हम सुन्नी बरेली वाले हैं बस्ती-बस्ती क़रिया-क़रिया, ना'रा लगाने वाले हैं यूँ हम को भगाना भारत से आसान नहीं है दुश्मन का ख़्वाजा पिया अजमेरी की हम चादर चढ़ाने वाले हैं क्यूँ मस्लक-ए-आ'ला-हज़रत का ना'रा न लगाएँ जीते-जी जब कि रज़ा के नाम का हम तो सदक़ा खाने वाले हैं यूँ हम को मिटाना दुनिया से आसान नहीं है अमरिका दीन-ए-नबी की ख़ातिर हम तो सर को कटाने वाले हैं ना'त-ख़्वाँ: सलीम रज़ा पीलीभीती hum sunni bareilly waale hai.n, hum sunni bareilly waale hai.n basti-basti qariya-qariya, naa'ra lagaane waale hai.n yu.n ham ko bhagaana bhaarat se aasaan nahi.n hai dushman ka KHwaja piya ajmeri ki ham chaadar cha.Dhaane waale hai.n kyu.n maslak-e-aa'la-hazrat ka naa'ra na lagaae.n jeete-ji jab ki raza ke naam ka ham to sadqa khaane waale hai.n yu.n ham ko miTaana duniya se aasaan nahi.n hai amrica deen-e-nabi ki KHaatir ham to sar ko kaTaane waale hai.n Naat-Khwaan: Saleem Raza Pilibhiti हिन्दी ENG اردو

अलविदा अलविदा साथियो अलविदा | ख़त्म आख़िर हुआ ये सफ़र दोस्तो / Alvida Alvida Sathiyo Alvida | Khatm Aakhir Hua Ye Safar Dosto

अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' चश्म-ए-पुर-नम है और दिल ख़फ़ा है मेरा एक दूजे से हम हो रहे हैं जुदा फिर न जाने मिलेंगे नहीं कुछ पता वक़्त-ए-फ़ुर्क़त अचानक है यूँ आ पड़ा कितनी मग़्मूम है आज बाद-ए-सबा दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' ऐ मेरे हम-सफ़र बा-वफ़ा दोस्तो ! याद आओगे मुझ को सदा, दोस्तो ! ये चमन की बहारें फ़ज़ा, दोस्तो ! नक़्श है दिल में हर इक अदा, दोस्तो ! रब सलामत रखे आप सब को सदा दोस्तो ! अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' अल-विदा' अल-विदा', साथियो ! अल-विदा' मेरे उस्ताद ने है सजाया मुझे रास्ता ख़ैर का है दिखाया मुझे बाप की तरह चलना सिखाया मुझे और चलने के क़ाबिल बनाया मुझे उन की आग़ोश-ए-शफ़क़त मे...

ये न पूछो किधर जा रहा हूँ | आज मैं अपने घर जा रहा हूँ / Ye Na Poochho Kidhar Ja Raha Hun | Aaj Main Apne Ghar Ja Raha Hun

ये न पूछो किधर जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ दोस्तो ! अब न आँसू बहाना क़ब्र ही तो है असली ठिकाना ये न समझो कि मर जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ सामने रू-ए-सरकार होगा क़ब्र में उन का दीदार होगा बस यही सोच कर जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ पास मेरे नहीं सोना-चाँदी हाथ मेरे हैं दोनों ही ख़ाली छोड़ कर माल-ओ-ज़र जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ दफ़्न कर के मुझे मत भुलाना क़ब्र पर तुम मेरी आना जाना सुन लो, लख़्त-ए-जिगर ! जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ सिर्फ़ दो गज़ का जोड़ा पहन कर शान से चार काँधों के ऊपर देख कर के सफ़र जा रहा हूँ आज मैं अपने घर जा रहा हूँ ना'त-ख़्वाँ: अज़मत रज़ा भागलपुरी ज़ीशान भरगैनवी ye na poochho kidhar ja raha hu.n aaj mai.n apne ghar ja raha hu.n dosto ! ab na aansu bahaana qabr hi to hai asli Thikaana ye na samjho ki mar ja raha hu.n aaj mai.n apne ghar ja raha hu.n saamne roo-e-sarkaar hoga qabr me.n un ka deedaar hoga bas yahi soch kar ja raha hu.n aaj mai.n apne ghar ja raha hu.n paas mere nahi.n s...

ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ / Khoobsurat Kali Hoti Hain Betiyan

ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ कैसी अच्छी भली होती हैं बेटियाँ अपने माँ-बाप की शान हैं, आन हैं ऐसी दिल की कली होती हैं बेटियाँ देख वालिद को वो मुस्कुराती रहें वालिदा को भी हर पल हँसाती रहें घर में गुलशन बनी होती हैं बेटियाँ ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ घर की 'इज़्ज़त हैं वो और बरकत हैं वो रब की रहमत हैं वो, घर की 'अज़मत हैं वो सब के दिल में सजी होती हैं बेटियाँ ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ माँ की शफ़क़त में रहती हैं हर पल मगन घर को रखती हैं अपने वो हर पल चमन कितनी दिल की हसीं होती हैं बेटियाँ ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ खिलखिलाती हैं माँ-बाप के साए में हाँ वो रखती हैं माँ-बाप की राए में ऐसी उन की सगी होती हैं बेटियाँ ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ मत सताओ उन्हें, कितनी मा'सूम हैं न ख़ुशी से तुम्हारी वो मग़्मूम हैं ऐसी नाज़ुक कली होती हैं बेटियाँ ख़ूबसूरत कली होती हैं बेटियाँ शायर: अब्दुल क़य्यूम हमदम नशीद-ख़्वाँ: यास्मीन ख़ान KHoobsoorat kali hoti hai.n beTiyaa.n kaisi achchhi bhali hoti hai.n beTiyaa.n apne maa.n-baap ki shaan hai.n, aan hai....

मेरी प्यारी बहन माँ की नूर-ए-नज़र | अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली / Meri Pyari Bahan Maa Ki Noor-e-Nazar | Apni Sasural Ko Ho Ke Rukhsat Chali

मेरी प्यारी बहन, माँ की नूर-ए-नज़र अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली छोड़ कर अपने बाबुल का प्यारा ये घर अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली तेरे भाई की है, बहन ! तुझ को दु'आ अपनी ससुराल में ख़ुश रहे तू सदा ख़ुशियों के अपने घर में लगाना शजर अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली तेरा लड़ना झगड़ना वो याद आएगा रूठ जाना मनाना वो याद आएगा ढूँडेगी घर में तुझ को मेरी अब नज़र अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली जिस तरह तू ने घर को सँभाला, बहन ! ऐसे ही देखना अपनी ससुराल को कोई शिकवा न लाना कभी होंटों पर अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली अपने शौहर की ख़िदमत तू करना सदा और नमाज़ों की पाबंद रहना सदा इस के ज़री'ए ही करना है रौशन क़बर अपनी ससुराल को हो के रुख़्सत चली शायर: ज़ीशान भरगैनवी नशीद-ख़्वाँ: ज़ीशान भरगैनवी meri pyaari bahan, maa.n ki noor-e-nazar apni sasuraal ko ho ke ruKHsat chali chho.D kar apne baabul ka pyaara ye ghar apni sasuraal ko ho ke ruKHsat chali tere bhaai ki hai, bahan ! tujh ko du'aa apni sauraal me.n KHush rahe tu sada KHushiyo.n ke apne ghar me.n la...