करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म ! / Karam Ki Ho Mujh Par Nazar Ghaus-e-Aazam !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !
के मुद्दत से हूँ मुंतज़र ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

मैं फ़ुर्क़त का सदमा कब तक सहूंगा
मुझे अब तो आओ नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

ज़माने की गर्दिश ने तंग कर दिया है
बहुत कर चुका हूँ सबर ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

सताता है क्यूँ मुझ को या रब ! ज़माना
बताओ तो जाऊं किधर ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

मेरे हो के मुझ से ही क्यूँ बे-ख़बर हो ?
लो अब तो ख़ुदारा ! ख़बर ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !

करो मग़फ़िरत हज़रत बीबी की ख़ुदारा !
दम-ए-वापसी लब पे या ग़ौस-ए-आज़म !

करम की हो मुझ पर नज़र ग़ौस-ए-आज़म !
के मुद्दत से हूँ मुंतज़र ग़ौस-ए-आज़म !


नातख्वां:
इमरान मुस्तफ़ा हुसैनी और शफ़ीउल्लाह खान

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