प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले / Pyar Hai Ham Ko Nabi Se, Ham Nabi Waale
हम महफ़िल-ए-नबी सजाने वाले हैं
नबी पे ये जान लुटाने वाले हैं
ना'रा नबी का हम मिल के लगाएँगे
ए दुश्मन-ए-नबी ! तुझ को जलाएँगे
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
वो हबीब-ए-किब्रिया हैं, अहमद-ए-मुख़्तार हैं
रब के जितने अम्बिया हैं सब के वो सरदार हैं
बा'द-अज़-ख़ुदा वो ही सब से है मोअ'तबर
भीक उन्हीं के दर से सब पाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
ज़िक्र ऊँचा जिस का ख़ुद करता है रब्बुल-आ'लमीन
क्या दबाएगा कोई ये ज़िक्र-ए-शाह-ए-मुर्सलीन
जो जलने वाले हैं नबी के ज़िक्र से
हम उन को और भी जलाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
वो नबी जिन के लिए रब ने बनाए दो-जहाँ
जिन का सदक़ा है ये दुनिया, जिन का सदक़ा है जिनाँ
आदम से ईसा तक आए हैं जो नबी
सब मुस्तफ़ा का ही बताने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
सब से बढ़ कर दो-जहाँ में मुस्तफ़ा की शान है
हो कहीं भी, हर मुसलमां उस का ये ईमान है
बे-ईमाँ हैं वो सब, जो इस में करते हैं शक
हम उन की ये हक़ीक़त बताने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
जो उठाते हैं नबी की शान पर मैली नज़र
नार-ए-दोज़ख़ में जलेगा देख लेना वो बशर
बता दो तुम इन्हें, ए अक्स क़ादरी !
हम उन को ख़ाक में मिलाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
नात-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ मुअज़्ज़म रज़ा क़ादरी
नबी पे ये जान लुटाने वाले हैं
ना'रा नबी का हम मिल के लगाएँगे
ए दुश्मन-ए-नबी ! तुझ को जलाएँगे
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
वो हबीब-ए-किब्रिया हैं, अहमद-ए-मुख़्तार हैं
रब के जितने अम्बिया हैं सब के वो सरदार हैं
बा'द-अज़-ख़ुदा वो ही सब से है मोअ'तबर
भीक उन्हीं के दर से सब पाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
ज़िक्र ऊँचा जिस का ख़ुद करता है रब्बुल-आ'लमीन
क्या दबाएगा कोई ये ज़िक्र-ए-शाह-ए-मुर्सलीन
जो जलने वाले हैं नबी के ज़िक्र से
हम उन को और भी जलाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
वो नबी जिन के लिए रब ने बनाए दो-जहाँ
जिन का सदक़ा है ये दुनिया, जिन का सदक़ा है जिनाँ
आदम से ईसा तक आए हैं जो नबी
सब मुस्तफ़ा का ही बताने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
सब से बढ़ कर दो-जहाँ में मुस्तफ़ा की शान है
हो कहीं भी, हर मुसलमां उस का ये ईमान है
बे-ईमाँ हैं वो सब, जो इस में करते हैं शक
हम उन की ये हक़ीक़त बताने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
जो उठाते हैं नबी की शान पर मैली नज़र
नार-ए-दोज़ख़ में जलेगा देख लेना वो बशर
बता दो तुम इन्हें, ए अक्स क़ादरी !
हम उन को ख़ाक में मिलाने वाले हैं
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
प्यार है हम को नबी से, हम नबी वाले
नात-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ मुअज़्ज़म रज़ा क़ादरी
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