कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो / Kabhi Mayoos Mat Hona, Andhera Kitna Gahra Ho

कभी मायूस मत होना उम्मीदों के समुंदर में
तलातुम आते रहते हैं, सफ़ीने डूबते भी हैं
सफ़र लेकिन नहीं रुकता, मुसाफ़िर टूट जाते हैं
मगर मल्लाह नहीं थकता, सफ़र तय हो के रहता है

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

कभी मायूस मत होना, ख़ुदा वाक़िफ़ है नाज़िर भी
ख़ुदा ज़ाहिर है बातिन भी, वही है हाल से वाक़िफ़
वही सीनों के अंदर भी, मुसीबत के अंधेरों में
तुम्हें गिरने नहीं देगा, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

कभी तुम माँग कर देखो, तुम्हारी आँख के आंसू
यूँही ढलने नहीं देगा, तुम्हारी आस की गागर
कभी गिरने नहीं देगा, हवा कितनी मुख़ालिफ़ हो
तुम्हें मुड़ने नहीं देगा, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

वहाँ इन्साफ की चक्की, ज़रा धीरे से चलती है
मगर चक्की के पाटों में, बहुत बारीक पीसता हैं
तुम्हारे एक का बदला, वहाँ सत्तर से ज़्यादा है
निय्यत तुलती है पलड़ों में, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

वहाँ जो हाथ उठते हैं, कभी ख़ाली नहीं आते
ज़रा सी देर लगती है मगर वो दे के रहता है
ज़रा सी देर लगती है, मगर वो दे के रहता है
हाँ ! वो दे के रहता है, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

दरीदा दामनों को वो रफ़ू करता है रहमत से
अगर कश्कोल टूटा हो तो वो भरता है नेअमत से
कभी अय्यूब की ख़ातिर ज़मीं चश्मा उबलती है
कहीं युनूस के होंटों पर अगर फ़रियाद उठती है

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

तुम्हारे दिल की ठेसों को यूँही दुखने नहीं देगा
तमन्ना का दिया यारों ! कभी बुझने नहीं देगा
कभी वो आस का दरिया कहीं रुकने नहीं देगा
कहीं थमने नहीं देगा, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

जब उस के रहम का सागर छलक के जोश खाता है
क़हर ढाता हुवा सूरज यका-यक काँप जाता है
हवा उठती है लहरा कर, घटा सजदे में गिरती है
जहाँ धरती तरसती है, वहीं रहमत बरसती है

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो

तरसते रेग-ज़ारों पर अबर बह के ही रहता है
नज़र वो उठ के रहती है, करम हो के ही रहता है
उम्मीदों का चमकता दिन अमर हो के ही रहता है
अमर हो के ही रहता है, कभी मायूस मत होना

कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो
कभी मायूस मत होना, अँधेरा कितना गहरा हो


नातख्वां:
हाफ़िज़ जुनैदुर्रहमान

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