हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया / Har Taraf Noor Hi Noor Sa Chha Gaya

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का
उनके आने से आई बहारें सभी
जो मुक़द्दर खुला सारे संसार का

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का

जब विलादत हुई रब के दिलदार की
रब्बे-ह़ब्ली सदाएं थी सरकार की
सारे आलम में ढूँढा मगर ना मिला
कोई सानी नहीं आप के प्यार का

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का

आज सजने लगा है ये फ़र्शे-ज़मीं
और रब ने सजाया है अर्शे-बरी
पढ़के फ़द़लिल्लाह तू भी मना ले ख़ुशी
कोई मक़सद नहीं तेरे इन्कार का

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का

क्यूं न ख़ुशियों के लम्हे दो-बाला करें
उनके दीवाने हैं, उनके मस्ताने हैं
उम्र भर उनकी ख़ुशियाँ मनाएंगे हम
कोई होगा नहीं अपने मेयार का

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का

मैं दुरूदो-सलामों के तोहफे लिये
क़ारी नोअ़मान जाऊँ मदीने कभी
देख लूँ अपनी बे-नूर आँखों से मैं
मन्ज़रे-दिलरुबा उनके दरबार का

हर तरफ नूर ही नूर सा छा गया
जश्ने-मीलाद है आज सरकार का
उनके आने से आई बहारें सभी
जो मुक़द्दर खुला सारे संसार का

शायर:
क़ारी नोअ़मान अनवर क़ादरी

नातख्वां:
क़ारी नोअ़मान अनवर क़ादरी

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