मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा / Mera Koi Nahin Hai Tere Siwa

कोई नहीं, मेरा कोई नहीं
कोई नहीं, मेरा कोई नहीं

जो कुछ भी मांगना है दरे-मुस्तफ़ा से मांग
अल्लाह के हबीब शहे-अम्बिया से मांग
अब तक कहां अंधेरो में भटका हुआ था तू
गर रोशनी की चाह है नूरे-ख़ुदा से मांग

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मैं बन के सवाली आया हूँ
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

मुझे नज़रे-करम की भीक मिले
मुझे नज़रे-करम की भीक मिले

आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

करम की भीक अता हो गुनाहगारों को
सहारा दीजिये सरकार बे-सहारों को

भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले

अगर हुज़ूर की रहमत का आसरा हो जाए
ज़माने में मुझे जीने का हौसला हो जाए

आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

गर तुम न सुनोगे तो मेरी कौन सुनेगा
गर तुम न करोगे तो करम कौन करेगा

आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

ख़ुद भीक देके केहते हैं मंगतों की ख़ैर हो
ऐसा सख़ी दरबार तो देखा नहीं कोई

आक़ा! भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

मुझे नज़रे-करम की भीक मिले
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

मेरी ग़ुनाह में गुज़री है ज़िन्दगी सारी
मैं तुझ को भूल गया था ऐ रहमते-बारी
गुनाहगार सही फिर भी ख़ुशनसीब हूँ मैं
शरीक उम्मते-आली में ऐ हबीब हूँ मैं
मैं ख़ाक बन के फ़ज़ा में बिख़र गया होता
वसीला मिलता ना तेरा तो मर गया होता

भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

मुझे नज़रे-करम की भीक मिले
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

बख़्शिश गुनाहों की ख़ुदा करदे हमारी तू
जितनी खताएं हो गई कर माफ़ सारी तू
दामन में ले के आएं हैं कितनी दुआए हम
मुश्किल हमारी दूर हो, अब हो न कोई ग़म
बस और कोई नहीं इल्तिजा मेरी
जो दिल से निकली है सुन ले ज़रा सदा मेरी

भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

मुझे नज़रे-करम की भीक मिले
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

रमज़ान में उतारा है तूने क़ुरआन को
बड़ा दिया है और भी रोज़े की शान को
आंसू भरी हुई है ये आँखें हमारी आज
हम तो बहोत बुरे हैं, तू रखना हमारी लाज
अब देख ले सजदों में रोने वालों को
के तेरे ज़िक्र में आँखें भी धोने वालों को

भीक मिले, आक़ा! भीक मिले
आक़ा! भीक मिले

मुझे नज़रे-करम की भीक मिले
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मैं बन के सवाली आया हूँ
मैं झोली ख़ाली लाया हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा

कोई नहीं, मेरा कोई नहीं
कोई नहीं, मेरा कोई नहीं


नातख्वां:
हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी

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