दिल में किसी को और बसाया न जाएगा / Dil Mein Kisi Ko Aur Basaya Na Jaega

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

वो खुद ही जान लेंगे, बताया न जाएगा
हम से तो अपना हाल सुनाया न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

हम को जज़ा मिलेगी मुह़म्मद से इश्क़ की
दोज़ख के आस पास भी लाया न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

कहते थे ये बिलाल तशद्दुद पे कुफ्र के
इश्क़-ए-नबी तो दिल से निकाला न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

दोज़ख में मैं तो क्या ! मेरा साया न जाएगा
क्यूं के रसूले-पाक से देखा न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

रोशन रहेगा दाग़े-फ़िराक़े-शहे-उमम
ये वो चराग़ है जो बुझाया न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

मानेगा उन की बात ख़ुदा हश्र में नसीर
बिन मुस्तफ़ा, ख़ुदा को मनाया न जाएगा

दिल में किसी को और बसाया न जाएगा
ज़िक्रे-रसूले-पाक भुलाया न जाएगा

शायर:
पीर नसीरुद्दीन नसीर

नातख्वां:
असद रज़ा अत्तारी

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